दिल्ली में शादी को रजिस्टर कैसे कराएँ?  जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया और नियम

Marriage Registration in Delhi

अक्सर लोग सोचते हैं, शादी हो गई है, अब रजिस्ट्रेशन क्यों? कई बार शादी सिर्फ धार्मिक रीति-रिवाज से हो जाती है:

  • लेकिन बिना रजिस्ट्रेशन के सरकारी और कानूनी मामलों में समस्या आती है।
  • पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक अकाउंट या प्रॉपर्टी में विवाद हो सकता है।
  • तलाक या मृत्यु जैसी स्थिति में अधिकार साबित करना मुश्किल होता है।

शादी सिर्फ व्यक्तिगत वचन नहीं, बल्कि एक कानूनी बंधन भी है जिसे राज्य मान्यता देता है। दिल्ली में शादी का रजिस्ट्रेशन सिर्फ औपचारिकता नहीं है। यह सुनिश्चित करता है कि पति-पत्नी अपने कानूनी अधिकार जैसे संपत्ति, मेंटेनेंस और सरकारी फायदे इस्तेमाल कर सकें।

कई कपल सोचते हैं कि धार्मिक समारोह ही काफी है और रजिस्ट्रेशन बाद में कर लेंगे। लेकिन अधिकृत रजिस्ट्रेशन होने से शादी कानूनी रूप से सुरक्षित हो जाती है और भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचाव होता है।

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शादी का रजिस्ट्रेशन क्यों ज़रूरी है?

शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के कई कानूनी और व्यावहारिक फायदे होते हैं:

  • यह शादी का कानूनी सबूत होता है, जो हर सरकारी और निजी काम में काम आता है।
  • पति-पत्नी के कानूनी अधिकारों और विरासत की सुरक्षा करता है।
  • पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक अकाउंट, नाम बदलने जैसे कामों में ज़रूरी होता है।
  • भविष्य में तलाक, विवाद या कोर्ट केस की स्थिति में मजबूत सबूत बनता है।
  • शादीशुदा कपल्स को मिलने वाली सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ आसान बनाता है।

दिल्ली में मैरिज रजिस्ट्रेशन किन कानूनों के तहत होता है?

दिल्ली में शादी का रजिस्ट्रेशन धर्म और कपल की पसंद के अनुसार अलग-अलग कानूनों के तहत किया जा सकता है:

  • स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954: यह कानून अलग-धर्म या अलग-जाति के कपल्स पर लागू होता है। कोर्ट मैरिज इसी एक्ट के तहत SDM के सामने कानूनी रूप से रजिस्टर की जाती है।
  • हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955: यह एक्ट हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय के लिए है। शादी के बाद रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, कानूनी सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी माना जाता है।
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ: मुस्लिम शादी निकाह के बाद वैध होती है, लेकिन भविष्य की कानूनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए शादी का रजिस्ट्रेशन करवाना बेहतर और सुरक्षित होता है।
  • इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872: यह कानून ईसाई धर्म के लोगों की शादियों पर लागू होता है। शादी के बाद मैरिज रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
  • पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट, 1936: यह एक्ट पारसी समुदाय की शादियों के लिए है। धार्मिक विवाह समारोह के बाद शादी का रजिस्ट्रेशन कराना कानूनी रूप से आवश्यक होता है।
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दिल्ली में शादी कौन रजिस्टर करा सकता है?

Marriage Registration in Delhi कराने के लिए कुछ आसान शर्तें पूरी होना ज़रूरी है। लड़की की उम्र कम से कम 18 साल और लड़के की उम्र 21 साल होनी चाहिए। दोनों अपनी मर्ज़ी से शादी के लिए सहमत हों। दोनों अविवाहित हों या पहले से तलाकशुदा हों या विधवा/विधुर हों। शादी कानून में बताए गए निषिद्ध रिश्तों में नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा पति या पत्नी में से कम से कम एक व्यक्ति पिछले 30 दिनों से दिल्ली में रह रहा हो।

दिल्ली में शादी का रजिस्ट्रेशन कहाँ होता है?

  • दिल्ली में शादी का रजिस्ट्रेशन उसी इलाके के मैरिज रजिस्ट्रार (SDM ऑफिस) में होता है, जहाँ दूल्हा या दुल्हन में से कोई एक कम से कम 30 दिनों से रह रहा हो।
  • दिल्ली के प्रमुख SDM ऑफिस सेंट्रल दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली, साउथ दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, वेस्ट दिल्ली और न्यू दिल्ली में स्थित हैं।
  • सही SDM ऑफिस चुनना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि गलत जगह आवेदन करने से रजिस्ट्रेशन में देरी या अर्जी खारिज भी हो सकती है।

दिल्ली में मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

पति–पत्नी के लिए:

  • उम्र का प्रमाण – जन्म प्रमाण पत्र / 10वीं की मार्कशीट / पासपोर्ट
  • पता प्रमाण – आधार कार्ड / बिजली-पानी का बिल / पासपोर्ट
  • पहचान पत्र – आधार कार्ड / पैन कार्ड / पासपोर्ट
  • मैरिज एफिडेविट – (स्पेशल मैरिज एक्ट के मामलों में)
  • पहले से शादीशुदा होने पर – तलाक की डिक्री या मृत्यु प्रमाण पत्र

गवाहों के लिए:

  • पहचान पत्र – आधार कार्ड / पैन कार्ड / पासपोर्ट
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • गवाह का 18 साल से ऊपर होना ज़रूरी

मैरिज रजिस्ट्रेशन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

स्टेप 1: आवेदन तैयार करना और जमा करना सबसे पहले SDM ऑफिस या ऑनलाइन पोर्टल से मैरिज रजिस्ट्रेशन फॉर्म लें और उसमें पति, पत्नी व गवाहों की सही जानकारी भरकर जमा करें।

स्टेप 2: ज़रूरी दस्तावेज़ लगाना भरे हुए आवेदन के साथ उम्र, पहचान और पते के सभी ज़रूरी दस्तावेज़ अटैच करें, ताकि रजिस्ट्रेशन में कोई देरी या आपत्ति न हो।

स्टेप 3: मैरिज ऑफिसर द्वारा जांच मैरिज ऑफिसर दस्तावेज़ों की जांच करता है और ज़रूरत पड़ने पर नोटिस या वेरिफिकेशन कर सकता है, ताकि जानकारी सही और वैध हो।

स्टेप 4: कपल द्वारा घोषणा पति और पत्नी को मैरिज ऑफिसर के सामने एक घोषणा पत्र पर साइन करना होता है, जिससे यह साबित होता है कि शादी आपसी सहमति से हो रही है।

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स्टेप 5: गवाहों की उपस्थिति कम से कम दो गवाहों का मौजूद होना ज़रूरी होता है। गवाह अपनी पहचान के दस्तावेज़ दिखाते हैं और रजिस्टर पर साइन करते हैं।

स्टेप 6: मैरिज सर्टिफिकेट जारी होना सभी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जो पूरे भारत में कानूनी रूप से मान्य होता है।

दिल्ली में मैरिज रजिस्ट्रेशन की फीस

Marriage Registration in Delhi कराने की सरकारी फीस बहुत ज़्यादा नहीं होती। आमतौर पर SDM या कोर्ट में मैरिज रजिस्ट्रेशन की फीस लगभग ₹100 से ₹200 के बीच होती है। इसके अलावा, अगर आपको एफिडेविट बनवाना, नोटरी कराना या फोटो-कॉपी करानी हो, तो उसके लिए थोड़ा अलग खर्च आ सकता है। यदि आप पूरी प्रक्रिया आसान बनाने के लिए किसी वकील या प्रोफेशनल की मदद लेते हैं, तो उनकी फीस अलग से ली जाती है, जो केस और सेवाओं पर निर्भर करती है।

मैरिज रजिस्ट्रेशन में कितना समय लगता है?

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत शादी रजिस्टर कराने में आमतौर पर 30 से 45 दिन का समय लग जाता है, क्योंकि इसमें 30 दिन का नोटिस पीरियड अनिवार्य होता है। अगर सभी दस्तावेज़ पूरे और सही हों, सही SDM ऑफिस चुना गया हो और कोई कानूनी आपत्ति न आए, तो शादी का रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट तय समय पर या कभी-कभी उससे भी जल्दी मिल सकता है। गलत दस्तावेज़ या आपत्ति की स्थिति में प्रक्रिया लंबी हो सकती है।

क्या दिल्ली में मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन हो सकता है?

हाँ, दिल्ली में मैरिज रजिस्ट्रेशन की कुछ प्रक्रियाएँ ऑनलाइन की जा सकती हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं होती। इसे आसान भाषा में इस तरह समझें:

ऑनलाइन क्या किया जा सकता है:

  • मैरिज रजिस्ट्रेशन का आवेदन फॉर्म ऑनलाइन डाउनलोड करना
  • कुछ जिलों में SDM ऑफिस के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करना
  • आवेदन की स्थिति (स्टेटस) ऑनलाइन चेक करना

ऑनलाइन क्या नहीं हो सकता:

  • पति-पत्नी की पहचान और दस्तावेज़ों की अंतिम जांच
  • शादी की घोषणा और साइन करना
  • गवाहों की उपस्थिति के बिना रजिस्ट्रेशन

ज़रूरी बात: पति-पत्नी दोनों को SDM ऑफिस में खुद मौजूद होना अनिवार्य है, गवाहों का भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना ज़रूरी होता है। फिलहाल कानून के अनुसार पूरी तरह ऑनलाइन मैरिज रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं है।

इसलिए, ऑनलाइन सुविधा सिर्फ प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए है, लेकिन कानूनी रूप से शादी का रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन ही पूरा होता है। Top of Form

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निष्कर्ष

दिल्ली में मैरिज रजिस्ट्रेशन सिर्फ शादी के बाद की एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह आपके रिश्ते को कानूनी सुरक्षा देने का एक ज़रूरी कदम है। ज़िंदगी में कभी भी संपत्ति, बच्चों, नौकरी बदलने, विदेश जाने या किसी कानूनी विवाद जैसी स्थितियाँ आ सकती हैं। ऐसे समय में रजिस्टर्ड शादी कानून की तरफ़ से आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा बनती है।

समय पर और सही तरीके से शादी का रजिस्ट्रेशन कराने से आपके अधिकार सुरक्षित रहते हैं, भविष्य की कानूनी परेशानियों से बचाव होता है और एक ऐसा रिकॉर्ड बनता है जो भारत ही नहीं, विदेशों में भी मान्य होता है। चाहे आपकी शादी धार्मिक रीति-रिवाज़ों से हुई हो या कोर्ट के ज़रिए, उसका रजिस्ट्रेशन आपको लंबे समय की सुरक्षा, सम्मान और भरोसा देता है। आज उठाया गया यह छोटा सा कदम, कल की बड़ी कानूनी दिक्कतों से बचा सकता है।

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FAQs

1. क्या शादी के कई साल बाद भी दिल्ली में मैरिज रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है?

हाँ। अगर शादी के सबूत और ज़रूरी दस्तावेज़ उपलब्ध हों, तो शादी के कई साल बाद भी मैरिज रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। देर से रजिस्ट्रेशन करना कानूनन मान्य है।

2. क्या वीज़ा या इमिग्रेशन के लिए मैरिज रजिस्ट्रेशन ज़रूरी होता है?

अधिकतर मामलों में हाँ। विदेशी दूतावास और इमिग्रेशन अधिकारी शादी का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से मांगते हैं।

3. क्या SDM शादी का रजिस्ट्रेशन मना कर सकता है?

हाँ। अगर दस्तावेज़ अधूरे हों, सही जूरिस्डिक्शन न हो, उम्र की शर्तें पूरी न हों या गलत जानकारी दी गई हो, तो SDM रजिस्ट्रेशन से मना कर सकता है।

4. क्या दिल्ली से मिला मैरिज सर्टिफिकेट बाहर भी मान्य होता है?

बिल्कुल। दिल्ली में जारी किया गया मैरिज सर्टिफिकेट पूरे भारत में मान्य होता है और विदेशों में भी कानूनी सबूत के रूप में स्वीकार किया जाता है।

5. अगर रजिस्ट्रेशन वाले दिन गवाह न आएँ तो क्या होगा?

अगर ज़रूरी गवाह मौजूद नहीं होते, तो रजिस्ट्रेशन टल सकता है। गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य होती है और उनके न आने से सर्टिफिकेट मिलने में देरी हो सकती है।

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