डाइवोर्स लेने के लिए, लंबे समय का सेपरेशन एफिडेविट काफी है।

डाइवोर्स लेने के लिए, लंबे समय का सेपरेशन एफिडेविट काफी है।

राजू सिंह v ट्विंकल कंवर के केस में, हस्बैंड द्वारा हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 13-बी के तहत फाइल की गयी जॉइंट पिटीशन को फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। लेकिन, हस्बैंड ने फैमिली कोर्ट के इस फैसले को चुनौती राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राजस्थान हाई कोर्ट के जज विजय बिश्नोई ने …

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हाई कोर्ट के जजों को उनके दौरे पर गिफ्ट्स ना दें: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट

हाई कोर्ट के जजों को उनके दौरे पर गिफ्ट्स ना दें: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट

हाल ही में एक दिलचस्प घटना तब हुई जब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने एक सर्कुलर जारी करयह कहा कि सबोर्डिनेट कोर्ट्स के जुडिशल ऑफिसर्स को हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को अपने साथ लेकर आने और जाने, यात्रा करने, होटल में ठहरने, भोजन की व्यवस्था करने या गिफ्ट्स देने  आदि …

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आईटी एक्ट का सेक्शन 67ए सेक्सुअल रिलेशन्स तक ही सीमित नहीं है, इसमें न्यूड वीडियो शामिल भी होगा- बॉम्बे हाई कोर्ट

आईटी एक्ट का सेक्शन 67ए सेक्सुअल रिलेशन्स तक ही सीमित नहीं है, इसमें न्यूड वीडियो शामिल भी होगा- बॉम्बे हाई कोर्ट

एस्टार नज़रुल अहमद v महाराष्ट्र राज्य के केस में एंटीसिपेट्री बेल की एप्लीकेशन पर फैसला लेते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि आईटी एक्ट के सेक्शन 67ए के तहत किसी व्यक्ति की न्यूड वीडियो को शेयर करना अपराध/क्राइम है। जज भारती ने यह ऑब्ज़र्व किया कि आईटी एक्ट के सेक्शन 67 के तहत “सेक्सुअली इम्प्लीसिट” …

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लीगल नोटिस कब और कैसे भेजें? – जानिए प्रक्रिया, फायदे और कानूनी महत्व

When and how to send a legal notice – Know the process, benefits and legal importance

हम सभी जीवन में कभी न कभी ऐसे हालातों से गुजरते हैं जब हमें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानून का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन कोर्ट-कचहरी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोग डर जाते हैं। ऐसे में लीगल नोटिस एक ऐसा विकल्प बन जाता है जो कानूनी कार्रवाई की शुरुआत करता है, लेकिन …

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नागिन डांस करने पर चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सस्पेंड

नागिन डांस करने पर चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सस्पेंड

उत्सव निलंबन की ओर जाता है। न्यायाधीशों को संगीत पर थिरकने और आधिकारिक वर्दी में नागिन नृत्य करने के लिए निलंबित कर दिया गया था। दूसरों की तरह आपने भी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पंकज जायसवाल का अपने क्लर्क के साथ नागिन डांस करते हुए वायरल वीडियो देखा होगा. वीडियो जितना वायरल हुआ और उस पर …

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हाई कोर्ट ने हस्बैंड को निर्देश दिया कि वाइफ को लॉयर हायर करके शादी तोड़ने की कार्यवाही करने के लिए 25000 रुपये दे।

हाई कोर्ट ने हस्बैंड को निर्देश दिया कि वाइफ को लॉयर हायर करके शादी तोड़ने की कार्यवाही करने के लिए 25000 रुपये दे।

पूजा एस v अभिषेक शेट्टी के केस में, कपल ने साल 2011 में शादी की और उनके 2 बच्चे हैं, बाद में हस्बैंड ने हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 13 (1) (i) और (ii) के तहत तलाक की मांग करते हुए याचिका दायर की। पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत एक …

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सेक्शन 438 के तहत एंटीसिपेट्री बेल कैसे ले सकते है?

सेक्शन 438 के तहत एंटीसिपेट्री बेल कैसे ले सकते है?

बेसिकली जमानत या बेल सस्पेक्ट पर लगाई जाने वाली एक प्री-ट्रायल रीस्ट्रिक्शन होती है। इसे सस्पेक्ट मतलब जिस व्यक्ति पर कोई जुर्म करने का शक है उस पर इसीलिए लगाया जाता है ताकी वह कोर्ट की लीगल प्रोसीडिंग्स/कार्यवाही में कोई रुकावट ना डाल सके। आसान शब्दों में समझे तो किसी व्यक्ति को बेल या रिहाई …

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क्या एक वाइफ सेक्शन 377 के तहत अपने हस्बैंड पर एफआईआर कर सकती है?

क्या एक वाइफ सेक्शन 377 के तहत अपने हस्बैंड पर एफआईआर कर सकती है?

भारत में, इंडियन पीनल कोड का सेक्शन 377 हमेशा से ही सामाजिक या खुले तौर पर बात करने के लिए एक टैबू माना जाता रहा है। बहुत सारे लोग इसके बारे में डिटेल में जानते थे, लेकिन ज्यादातर लोगों की इस टॉपिक पर अपनी ही राय और सोंच थी, जो हमेशा बहुत ही भ्रम से …

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क्या विधवाओं के मेंटेनेंस के लिए एचयूएफ प्रॉपर्टी यूज़ की जा सकती है?

क्या विधवाओं के मेंटेनेंस के लिए एचयूएफ प्रॉपर्टी यूज़ की जा सकती है?

मुन्नी देवी उर्फ ​​नाथी देवी (मृत) v राजेंद्र उर्फ ​​लल्लू लाल (मृत) और अन्य के केस में, जज अजय रस्तोगी और जज बेला की बेंच ने माना कि जब एक हिंदू विधवा के पास ‘हिन्दू अन्डिवाइडेड फैमिली प्रॉपर्टी’ का स्पेशल कानूनी अधिकार होता है, तो यह माना जाएगा कि ऐसी प्रोपेर्टी उसके मेंटेनेंस का पूर्व-मौजूदा …

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महिलाओं को गैर-जमानती अपराधों के साथ मौत या उम्रकैद तक की सजा के लिए भी जमानत दी जा सकती है।

महिलाओं को गैर-जमानती अपराधों के साथ मौत या उम्रकैद तक की सजा के लिए भी जमानत दी जा सकती है।

नेथरा v कर्नाटक स्टेट के केस में, कर्नाटक के हाई कोर्ट ने माना कि मौत या उम्रकैद की सज़ा वाले क्राइम्स में बेल नहीं दी जा सकती है, भारत में ऐसा कोई कानून/लॉ नहीं है। जज एम नागपरसन्ना ने अपने हस्बैंड की हत्या की एक आरोपी महिला को बेल देते हुए यह बात कही थी। …

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