India Lead

क्या नाजायज़ बच्चे पुश्तैनी प्रॉपर्टी के हक़दार है?

क्या नाजायज़ बच्चे पुश्तैनी प्रॉपर्टी के हक़दार है?

सभी कहते है कि बच्चे भगवान् का रूप होते है। अगर वही वो एक नाजायज़ बच्चा हो तो सभी की सोंच और नजरिया बदल जाता है। हालाँकि, कानून की नज़र में ऐसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एक केस के चलते फैसला सुनाया कि नाजायज बच्चे भी अपने पेरेंट्स की प्रॉपर्टी के हकदार है। हांलांकि, …

क्या नाजायज़ बच्चे पुश्तैनी प्रॉपर्टी के हक़दार है? Read More »

क्या कोर्ट मैरिज करने वाले कपल को कोर्ट द्वारा सुरक्षा मिल सकती है।

क्या कोर्ट मैरिज करने वाले कपल को कोर्ट द्वारा सुरक्षा मिल सकती है।

भारत में हर नागरिक को अधिकार दिए गए है। देखा जाये तो भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ नागरिकों को इतने सारे अधिकार दिए जाते है। भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत हर भारतीय नागरिक को जीवन जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता/आज़ादी से रहना का अधिकार मिला हुआ है।  इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट और …

क्या कोर्ट मैरिज करने वाले कपल को कोर्ट द्वारा सुरक्षा मिल सकती है। Read More »

हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कौन शादी रजिस्टर करा सकता है?

हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कौन शादी रजिस्टर करा सकता है?

हिन्दू मैरिज एक्ट क्या है? शादी एक औपचारिक समारोह होता है जिसके द्वारा दो अलग-अलग लोग ऑफिशियली अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के सामने एक कपल बन जाते है। भारत में सभी धर्मों के कुछ ना कुछ नियम, विनियम और रीती-रिवाज़ होते है। जिनका पालन शादी के अवसर के दौरान सभी धर्मों को करना …

हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कौन शादी रजिस्टर करा सकता है? Read More »

आरटीआई एप्लीकेशन फाइल करने की पूरी प्रोसेस क्या है?

आरटीआई एप्लीकेशन फाइल करने की पूरी प्रोसेस क्या है?

2005 में लागू हुए सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) ने सभी ऑथॉरिटीज़ के लिए यह जरूरी कर दिया कि वे जनता के द्वारा मांगी गयी इनफार्मेशन उन्हें समय से प्रदान कराएं। यह एक्ट भारत के सभी नागरिकों पर लागू होता है।  इस एक्ट के तहत देश के नागरिकों को यह अधिकार दिया गया है …

आरटीआई एप्लीकेशन फाइल करने की पूरी प्रोसेस क्या है? Read More »

भारत में सेक्स वर्कर्स के क्या अधिकार है?

भारत में सेक्स वर्कर्स के क्या अधिकार है?

साल 2022 सेक्स वर्कर्स के लिए बहुत महत्वूर्ण साल रहा था। ऐसा इसीलिए क्योंकि भारत में साल 2022 में सेक्स वर्कर्स और वेश्यावृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और इसको लेकर बड़ी घोषणाएं की थी और कई पुराने नियमों और कानूनों को गलत मानकर बदल दिया गया था। कई बदलाव आये सेक्स वर्कर्स की अधिकारों …

भारत में सेक्स वर्कर्स के क्या अधिकार है? Read More »

रेप के केस में मेडिकल एग्जामिनेशन कराना क्यों जरूरी है?

Why is it necessary to have a medical examination in a rape case

भारत में बलात्कार (रेप) एक गंभीर और संवेदनशील अपराध है, जिसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत विशेष रूप से दंडनीय बनाया गया है। रेप पीड़िता को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में मेडिकल एग्जामिनेशन एक अत्यंत आवश्यक कड़ी है। यह न केवल अपराध की पुष्टि में मदद करता है, बल्कि पीड़िता के मानसिक और शारीरिक …

रेप के केस में मेडिकल एग्जामिनेशन कराना क्यों जरूरी है? Read More »

भारत में किरायेदार के क्या अधिकार है?

भारत में किरायेदार के क्या अधिकार है?

बहुत अधिकार हैं जो किरायेदार और मकान मालिक के बीच परस्पर जुड़े हुए होते हैं। जब भी एक मकान मालिक किसी किरायदार को अपनी प्रॉपर्टी किराय पर देता है तब उनके बीच यह रिश्ता एक कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से बनाया जाता हैं। आइए इस लेख के माध्यम से किरायेदार के अधिकारों को समझते हैं। एक …

भारत में किरायेदार के क्या अधिकार है? Read More »

भारत में वेश्यावृत्ति को क्या दर्जा दिया गया है?

What status is given to prostitution in India

वेश्यावृत्ति का इतिहास बहुत पुराना है और यह प्राचीन सभ्यताओं में मौजूद रही है। इसे आम तौर पर “दुनिया का सबसे पुराना पेशा” कहा जाता है, लेकिन भारतीय समाज में इसके प्रति दृष्टिकोण हमेशा नकारात्मक रहा है। हालांकि, भारत में वेश्यावृत्ति एक विवादास्पद और जटिल मुद्दा है। कानूनी दृष्टिकोण से, वेश्यावृत्ति का भारत में एक …

भारत में वेश्यावृत्ति को क्या दर्जा दिया गया है? Read More »

जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना कब जरूरी है?

जीएसटी रजिस्ट्रेशन कब जरूरी है?

जीएसटी रजिस्ट्रेशन वह प्रोसेस होता है जिसके अंदर हर टैक्स देने वाला व्यक्ति (Goods and Service Tax) रजिस्ट्रेशन के तहत एक टैक्स देने वाले व्यक्ति के रूप में रजिस्टर हो जाता है। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरी हो जाने के बाद गुड्स एंड सर्विस टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (जीएसटीआईएन) दे दिया जाता है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैसे करें और …

जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना कब जरूरी है? Read More »

कानूनी नोटिस और कोर्ट नोटिस के बीच क्या अंतर है?

कानूनी नोटिस और कोर्ट नोटिस के बीच क्या अंतर है?

कैविएट पिटीशन तब दायर की जाती है जब कोई मामला अदालत में लंबित होता है; दूसरी ओर, मुकदमा दायर करने से पहले व्यक्ति को एक कानूनी नोटिस भेजा जाता है और इस मुद्दे के संबंध में शिकायतें उठाई जाती हैं। कैविएट पिटीशन मामले में आपकी रुचि और इरादे के बारे में अदालत को सूचित करती …

कानूनी नोटिस और कोर्ट नोटिस के बीच क्या अंतर है? Read More »