डिजिटल अरेस्ट का कॉल आया? यह स्कैम है या असली, तुरंत कैसे पहचानें

Got a call from Digital Arrest How to quickly identify if it's a scam or real

सोचिए, आपको अचानक एक वीडियो कॉल आता है। सामने एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में बैठा है। पीछे पुलिस स्टेशन जैसा बैकग्राउंड। वह गंभीर आवाज़ में कहता है कि आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और पोर्नोग्राफी का केस दर्ज है। आपको अभी डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है।

आप घबरा जाते हैं। वह कहता है – “अगर आपने अभी 30 मिनट में पैसे ट्रांसफर नहीं किए, तो पुलिस आपके घर आ जाएगी और आपको जेल ले जाएगी।” यही है डिजिटल अरेस्ट स्कैम। इसमें स्कैमर आपको डर, शर्म और जल्दबाज़ी में डालकर पैसे ऐंठते हैं।

आज के डिजिटल दौर में, जहाँ वीडियो कॉल और ऑनलाइन जांच आम बात लगती है, अपराधी इसी तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों को फँसाते हैं। भारत में हज़ारों पढ़े-लिखे लोग, डॉक्टर, व्यापारी, बुज़ुर्ग तक इस स्कैम का शिकार हो चुके हैं, क्योंकि अपराधी कानून की भाषा और पुलिस का डर बहुत चालाकी से इस्तेमाल करते हैं। इस ब्लॉग का उद्देश्य है – डर नहीं, सही पहचान और सुरक्षा।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?

डिजिटल अरेस्ट कोई असली कानूनी शब्द नहीं है। यह साइबर ठगों द्वारा बनाया गया एक झूठा शब्द है। भारत के कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज़ नहीं होती। ठग लोग फोन, वीडियो कॉल या व्हाट्सएप पर आपको डराने के लिए कहते हैं कि आप गिरफ्तार हो चुके हैं। वे कहते हैं कि:

  • आपका आधार किसी अपराध से जुड़ा है
  • आपके बैंक खाते में धोखाधड़ी हुई है
  • आपके नाम से कोई गलत पार्सल पकड़ा गया है
  • आपके खिलाफ केस दर्ज हो गया है

फिर वे बोलते हैं: “आप डिजिटल अरेस्ट में हैं। आप कहीं जा नहीं सकते, किसी से बात नहीं कर सकते, और कॉल भी नहीं काट सकते।” यह सब पूरी तरह झूठ है। यह सिर्फ डराकर पैसे ऐंठने का तरीका है।

भारत में कानूनी गिरफ्तारी कैसे होती है?

भारतीय कानून के अनुसार गिरफ्तारी हमेशा असल में, सामने आकर होती है, ऑनलाइन नहीं। असल गिरफ्तारी में पुलिस:

  • खुद आपके सामने आती है
  • अपनी पहचान (ID) दिखाती है
  • बताती है कि आपको किस मामले में पकड़ा जा रहा है
  • लिखित अरेस्ट मेमो बनाती है
  • और 24 घंटे के अंदर आपको मजिस्ट्रेट के सामने पेश करती है

कोई भी पुलिस, CBI या कोर्ट कभी भी इन तरीकों से किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकता:

  • फोन पर
  • व्हाट्सएप पर
  • ज़ूम पर
  • स्काइप पर
  • वीडियो कॉल पर

अगर कोई ऐसा कहे, तो वह 100% ठगी है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे काम करता है?

इस तरह की ठगी बहुत चालाकी से की जाती है और इसका मकसद होता है आपको डराकर तुरंत पैसा निकलवाना। आमतौर पर यह ऐसे शुरू होती है:

आपको एक कॉल आता है जो खुद को CBI, साइबर क्राइम, पुलिस, कस्टम या टेलीकॉम डिपार्टमेंट से बताता है। वे कहते हैं कि आपके नाम, मोबाइल नंबर या आधार से कोई अपराध जुड़ा है – जैसे ड्रग्स का पार्सल, मनी लॉन्ड्रिंग या फर्जी सिम कार्ड।

फिर कॉल को एक “सीनियर अफसर” को ट्रांसफर किया जाता है। वह वीडियो कॉल पर आता है। पीछे पुलिस स्टेशन जैसा बैकग्राउंड होता है, यूनिफॉर्म भी पहन रखी होती है ताकि बात असली लगे।

इसे भी पढ़ें:  AI द्वारा बनाए गए कॉन्ट्रैक्ट – क्या ये भारतीय कानून में वैध हैं?

वह आपको डराता है कि अभी गिरफ्तारी होगी, जेल भेज दिया जाएगा, और मीडिया में नाम आ जाएगा। डर के माहौल में आप सोचने की हालत में नहीं रहते।

फिर कहा जाता है कि अगर आप तुरंत पैसे भेज दें तो केस “सेटल” हो जाएगा, गिरफ्तारी रुक जाएगी और नाम साफ हो जाएगा। साथ ही धमकी दी जाती है कि किसी को बताया तो हालत और खराब हो जाएगी।

असल में यह सब मानसिक दबाव डालकर किया गया फ्रॉड होता है। कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं।

यह 100% स्कैम है – पहचानें आसान संकेत

अगर कॉल या वीडियो पर ये बातें हों, तो समझ जाइए यह ठगी है, असली पुलिस नहीं:

  • गिरफ्तारी रोकने के लिए पैसे मांगना
  • बैंक डिटेल या OTP मांगना
  • आपको वीडियो कॉल पर लगातार रोकना
  • “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी देना
  • WhatsApp, Zoom, Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर डराना
  • वकील से बात न करने देने की धमकी देना

स्कैमर्स कैसे भरोसा जीतते हैं?

  • फर्जी FIR और केस नंबर दिखाते हैं।
  • असली सरकारी वेबसाइट जैसा बैकग्राउंड लगाते हैं।
  • आपकी पर्सनल जानकारी बताते हैं।
  • आपको अकेला और डरा हुआ रखते हैं।
  • यह सब सोशल इंजीनियरिंग कहलाता है।

ऐसी कॉल आने पर तुरंत क्या करें?

  • कॉल डिसकनेक्ट करें: तुरंत फोन काट दें, बातचीत जारी रखने से आप धोखेबाज के नियंत्रण में रह सकते हैं।
  • पैसे न भेजें: कोई भी पैसा या बैंक ट्रांजैक्शन करने से आपका नुकसान हो सकता है, स्कैमर्स पैसा चुराने के लिए कहते हैं।
  • OTP या आधार न साझा करें: OTP या आधार नंबर देने से आपके बैंक और पहचान का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
  • स्क्रीनशॉट लें: कॉल, मैसेज या वीडियो का स्क्रीनशॉट लें, यह सबूत के रूप में बाद में काम आएगा।
  • 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें: तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन से सलाह लें और मामला दर्ज कराएँ।
  • cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें: ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने से अधिकारियों को मामला पता चलेगा और कार्रवाई तेज़ होगी।
  • अपने बैंक को सूचित करें: अपने बैंक को तुरंत बताएं ताकि आपके अकाउंट को सुरक्षित किया जा सके और कोई धोखाधड़ी रोकी जा सके।

क्या पुलिस कभी पैसे मांग सकती है?

  1. कभी नहीं: भारत में किसी भी पुलिस अधिकारी, CBI या सरकारी एजेंसी को फोन पर पैसे मांगने का कोई अधिकार नहीं है।
  2. पुलिस, CBI, कोर्ट या सरकारी ऑफिस: ये सभी संस्थान अपने काम में ईमानदारी बनाए रखते हैं और व्यक्तिगत लाभ के लिए पैसे नहीं मांग सकते।
  3. फोन पर रिश्वत नहीं लेती: कोई भी अधिकारी फोन या वीडियो कॉल के जरिए पैसे लेने का आदेश नहीं दे सकता, यह गैरकानूनी है।
  4. ऑनलाइन केस सैटल नहीं करते: पुलिस या कोर्ट केस को ऑनलाइन पैसे देकर खत्म करने की अनुमति नहीं देते, यह पूरी तरह फर्जी है।
  5. UPI या ट्रांसफर की मांग नहीं: सरकारी अधिकारी किसी से भी UPI, नेट बैंकिंग या वॉलेट से पैसे नहीं मांग सकते, ऐसा करना अपराध है।
इसे भी पढ़ें:  ऑनलाइन लेन-देन और ई-कॉमर्स में धोखाधड़ी के मामलों को कानून कैसे देखता है?

अगर कोई पैसा मांगता है, तो वह भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के तहत भारतीय कानून के तहत अपराध माना जाएगा।

अगर आपने पैसे दे दिए हैं तो क्या करें?

अगर गलती से आपने डिजिटल अरेस्ट या ऑनलाइन फ्रॉड कॉल में पैसे भेज दिए हैं, तो तुरंत कार्रवाई करना बहुत जरूरी है। देर करने से पैसे वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है।

कदम दर कदम करें:

  1. तुरंत रिपोर्ट करें: जैसे ही आपको एहसास हो कि यह फ्रॉड था, तुरंत अपने नजदीकी साइबर सेल या पुलिस को जानकारी दें।
  2. साइबर शिकायत दर्ज कराएँ: cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन साइबर शिकायत दर्ज करें, ताकि केस दर्ज होकर जांच शुरू हो सके।
  3. बैंक को सूचित करें: अपने बैंक को तुरंत बताएं कि आपके अकाउंट से फ्रॉड के जरिए पैसे कट गए हैं। बैंक लेन-देन रोकने या रिकवरी में मदद कर सकता है।
  4. पुलिस में FIR दर्ज कराएँ: स्थानीय पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएँ ताकि कानूनी रूप से मामला पक्का हो और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
  5. वकील से कानूनी सलाह लें: किसी अच्छे क्रिमिनल या साइबर लॉ वकील से तुरंत सलाह लें। वकील आपको सही कदम बताएगा, केस की रणनीति बनाएगा और पैसे वापस पाने में मदद करेगा।

ध्यान दें: जितनी जल्दी आप रिपोर्ट करेंगे, पैसे लौटाने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। समय पर सही कदम उठाना फ्रॉड से बचने और रिकवरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।

ये स्कैम बढ़ क्यों रहे हैं?

स्कैम करने वाले लोग अब बहुत चालाक हो गए हैं। वे विभिन्न तरीकों से लोगों को फंसाते हैं:

  • डेटा लीक का इस्तेमाल: आपका मोबाइल नंबर, ईमेल या अन्य जानकारी चोरी करके फ्रॉड कॉल करते हैं।
  • सोशल मीडिया का इस्तेमाल: फेसबुक, व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम से आपकी प्रोफाइल देखकर निशाना बनाते हैं।
  • नकली वर्दी और आईडी: पुलिस या अधिकारी की वर्दी पहनकर डराते हैं।
  • एआई आवाज और वीडियो: वीडियो कॉल या रिकॉर्डिंग में वास्तविक दिखाकर डराते हैं।

वे खासतौर पर इन लोगों को निशाना बनाते हैं:

  • बुज़ुर्ग लोग
  • प्रोफेशनल्स और ऑफिस वाले
  • NRI या विदेश में रहने वाले
  • पहली बार डिजिटल पेमेंट या ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने वाले

क्यों लोग फंस जाते हैं: डर, घबराहट और तुरंत कार्रवाई की धारणा लोगों को पैसे भेजने पर मजबूर करती है।

डिजिटल अरेस्ट कॉल के बाद कोर्ट में केस कब करना चाहिए?

हर शक वाली कॉल पर कोर्ट जाना जरूरी नहीं होता। लेकिन अगर “डिजिटल अरेस्ट” वाले ठगों ने आपको सच में नुकसान पहुँचा दिया है, तो कानूनी कार्रवाई जरूरी हो जाती है।

आपको कोर्ट जाना चाहिए अगर:

  • आपसे पैसे ले लिए गए हों
  • आपका बैंक अकाउंट या वॉलेट फ्रीज़ कर दिया गया हो
  • आपकी ID, आधार या डाटा का गलत इस्तेमाल हुआ हो
  • ठग आपको बार-बार गिरफ्तारी, वीडियो या केस की धमकी दे रहे हों

ऐसी स्थिति में यह सिर्फ डराने की बात नहीं रहती, बल्कि यह कानूनी अपराध बन जाता है।

आप पुलिस और कोर्ट में धोखाधड़ी, धमकी, फर्जी अफसर बनना, पहचान की चोरी और साइबर फ्रॉड जैसे अपराधों की शिकायत कर सकते हैं। ये सभी अपराध सज़ा और जुर्माने वाले हैं।

इसे भी पढ़ें:  बिना घरवालों को बताए कोर्ट मैरिज कर ली है अब जान का खतरा है, क्या करें?

अगर पुलिस आपकी FIR दर्ज नहीं करती, तो आप भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत कोर्ट में जाकर मजिस्ट्रेट से कह सकते हैं कि वे पुलिस को केस दर्ज करने और जांच करने का आदेश दें। आप सीधे कोर्ट में निजी शिकायत भी दे सकते हैं।

अगर आपके खाते या पैसे पर रोक लगी है, तो आप कोर्ट से तुरंत राहत भी मांग सकते हैं ताकि आपका पैसा और बैंकिंग सेवाएँ वापस मिल सकें।

कोर्ट में केस करने से न केवल आपका पैसा और इज़्ज़त बचती है, बल्कि ऐसे ठगों को सज़ा भी मिलती है, जिससे दूसरे लोग शिकार होने से बचते हैं।

निष्कर्ष

“डिजिटल अरेस्ट” कोई कानून नहीं है, यह सिर्फ डर दिखाने का तरीका है। ठग डर पैदा करके लोगों से पैसे निकलवाते हैं, उनके पास कोई असली ताकत नहीं होती। जैसे ही आप समझ जाते हैं कि पुलिस ऑनलाइन गिरफ्तार नहीं कर सकती, उनकी चाल खत्म हो जाती है। कानून हमेशा खुले तौर पर चलता है, चोरी-छिपे वीडियो कॉल पर नहीं। कोर्ट सौदेबाज़ी नहीं करता और पुलिस आज़ादी बेचती नहीं है।

इस धोखे से बचने का सबसे बड़ा हथियार है – जानकारी और शांति। घबराएँ नहीं, कॉल काटें, शिकायत करें और खुद को सुरक्षित रखें। आवाज़ कितनी भी सख्त हो या वर्दी कितनी भी असली लगे, याद रखें – भारत में इंसाफ व्हाट्सएप पर नहीं होता।

किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।

FAQs

1. क्या पुलिस व्हाट्सएप या ज़ूम पर कॉल करके गिरफ्तारी की धमकी दे सकती है?

नहीं। भारत में पुलिस कभी भी व्हाट्सएप, ज़ूम या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या धमकी नहीं दे सकती। ऐसा कॉल आना साफ़ धोखा है।

2. अगर मुझे डिजिटल अरेस्ट का कॉल आए तो मुझे क्या सबूत संभाल कर रखने चाहिए?

कॉल रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट, फोन नंबर, पैसे मांगने वाले मैसेज, बैंक मैसेज, ईमेल और भेजे गए लिंक – सब कुछ संभाल कर रखें। यह शिकायत में काम आएगा।

3. ऐसे ठगों पर भारत में कौन-से कानून लगते हैं?

इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी, नकली पुलिस बनना, धमकी देना और IT एक्ट के तहत साइबर फ्रॉड का केस बनता है।

4. अगर मैंने डर में पैसे दे दिए हों तो क्या वापस मिल सकते हैं?

हाँ। अगर आप तुरंत साइबर क्राइम और बैंक को सूचना दें, तो ठग का खाता फ्रीज़ हो सकता है और कोर्ट के ज़रिए पैसा वापस मिल सकता है।

5. क्या सिर्फ डिजिटल अरेस्ट का कॉल आने से असली गिरफ्तारी हो सकती है?

नहीं। नकली कॉल का कोई कानूनी मतलब नहीं होता। असली गिरफ्तारी सिर्फ FIR, कोर्ट के आदेश या पुलिस की कानूनी कार्रवाई से ही होती है।

Social Media