पासपोर्ट केवल यात्रा करने का दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि यह आपकी आज़ादी का प्रतीक है, विदेश जाकर काम करने, पढ़ाई करने, इलाज कराने या अपने रिश्तेदारों से मिलने की आज़ादी। जब अचानक कोर्ट आपके पासपोर्ट को जब्त करने का आदेश दे देती है, तो व्यक्ति मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और भविष्य की अनिश्चितता का सामना करता है।
लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि पासपोर्ट जब्त होना यह नहीं दर्शाता कि आपकी विदेश जाने की आज़ादी हमेशा के लिए खत्म हो गई है। अदालत ऐसा कदम आमतौर पर इसलिए उठाती है ताकि आपकी मौजूदगी केस की सुनवाई के दौरान बनी रहे, न कि आपको पहले से सज़ा देने के लिए।
सही कानूनी प्रक्रिया अपनाकर बहुत से लोग अपना पासपोर्ट वापस पा लेते हैं या विदेश यात्रा की अनुमति हासिल कर लेते हैं।
पासपोर्ट जब्त होने का मतलब क्या है?
जब किसी का पासपोर्ट जब्त (सीज़) किया जाता है, तो इसका मतलब होता है कि पुलिस या अदालत पासपोर्ट को अपने पास रख लेती है।
जब पासपोर्ट इम्पाउंड किया जाता है, तो पासपोर्ट अथॉरिटी कानूनी अधिकार के तहत उसे अपने पास रोक लेती है।
दोनों ही स्थितियों में व्यक्ति तब तक अपने पासपोर्ट का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जब तक अदालत या संबंधित अथॉरिटी से अनुमति न मिल जाए।
अदालत आमतौर पर पासपोर्ट जब्त करने का आदेश तब देती है, जब उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि व्यक्ति केस के दौरान उपलब्ध रहे और देश छोड़कर न भाग जाए।
पासपोर्ट जब्त होने के क्या कारण हो सकते है?
पासपोर्ट एक्ट, 1967 के तहत सरकार को अधिकार है कि वह पासपोर्ट जारी करने, निलंबित करने या रिवोक करने का आदेश दे। पासपोर्ट जब्त होने के कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हो सकते हैं:
- आपके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित होना
- आपके विरुद्ध नॉन-बेलेबल वारंट जारी होना
- बेल की शर्त के रूप में पासपोर्ट जमा करने का आदेश
- आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी या फ्रॉड से जुड़ा मामला
- अदालत को यह आशंका होना कि व्यक्ति विदेश भाग सकता है
- पहले दिए गए कोर्ट के आदेशों का पालन न करना
इन सभी मामलों में अदालत का मुख्य उद्देश्य सज़ा देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि व्यक्ति हर सुनवाई में अदालत के सामने उपस्थित रहे।
क्या हर मामले में पासपोर्ट जब्त होता है?
नहीं, हर मामले में पासपोर्ट अपने आप जब्त नहीं किया जाता। अदालत हर केस की परिस्थितियों को देखकर फैसला करती है। छोटे या मामूली अपराधों में आमतौर पर पासपोर्ट जब्त करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह कदम ज़्यादातर गंभीर मामलों में या तब उठाया जाता है, जब अदालत को यह डर हो कि व्यक्ति विदेश भाग सकता है।
कोर्ट द्वारा पासपोर्ट जब्ती और पासपोर्ट अथॉरिटी द्वारा इम्पाउंडिंग में अंतर
| आधार | कोर्ट द्वारा पासपोर्ट जब्ती | पासपोर्ट अथॉरिटी द्वारा इम्पाउंडिंग |
| आदेश कौन देता है | अदालत आदेश देकर पासपोर्ट जब्त कराती है | पासपोर्ट ऑफिस कानूनी अधिकार से इम्पाउंड करता है |
| कारण | किसी चल रहे केस या जांच से जुड़ा होता है | पासपोर्ट कानून के तहत बताए गए आधारों पर होता है |
| उद्देश्य | व्यक्ति की कोर्ट में मौजूदगी सुनिश्चित करना | पासपोर्ट के दुरुपयोग या कानूनी उल्लंघन को रोकना |
| चुनौती कहाँ | उसी अदालत में आवेदन देकर चुनौती दी जाती है | पहले पासपोर्ट अथॉरिटी के सामने, फिर कोर्ट में |
यह समझना बहुत जरूरी है कि आपका पासपोर्ट किसने और किस कारण से रोका है, क्योंकि उसी के आधार पर सही कानूनी कदम उठाया जाता है।
पासपोर्ट जब्त होने -पर तुरंत क्या करें?
पता करें आपका पासपोर्ट किसके पास है: सबसे पहले यह साफ करना जरूरी है कि आपका पासपोर्ट इस समय कहाँ है:
- क्या वह कोर्ट के रिकॉर्ड में जमा है
- क्या पुलिस के पास रखा गया है
- या पासपोर्ट अथॉरिटी ने उसे इम्पाउंड किया है
- आपका वकील केस की फाइल देखकर यह आसानी से जांच कर सकता है।
यह समझें कि पासपोर्ट क्यों रोका गया: इसके बाद अपने केस से जुड़े दस्तावेज़ ध्यान से देखें:
- बेल ऑर्डर (जमानत आदेश)
- कोर्ट के निर्देश
- FIR या चार्जशीट
इनसे यह पता चलेगा कि पासपोर्ट किस वजह से जब्त या रोका गया है, और इसी आधार पर आगे की सही कानूनी कार्रवाई तय की जाती है।
कोर्ट से पासपोर्ट रिलीज कराने के लिए आवेदन कैसे करें?
अगर आपका पासपोर्ट कोर्ट में जमा है, तो आप उसी कोर्ट में एक सरल सा आवेदन देकर पासपोर्ट वापस (रिलीज) करने की प्रार्थना कर सकते हैं। यह आवेदन आमतौर पर आपके वकील के माध्यम से दाखिल किया जाता है।
आवेदन में क्या-क्या लिखना चाहिए
- आपके केस का पूरा विवरण
- पासपोर्ट किस कारण से जब्त किया गया था
- यह भरोसा कि आप जांच और सुनवाई में पूरा सहयोग करेंगे
- यह स्पष्ट करना कि आपका देश छोड़कर भागने का कोई इरादा नहीं है
- यदि विदेश यात्रा करनी है, तो उसका सही उद्देश्य (जैसे नौकरी, पढ़ाई, इलाज आदि)
साथ में लगाए जाने वाले जरूरी दस्तावेज़
- पासपोर्ट की कॉपी
- बेल ऑर्डर (जमानत आदेश) की कॉपी
- मेडिकल सर्टिफिकेट / नौकरी का पत्र / एडमिशन लेटर (यदि लागू हो)
- पता प्रमाण (Address Proof)
- एफिडेविट (शपथपत्र)
कोर्ट क्या आदेश दे सकती है?
कोर्ट आपके आवेदन पर विचार करने के बाद अलग-अलग तरह का आदेश दे सकती है, जैसे पासपोर्ट को स्थायी रूप से वापस करने का आदेश देना, केवल कुछ समय के लिए पासपोर्ट लौटाना, सीमित अवधि के लिए विदेश जाने की अनुमति देना, या फिर आवेदन को फिलहाल खारिज करते हुए भविष्य में दोबारा आवेदन करने की छूट देना।
क्या कोर्ट अस्थायी रूप से विदेश जाने की अनुमति दे सकती है?
हाँ। भले ही आपका पासपोर्ट स्थायी रूप से वापस न किया गया हो, फिर भी कोर्ट कई मामलों में कुछ समय के लिए विदेश जाने की अनुमति दे देती है। इसके लिए कोर्ट कुछ शर्तें लगा सकती है, जैसे एक तय राशि की सुरक्षा जमा करना, यह लिखित वादा करना कि आप समय पर भारत वापस आएँगे, अपनी यात्रा का पूरा विवरण देना और विदेश में रहने का पता कोर्ट को बताना।
क्या होगा अगर कोर्ट पासपोर्ट रिलीज़ करने से मना कर दे?
- अगर निचली अदालत आपका आवेदन खारिज कर देती है, तो आप हायर कोर्ट में जाकर उस आदेश को चुनौती दे सकते हैं।
- आप अपनी बेल (जमानत) की शर्तों में संशोधन (मॉडिफिकेशन) के लिए भी आवेदन कर सकते हैं, ताकि पासपोर्ट से जुड़ी शर्त हटाई या हल्की की जा सके।
- यदि आपकी परिस्थितियों में बदलाव आया है, जैसे नौकरी लगना, पढ़ाई का मौका मिलना या पारिवारिक कारण, तो इन्हें दिखाकर दोबारा आवेदन किया जा सकता है।
- आमतौर पर उच्च अदालतें तब हस्तक्षेप करती हैं, जब उन्हें लगता है कि पासपोर्ट रोकने की शर्त जरूरत से ज्यादा कठोर या अनुचित है।
पासपोर्ट एक्ट के तहत आपके अधिकार
कानून और अदालतों द्वारा मान्यता प्राप्त अधिकारों के अनुसार, अगर आपका पासपोर्ट ज़ब्त या जमा किया गया है, तो आपके पास कुछ महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं, जिन्हें जानना आपके लिए बहुत जरूरी है:
- बिना कानूनी आधार के पासपोर्ट नहीं लिया जा सकता: सरकार या कोई भी अथॉरिटी आपका पासपोर्ट मनमाने तरीके से नहीं ले सकती। पासपोर्ट तभी लिया जा सकता है जब कोर्ट का आदेश हो या पासपोर्ट एक्ट में दी गई किसी कानूनी शक्ति के तहत कार्रवाई की गई हो। अगर बिना अधिकार के पासपोर्ट लिया गया है, तो आप उसे कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
- पासपोर्ट क्यों लिया गया, यह जानने का अधिकार: आपको यह जानने का पूरा हक है कि आपका पासपोर्ट किस कारण से लिया गया है, किस कानून के तहत लिया गया है और किस आदेश या अथॉरिटी के आधार पर यह किया गया है। अगर आपको यह जानकारी नहीं दी जाती, तो आप इस कार्रवाई को चुनौती दे सकते हैं।
- पासपोर्ट वापस पाने के लिए आवेदन करने का अधिकार: जब पासपोर्ट लेने का कारण खत्म हो जाए, जैसे जांच पूरी हो जाए, कोर्ट को आपकी उपस्थिति की जरूरत न रहे, आपको बरी कर दिया जाए या बिना किसी शर्त के बेल मिल जाए, तो आप पासपोर्ट वापस पाने के लिए कोर्ट में आवेदन कर सकते हैं।
- अस्थायी रूप से विदेश यात्रा की अनुमति मांगने का अधिकार: अगर किसी जरूरी कारण से, जैसे इलाज, पारिवारिक आपात स्थिति, पढ़ाई या नौकरी के लिए विदेश जाना हो, तो आप कोर्ट से अस्थायी यात्रा की अनुमति मांग सकते हैं, भले ही पासपोर्ट कोर्ट के पास जमा हो।
- कारण सहित आदेश पाने का अधिकार: कोर्ट या अथॉरिटी को यह साफ-साफ बताना होता है कि पासपोर्ट रोकना क्यों जरूरी है। बिना वजह या बिना कारण बताया गया आदेश कानूनन गलत माना जा सकता है।
- रेस्ट्रनिंग आर्डर के खिलाफ अपील करने का अधिकार: अगर कोर्ट आपका पासपोर्ट छोड़ने से मना कर दे, तो आप ऊपरी अदालत में अपील कर सकते हैं, संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में पिटीशन या अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दाखिल कर सकते हैं।
- वकील की सहायता लेने का अधिकार: आपको यह पूरा हक है कि आप वकील की मदद लें और अपनी बात कानूनी तरीके से रखें। बिना आपको सुने और मौका दिए किसी का पासपोर्ट नहीं लिया जा सकता।
हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय
सुरेश नंदा बनाम CBI, 2011
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट को केवल “सेफ कस्टडी” के नाम पर लंबे समय तक रोके रखना गलत है।
- पासपोर्ट रखना और विदेश यात्रा करना व्यक्ति का मौलिक अधिकार माना गया है।
- यदि पासपोर्ट जब्त रखने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है, तो उसे वापस किया जाना चाहिए।
- अदालतें ट्रायल खत्म होने तक पासपोर्ट अपने पास रखने का सामान्य आदेश नहीं दे सकतीं।
हार्दिक शाह बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया, 2021
- बिना उचित और ठोस कारण पासपोर्ट रोकना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
- केवल IPC धारा 498-A/ BNS धारा 85 का केस चलना पासपोर्ट जब्त करने का आधार नहीं बनता।
- रेड कॉर्नर नोटिस जारी होना भी अपने आप में पासपोर्ट जब्त करने का कारण नहीं है।
- व्यक्ति की आजीविका, सम्मान और यात्रा की स्वतंत्रता की रक्षा करना जरूरी है।
प्रवीण सुरेंदीरण बनाम कर्नाटक राज्य, 2019
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जब्त करने का अधिकार केवल पासपोर्ट एक्ट के तहत अधिकृत अधिकारी को है।
- CrPC धारा 104/ BNSS धारा 106 के तहत सामान्य दस्तावेज़ जब्त हो सकते हैं, लेकिन पासपोर्ट नहीं।
- ट्रायल कोर्ट अपने स्तर पर पासपोर्ट इम्पाउंड नहीं कर सकती।
- यदि कोर्ट द्वारा गलत तरीके से पासपोर्ट रोका गया है, तो उसे लौटाया जाना चाहिए।
इन तीनों फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि पासपोर्ट व्यक्ति का महत्वपूर्ण अधिकार है और उसे केवल वैध कानूनी प्रक्रिया और उचित कारणों के आधार पर ही रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
कोर्ट केस के कारण पासपोर्ट का जब्त होना कोई सज़ा नहीं, बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना होता है कि व्यक्ति कोर्ट के सामने उपस्थित रहे। कानून यह भी मानता है कि किसी व्यक्ति की आज़ादी और रोज़गार को बिना वजह रोका नहीं जा सकता।
यदि समय पर सही कानूनी कदम उठाए जाएँ, पूरे दस्तावेज़ लगाए जाएँ और सच-सच जानकारी दी जाए, तो बहुत से लोग अपना पासपोर्ट वापस पा लेते हैं या विदेश जाने की अनुमति प्राप्त कर लेते हैं। अगर आपका पासपोर्ट जब्त हो गया है, तो निराश न हों—कानून आपके अधिकारों की रक्षा करता है और आपको फिर से स्वतंत्र रूप से यात्रा करने का रास्ता देता है।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
1. क्या केवल FIR दर्ज होने से पासपोर्ट जब्त हो सकता है?
नहीं। सिर्फ FIR दर्ज होने से पासपोर्ट अपने-आप जब्त नहीं होता। इसके लिए कोर्ट का स्पष्ट आदेश या पासपोर्ट कानून के तहत वैध कार्रवाई आवश्यक होती है।
2. क्या बेल मिलने के बाद पासपोर्ट अपने-आप मिल जाता है?
हमेशा नहीं। पहले अपनी बेल की शर्तें देखें। यदि उसमें पासपोर्ट जमा करने की शर्त है, तो पासपोर्ट वापस पाने के लिए अलग से आवेदन देना पड़ता है।
3. क्या जब्त पासपोर्ट की स्थिति में पासपोर्ट रिन्यू हो सकता है?
आमतौर पर नहीं। जब तक कोर्ट या पासपोर्ट अधिकारी जब्ती का आदेश हटाते नहीं, तब तक रिन्यू संभव नहीं होता।
4. क्या पासपोर्ट जब्त होने से वीज़ा पर असर पड़ता है?
हाँ। क्योंकि वीज़ा के लिए वैध पासपोर्ट जरूरी होता है, इसलिए पासपोर्ट जब्त होने से वीज़ा प्रभावित हो सकता है।
5. क्या पासपोर्ट न जब्त होने पर भी एयरपोर्ट पर रोका जा सकता है?
हाँ। कोर्ट अलग से यात्रा पर रोक या लुक आउट सर्कुलर जारी कर सकती है। यात्रा से पहले कानूनी सलाह लेना सुरक्षित रहता है।



एडवोकेट से पूछे सवाल