मैरिज रजिस्ट्रेशन कैसे कराएँ?  जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया

How to get your marriage registered Learn the complete legal process.

बहुत से कपल्स यह मानते हैं कि सिर्फ धार्मिक रस्में कर लेने से उनकी शादी कानूनी रूप से मान्य हो जाती है। लेकिन सच यह है कि रस्में केवल सामाजिक पहचान देती हैं, जबकि शादी का रजिस्ट्रेशन ही कानूनी सबूत होता है

अगर मैरिज सर्टिफिकेट नहीं हो, तो पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक नॉमिनेशन, प्रॉपर्टी के अधिकार, इंश्योरेंस क्लेम या कोर्ट के मामलों में परेशानी आ सकती है। अच्छी बात यह है कि भारत में शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी भी है और कानून इसकी पूरी सुरक्षा देता है। सही तरीके से करने पर यह प्रक्रिया आसान होती है।

यह ब्लॉग आपको भारत में शादी रजिस्ट्रेशन से जुड़ी हर जरूरी जानकारी देगा – कौन-सा कानून लागू होता है, पूरी प्रक्रिया क्या है, कौन-से दस्तावेज़ चाहिए और कितना समय लगता है।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

क्या भारत में मैरिज रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है?

हाँ। भारत में मैरिज रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने सीमा बनाम अश्विनी कुमार (2006) मामले में साफ कहा है कि धर्म चाहे कोई भी हो, हर शादी का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। इसका मकसद महिलाओं की सुरक्षा करना और गलत या अवैध शादियों को रोकना है।

मैरिज रजिस्ट्रेशन क्यों ज़रूरी है? 

मैरिज रजिस्ट्रेशन बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे आपको:

  • शादी का पक्का कानूनी सबूत मिलता है
  • पति-पत्नी के कानूनी अधिकार सुरक्षित रहते हैं
  • पासपोर्ट और वीज़ा बनवाने में आसानी होती है
  • संपत्ति और विरासत के मामलों में मदद मिलती है
  • तलाक या अन्य पारिवारिक विवादों में प्रमाण मिलता है
  • महिलाओं को सामाजिक और कानूनी सुरक्षा मिलती है

शादी का सर्टिफिकेट आपकी शादी की सबसे मजबूत कानूनी पहचान होता है।

मैरिज रजिस्ट्रेशन पर कौन-सा कानून लागू होता है?

मैरिज रजिस्ट्रेशन इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी शादी किस तरीके से और किस कानून के तहत हुई है। भारत में अलग-अलग धर्म और परिस्थितियों के लिए अलग कानून बनाए गए हैं।

  • हिंदू मैरिज एक्ट, 1955
  • स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ
  • क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872
  • पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट, 1936

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन तब किया जाता है, जब दोनों पति-पत्नी हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हों। यह कानून ऐसे विवाहों पर लागू होता है जो धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न किए गए हों।

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 8 – यह धारा राज्य सरकारों को यह अधिकार देती है कि वे हिंदू विवाहों के रजिस्ट्रेशन के नियम तय करें।

ज़रूरी शर्तें
  • विवाह हिंदू रीति-रिवाजों (जैसे फेरे, सप्तपदी आदि) के अनुसार हुआ होना चाहिए।
  • मैरिज रजिस्ट्रेशन शादी के बाद किया जाता है।
  • दोनों पक्ष कानूनन विवाह योग्य हों (उम्र, सहमति आदि)।
मैरिज रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
  1. पति-पत्नी अपने क्षेत्र के लोकल मैरिज रजिस्ट्रार के पास आवेदन करते हैं।
  2. निर्धारित आवेदन फॉर्म भरा जाता है।
  3. पहचान, पता और उम्र से जुड़े दस्तावेज़ जमा किए जाते हैं।
  4. दोनों पति-पत्नी गवाहों के साथ रजिस्ट्रार के सामने उपस्थित होते हैं।
  5. रजिस्ट्रार दस्तावेज़ों की जांच और सत्यापन करता है।
  6. सब कुछ सही पाए जाने पर मैरिज सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।
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गवाहों की आवश्यकता: आमतौर पर 2 गवाह पर्याप्त होते हैं। गवाह परिवार के सदस्य या करीबी व्यक्ति हो सकते हैं और उनकी पहचान प्रमाण जरूरी होती है।

क्यों ज़रूरी है यह रजिस्ट्रेशन? हिंदू मैरिज एक्ट के तहत किया गया मैरिज रजिस्ट्रेशन आपको एक मजबूत कानूनी प्रमाण देता है, जो पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक, संपत्ति, बीमा और कोर्ट मामलों में बहुत काम आता है।

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 उन कपल्स के लिए लागू होता है जो अलग-अलग धर्म या जाति से हैं, या जो बिना किसी धार्मिक रस्म के कोर्ट मैरिज करना चाहते हैं। इस कानून के तहत की गई शादी पूरी तरह कानूनी होती है और पूरे भारत में मान्य रहती है।

यह कानून कब लागू होता है?
  • जब शादी इंटर-रिलिजन या इंटर-कास्ट हो।
  • जब कपल कोर्ट मैरिज करना चाहता हो।
  • जब शादी बिना किसी धार्मिक रीति-रिवाज के की जाए।
महत्वपूर्ण कानूनी धाराएँ
  • धारा 4 – शादी की जरूरी शर्तें (उम्र, सहमति, वैवाहिक स्थिति आदि)
  • धारा 5 – शादी का नोटिस देना
  • धारा 11 – आपत्ति की जांच
  • धारा 13 – मैरिज सर्टिफिकेट जारी होना

मैरिज रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया: सबसे पहले कपल को मैरिज ऑफिसर के पास शादी का नोटिस देना होता है, जैसा कि धारा 5 में बताया गया है। इसके बाद 30 दिन की नोटिस अवधि होती है, ताकि यह देखा जा सके कि शादी में कोई कानूनी रुकावट तो नहीं है। अगर इस दौरान कोई वैध आपत्ति नहीं आती, तो मैरिज ऑफिसर के सामने शादी संपन्न कराई जाती है। अंत में धारा 13 के तहत मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जो शादी का पक्का कानूनी सबूत होता है।

गवाहों की ज़रूरत: स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन के समय कम से कम 3 से 4 गवाहों का मौजूद होना अनिवार्य होता है। सभी गवाहों को अपनी पहचान का प्रमाण भी देना होता है।

मुस्लिम कपल्स के लिए मैरिज रजिस्ट्रेशन

मुस्लिम कपल्स की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होती है, लेकिन मैरिज रजिस्ट्रेशन राज्य के नियमों के तहत कराया जाता है।

निकाह के समय मिलने वाला निकाहनामा शादी का प्राथमिक सबूत होता है, लेकिन केवल निकाहनामा होने से कई सरकारी कामों में दिक्कत आ सकती है। इसलिए मैरिज रजिस्ट्रेशन कराना बहुत ज़रूरी होता है।

मैरिज रजिस्ट्रेशन आमतौर पर स्थानीय मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस में किया जाता है। इससे शादी को मजबूत कानूनी मान्यता मिलती है और पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक, प्रॉपर्टी या कोर्ट के मामलों में आसानी रहती है।

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क्रिश्चियन कपल्स के लिए मैरिज रजिस्ट्रेशन

ईसाई धर्म के कपल्स की शादी क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 के तहत होती है। शादी किसी चर्च में पादरी (Priest) के द्वारा या फिर मैरिज रजिस्ट्रार के सामने कराई जाती है। शादी के बाद उसका विवरण मैरेज रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इस रजिस्टर से मिलने वाला सर्टिफाइड एक्सट्रैक्ट या मैरिज सर्टिफिकेट ही शादी का कानूनी सबूत माना जाता है। यह सर्टिफिकेट सभी सरकारी और कोर्ट कार्यों में मान्य होता है।

पारसी कपल्स के लिए मैरिज रजिस्ट्रेशन

पारसी कपल्स की शादी पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट, 1936 के अनुसार होती है। शादी के बाद उसे पारसी मैरिज रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर कराया जाता है। रजिस्ट्रेशन के समय शादी का पूरा विवरण सरकारी रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इसके बाद जो मैरिज सर्टिफिकेट जारी होता है, वही शादी का अंतिम और कानूनी प्रमाण होता है, जिसे हर सरकारी विभाग और कोर्ट स्वीकार करता है।

मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ सामान्य और आसान दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है, ताकि शादी को कानूनी मान्यता मिल सके। आमतौर पर ये दस्तावेज़ मांगे जाते हैं:

  • उम्र का प्रमाण – जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या पासपोर्ट
  • पते का प्रमाण – आधार कार्ड, वोटर आईडी या किराए का एग्रीमेंट
  • पासपोर्ट साइज फोटो – पति और पत्नी की हाल की फोटो
  • शादी का कार्ड – अगर उपलब्ध हो (जरूरी नहीं, लेकिन सहायक)
  • वैवाहिक स्थिति का शपथपत्र – जिसमें अविवाहित/तलाकशुदा/विधवा या विधुर होने की जानकारी हो
  • गवाहों का पहचान पत्र – गवाहों का आधार, वोटर आईडी आदि
  • निकाहनामा / चर्च सर्टिफिकेट – अगर मुस्लिम या ईसाई विवाह हुआ हो

क्या बिना किसी रस्म के मैरिज रजिस्ट्रेशन हो सकता है? 

स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत किसी भी तरह की धार्मिक रस्म जरूरी नहीं होती। इसमें केवल कानून में बताई गई शर्तें पूरी करना और मैरिज रजिस्ट्रेशन कराना ही काफी होता है। रस्म हो या न हो, रजिस्ट्रेशन होने के बाद शादी पूरी तरह कानूनी मानी जाती है।

क्या मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए परिवार की सहमति जरूरी है? 

अगर पति-पत्नी दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी कर रहे हैं, तो परिवार की सहमति की कोई कानूनी जरूरत नहीं होती। कानून सिर्फ उम्र और आपसी सहमति देखता है, परिवार की अनुमति नहीं।

अगर रजिस्ट्रेशन के समय एक साथी मौजूद न हो तो क्या होगा? 

आमतौर पर मैरिज रजिस्ट्रेशन के समय पति और पत्नी दोनों का मौजूद होना जरूरी होता है। लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में, सही कारण और कोर्ट की अनुमति से अपवाद किया जा सकता है।

क्या मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन किया जा सकता है?

हाँ, मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन भी किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में यह साफ किया कि शादी का मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। आजकल ज़्यादातर राज्यों में ऑनलाइन और ऑफलाइन – दोनों तरीके उपलब्ध हैं।

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ऑनलाइन मैरिज रजिस्ट्रेशन कैसे होता है? आप राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन फॉर्म भर सकते हैं, ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं और मैरिज ऑफिसर के साथ अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।

ध्यान रखने वाली बात: भले ही आवेदन ऑनलाइन हो, लेकिन मैरिज रजिस्ट्रेशन के दिन पति-पत्नी दोनों की मैरिज ऑफिस में व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी होती है। यह तरीका आसान, सुविधाजनक, समय बचाने वाला और खर्च में कम होता है।

निष्कर्ष

मैरिज रजिस्ट्रेशन किसी निजी रिश्ते को कानूनी पहचान देता है। यह सिर्फ कागज़ी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आपकी सुरक्षा, अधिकार और भविष्य की गारंटी है। चाहे शादी धार्मिक तरीके से हुई हो या कोर्ट मैरिज के रूप में, उसका रजिस्ट्रेशन बहुत ज़रूरी है।

सही कानून की जानकारी, सही प्रक्रिया और पूरे दस्तावेज़ होने से मैरिज रजिस्ट्रेशन आसान और बिना तनाव के हो जाता है। समय पर किया गया रजिस्ट्रेशन न सिर्फ रिश्ते को मजबूत करता है, बल्कि पति-पत्नी दोनों के अधिकार और सम्मान की भी पूरी तरह रक्षा करता है।

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FAQs

1. क्या शादी के कई साल बाद भी मैरिज रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है?

हाँ। ज़्यादातर राज्यों के नियमों के अनुसार शादी के कई साल बाद भी मैरिज रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। कभी-कभी थोड़ी फीस या अतिरिक्त शपथपत्र देना पड़ता है, लेकिन शादी कानूनी रूप से रजिस्टर हो सकती है।

2. क्या मैरिज सर्टिफिकेट वीज़ा या इमिग्रेशन जैसे अंतरराष्ट्रीय कामों में मान्य होता है?

हाँ। सरकारी मैरिज सर्टिफिकेट पासपोर्ट अपडेट, स्पाउस वीज़ा, इमिग्रेशन और विदेशी दूतावासों में मान्य होता है। कुछ मामलों में अटेस्टेशन या अपोस्टिल की ज़रूरत पड़ सकती है।

3. अगर मैरिज सर्टिफिकेट में नाम या तारीख गलत हो तो क्या करें?

अगर सर्टिफिकेट में कोई गलती है, तो मैरिज रजिस्ट्रार के पास सही दस्तावेज़ देकर सुधार कराया जा सकता है। कई बार शपथपत्र या कोर्ट के आदेश की भी ज़रूरत पड़ती है।

4. क्या शादी किसी और शहर में हुई हो, तो भी दूसरे शहर में मैरिज रजिस्ट्रेशन हो सकता है?

हाँ। आमतौर पर पति या पत्नी में से किसी एक के रहने की जगह पर मैरिज रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है, चाहे शादी किसी दूसरे शहर या राज्य में हुई हो।

5. क्या मैरिज रजिस्ट्रेशन से अपने आप संपत्ति या विरासत का हक मिल जाता है?

मैरिज रजिस्ट्रेशन से सीधे संपत्ति ट्रांसफर नहीं होती, लेकिन यह शादी का मजबूत कानूनी सबूत होता है। इससे विरासत, नॉमिनेशन और पति-पत्नी के अधिकारों का दावा करना आसान हो जाता है।

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