इंटर रिलिजन मैरिज कैसे करें? जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया

How to conduct an inter-religious marriage Learn the complete legal process.

प्यार धर्म नहीं देखता। लेकिन भारत में जब दो अलग-अलग धर्म के लोग शादी करना चाहते हैं, तो उन्हें अक्सर परिवार का विरोध, समाज का दबाव और कानून को लेकर भ्रम झेलना पड़ता है। कई कपल्स को लगता है कि शादी के लिए धर्म बदलना पड़ेगा या माता-पिता या पुलिस की अनुमति जरूरी है।

सच्चाई बहुत साफ है: भारत में इंटर – रिलिजन मैरिज पूरी तरह कानूनी है। भारतीय कानून हर वयस्क व्यक्ति को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है, चाहे धर्म अलग हो। सुप्रीम कोर्ट ने लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 2006 के फैसले में साफ कहा है कि दो बालिग लोग अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं और उन्हें पूरी कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

यह ब्लॉग आपको बताएगा कि अलग-अलग धर्म में शादी कैसे करें, कौन-सा कानून लागू होता है और आप कानूनी रूप से सुरक्षित कैसे रह सकते हैं।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

क्या भारत में इंटर-रिलिजन मैरिज कानूनी है?

भारत में इंटर – रिलिजन शादी पूरी तरह कानूनी और सुरक्षित है। कानून ऐसे सभी वयस्क कपल्स का साथ देता है जो अपनी मर्जी से शादी करना चाहते हैं।

संविधान की सुरक्षा

  • अनुच्छेद 14 – कानून की नजर में सभी लोग बराबर हैं।
  • अनुच्छेद 15 – धर्म के आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता।
  • अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार, जिसमें अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना है कि किसी भी वयस्क व्यक्ति को यह पूरा अधिकार है कि वह अपनी पसंद के जीवनसाथी से शादी करे। धर्म के आधार पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती। इसलिए, अलग-अलग धर्म के होने के बावजूद शादी करना भारत में पूरी तरह वैध है।

इंटर – रिलिजन मैरिज किस कानून के तहत होती है?

भारत में इंटर – रिलिजन (अलग-अलग धर्म) शादी के लिए मुख्य और सबसे सुरक्षित कानून है स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954। इस कानून की खास बात यह है कि यह उन कपल्स के लिए बनाया गया है जो अलग-अलग धर्म से होते हुए भी कानूनी रूप से शादी करना चाहते हैं, बिना धर्म बदले।

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत:

  • अलग-अलग धर्म के लोग आपस में शादी कर सकते हैं।
  • किसी भी पक्ष को धर्म परिवर्तन करने की ज़रूरत नहीं होती।
  • शादी कोर्ट/मैरिज रजिस्ट्रार के सामने होती है।
  • शादी का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह कानूनी होता है।
  • यह शादी पूरे भारत में मान्य होती है।

अगर कपल नहीं चाहता कि वह किसी धार्मिक रस्म में बंधे, या परिवार की सहमति नहीं है, या धर्म अलग-अलग है, तो स्पेशल मैरिज एक्ट सबसे सही और सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो: यह कानून आपको आपकी पसंद के इंसान से शादी करने की कानूनी आज़ादी और सुरक्षा देता है, चाहे धर्म अलग ही क्यों न हो।

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 सबसे सुरक्षित विकल्प क्यों है?

इंटर – रिलिजन (अलग-अलग धर्म) शादी के लिए स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद माना जाता है। इसका कारण यह है कि इस कानून के तहत शादी करने के लिए किसी भी तरह का धर्म परिवर्तन जरूरी नहीं होता। शादी में दोनों पार्टनर का धर्म अलग-अलग हो सकता है और फिर भी शादी पूरी तरह वैध रहती है।

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इस एक्ट के तहत शादी सरकारी मैरिज रजिस्ट्रार के सामने रजिस्टर होती है, जिससे मिलने वाला मैरिज सर्टिफिकेट बहुत मजबूत कानूनी सबूत होता है। यह सर्टिफिकेट कोर्ट, पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक और अन्य सरकारी कामों में मान्य होता है। साथ ही, यह कानून पति-पत्नी दोनों के अधिकारों की रक्षा करता है और पूरे भारत में मान्य है।

इंटर-रिलिजन शादी के लिए कानूनी शर्तें (स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 की धारा 4)

  1. पुरुष की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए, ताकि वह कानूनन शादी करने के लिए योग्य माना जाए।
  2. महिला की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए, इससे कम उम्र में शादी करना कानूनन अपराध है।
  3. दोनों पक्षों की शादी पूरी तरह अपनी मर्जी से होनी चाहिए, किसी दबाव, डर या ज़बरदस्ती से नहीं।
  4. दोनों पहले से अविवाहित हों, या फिर कानूनी रूप से तलाकशुदा हों।
  5. दोनों मानसिक रूप से स्वस्थ हों, ताकि वे शादी की सहमति और जिम्मेदारियों को समझ सकें।
  6. दोनों एक-दूसरे के निषिद्ध रिश्तेदार न हों, जैसे सगे भाई-बहन या बहुत करीबी रिश्ते।
  7. शादी के लिए धर्म कोई शर्त नहीं है, अलग-अलग धर्म के लोग बिना धर्म बदले शादी कर सकते हैं।

इंटर-रिलिजन मैरिज की स्टेप-बाय-स्टेप कानूनी प्रक्रिया

स्टेप 1: शादी का नोटिस देना (धारा 5, स्पेशल मैरिज एक्ट)

  • इंटर – रिलिजन मैरिज के लिए सबसे पहला कदम होता है नोटिस ऑफ इंटेंडेड मैरिज देना। यह नोटिस लड़का या लड़की, कोई भी एक पक्ष मैरिज ऑफिसर को लिखित रूप में दे सकता है।
  • शर्त यह है कि दोनों में से कम से कम एक व्यक्ति उस जिले में पिछले 30 दिनों से रह रहा हो।
  • यह नोटिस शादी से पहले देना जरूरी है ताकि कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू हो सके।

स्टेप 2: 30 दिन की नोटिस अवधि

नोटिस मिलने के बाद मैरिज ऑफिसर उसे अपने कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगा देता है। इस 30 दिन की अवधि का मकसद केवल यह देखना होता है कि शादी में कोई कानूनी रुकावट तो नहीं है। इस दौरान धर्म, परिवार की मर्जी, समाज या जाति के आधार पर कोई आपत्ति मान्य नहीं होती।

स्टेप 3: आपत्ति आने पर क्या होता है? (धारा 11, स्पेशल मैरिज एक्ट)

अगर कोई व्यक्ति आपत्ति करता है, तो मैरिज ऑफिसर केवल कानूनी आपत्तियों की जांच करता है। जैसे—

  • उम्र कम होना
  • पहले से शादीशुदा होना
  • नजदीकी रिश्ते में होना
  • जबरदस्ती या धोखे से शादी

धर्म अलग होना, परिवार का विरोध या सामाजिक दबाव कानूनी आपत्ति नहीं माना जाता। अगर आपत्ति गलत पाई जाती है, तो शादी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

स्टेप 4: शादी की रस्म और रजिस्ट्रेशन (धारा 13, स्पेशल मैरिज एक्ट)

  • 30 दिन पूरे होने और कोई वैध आपत्ति न होने पर दोनों पक्ष मैरिज ऑफिसर के सामने कम से कम 3 गवाहों के साथ उपस्थित होते हैं। दोनों अपनी स्वेच्छा से शादी करने की घोषणा करते हैं।
  • इसके बाद शादी रजिस्टर होती है और मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।
  • यही सर्टिफिकेट शादी का अंतिम और सबसे मजबूत कानूनी प्रमाण होता है, जिसे हर सरकारी और कोर्ट अथॉरिटी मानती है।
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इंटर-रिलिजन मैरिज के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

  • उम्र का प्रमाण – जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या पासपोर्ट
  • पता प्रमाण – आधार कार्ड, वोटर ID या किरायानामा
  • पासपोर्ट साइज फोटो – दोनों पार्टनर की हाल की फोटो
  • वैवाहिक स्थिति का शपथपत्र – अविवाहित / तलाकशुदा
  • तलाक का आदेश – अगर पहले तलाक हो चुका है
  • मृत्यु प्रमाण पत्र – अगर पहले पति या पत्नी का निधन हो चुका है

क्या धर्म परिवर्तन ज़रूरी है?

नहीं, धर्म परिवर्तन बिल्कुल ज़रूरी नहीं है। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत दोनों अपने-अपने धर्म में रह सकते हैं। किसी भी तरह की धार्मिक रस्म करना अनिवार्य नहीं है। धर्म परिवर्तन करना पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला है, कानूनी मजबूरी नहीं। यानी, बिना धर्म बदले भी शादी पूरी तरह कानूनी और मान्य होती है।

अगर परिवार वाले कपल को धमकाएँ या परेशान करें तो क्या करें?

भारतीय कानून इंटर – रिलिजन (अलग-अलग धर्म के) कपल्स की पूरी सुरक्षा करता है। अगर परिवार या रिश्तेदार धमकी देते हैं, डराते हैं या शादी से रोकने की कोशिश करते हैं, तो कानून आपके साथ खड़ा है।

कानूनी उपाय उपलब्ध हैं:

  • पुलिस सुरक्षा के लिए आवेदन: कपल स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर सुरक्षा माँग सकता है।
  • SP को प्रार्थना पत्र: अगर स्थानीय पुलिस मदद न करे, तो सीधे एसपी ऑफिस में शिकायत दी जा सकती है।
  • हाई कोर्ट में सुरक्षा याचिका: जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट में प्रोटेक्शन पिटीशन दायर की जा सकती है।
  • धमकी पर कानूनी कार्रवाई: धमकी, डराने या हिंसा के मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज हो सकता है।
  • संविधान का अनुच्छेद 21: यह अनुच्छेद जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, जिसमें अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार शामिल है।

कोर्ट ने साफ कहा है कि पुलिस की ज़िम्मेदारी कपल की सुरक्षा करना है, न कि उन्हें परेशान करना।

क्या पुलिस इंटर – रिलिजन शादी को रोक सकती है?

नहीं। पुलिस किसी भी कानूनी इंटर – रिलिजन शादी को रोक नहीं सकती।

पुलिस क्या नहीं कर सकती?

  • कपल को ज़बरदस्ती अलग नहीं कर सकती।
  • माता-पिता की सहमति की मांग नहीं कर सकती।
  • सिर्फ धर्म या समाज के दबाव में शादी रोक नहीं सकती।

पुलिस क्या कर सकती है?

  • केवल उम्र की जाँच कर सकती है।
  • यह देख सकती है कि दोनों अपनी मर्जी से शादी कर रहे हैं।

अगर पुलिस किसी भी तरह से परेशान करती है, तो उसके खिलाफ कोर्ट में शिकायत की जा सकती है। कानून साफ है – दो बालिग अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं, और कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता।

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क्या शादी से पहले साथ रहना वैध है?

शादी से पहले साथ रहना, जिसे लाइव-इन रिलेशनशिप कहा जाता है, भारतीय कानून में कानूनी और वैध माना गया है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। दो बालिग व्यक्ति अपनी आपसी सहमति से साथ रह सकते हैं। यह कोई अपराध नहीं है और पुलिस या परिवार उन्हें परेशान नहीं कर सकते। अदालतें ऐसे रिश्तों को सम्मान और सुरक्षा देती हैं।

कपल्स के लिए कुछ ज़रूरी और आसान सुझाव

  • सभी ज़रूरी दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें।
  • ऐसे इलाके का मैरिज ऑफिस चुनें जहाँ प्रक्रिया सुरक्षित और आसान हो।
  • शादी से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें।
  • शुरुआत में ही किसी अच्छे वकील से सलाह लें।
  • अगर डर या परेशानी हो, तो तुरंत कानूनी सुरक्षा के लिए आवेदन करें।

निष्कर्ष

इंटर – रिलिजन मैरिज कोई कानूनी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक चुनौती हो सकती है। भारतीय कानून रिश्तों को धर्म के आधार पर नहीं परखता। कानून सिर्फ यह देखता है कि दोनों व्यक्ति बालिग हैं, अपनी मर्जी से शादी कर रहे हैं और सभी कानूनी शर्तें पूरी हो रही हैं।

स्पेशल मैरिज एक्ट की सही जानकारी और समय पर कानूनी मदद से कपल्स पूरी गरिमा, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ शादी कर सकते हैं। रास्ता थोड़ा साहस माँग सकता है, लेकिन कानून पूरी मजबूती से आपके साथ खड़ा है।

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FAQs

1. क्या इंटर-फेथ कपल्स अपनी शादी भारत के किसी भी राज्य में रजिस्टर कर सकते हैं?

हाँ। एक बार शादी स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत रजिस्टर हो जाने के बाद, यह पूरी भारत में कानूनी रूप से मान्य होती है, चाहे शादी किसी भी राज्य में हुई हो।

2. शादी का नोटिस फाइल करने के बाद कितना समय इंतजार करना चाहिए?

नोटिस को कम से कम 30 दिन तक सार्वजनिक रूप से लगाया जाता है। इस अवधि में अगर कोई वैध कानूनी आपत्ति नहीं आती, तो शादी को रजिस्टर किया जा सकता है।

3. अगर परिवार या रिश्तेदार धमकी दें या परेशान करें तो कानूनी सुरक्षा क्या है?

कपल्स पुलिस या हाईकोर्ट में सुरक्षा के लिए अपील कर सकते हैं। धमकी, डराने-धमकाने या शादी रोकने की कोशिश पर BNS के तहत कार्रवाई हो सकती है।

4. इंटर-फेथ शादी रजिस्ट्रेशन के लिए गवाह होना जरूरी है?

हाँ। स्पेशल मैरिज एक्ट के अनुसार, शादी रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट पर साइन करते समय कम से कम तीन गवाहों की उपस्थिति आवश्यक है।

5. क्या परिवार की आपत्ति के कारण इंटर-फेथ शादी रद्द की जा सकती है?

नहीं। परिवार की आपत्ति या जाति/धर्म आधारित विरोध कानूनी रूप से वैध शादी को रद्द नहीं कर सकते, अगर शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत संपन्न और रजिस्टर हो चुकी हो।

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