पुलिस द्वारा गिरफ्तारी एक गंभीर कानूनी घटना है, जो किसी व्यक्ति की आज़ादी, इज़्ज़त और निजी जीवन पर बड़ा असर डाल सकती है। भारत में पुलिस के पास अपराध करने के आरोपित व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार होता है, लेकिन यह अधिकार कानून, जैसे कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश और संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत सीमित और नियंत्रित है। कई लोग अचानक घर पर गिरफ्तारी होने पर घबरा जाते हैं या अनजाने में अपने अधिकारों से समझौता कर लेते हैं।
भारत में 70% से अधिक गिरफ्तारियाँ ऐसी होती हैं जहाँ व्यक्ति को यह तक नहीं बताया जाता कि उसका अपराध क्या है। लोग यह नहीं जानते कि हर FIR में गिरफ्तारी ज़रूरी नहीं होती, और हर गिरफ्तारी का मतलब जेल नहीं होता।
यह लेख आपको स्टेप-बाय-स्टेप बताएगा कि अगर पुलिस आपके घर आकर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को गिरफ्तार करने आए तो क्या करना चाहिए। इसमें बताया गया है कि पुलिस को कौन-कौन से नियम मानने होते हैं, गिरफ्तारी होने पर आपके क्या अधिकार हैं, महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा क्या है और वकील की भूमिका क्या होती है।
अपने अधिकारों और सुरक्षा उपायों को समझकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि गिरफ्तारी कानूनी हो, किसी प्रकार के दुरुपयोग से बचा जा सके और आप अपनी आज़ादी और इज़्ज़त को तुरंत सुरक्षित रख सकें। यह गाइड आपको मदद करेगा ताकि आप तनावपूर्ण और आपातकालीन स्थिति में सही कदम उठा सकें।
गिरफ्तारी क्या है?
गिरफ्तारी का मतलब है कि कानून के तहत किसी व्यक्ति की आज़ादी को अस्थायी या स्थायी रूप से रोकना। यह सिर्फ पुलिस का मनमाना कदम नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है। किसी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 43 के नियमों का पालन करना होता है।
हिरासत और गिरफ्तारी में फर्क:
- हिरासत: अगर पुलिस आपको सिर्फ पूछताछ के लिए कुछ समय के लिए रोकती है, उसे हिरासत कहते हैं। इस दौरान आपको घर, परिवार या वकील से मिलने की सीमित आज़ादी मिल सकती है।
- गिरफ्तारी: जब पुलिस आपको कानूनी तौर पर पकड़कर अपने पास रखती है और इस पर केस दर्ज होता है, उसे गिरफ्तारी कहते हैं। इस समय आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो जाती है।
याद रखें, हर पूछताछ या पुलिस के रोकने का मतलब गिरफ्तारी नहीं। गिरफ्तारी तभी होती है जब आपको कानूनी तरीके से पकड़ लिया जाए और आपको कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया शुरू हो। यह जानना जरूरी है ताकि आप अपनी कानूनी सुरक्षा और अधिकारों का सही इस्तेमाल कर सकें।
पुलिस घर आकर गिरफ्तारी कब कर सकती है?
पुलिस किसी व्यक्ति को उसके घर से गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन सिर्फ़ कानूनी प्रक्रिया का पालन करके। पुलिस किसी भी घर में बिना वजह या नियम तोड़े किसी को नहीं ले सकती।
पुलिस घर आकर गिरफ्तारी तभी कर सकती है जब:
- आपके खिलाफ वैध FIR दर्ज हो।
- कोर्ट ने वारंट जारी किया हो।
- अपराध गंभीर हो और गिरफ्तारी जरूरी हो।
पुलिस को गिरफ्तारी करते समय यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि उन्हें किस वजह से गिरफ्तारी करनी पड़ रही है। साथ ही, वे आपको बताएँ कि आप पर कौन सा अपराध लगाया गया है और गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी कौन हैं। यह सब नियम कानून के तहत किया जाना चाहिए ताकि गिरफ्तारी वैध और पारदर्शी बनी रहे।अगर पुलिस ये नियम नहीं मानती, तो गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) में यह स्पष्ट किया गया कि सिर्फ FIR दर्ज होने भर से किसी की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को पहले यह साबित करना होगा कि गिरफ्तारी वास्तव में जरूरी है, जैसे कि आरोपी भाग सकता है या सबूत मिटा सकता है।
इस निर्णय का मकसद नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना था कि पुलिस का गिरफ्तारी पर अनियंत्रित अधिकार न हो।
पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कब कर सकती है?
भारत में पुलिस किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं कर सकती। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 35 में साफ़ शर्तें दी गई हैं कि पुलिस कब बिना वारंट किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है।
बिना वारंट गिरफ्तारी के मुख्य कारण
- संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) पुलिस बिना वारंट तब गिरफ्तार कर सकती है जब व्यक्ति किसी गंभीर अपराध में आरोपी हो। ऐसे अपराधों में FIR दर्ज करना और बिना कोर्ट की अनुमति जांच शुरू करना संभव हो।
- यथार्थिक संदेह (Reasonable Suspicion) पुलिस को यह विश्वास होना चाहिए कि व्यक्ति ने अपराध किया है, कर रहा है या करने वाला है। सिर्फ अनुमान या व्यक्तिगत नापसंदगी पर्याप्त नहीं है।
- भागने या सबूत मिटाने का खतरा (Preventing Escape or Obstruction) अगर आरोपी भाग सकता है, सबूत मिटा सकता है, गवाहों को डराने की कोशिश कर सकता है या जांच में बाधा डाल सकता है, तो गिरफ्तारी की जा सकती है।
- गिरफ्तारी का कारण बताना (Obligation to Inform) बिना वारंट गिरफ्तारी में भी पुलिस को गिरफ्तारी के कारण बताना ज़रूरी है।
सबसे पहले क्या करें – शांत रहें
जब पुलिस घर आए, तो चिल्लाएँ, बहस करें या भागने की कोशिश न करें। ऐसा करने से आपके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसकी बजाय करें:
- खुद को शांत रखें। घबराहट में निर्णय गलत हो सकते हैं।
- पुलिस से सौम्य और विनम्र भाषा में बात करें।
- सवाल पूछें, लेकिन सम्मानपूर्वक।
- किसी दस्तावेज़ या कागज़ पर तुरंत हस्ताक्षर न करें जब तक पूरी तरह समझ न लें।
- शांति और संयम रखने से आप अपने कानूनी अधिकारों को सुरक्षित कर सकते हैं और पुलिस के साथ सही ढंग से बातचीत कर सकते हैं।
पुलिस से पूछें – गिरफ्तारी का कारण क्या है?
आपका कानूनी अधिकार है कि आप जानें:
- आपको क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है।
- आप पर कौन सा अपराध लगाया गया है।
यह अधिकार आपको भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 और क्रिमिनल लॉ के तहत मिलता है। इसे जानना बहुत जरूरी है ताकि कोई अवैध कार्रवाई आपके खिलाफ न हो।
गिरफ्तारी वारंट मांगें (यदि जरूरी हो)
कई अपराधों में पुलिस को गिरफ्तारी के लिए कोर्ट द्वारा जारी वारंट की आवश्यकता होती है।
आप पूछ सकते हैं: “क्या आपके पास वारंट है?” अगर वारंट है, तो:
- पुलिस को इसे आपके सामने दिखाना होगा।
- वारंट में आपका नाम होना चाहिए।
- इसे जज द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए।
अगर वारंट नहीं है, तो पुलिस गंभीर मामलों में अभी भी गिरफ्तारी कर सकती है, लेकिन उन्हें यह बताना होगा कि तुरंत कार्रवाई क्यों जरूरी है।
पुलिस को अरेस्ट मेमो तैयार करना ज़रूरी है
गिरफ्तारी के समय पुलिस एक अरेस्ट मेमो (गिरफ्तारी का दस्तावेज़) बनाना अनिवार्य है। यह दस्तावेज़ आपके अधिकारों की सुरक्षा करता है।
इसमें शामिल होना चाहिए:
- गिरफ्तारी की तारीख और समय
- गिरफ्तारी का स्थान
- पकड़ने वाले पुलिस अधिकारी का नाम
- एक गवाह का नाम – कोई परिवार का सदस्य या पड़ोसी
आप या आपका परिवार इस मेमो पर हस्ताक्षर करें और एक प्रति (कॉपी) मांगे। यह नियम सुप्रीम कोर्ट ने डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल (1997) के मामले में तय किया था।
क्या गिरफ्तारी के समय आप वकील बुला सकते हैं?
गिरफ्तारी या पूछताछ के समय आपका यह कानूनी अधिकार है। पुलिस आपको रोक नहीं सकती:
- वकील को बुलाने से – आप अपनी सलाह और सुरक्षा के लिए किसी वकील को तुरंत बुला सकते हैं।
- परिवार या मित्र को सूचित करने से – आप तय कर सकते हैं कि कौन आपके गिरफ्तार होने की जानकारी पाए। यह आपकी सुरक्षा और पुलिस हिरासत में गायब होने से बचाव करता है।
कभी भी अकेले न जाएँ। वकील मदद करता है कि आप पर गलत दबाव न डाला जाए और कोई झूठा बयान न लिया जाए।
महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा क्या है?
अगर गिरफ्तारी का शिकार कोई महिला है, तो उसके लिए कानून में विशेष सुरक्षा दी गई है ताकि उसका सम्मान और सुरक्षा बनी रहे।
- रात में गिरफ्तारी नहीं – महिला को रात के समय गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, सिवाय अत्यंत गंभीर और जरूरी मामलों के।
- महिला अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी – महिला को गिरफ्तार करने के लिए महिला पुलिस अधिकारी होना ज़रूरी है, ताकि सम्मान और आरामदायक माहौल बना रहे।
- सम्मान और सुरक्षा का अधिकार – महिला को किसी भी तरह की अपमानजनक या हिंसक व्यवहार से सुरक्षा का हक़ है।
ये नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि महिलाओं को अत्याचार, डर और उत्पीड़न से बचाया जा सके और कानून का सही इस्तेमाल हो।
शीला बरसे बनाम महाराष्ट्र राज्य (1983)
इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला को सम्मान और गरिमा के साथ गिरफ्तार करना चाहिए और उसे पुरुषों से अलग सुरक्षित जगह पर रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि महिला की हिरासत में उसे महिलाओं के लिए अलग लॉक‑अप या कमरे में रखा जाना चाहिए, और जब महिला पुलिस अधिकारी उपलब्ध हो, तो महिला की गिरफ्तारी और पूछताछ में महिला अधिकारी का सहयोग होना चाहिए। ये निर्देश इसलिए दिए गए ताकि महिलाओं के साथ कोई असंभव, अपमानजनक, या असुरक्षित व्यवहार न हो।
श्रीमती भारती एस खंडधार बनाम श्री मारुति गोविंद जाधव (2012)
बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी महिला को सूर्यास्त के बाद (शाम) और सूर्योदय से पहले (सुबह) गिरफ्तार करना कानून के खिलाफ है, जब तक कि कोई बहुत ही आपात स्थिति न हो। अगर कभी सच में रात में गिरफ्तारी जरूरी हो, तो:
- पुलिस को पहले मजिस्ट्रेट से लिखित अनुमति लेनी होगी
- गिरफ्तारी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही की जाएगी
- महिला की सुरक्षा और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाएगा
कोर्ट ने कहा कि रात में महिलाओं की गिरफ्तारी से डर, शोषण और उत्पीड़न का खतरा होता है, इसलिए कानून ने यह सुरक्षा दी है।
इस फैसले का सीधा मतलब है: पुलिस महिला को कभी भी मनमाने तरीके से रात में उठाकर नहीं ले जा सकती। अगर ऐसा किया गया, तो वह गिरफ्तारी अवैध होगी।
क्या पुलिस आपसे जबरदस्ती कॉन्फेशन ले सकती है?
पुलिस को किसी भी हालत में आपको मारने, डराने, धमकाने या शारीरिक-मानसिक यातना देकर कॉन्फेशन लेने का अधिकार नहीं है। अगर पुलिस के दबाव, डर या मारपीट से कोई बयान लिया जाता है, तो वह कानून में बेकार होता है और कोर्ट उसे स्वीकार नहीं करती। कानून कहता है कि सच्चा और मान्य कॉन्फेशन वही होता है जो मजिस्ट्रेट के सामने, बिना किसी दबाव के दिया गया हो। इसलिए अगर पुलिस आप पर कुछ मानने का दबाव बनाए, तो आप चुप रहने और वकील से बात करने का पूरा अधिकार रखते हैं।
आपको बेल कब मिल सकती है?
गिरफ्तारी का मतलब यह नहीं होता कि आपको सीधे जेल भेज दिया जाएगा। ज़्यादातर मामलों में कानून आपको बेल पर रिहा होने का अधिकार देता है।
BNSS की धारा 478 के अनुसार, अगर अपराध बेलेबल है, तो पुलिस को आपको थाने से ही बेल देनी होती है। इसमें पुलिस के पास आपको जेल भेजने का कोई अधिकार नहीं होता।
अगर अपराध नॉन- बेलेबल है, तो BNSS की धारा 480 के तहत कोर्ट यह तय करती है कि आपको बेल दी जाए या नहीं। लेकिन ऐसे मामलों में भी, अगर अपराध बहुत गंभीर नहीं है, आरोपी भागने वाला नहीं है, और जांच में सहयोग कर रहा है, तो कोर्ट आमतौर पर बेल दे देती है।
इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि गिरफ्तारी का मतलब सज़ा नहीं है। कई मामलों में व्यक्ति को कुछ घंटों या उसी दिन बेल मिल जाती है और वह घर जा सकता है।
पुलिस आपको कितने समय तक रख सकती है?
कानून के अनुसार पुलिस किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी मर्जी से थाने में नहीं रख सकती। BNSS की धारा 58 कहती है कि पुलिस को आपको 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना ही होगा।
अगर 24 घंटे में जाँच पूरी नहीं होती, तो पुलिस को BNSS की धारा 187 के तहत मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी पड़ती है। मजिस्ट्रेट ही तय करता है कि:
- आपको पुलिस हिरासत में भेजा जाए या
- न्यायिक हिरासत (जेल) में रखा जाए
पुलिस खुद से आपको आगे नहीं रोक सकती। BNSS धारा 167 यह भी कहती है कि अगर पुलिस 60 दिन (या गंभीर मामलों में 90 दिन) के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को डिफॉल्ट बेलमिल जाती है। इसका मतलब यह है कि सरकार आपको बिना केस पूरा किए अनंत समय तक बंद नहीं रख सकती।
यह कानून इसलिए बनाया गया है ताकि किसी को भी थाने में बैठाकर डराया, पीटा या गलत तरीके से फँसाया न जा सके। मजिस्ट्रेट की निगरानी में ही आपकी हिरासत होती है, यही आपकी आज़ादी और अधिकारों की असली सुरक्षा है।
अगर गिरफ्तारी गैर-कानूनी हो तो क्या करें?
अगर पुलिस ने आपको कानून के बिना गिरफ्तार किया है, तो आप ये कदम उठा सकते हैं:
- आप शिकायत कर सकते हैं: पुलिस के सीनियर अफसर (SP, DCP) या महिला आयोग (अगर महिला है) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- कोर्ट जा सकते हैं: आप सीधे हाई कोर्ट में पिटीशन डालकर अपनी रिहाई और न्याय मांग सकते हैं।
- कंपनसेशन मांग सकते हैं: अगर गिरफ्तारी गलत साबित हो जाए, तो कोर्ट सरकार को आपको कंपनसेशन देने का आदेश दे सकता है।
- पुलिस पर कार्रवाई हो सकती है: कोर्ट पुलिस अफसर के खिलाफ जांच और सज़ा का आदेश भी दे सकता है।
गैर-कानूनी गिरफ्तारी बहुत गंभीर बात है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गलत गिरफ्तारी किसी की आज़ादी का उल्लंघन है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इन अधिकारों का मकसद यही है कि कोई भी पुलिस अधिकारी किसी बेगुनाह को डराकर या ज़बरदस्ती गिरफ्तार न कर सके। कानून आपकी सुरक्षा के लिए है।
निष्कर्ष
जब पुलिस गिरफ्तारी के लिए आती है, डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन बेबस होना ज़रूरी नहीं। भारत का कानून आपके और पुलिस की ताक़त के दुरुपयोग के बीच एक मजबूत दीवार की तरह खड़ा है। गिरफ्तारी से आपकी इज़्ज़त, आपकी आवाज़ और आपके अधिकार खत्म नहीं होते। संविधान, अदालतों के नियम और कानूनी प्रक्रिया हर नागरिक को सुरक्षा देते हैं। जैसे ही आप अपने अधिकार जानते हैं, आप डर से निकलकर कानून की सुरक्षा में आ जाते हैं।
गिरफ्तारी के नियम जानना न्याय से भागना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि न्याय सही, कानूनी और इंसानियत के साथ हो। चाहे आप बेगुनाह हों या आरोपित, कानून किसी को अपमानित करने, ज़ोर-जबरदस्ती करने या छुपकर कार्रवाई करने की इजाज़त नहीं देता। जानकारी आपकी ढाल है और वकील आपकी ताक़त।
कठिन समय में घबराएँ नहीं – अपने अधिकारों पर खड़े रहें। कानून सिर्फ कोर्ट में नहीं, आपके दरवाज़े पर भी आपकी रक्षा के लिए मौजूद है।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
1. क्या पुलिस मेरी इजाज़त के बिना घर में घुसकर गिरफ्तार कर सकती है?
हाँ, लेकिन केवल तब जब उनके पास कानूनी अधिकार हो – जैसे कोर्ट का वारंट या कानून के अनुसार गिरफ्तारी का कारण। पुलिस को अपनी पहचान बतानी होती है और कानून का पालन करना होता है।
2. जब पुलिस गिरफ्तार करने आए तो मुझे उनसे क्या दिखाने को कहना चाहिए?
आप पुलिस से उनकी आईडी, गिरफ्तारी का कारण, FIR की जानकारी और अगर वारंट है तो उसकी कॉपी दिखाने को कह सकते हैं। इससे पता चलता है कि गिरफ्तारी सही है या नहीं।
3. अगर पुलिस कानून का पालन न करे तो क्या होगा?
अगर पुलिस नियम तोड़कर गिरफ्तारी करती है, तो कोर्ट में शिकायत की जा सकती है। आप ज़मानत, मुआवज़ा या पुलिस पर कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।
4. गिरफ्तार होने के बाद मैं कितनी जल्दी छूट सकता हूँ?
अगर मामला ज़मानती है तो आप तुरंत ज़मानत पर छूट सकते हैं। नहीं तो 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा, जो आगे फैसला करेगा।
5. अगर मुझे गलत तरीके से रोका गया हो तो परिवार क्या कर सकता है?
परिवार वकील से संपर्क कर सकता है, कोर्ट में अर्ज़ी दे सकता है या हैबियस कॉर्पस डाल सकता है ताकि व्यक्ति को जल्दी कोर्ट के सामने लाया जाए।



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