Adv. Vidhi Saini

BNS की धारा 333 क्या है?

What is Section 333 of the BNS

हर व्यक्ति का घर उसकी निजी और सुरक्षित जगह होती है। कानून भी इस बात को मानता है और घर में बिना अनुमति घुसने से सुरक्षा देता है। अगर कोई व्यक्ति गलत नीयत से जैसे किसी को चोट पहुँचाने, मारने-पीटने या जबरन बंद करने की तैयारी के साथ, किसी के घर में घुसता है, तो …

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क्या कपल प्रोटेक्शन के लिए कोर्ट जाना ज़रूरी है? जानिए हाई कोर्ट से प्रोटेक्शन के फायदे

Is it necessary to go to court for couple protection Learn about the benefits of protection from the High Court.

आज के समय में पति-पत्नी, सगाईशुदा या साथ रहने वाले जोड़ों के बीच कभी-कभी झगड़े, धमकियाँ, परेशान करना या शारीरिक/मानसिक उत्पीड़न जैसी स्थितियाँ पैदा हो सकती हैं। बहुत लोग इसे निजी तौर पर सुलझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कानून मानता है कि कुछ मामलों में सुरक्षा और न्याय के लिए कोर्ट से संरक्षण लेना …

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BNS की धारा 352 क्या है?

BNS 352 in hindi

भारतीय न्याय संहिता, 2023 भारत का नया आपराधिक कानून है, जिसने पुराने आईपीसी कानून की जगह ली है। इस नए कानून का उद्देश्य अपराधों को सरल भाषा में समझाना और आज की ज़रूरतों के अनुसार न्याय देना है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 जानबूझकर अपमान करने से जुड़ा अपराध बताती है। पहले यही बात …

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क्या शादी रद्द होने के बाद मेंटेनेंस या एलिमनी का हक मिलता है?

Is there a right to maintenance or alimony after the marriage is annulled

भारत के फैमिली लॉ में सबसे अक्सर पूछा जाने वाला सवाल यही है कि शादी रद्द होने के बाद क्या मेन्टेनेंस या एलिमनी ली जा सकती है। बहुत लोग सोचते हैं कि अगर शादी रद्द (वोयड या वोयडेबल) हो गई, तो शादी से जुड़े सभी अधिकार, जैसे मेन्टेनेंस खत्म हो जाते हैं। लेकिन भारतीय कानून …

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NRI प्रॉपर्टी फ्रॉड के सबसे आम 10 तरीके – कैसे बचें और क्या कानूनी उपाय हैं?

10 Most Common NRI Property Frauds – How to Avoid Them and What Are the Legal Remedies

कई NRIs के लिए भारत में प्रॉपर्टी खरीदना सुरक्षा, परिवार से जुड़ाव और लम्बे समय का इन्वेस्टमेंट माना जाता है। लेकिन भारत से दूर होने के कारण कुछ जोखिम भी जुड़े होते हैं। धोखेबाज़ इसका फायदा उठाते हैं क्योंकि NRI अक्सर प्रॉपर्टी का रूटीन इंस्पेक्शन नहीं कर सकते, दस्तावेज़ खुद से नहीं देख सकते और …

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GST रजिस्ट्रेशन कब ज़रूरी होता है? जानिए कंपनी के लिए नियम

When is GST registration necessary? Learn the rules for companies.

GST भारत में कारोबार से जुड़ा एक बहुत ही ज़रूरी टैक्स कानून है। GST आने से टैक्स व्यवस्था आसान हुई है, लेकिन आज भी कई कंपनियों को यह समझने में परेशानी होती है कि GST रजिस्ट्रेशन कब ज़रूरी होता है। कुछ बिज़नेस मालिक सोचते हैं कि GST तभी लगता है जब बहुत ज़्यादा मुनाफ़ा हो, …

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कंपनी रजिस्टर होने के बाद कौन-से लीगल कम्प्लाइंस ज़रूरी हैं?

What legal compliances are required after the company is registered

बहुत से बिज़नेस शुरू करने वाले लोग यह मान लेते हैं कि कंपनी रजिस्टर होते ही उनका सारा कानूनी काम पूरा हो गया। लेकिन असल में कंपनी रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ एक शुरुआत होती है। असली ज़िम्मेदारी कंपनी बनने के बाद शुरू होती है, जब कंपनी को अलग-अलग कानूनों, फाइलिंग और नियमों का पालन करना होता है। …

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क्या क्रिमिनल मामलों में आर्बिट्रेशन लागू होता है? जानिए कानूनी सीमाएँ

Is arbitration applicable in criminal cases? Know the legal limits.

आर्बिट्रेशन आजकल विवाद सुलझाने का एक पसंदीदा तरीका बन गया है, क्योंकि यह तेज़, गोपनीय और लचीला होता है। बहुत से लोग बिना इसकी पूरी कानूनी समझ के अपने कॉन्ट्रैक्ट में आर्बिट्रेशन क्लॉज़ जोड़ देते हैं। जब बाद में विवाद होता है, तो सबसे आम सवाल यही होता है “क्या यह मामला कोर्ट जाने के …

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मुंबई में इंटर-रिलिजन मैरिज कैसे करें? स्पेशल मैरिज एक्ट पूरी कानूनी प्रक्रिया

How to conduct an inter-religion marriage in Mumbai The Special Marriage Act and the complete legal process

आज के समय में अलग-अलग धर्मों से आने वाले कपल्स का विवाह करना कोई असामान्य बात नहीं है। लेकिन जब बात इंटर-रिलिजन मैरिज की आती है, तो अधिकतर कपल्स के मन में डर, भ्रम और कानूनी अनिश्चितता बनी रहती है। खासकर मुंबई जैसे बड़े शहर में, जहाँ प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चरणों में होती …

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बिज़नेस डिस्प्यूट को कैसे सुलझाएं? जानिए आर्बिट्रेशन के ज़रिए तेज़ और प्रभावी समाधान

How to resolve business disputes Learn about fast and effective solutions through arbitration.

बिज़नेस चलाना सिर्फ़ मुनाफ़ा कमाने का काम नहीं है, इसमें रिश्तों को संभालना, जिम्मेदारियाँ निभाना और कई तरह के रिस्क मैनेज करना भी शामिल है। कई बार समझौता होने के बाद भी गलतफहमियाँ हो जाती हैं। पेमेंट लेट हो जाता है, सामान समय पर नहीं मिलता, सर्विस ठीक से नहीं मिलती या पार्टनर्स आपस में …

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