IPC की धारा 427 क्या है?

What is Section 427 of IPC

आज के समय में छोटी-छोटी बातें भी जल्दी बड़े झगड़ों का रूप ले लेती हैं। पड़ोसियों के झगड़े, सड़क पर गुस्सा, किराए को लेकर विवाद, बिज़नेस पार्टनर के बीच मनमुटाव या पारिवारिक तनाव में अक्सर लोग गुस्से में तोड़-फोड़ कर देते हैं। जैसे – गुस्से में किसी की गाड़ी का शीशा तोड़ देना, दुकान या मकान की दीवार खराब कर देना, या ऑफिस में मशीन या कंप्यूटर तोड़ देना।

अक्सर लोग सोचते हैं, “बस सामान ही तो टूटा है, इसमें अपराध क्या है?” यहीं पर IPC 427 की धारा लागू होती है। यह धारा बताती है कि कब किसी की चीज़ को नुकसान पहुँचाना सिर्फ नुकसान नहीं, बल्कि कानूनी अपराध बन जाता है।

इस ब्लॉग का मकसद यही है कि धारा 427 IPC को रोज़मर्रा के उदाहरणों के साथ समझाया जाए, ताकि आम व्यक्ति अपने अधिकार और जिम्मेदारियाँ सही तरीके से समझ सके।

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मिसचीफ़ क्या होता है?

धारा 427 ipc को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि कानून में “मिसचीफ” का क्या अर्थ है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 425 में मिसचीफ की परिभाषा दी गई है, और धारा 427 उसी पर आधारित है।

कानून के अनुसार मिसचीफ तब माना जाता है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर या यह जानते हुए किसी संपत्ति को नुकसान पहुँचाता है या नष्ट करता है। मिसचीफ में ये बातें शामिल होती हैं:

  • किसी की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना या उसे पूरी तरह खराब कर देना
  • संपत्ति की हालत बदल देना, जिससे उसकी कीमत या उपयोगिता कम हो जाए
  • किसी अन्य व्यक्ति को गलत तरीके से आर्थिक नुकसान पहुँचना

मिसचीफ से जुड़ी ज़रूरी बातें

  • नुकसान निजी संपत्ति (जैसे घर, गाड़ी) या सरकारी संपत्ति (जैसे सड़क, बिजली का खंभा) किसी को भी हो सकता है।
  • यह ज़रूरी नहीं कि संपत्ति किसी और की ही हो, ज़रूरी यह है कि किसी व्यक्ति को नुकसान हुआ है या नहीं।
  • आरोपी का इरादा होना चाहिए, या कम से कम उसे यह पता होना चाहिए कि उसके काम से नुकसान हो सकता है।
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IPC की धारा 427 क्या कहती है?

  • अगर कोई व्यक्ति किसी और की संपत्ति को जानबूझकर या यह जानते हुए नुकसान पहुँचाता है, और
  • उस नुकसान की कीमत ₹50 या उससे अधिक है, तो वह अपराधी माना जाएगा।

किसी को धारा 427 के तहत दोषी ठहराने के लिए निम्न बातें साबित होनी जरूरी हैं:

  1. नुकसान पहुँचाने का कार्य (Commission of Mischief): अपराधी ने जानबूझकर या यह जानते हुए किसी की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का कार्य किया हो। केवल अनजाने में हुई घटना अपराध नहीं मानी जाती।
  2. संपत्ति को वास्तविक नुकसान (Damage to Property): उस कार्य से संपत्ति को वास्तविक नुकसान या हानि हुई हो। मामूली झगड़े या बहस से नुकसान होने पर यह धारा लागू नहीं होती।
  3. नुकसान का मूल्य (Value of Damage): नुकसान की कीमत ₹50 या उससे अधिक होनी चाहिए। अगर नुकसान ₹50 से कम है, तो धारा 427 लागू नहीं होगी, लेकिन अन्य छोटी धाराएँ लागू हो सकती हैं।
  4. इरादा या जानकारी (Intention or Knowledge): अपराधी का इरादा जानबूझकर नुकसान पहुँचाना होना चाहिए, या उसे पता होना चाहिए कि उसके कार्य से नुकसान होने की संभावना है। इसे क्रिमिनल इरादा कहा जाता है।

Section 427 IPC के तहत सज़ा

अगर कोई व्यक्ति Section 427 IPC के तहत दोषी पाया जाता है, तो उसे दो साल तक की जेल, याजुर्माना, यादोनों हो सकते है। सज़ा का निर्णय कोर्ट मामले की गंभीरता, नुकसान की मात्रा और परिस्थितियों को देखकर करती है।

क्या धारा 427 IPC के तहत पुलिस कार्रवाई और बेल संभव है?

  • गैर-संज्ञेय (Non – Cognizable): सामान्य तौर पर धारा 427 IPC का अपराध गैर-संज्ञेय माना जाता है। इसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट के केवल इस धारा के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती।
  • बेल (Bailable): यह अपराध बेल योग्य होता है, यानी आरोपी कोर्ट या पुलिस से बेल के लिए आवेदन कर सकता है और सुनवाई तक रिहा हो सकता है।
  • समझौता योग्य (Compoundable): कई मामलों में धारा 427 Ipc समझौता योग्य होती है। इसका मतलब है कि यदि पीड़ित चाहे तो आरोपी से समझौता कर सकता है और आगे की कानूनी कार्रवाई रोकी जा सकती है।
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Section 427 IPC अन्य अपराधों की तुलना में थोड़ी कम गंभीर होती है, लेकिन जब संपत्ति को नुकसान पहुँचता है तो यह गंभीर अपराध माना जाता है।

धारा 427 के उदाहरण

  • उदाहरण 1: वाहन को नुकसान पहुँचना राहुल अपने पड़ोसी से गुस्से में है और उसकी कार के दरवाजे पर चाबी से खरोंच कर देता है। मरम्मत की कीमत ₹2,000 है। क्योकि नुकसान जानबूझकर किया गया और ₹50 से अधिक है, राहुल पर धारा 427 IPC लग सकती है।
  • उदाहरण 2: दुकान की खिड़की तोड़ना कुछ लोग खराब सेवाओं के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक दुकान की काँच की खिड़की तोड़ देते हैं। नुकसान ₹5,000 का है। यह जानबूझकर किया गया और ₹50 से अधिक है, इसलिए IPC 427 लागू होती है।

धारा 427 के तहत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया

यदि आप धारा 427 के तहत शिकायत करना चाहते हैं, तो इसे आसान तरीके से इस तरह कर सकते हैं:

  • सभी जानकारी इकट्ठा करें: घटना की तारीख, समय, स्थान और आरोपी का नाम (यदि पता हो) सहित सबूत जैसे फोटो, वीडियो या बिल इकट्ठा करें।
  • पुलिस स्टेशन जाएँ या ऑनलाइन शिकायत करें: अपने क्षेत्र के पुलिस स्टेशन जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराएँ या कई राज्यों में ऑनलाइन शिकायत भी की जा सकती है।
  • शिकायत दर्ज कराएँ: पुलिस को पूरी जानकारी और सबूत दें ताकि वे मामले की सही जांच शुरू कर सकें।
  • पुलिस जांच और गिरफ्तारी: पुलिस सबूत और गवाहों के आधार पर आरोपी की जांच करती है और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी करती है।
  • समझौता या मुआवजा: दोनों पक्ष आपस में समझौता कर सकते हैं। अगर आरोपी माने और नुकसान की भरपाई करे, तो मामला यहीं समाप्त हो सकता है।
  • कोर्ट में कार्रवाई: अगर समझौता नहीं होता है, तो पुलिस आरोप पत्र (चारा्जशीट) तैयार करके मामला अदालत में भेजती है। कोर्ट में सबूत और गवाहों के आधार पर सुनवाई होती है।
  • वकील से सलाह लें: अदालत की प्रक्रिया के दौरान वकील से सलाह लेना फायदेमंद होता है ताकि आप अपने अधिकार और सबूत सही तरीके से पेश कर सकें।
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धारा 427 IPC के मामले में बचाव

  • इरादे की कमी (Lack of Intent): अगर नुकसान जानबूझकर या जानकर नहीं किया गया, जैसे कि यह दुर्घटना थी, तो धारा 427 लागू नहीं हो सकती।
  • नुकसान की मात्रा कम होना (Insufficient Damage): अगर हानि ₹50 से कम है, तो धारा 427 सही नहीं मानी जाएगी। हालाँकि, मामूली अपराध या सिविल उपाय लागू हो सकते हैं।
  • गलत कृत्य नहीं हुआ (No Wrongful Act): अगर कार्य से वास्तव में नुकसान नहीं हुआ, भले ही वह हानिकारक लगे, तो इसे “मिशीफ” के तहत नहीं माना जाएगा।

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IPC धारा 427 को BNS धारा 324 में बदल दिया है।

अन्य मुख्य धाराएं

FAQs

1. धारा 427 IPC का मतलब क्या है?

धारा 427 उन लोगों को दंडित करती है जिन्होंने जानबूझकर किसी की संपत्ति को ₹50 या उससे अधिक का नुकसान पहुँचाया हो। सजा में दो साल तक जेल, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

2. क्या धारा 427 IPC बेल योग्य है?

हाँ, यह आम तौर पर बेल योग्य अपराध है। इसका मतलब है कि आरोपी कोर्ट से बेल के लिए आवेदन कर सकता है।

3. क्या मैं धारा 427 के तहत FIR दर्ज करवा सकता हूँ?

हाँ, यदि संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया और सबूत मौजूद हैं, तो पुलिस शिकायत पर FIR दर्ज कर सकती है।

4. क्या धारा 427 एक्सीडेंट के नुकसान पर लागू होती है?

नहीं, यह अपराध जानबूझकर या जानकर नुकसान पहुँचाने पर लागू होता है। गलती से या आकस्मिक नुकसान आम तौर पर इस धारा में नहीं आता।

5. क्या पीड़ित मुआवजे का दावा भी कर सकता है?

हाँ, आप आपराधिक केस के अलावा सिविल कोर्ट में संपत्ति के नुकसान का मुआवजा भी मांग सकते हैं।

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