वोटिंग केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक ऐसी ताकत है जिससे नागरिक अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और देश का भविष्य तय करते हैं। लेकिन यह अधिकार तभी इस्तेमाल किया जा सकता है, जब आपका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हो।
समय के साथ वोटर लिस्ट में कई तरह की गलतियाँ हो सकती हैं, जैसे किसी दिवंगत व्यक्ति का नाम अब भी मौजूद होना, योग्य व्यक्ति का नाम सूची में न होना, नाम या पते की गलत स्पेलिंग होना, या एक ही व्यक्ति का नाम दो बार दर्ज होना।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) का उद्देश्य इन सभी गलतियों को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से ठीक करना है, ताकि हर योग्य नागरिक बिना किसी परेशानी के अपने वोटिंग अधिकार का उपयोग कर सके।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) क्या है?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) वोटर लिस्ट की एक विस्तृत और घर-घर जाकर की जाने वाली जाँच प्रक्रिया है, जो किसी विशेष क्षेत्र में की जाती है। सामान्य अपडेट के मुकाबले इसमें गहराई से जाँच की जाती है और यह प्रक्रिया इस प्रकार होती है:
- वोटर्स का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाता है
- जहाँ ज़रूरत हो वहाँ नए वोटर्स की फ्रेश एंट्री की जाती है
- दिए गए दस्तावेज़ों की जाँच की जाती है
- वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना, हटाना या सुधार करना
इसे “इंटेंसिव” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पूरी तरह से फील्ड-आधारित और गहन प्रक्रिया होती है, न कि केवल कागज़ों पर की जाने वाली।
भारत में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कैसे शुरू हुआ? नए दिशा-निर्देशों के पीछे की कहानी
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कोई साधारण वोटर लिस्ट अपडेट प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की चुनाव प्रणाली में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य पुराने समय से चली आ रही गलतियों को ठीक करना और यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में केवल सही और योग्य वोटर्स के ही नाम हों।
बिहार से हुई SIR की शुरुआत (2025)
हाल ही में SIR की सबसे बड़ी पहल बिहार राज्य में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले देखने को मिली। चुनाव आयोग ने जून 2025 में बिहार की वोटर लिस्ट को साफ और सही बनाने के लिए यह विशेष अभियान शुरू किया। खास बात यह है कि बिहार में इससे पहले इस तरह की व्यापक जाँच साल 2003 के बाद नहीं हुई थी।
24 जून 2025 की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और रिप्रजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट, 1950 की धारा 21 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए SIR शुरू किया, जिसमें 1 जुलाई 2025 को योग्यता की तिथि (qualifying date) तय किया गया।
SIR को जरूरी क्यों माना गया?
चुनाव आयोग के अनुसार, कई ऐसे कारण सामने आए जिनकी वजह से वोटर लिस्ट में बड़े स्तर पर सुधार करना जरूरी हो गया:
- तेज़ी से हो रहे अर्बनाइजेशन के कारण लोग बार-बार अपना पता बदल रहे हैं।
- पुरानी वोटर लिस्ट में कई गलत और अधूरी एंट्री मौजूद हैं।
- वर्षों से माइग्रेशन, मृत्यु और डुप्लीकेट नाम जुड़ते चले गए हैं।
- बड़ी संख्या में युवा नागरिक अब वोटिंग के लिए योग्य हो गए हैं।
- पिछली बार इस तरह की व्यापक जाँच लगभग 20 साल पहले हुई थी, इसलिए वोटर लिस्ट काफी हद तक पुरानी हो चुकी थी।
SIR प्रक्रिया कौन करता है?
- बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर वोटिंगओं का भौतिक सत्यापन करते हैं और जरूरी फॉर्म व दस्तावेज़ एकत्र करते हैं।
- BLO द्वारा जुटाई गई जानकारी को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) जांचते और सत्यापित करते हैं।
- असिस्टेंट ERO, ERO की सहायता करते हैं और मामलों की प्राथमिक जांच करते हैं।
- ये सभी अधिकारी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करते हैं। इसका उद्देश्य वोटर लिस्ट को सही, अपडेट और भरोसेमंद बनाना होता है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के लिए नई गाइडलाइंस
- घर-घर जाकर वेरिफिकेशन बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) प्रत्येक घर पर जाकर वोटिंग की जानकारी को व्यक्तिगत रूप से जांचते हैं, ताकि कोई गलत या फर्जी एंट्री न रहे।
- दस्तावेज़ों के आधार पर जांच जरूरत पड़ने पर नागरिकों से पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज़ दिखाने को कहा जा सकता है, जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र या ड्राइविंग लाइसेंस, ताकि सही विवरण दर्ज किया जा सके।
- ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का सार्वजनिक प्रदर्शन तैयार की गई प्रारंभिक वोटर लिस्ट जनता के देखने के लिए प्रकाशित की जाती है, ताकि लोग अपनी एंट्री स्वयं जांच सकें।
- दावा और आपत्ति की अवधि इस दौरान नागरिक अपना नाम जोड़ने के लिए दावा कर सकते हैं या गलत एंट्री के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
- स्पेशल कैम्प्स पोलिंग स्टेशन या निर्धारित स्थानों पर कैंप लगाए जाते हैं, जहाँ नागरिकों को फॉर्म भरने और सुधार कराने में मदद दी जाती है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में आने वाली मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
- गरीब और कमजोर वर्ग के पास दस्तावेज़ों की कमी कई गरीब, प्रवासी, बेघर और आदिवासी लोगों के पास पूरे कागज़ नहीं होते। सख्त नियमों की वजह से उनका नाम वोटर लिस्ट से छूट सकता है।
- अवैध प्रवासियों के नाम जुड़ जाने का खतरा अगर सही तरीके से जांच न हो, तो गलत तरीके से कुछ लोगों के नाम वोटर लिस्ट में आ सकते हैं, जिससे सुरक्षा की चिंता बढ़ती है।
- सही वोटर्स के नाम गलती से हट जाना बड़ी संख्या में काम होने के कारण इंसानी या सिस्टम की गलतियों से असली वोटरों के नाम भी कट सकते हैं।
- डेटा और तकनीक से जुड़ी समस्याएँ पुराने रिकॉर्ड, गलत जानकारी और कमजोर तकनीकी व्यवस्था के कारण सही जांच करना मुश्किल हो जाता है।
- राजनीतिक दखल का खतरा कभी-कभी आरोप लगते हैं कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने में राजनीति की जाती है।
- लोगों को पूरी जानकारी न मिल पाना कई बार लोगों को SIR प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं मिलती, जिससे वे समय पर दावा या आपत्ति नहीं कर पाते।
- सुरक्षा और वोटिंग अधिकार में संतुलन फर्जी नाम रोकना जरूरी है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि किसी भी योग्य नागरिक का वोटिंग अधिकार न छीना जाए।
वोटर लिस्ट से नाम कट गया है तो क्या करें?
बहुत से नागरिकों को यह समस्या तब पता चलती है जब चुनाव नज़दीक होते हैं और वे अपना नाम वोटर लिस्ट में खोजते हैं, लेकिन नाम मौजूद नहीं मिलता। यह स्थिति परेशान करने वाली ज़रूर है, लेकिन कानून इसके लिए स्पष्ट समाधान देता है।
सबसे पहले क्या जाँच करें?
- क्या नाम किसी और विधानसभा क्षेत्र में शिफ्ट हो गया है?
- क्या हाल ही में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान नाम हटाया गया है?
- क्या BLO द्वारा कोई नोटिस दिया गया था?
- नेशनल वोटिंग सर्विस पोर्टल (NVSP) या राज्य चुनाव पोर्टल पर EPIC नंबर डालकर खोजें।
फॉर्म 6 के माध्यम से पुनः नाम जुड़वाना: यदि आपका नाम वोटर लिस्ट से कट गया है:
- तो आप Form-6 भरकर नया नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं
- आधार कार्ड, पता प्रमाण और पहचान पत्र संलग्न करें
- ऑनलाइन या BLO के माध्यम से आवेदन करें
- सत्यापन के बाद आपका नाम फिर से वोटिंग सूची में जोड़ा जा सकता है।
यदि बिना सूचना नाम हटाया गया हो: यदि आपका नाम बिना किसी नोटिस या सुनवाई के हटाया गया है, तो यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है।:
- ऐसे में आप ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर) को लिखित आपत्ति दें
- जिला निर्वाचन अधिकारी को शिकायत करें
- रसीद अवश्य लें
कानूनी उपाय: यदि प्रशासनिक स्तर पर समाधान न मिले तो:
- हाई कोर्ट में रिट पिटीशन दायर की जा सकती है
- यह दलील दी जा सकती है कि मतदान का अधिकार संवैधानिक महत्व रखता है
- कोर्ट संबंधित अधिकारी को नाम जोड़ने का निर्देश दे सकता है
समयसीमा क्यों महत्वपूर्ण है? चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले आवेदन करने पर राहत मिलने की संभावना अधिक रहती है। अंतिम तारीख के बाद आवेदन करने पर उसी चुनाव में वोट डालना मुश्किल हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
जब बिहार में SIR शुरू किया गया, तो इस पर सुप्रीम कोर्ट में कई पिटीशन दायर की गईं। कुछ संगठनों और लोगों ने कहा कि यह प्रक्रिया गलत तरीके से लागू की जा रही है और इससे कई योग्य वोटरों के नाम कट सकते हैं। यह भी तर्क दिया गया कि यह कानून और नियमों की सीमा से बाहर जा सकती है और वोटरों पर ज़्यादा बोझ डालती है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया को संविधान के अनुच्छेद 324 और रिप्रजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट, 1950 की धारा 21 के तहत SIR कराने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट हमेशा एक जैसी नहीं रह सकती, समय-समय पर उसे सही करना ज़रूरी है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया वोटर-फ्रेंडली होनी चाहिए। लोगों को पहचान के लिए ज्यादा तरह के दस्तावेज़ देने की अनुमति मिले और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सार्वजनिक की जाए। अगर किसी का नाम हटाया जाए, तो उसका कारण भी साफ बताया जाए, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष रहे।
इसका इंडियन डेमोक्रेसी के लिए क्या मतलब है?
SIR का मकसद वोटर लिस्ट को साफ और सही बनाना है, ताकि केवल योग्य वोटर ही उसमें रहें और गलतियाँ दूर हों। बिहार में किया गया SIR आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
इससे यह भी साफ होता है कि चुनाव आयोग जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठा सकता है, लेकिन साथ ही अदालतें यह सुनिश्चित करती हैं कि किसी भी नागरिक के वोटिंग अधिकार के साथ अन्याय न हो।
निष्कर्ष
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन सिर्फ सरकार की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि हर नागरिक के लिए अपने लोकतांत्रिक अधिकार को सुरक्षित करने का मौका है। सही वोटर लिस्ट का मतलब है कि चुनाव के दिन आपकी आवाज़ सुनी जाएगी। जब आप अपना नाम और विवरण जांचते हैं और अधिकारियों का सहयोग करते हैं, तो आप सीधे तौर पर लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।
आज कुछ मिनट निकालकर अपनी वोटर जानकारी जांच लेना, कल आपका नाम वोटर लिस्ट में रहेगा या नहीं – इसका फर्क तय कर सकता है। आपका वोट बहुत कीमती है, और इसकी शुरुआत आपके नाम से होती है जो वोटर लिस्ट में होना चाहिए।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
1. क्या वोटिंग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की स्थिति ऑनलाइन देख सकता है?
हाँ। वोटिंग चुनाव आयोग की आधिकारिक वोटर सर्विस वेबसाइट पर जाकर अपनी आवेदन स्थिति, वेरिफिकेशन स्टेटस और ड्राफ्ट या फाइनल वोटर लिस्ट में नाम की जानकारी देख सकता है।
2. अगर कोई व्यक्ति स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की अंतिम तारीख चूक जाए तो क्या होगा?
अगर समय सीमा छूट जाए तो वोटिंग का अधिकार हमेशा के लिए खत्म नहीं होता। व्यक्ति बाद में क्लेम फॉर्म भर सकता है, लेकिन जब तक नाम दोबारा वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ता, तब तक वोटिंग नहीं कर पाएगा।
3. क्या पहली बार वोटर बनने वाले लोग भी SIR में शामिल होते हैं?
हाँ। जो युवा हाल ही में 18 वर्ष के हुए हैं, वे जरूरी पहचान और पते के दस्तावेज देकर नया वोटर बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
4. क्या कोई वोटिंग किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर आपत्ति कर सकता है?
हाँ। अगर किसी का नाम गलत या धोखाधड़ी से वोटर लिस्ट में दिख रहा है, तो कोई भी नागरिक आपत्ति दर्ज कर सकता है। इसके बाद चुनाव अधिकारी जांच करेंगे।
5. क्या स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन हर राज्य में होता है?
नहीं। यह प्रक्रिया तभी होती है जब चुनाव आयोग इसे जरूरी समझता है। यह हर साल होने वाली सामान्य रिवीजन की तरह नियमित प्रक्रिया नहीं है।



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