शादी करना एक निजी फैसला होता है, लेकिन उस शादी को कानूनी रूप से साबित करना भी उतना ही ज़रूरी होता है। बहुत से कपल्स सोचते हैं कि साथ रहना या केवल धार्मिक रस्म कर लेना काफी है, लेकिन हकीकत यह है कि मैरिज सर्टिफिकेट ही शादी का सबसे मजबूत कानूनी सबूत होता है। इसके बिना निम्न समस्याएँ आती हैं:
- पासपोर्ट या वीज़ा आवेदन में रुकावट
- बैंक अकाउंट, नॉमिनी या इंश्योरेंस क्लेम में समस्या
- प्रॉपर्टी और उत्तराधिकार विवाद
- महिला और बच्चों के कानूनी अधिकारों पर असर
इस ब्लॉग आपको बताएगा कि कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट कैसे प्राप्त करें और भविष्य की कानूनी परेशानियों से कैसे बचें।
कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट क्या होता है?
कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट एक सरकारी दस्तावेज़ होता है, जो तब जारी किया जाता है जब पति-पत्नी की शादी मैरिज ऑफिसर के सामने कानूनी तरीके से कराई और रजिस्टर की जाती है। यह सर्टिफिकेट यह साबित करता है कि शादी कानून के अनुसार हुई है।
स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954, की धारा 13 के अनुसार, कोर्ट मैरिज के बाद मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाना अनिवार्य है। यह कानून उन कपल्स के लिए है जो बिना किसी धार्मिक रस्म के, सीधे कानूनी प्रक्रिया से शादी करना चाहते हैं, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो।
एक बार यह सर्टिफिकेट जारी हो जाने के बाद, यह पूरे भारत में शादी का अंतिम और पक्का कानूनी सबूत माना जाता है। पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक, प्रॉपर्टी, कोर्ट केस या किसी भी सरकारी काम में इसे पूरी मान्यता मिलती है।
कोर्ट मैरिज के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
कोर्ट मैरिज कोई भी कपल कर सकता है जो बिना धार्मिक रस्मों के, सीधे कानून के तहत शादी करना चाहता हो। इसमें धर्म या जाति की कोई पाबंदी नहीं होती।
कोर्ट मैरिज इन कपल्स के लिए होती है:
- अलग-अलग धर्म के कपल
- अलग-अलग जाति के कपल
- एक ही धर्म के कपल
- जो सादगी से, बिना रस्मों के शादी करना चाहते हैं
कोर्ट मैरिज के लिए ज़रूरी शर्तें (स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 की धारा 4 के अनुसार)
- लड़के की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए
- लड़की की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए
- दोनों अपनी पूरी मर्जी और बिना किसी दबाव के शादी कर रहे हों
- दोनों पहले से शादीशुदा न हों या फिर तलाकशुदा हों
- दोनों मानसिक रूप से स्वस्थ हों, ताकि शादी की जिम्मेदारी समझ सकें
- दोनों के बीच ऐसा नजदीकी रिश्ता न हो, जिसे कानून शादी के लिए मना करता है
अगर ये सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो कपल कानूनी रूप से कोर्ट मैरिज के लिए योग्य माना जाता है और वे आसानी से court marriage certificate प्राप्त कर सकते हैं।
कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट प्राप्त करने की की पूरी प्रक्रिया
स्टेप 1: शादी का नोटिस देना सबसे पहले कपल को स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 5 के तहत मैरिज ऑफिसर के पास शादी का नोटिस देना होता है। यह नोटिस उसी जिले में दिया जाता है, जहाँ पति या पत्नी में से कोई एक कम से कम 30 दिन से रह रहा हो।
स्टेप 2: नोटिस का प्रकाशन मैरिज ऑफिसर इस नोटिस को अपने ऑफिस के नोटिस बोर्ड पर लगाता है (धारा 6) । इसका मकसद सिर्फ यह देखना होता है कि शादी में कोई कानूनी रुकावट तो नहीं है।
स्टेप 3: 30 दिन की प्रतीक्षा अवधि नोटिस देने के बाद 30 दिन इंतज़ार करना ज़रूरी होता है। इस दौरान परिवार या समाज की आपत्ति की कोई कानूनी अहमियत नहीं होती।
स्टेप 4: आपत्ति (अगर कोई हो) अगर कोई आपत्ति आती है, तो वह केवल धारा 7 के तहत ही मान्य होती है। मैरिज ऑफिसर इसकी जांच धारा 11 के अनुसार करता है। अगर आपत्ति गलत पाई जाती है, तो शादी आगे बढ़ जाती है।
स्टेप 5: कोर्ट मैरिज करना निर्धारित तारीख पर पति-पत्नी दोनों मैरिज ऑफिसर के सामने उपस्थित होते हैं। इस समय कम से कम 3 गवाहों की मौजूदगी ज़रूरी होती है। इसके बाद शादी कानूनी रूप से संपन्न कराई जाती है।
स्टेप 6: कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट मिलना शादी के तुरंत बाद धारा 13 के तहत कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। इस पर पति-पत्नी, गवाह और मैरिज ऑफिसर के हस्ताक्षर होते हैं। यही सर्टिफिकेट शादी का अंतिम और पक्का कानूनी सबूत होता है।
कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
पति-पत्नी के लिए:
- उम्र का प्रमाण (10वीं की मार्कशीट / जन्म प्रमाण पत्र / पासपोर्ट)
- पते का प्रमाण (आधार कार्ड / वोटर आईडी / पासपोर्ट / किराया एग्रीमेंट)
- पासपोर्ट साइज फोटो
- वैवाहिक स्थिति का शपथपत्र
- तलाक का आदेश (अगर पहले शादी हो चुकी हो)
- मृत्यु प्रमाण पत्र (अगर विधवा/विधुर हों)
गवाहों के लिए (3 गवाह ज़रूरी):
- पहचान पत्र
- पते का प्रमाण
- पासपोर्ट साइज फोटो
यह पूरी प्रक्रिया कानूनी, सुरक्षित और पारदर्शी होती है, जिसे कोई भी आम व्यक्ति आसानी से समझ सकता है।
कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट मिलने में कितना समय लगता है?
कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट बनने में आमतौर पर कम से कम 30 दिन लगते हैं, क्योंकि कानून के अनुसार 30 दिन का नोटिस पीरियड जरूरी होता है। अगर सभी दस्तावेज़ सही हों और कोई आपत्ति न आए, तो पूरा काम 30 से 45 दिन में पूरा हो जाता है। हालाँकि, अगर काग़ज़ात अधूरे हों या किसी वजह से आपत्ति आ जाए, तो थोड़ा ज़्यादा समय भी लग सकता है।
क्या कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट पूरे भारत में मान्य है?
हाँ, कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट पूरे भारत में मान्य होता है। यह सर्टिफिकेट सभी राज्यों में स्वीकार किया जाता है और इसे कोर्ट, बैंक, पासपोर्ट ऑफिस, सरकारी विभाग और विदेशी दूतावास भी मानते हैं।
वीज़ा, इमिग्रेशन, पासपोर्ट अपडेट और अन्य कानूनी कामों में यह सर्टिफिकेट पूरी तरह काम करता है और शादी का पक्का कानूनी सबूत माना जाता है।
क्या कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है?
हाँ, कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट के लिए आवेदन ऑनलाइन शुरू किया जा सकता है, लेकिन पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन पूरी नहीं होती।
ऑनलाइन क्या किया जा सकता है?
भारत के कई राज्यों में स्टेट मैरिज रजिस्ट्रेशन या ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए आप ये काम ऑनलाइन कर सकते हैं:
- स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 की धारा 5 के तहत शादी का नोटिस भरना
- ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड करना
- मैरिज ऑफिसर के साथ अपॉइंटमेंट बुक करना
- कुछ राज्यों में सरकारी फीस ऑनलाइन जमा करना
ऑनलाइन क्या नहीं हो सकता?
ऑनलाइन सुविधा होने के बावजूद, ये काम खुद मौजूद होकर ही करने होते हैं:
- ओरिजिनल दस्तावेज़ों की जांच
- लड़का-लड़की और तीन गवाहों की मैरिज ऑफिसर के सामने उपस्थिति
- शादी की प्रक्रिया पूरी करना
- धारा 13 के तहत कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट पर साइन करना और सर्टिफिकेट जारी होना
खुद मौजूद होना क्यों ज़रूरी है?
कानून के अनुसार मैरिज ऑफिसर को यह खुद देखकर सुनिश्चित करना होता है कि दोनों की उम्र और पहचान सही है, दोनों अपनी मर्जी से शादी कर रहे हैं, गवाह मौजूद हैं। इसी कारण भारत में पूरी तरह ऑनलाइन कोर्ट मैरिज कानूनी रूप से संभव नहीं है।
निष्कर्ष
कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना एक आसान और साफ़ कानूनी प्रक्रिया है, अगर इसे सही तरीके से किया जाए। यह पति-पत्नी को पूरी कानूनी पहचान, सुरक्षा और मानसिक शांति देता है। भले ही 30 दिन की नोटिस अवधि में थोड़ा इंतज़ार करना पड़ता है, लेकिन अंत में मिलने वाला सर्टिफिकेट जीवन भर शादी का पक्का सबूत बनता है।
अगर कानून की सही जानकारी हो, सभी दस्तावेज़ पूरे हों और प्रक्रिया ठीक से अपनाई जाए, तो कोर्ट मैरिज में कोई परेशानी नहीं आती। कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट सिर्फ कागज़ नहीं है, बल्कि वैवाहिक जीवन की कानूनी सुरक्षा की मजबूत नींव है।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
1. क्या कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट से आधार, पैन और पासपोर्ट अपडेट किया जा सकता है?
हाँ। कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट एक सरकारी दस्तावेज़ होता है। इसकी मदद से आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, बैंक नॉमिनेशन और अन्य सरकारी रिकॉर्ड आसानी से अपडेट किए जा सकते हैं।
2. अगर 30 दिन की नोटिस अवधि के दौरान किसी एक पार्टनर का पता बदल जाए तो क्या होगा?
अगर इस दौरान पता बदल जाता है, तो मैरिज ऑफिसर नया पता प्रमाण मांग सकता है। कुछ मामलों में, अगर कानून की रेजिडेंस शर्त पूरी नहीं होती, तो नया नोटिस भी देना पड़ सकता है।
3. क्या कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट से बीमा और अन्य स्पाउस बेनिफिट्स मिल सकते हैं?
हाँ। बीमा कंपनियाँ, सरकारी विभाग और नियोक्ता, कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट को पति-पत्नी के रिश्ते का पक्का सबूत मानते हैं। इससे मेडिकल क्लेम, फैमिली पेंशन और अन्य लाभ मिलते हैं।
4. अगर कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट खो जाए या खराब हो जाए तो क्या करें?
अगर सर्टिफिकेट खो जाए या खराब हो जाए, तो उसी मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस से डुप्लीकेट या सर्टिफाइड कॉपी ली जा सकती है। इसके लिए आवेदन, हलफनामा और तय फीस देनी होती है।
5. क्या कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट में धर्म या जाति लिखी होती है?
नहीं। स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत जारी कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट में धर्म या जाति का उल्लेख नहीं होता। यह एक न्यूट्रल और प्राइवेसी सुरक्षित करने वाला कानूनी दस्तावेज़ है।



एडवोकेट से पूछे सवाल