कोर्ट मैरिज में विटनेस अरेंज कैसे करें।

कोर्ट मैरिज में विटनेस अरेंज कैसे करें।

गवाह/विटनेस शब्द का मतलब उस व्यक्ति से है जो एक्सेप्ट करता है कि यह एक्टिविटी होते समय मै उस सिचुएशन में प्रेजेंट था। हालाँकि, विटनेस का अलग अलग सिचुऎशन्स में अलग अलग मतलब हो सकता है: वह व्यक्ति जो किसी इंसिडेंट (क्राइम या एक्सीडेंट) होने के समय इंसिडेंट की जगह पर प्रेजेंट था, उसे विटनेस …

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अगर मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग आर्टिब्रेशन क्लॉज़ वाले एग्रीमेंट की वजह से उत्पन्न होता है, तो वह वैलिड है।

अगर मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग आर्टिब्रेशन क्लॉज़ वाले एग्रीमेंट की वजह से उत्पन्न होता है, तो मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग वैलिड है।

हाल ही में, दिल्ली हाई कोर्ट ने (जूकी प्राइवेट लिमिटेड v मेसर्स कैपिटल अपेरल्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड) के केस में फैसला किया कि अगर दोनों पार्टियों द्वारा साइन किये हुए एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग में कहा गया है कि बचे हुए अमाउंट की पेमेंट के लिए आर्टिब्रेशन सुनवाई की मांग की जा सकती है, तो …

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रेप लॉ जेंडर-न्यूट्रल होने चाहिए और पुरुष को बहलाने वाली महिला को भी दंडित किया जाना चाहिए।

रेप लॉ जेंडर-न्यूट्रल होने चाहिए और पुरुष को बहलाने वाली महिला को भी दंडित किया जाना चाहिए।

भारत में फोर्थ नंबर पर आने वाला सबसे मुख्य क्राइम रेप है। रेप को आम तौर पर पुरुष द्वारा, एक महिला के अगेंस्ट किया गया क्राइम माना जाता है। हालाँकि, यह क्राइम पुरुषों, होमोसेक्सुअल्स और ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के अगेंस्ट भी होता है। यूनाइटेड स्टेटस अमेरिका में डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सेंटर द्वारा की गयी एक …

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मैरिज सर्टिफिकेट इशू करना आर्य समाज का काम नहीं है।

मैरिज सर्टिफिकेट इशू करना आर्य समाज का काम नहीं है।

भारत में 1875 में एक हिंदू सुधार आंदोलन, धार्मिक संगठन के रूप में शुरू हुआ था। यह संगठन मनाता है की सभी धर्मों का एक ही भगवान है। साथ ही, यह वेदों में लिखी गयी हर बात सही होने और उसके आदर्शों और प्रथाओं में विश्वास रखता है। इस संगठन को आर्य समाज के नाम …

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नेशनल लेवल पर माइनॉरिटीज़ के रूप में मुस्लिम्स, क्रिस्चंस, सिखों, बौद्धों, पारसियों और जैनियों की नोटिफिकेशन को चैलेंज देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल

नेशनल लेवल पर माइनॉरिटीज के रूप में मुस्लिम्स, क्रिस्चंस, सिखों, बौद्धों, पारसियों और जैनियों की नोटिफिकेशन को चैलेंज देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल

देवकीनंदन ठाकुर द्वारा संविधान के आर्टिकल 29 और 30 के तहत, डिस्ट्रिक्ट लेवल पर माइनॉरिटीज़ की सही पहचान करके, उन्हें प्रॉफिट देने के लिए एक पीआईएल फाइल की गयी थी।  फाइल की गयी पीआईएल के अनुसार, 1993 में भारत सरकार/ इंडियन गवर्मेंट द्वारा मुसलमानों, सिखों, बौद्धों, पारसियों और जैनियों को नेशनल लेवल पर अल्पसंख्यक/माइनॉरिटी घोषित …

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ससुर किसी अन्य व्यक्ति के साथ अपनी बहू का रेप नहीं कर सकता- इलाहाबाद हाई कोर्ट

ससुर किसी अन्य व्यक्ति के साथ अपनी बहू का रेप नहीं कर सकता- इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपनी बहू के साथ रेप के एक आरोपी और सह-आरोपी को यह कहते हुए ऐंटिसिपेटरी बेल दे दी है कि “यह काफी अप्राकृतिक/अननेचूरल है कि एक ससुर हमारी भारतीय संस्कृति में किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर अपनी ही बहू के साथ बलात्कार/रेप करे। “ फैक्ट्स: बाबू खान(आरोपी), जिन पर उनकी …

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क्या वाइफ मेंटेनेंस अमाउंट के ना मिलने पर हस्बैंड द्वारा कमाई हुई प्रापर्टी पर दावा कर सकती है?

क्या वाइफ मेंटेनेंस अमाउंट के ना मिलने पर हस्बैंड द्वारा कमाई हुई प्रापर्टी पर दावा कर सकती है?

एक अपील पर सुनवाई करते हुए, आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज सुब्बा रेड्डी सत्ती ने फैसला लिया कि क्योंकि इस बात का कोई एविडेंस पेश नहीं किया गया कि हस्बैंड ने अपनी वाइफ और बच्चों की बेसिक नीड्स पूरी नहीं की है, इसलिए वाइफ द्वारा हस्बैंड की खुद कमाई हुई प्रॉपर्टी पर किया गया …

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आर्बिट्रेशन के फैसले में देरी होने पर उसके फैसले को चैलेंज किया जा सकता है।

आर्टीब्रेशन के फैसले में देरी होने पर उसके फैसले को चैलेंज किया जा सकता है।

जज विभु बाखरू की सिंगल जज बेंच ने कहा कि अगर बिना किसी वैलिड रीज़न के आर्बिट्रल अवार्ड में देरी होती है, तो ऐसे केसिस में आर्बिट्रेशन के फैसले को चैलेंज किया जा सकता है। इस केस के दौरान यह माना गया कि बिना किसी एक्सप्लेनेशन दिए आर्बिट्रेशन के फैसले में देरी करना भारत की …

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अगर कोई लड़की झूठे केस की धमकी दे रही है, तो क्या करें?

What to do if a girl is threatening to file a false case

आजकल, झूठे केस की धमकियाँ एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी हैं। यह विभिन्न कारणों से हो सकती हैं, जैसे बदला लेना, किसी से पैसे मांगना, या किसी को मानसिक रूप से परेशान करना। ऐसी धमकियाँ अक्सर महिलाओं द्वारा दिए जाने वाले आरोपों के रूप में सामने आती हैं। कई बार ये आरोप बेहद …

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परेंट्स की इनकम और उनका पढ़ा लिखा होना, बच्चे की कस्टडी तय करने का एकमात्र तरीका नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

परेंट्स की इनकम और उनका पढ़ा लिखा होना, बच्चे की कस्टडी तय करने का एकमात्र तरीका नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

बच्चों की कस्टडी हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के सेक्शन 26 के तहत दी जाती है। आईये जानते है इस केस में कोर्ट ने क्या फैसला लिया है।  केस क्या है:- निमिश एस अग्रवाल v/s श्रीमती रूही अग्रवाल के केस में, फादर ने लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपने बच्चे की कस्टडी मांगते हुए एक …

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