कोर्ट मैरिज में डॉक्यूमेंट रिजेक्ट हो गए – अब क्या करें?

Documents rejected in court marriage – what to do now

बहुत से जोड़ों को लगता है कि जैसे ही वे कोर्ट मैरिज करने का फैसला कर लेते हैं, वैसे ही पूरी प्रक्रिया जल्दी और आसानी से पूरी हो जाएगी। लेकिन सच यह है कि अक्सर सबसे बड़ी परेशानी तब आती है, जब मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑफिस में उनके डॉक्यूमेंट रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। यह दिक्कत कभी डॉक्यूमेंट जमा करते समय, कभी सूचना की जांच के दौरान, और कभी मैरिज रजिस्ट्रेशन से ठीक पहले सामने आ जाती है। ऐसी स्थिति में घबराहट, तनाव और यह डर होना स्वाभाविक है कि कहीं शादी रुक न जाए।

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में डॉक्यूमेंट रिजेक्ट होने का मतलब यह नहीं होता कि कोर्ट मैरिज हमेशा के लिए रुक गई। इसका मतलब आमतौर पर सिर्फ इतना होता है कि किसी डॉक्यूमेंट में कमी, गलती, नाम या जानकारी में अंतर, जरूरी प्रमाण की कमी, या कोई प्रक्रिया से जुड़ी समस्या है, जिसे ठीक करना जरूरी है। इस ब्लॉग में आप समझेंगे कि कोर्ट मैरिज में डॉक्यूमेंट क्यों रिजेक्ट होते हैं और ऐसी स्थिति में आपको कौन-कौन से कानूनी और व्यवहारिक कदम तुरंत उठाने चाहिए।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

कोर्ट मैरिज के डाक्यूमेंट्स रिजेक्ट आम कारण क्या हैं?

कोर्ट मैरिज में डॉक्यूमेंट अक्सर छोटी गलतियों, जानकारी में अंतर, अधूरे रिकॉर्ड, या कानूनी शर्तें पूरी न होने की वजह से रिजेक्ट हो जाते हैं। कई बार कपल्स को लगता है कि उन्होंने सब कुछ सही दिया है, लेकिन मैरिज ऑफिसर डॉक्यूमेंट की बारीकी से जांच करता है। नीचे ऐसे सबसे आम कारण दिए गए हैं, जिनकी वजह से कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया रुक सकती है।

1. डॉक्यूमेंट में नाम अलग-अलग होना

अगर आपके आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, मार्कशीट, जन्म प्रमाण पत्र, या एफिडेविट में नाम अलग-अलग लिखा है, तो मैरिज ऑफिसर आपत्ति लगा सकता है। कई बार छोटी स्पेलिंग की गलती भी बड़ी परेशानी खड़ी कर देती है। इसलिए नाम हर डॉक्यूमेंट में एक जैसा होना बहुत जरूरी है।

2. उम्र का प्रमाण सही न होना या स्वीकार न होना

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 की धारा 4 और हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 5 के अनुसार, शादी के समय लड़के की उम्र कम से कम 21 साल और लड़की की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। अगर उम्र साबित करने वाला डॉक्यूमेंट साफ नहीं है, अधूरा है, या ऑफिस उसे स्वीकार नहीं करता, तो डॉक्यूमेंट रिजेक्ट हो सकते हैं।

3. पता प्रमाण या 30 दिन निवास की समस्या

नोटिस उसी जिले के मैरिज ऑफिसर को दिया जाता है जहाँ दोनों में से कम से कम एक व्यक्ति नोटिस देने से ठीक पहले लगातार 30 दिन तक रहा हो। अगर आप यह 30 दिन का निवास साबित नहीं कर पाते, तो ऑफिस नोटिस लेने या आगे बढ़ाने से मना कर सकता है।

4. एफिडेविट अधूरा या गलत होना

कोर्ट मैरिज में कई बार एफिडेविट देना जरूरी होता है, जिसमें जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, नागरिकता, मानसिक स्थिति, निषिद्ध संबंध न होना, और अपनी मर्जी से शादी करना जैसी बातें लिखी जाती हैं। अगर एफिडेविट अधूरा हो, गलत तरीके से बना हो, हस्ताक्षर न हो, सही तरीके से सत्यापित न हो, या उसमें लिखी जानकारी डॉक्यूमेंट से मेल न खाती हो, तो मैरिज ऑफिसर फाइल रोक सकता है। इसलिए एफिडेविट हमेशा सही कानूनी प्रारूप में बनवाना चाहिए।

5. गवाहों के डॉक्यूमेंट में कमी

कोर्ट मैरिज के अंतिम चरण में गवाह बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। आमतौर पर गवाहों के पहचान प्रमाण, पता प्रमाण, फोटो और तय तारीख पर उपस्थित होना जरूरी होता है। अगर गवाह का पहचान पत्र एक्सपायर हो, नाम अलग हो, गवाह तय तारीख पर न आए, गवाह की उम्र कम हो, या गवाहों की संख्या सही न हो, तो शादी की प्रक्रिया रुक सकती है। कई बार कपल्स अपने डॉक्यूमेंट सही रखते हैं, लेकिन गवाहों की वजह से फाइल अटक जाती है।

6. तलाक या पिछली शादी से जुड़े डॉक्यूमेंट में समस्या

अगर लड़का या लड़की में से कोई पहले शादीशुदा रहा है, तो मैरिज ऑफिसर आमतौर पर तलाक का प्रमाण या पहले जीवनसाथी का मृत्यु प्रमाण पत्र मांग सकता है। ऐसे मामलों में सही और अंतिम कानूनी डॉक्यूमेंट बहुत जरूरी होते हैं।

7. पासपोर्ट, NRI या विदेशी नागरिक से जुड़ी समस्या

अगर शादी करने वालों में से कोई विदेशी नागरिक है या NRI है, तो डॉक्यूमेंट की जांच और भी सख्त हो जाती है। ऐसे मामलों में आमतौर पर वैध पासपोर्ट, वीजा की स्थिति, कुछ मामलों में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC), अविवाहित होने का प्रमाण, एम्बेसी से जुड़े डॉक्यूमेंट, और कुछ मामलों में एपोस्टिल या लीगल वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है। इनमें कोई भी कमी होने पर फाइल में देरी, आपत्ति, या सीधा रिजेक्शन हो सकता है। इस तरह के मामलों में पहले से कानूनी सलाह लेना बहुत जरूरी है।

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8. ऑफिस की तकनीकी या मनमानी आपत्तियाँ

कई बार डॉक्यूमेंट में कोई बड़ी कानूनी कमी नहीं होती, फिर भी ऑफिस प्रक्रिया या अपने स्थानीय तरीके के आधार पर आपत्ति लगा देता है।

डॉक्यूमेंट रिजेक्ट होने के बाद सबसे पहला कदम क्या होना चाहिए?

अगर आपके कोर्ट मैरिज के डॉक्यूमेंट रिजेक्ट हो गए हैं, तो सबसे पहले घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बहुत से कपल्स को ऐसा लगता है कि अब शादी नहीं हो पाएगी, लेकिन सच यह है कि ज्यादातर मामलों में यह समस्या ठीक की जा सकती है। अक्सर डॉक्यूमेंट रिजेक्ट होने का मतलब सिर्फ इतना होता है कि किसी कागज़ में कमी, गलती, जानकारी का अंतर, या कानूनी रूप से कोई छोटी समस्या है, जिसे सही करके प्रक्रिया फिर से आगे बढ़ाई जा सकती है।

डॉक्यूमेंट रिजेक्ट होने के तुरंत बाद आपको क्या करना चाहिए?

  • सबसे पहले रिजेक्शन का सही कारण पूछें
  • कोशिश करें कि कारण लिखित रूप में मिल जाए
  • यह समझें कि कमी ठीक की जा सकती है या नहीं
  • केवल क्लर्क, दलाल, या किसी एजेंट की बात पर भरोसा न करें
  • अपने डॉक्यूमेंट को कानूनी जरूरतों से मिलाकर देखें
  • अगर आपत्ति गलत, अस्पष्ट, या अनुचित लगे, तो तुरंत वकील से सलाह लें

कपल्स की सबसे बड़ी गलती क्या होती है?

बहुत से कपल्स इस समय घबरा जाते हैं या भावनात्मक हो जाते हैं, जबकि उन्हें शांत रहकर सबसे पहले यह पूछना चाहिए: आखिर कौन-सा डॉक्यूमेंट कम है, किसमें गलती है, या कानून के हिसाब से क्या चीज़ पूरी नहीं है?”

रिजेक्ट हुए कोर्ट मैरिज डॉक्यूमेंट कैसे ठीक करें?

जब आपको यह साफ पता चल जाए कि डॉक्यूमेंट किस वजह से रिजेक्ट हुए हैं, तो अगला कदम होता है उन्हें सही करना। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में डॉक्यूमेंट की कमी या गलती ठीक की जा सकती है। नीचे आसान भाषा में समझिए कि अलग-अलग समस्या का समाधान कैसे किया जाता है।

नाम अलग-अलग होने पर क्या करें

  • अगर अलग-अलग डॉक्यूमेंट में आपका नाम अलग लिखा है, तो सबसे पहले एफिडेविट बनवाया जा सकता है।
  • साथ ही, ऐसे डॉक्यूमेंट साथ रखें जिनमें नाम एक जैसा या मिलते-जुलते तरीके से हो।
  • जरूरत पड़े तो आधार, पैन या पासपोर्ट में नाम अपडेट करवाएँ।
  • स्कूल सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र भी बहुत काम आ सकता है।
  • अगर नाम में बड़ा अंतर है, तो समय होने पर गजट पब्लिकेशन करवाने पर भी विचार किया जा सकता है।

उम्र के प्रमाण में समस्या हो तो क्या करें

  • उम्र साबित करने के लिए हमेशा सबसे मजबूत डॉक्यूमेंट पहले रखें, जैसे जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट।
  • अगर पासपोर्ट है, तो उसे भी साथ रखें।
  • सिर्फ एक डॉक्यूमेंट पर निर्भर रहने की बजाय उम्र के कई प्रमाण साथ रखना बेहतर होता है।
  • कमजोर, अस्पष्ट या सिर्फ अनुमान वाले डॉक्यूमेंट पर भरोसा न करें।
  • अगर अलग-अलग डॉक्यूमेंट में जन्मतिथि अलग है, तो एफिडेविट और मजबूत रिकॉर्ड के जरिए उसे समझाना पड़ सकता है।

पता प्रमाण या 30 दिन निवास की समस्या हो तो क्या करें

  • अगर 30 दिन के निवास का प्रमाण देने में दिक्कत है, तो रेंट एग्रीमेंट, मकान मालिक का एफिडेविट, और बिजली-पानी का बिल (अगर उपलब्ध हो) साथ रखें।
  • बैंक स्टेटमेंट जिसमें पता लिखा हो, वह भी उपयोगी हो सकता है।
  • कुछ जगहों पर एम्प्लॉयर्स लेटर या हॉस्टल सर्टिफिकेट भी मान लिया जाता है।
  • ध्यान रखें कि कम से कम एक व्यक्ति का उस जिले में लगातार 30 दिन रहना साबित होना चाहिए।
  • अगर 30 दिन पूरे नहीं हुए हैं, तो नोटिस दाखिल करने की तारीख सही तरीके से दोबारा तय करनी पड़ सकती है।

एफिडेविट में गलती हो तो क्या करें

  • अगर एफिडेविट गलत, अधूरा या मेल न खाने वाला है, तो उसे किसी कानूनी जानकार या वकील से दोबारा सही तरीके से बनवाएँ।
  • उसमें सभी जरूरी बातें शामिल होनी चाहिए, जैसे नाम, उम्र, पता, वैवाहिक स्थिति, और जरूरत हो तो धर्म से जुड़ी जानकारी।
  • यह भी जरूरी है कि एफिडेविट में लिखी हर बात आपके बाकी डॉक्यूमेंट से पूरी तरह मेल खाए।
  • अंत में, एफिडेविट को सही तरीके से नोटरी भी करवाना चाहिए।
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तलाक या विधवा / विधुर होने के डॉक्यूमेंट में समस्या हो तो क्या करें

  • अगर पहले शादी हो चुकी थी, तो तलाक के अंतिम आदेश की सर्टिफाइड कॉपी लेना बहुत जरूरी है।
  • सिर्फ तलाक की अर्जी या केस के कागज़ काफी नहीं होते, बल्कि अंतिम आदेश चाहिए होता है।
  • अगर अपील की स्थिति या समय-सीमा का सवाल है, तो पहले वकील से कानूनी सलाह जरूर लें
  • अगर पहले जीवनसाथी की मृत्यु हो चुकी है, तो मृत्यु प्रमाण पत्र साथ रखें।
  • साथ ही, पहले विवाह के रिकॉर्ड को आपके साथ जोड़ने वाले अतिरिक्त पहचान डॉक्यूमेंट भी साथ रखना फायदेमंद होता है।

क्या मैरिज ऑफिसर आपका कोर्ट मैरिज आवेदन कानूनी रूप से रिजेक्ट कर सकता है?

मैरिज ऑफिसर आपका आवेदन रिजेक्ट कर सकता है, लेकिन सिर्फ कानूनी कारणों पर। वह अपनी व्यक्तिगत सोच, पसंद-नापसंद, या ऑफिस की मनमानी प्रक्रिया के आधार पर आवेदन रिजेक्ट नहीं कर सकता।

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के अनुसार, मैरिज ऑफिसर यह देख सकता है कि:

  • दोनों की कानूनी उम्र पूरी है या नहीं
  • दोनों अपनी मर्जी से सही सहमति दे रहे हैं या नहीं
  • किसी भी पक्ष का पहले से पति या पत्नी जीवित तो नहीं है
  • दोनों निषिद्ध रिश्ते में तो नहीं आते (जब तक कोई मान्य प्रथा अनुमति न देती हो)
  • नोटिस और 30 दिन निवास की शर्त पूरी हुई है या नहीं
  • अगर कोई आपत्ति आई है, तो उसका निपटारा कानून के अनुसार हुआ है या नहीं

किन कारणों से मैरिज ऑफिसर आवेदन रिजेक्ट नहीं कर सकता? 

  • मैरिज ऑफिसर आपका आवेदन सिर्फ इसलिए रिजेक्ट नहीं कर सकता क्योंकि:
  • माता-पिता मौजूद नहीं हैं (अगर दोनों बालिग हैं)
  • यह इंटर-कास्ट मैरिज है
  • यह इंटर-फेथ मैरिज है (स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत)
  • कपल ने अपनी पसंद से शादी करने का फैसला लिया है
  • परिवार इस रिश्ते के खिलाफ है
  • ऑफिसर को यह रिश्ता व्यक्तिगत रूप से पसंद नहीं है
  • कानून में आधार न होने पर अतिरिक्त डॉक्यूमेंट मांगे जा रहे हैं

अगर मैरिज ऑफिसर बिना सही कानूनी कारण के आवेदन रोकता या रिजेक्ट करता है, तो ऐसी स्थिति में कानूनी उपाय उपलब्ध होते हैं।

अगर ऑफिस बिना लिखित रिजेक्शन के सिर्फ देरी कर रहा हो, तो क्या करें?

कई बार ऐसा होता है कि ऑफिस सीधे लिखित रूप में रिजेक्ट नहीं करता, लेकिन फाइल को बार-बार टालता रहता है। जैसे: अगले हफ्ते आइए, सिस्टम की समस्या है, ऑफिसर उपलब्ध नहीं हैं या फाइल प्रोसेस में है, यह स्थिति बहुत आम है, और कई कपल्स इसी वजह से परेशान हो जाते हैं।

ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए?

  • जहाँ संभव हो, लिखित रूप में या ईमेल से फॉलो-अप करना चाहिए
  • अगर कोई डॉक्यूमेंट मांगा गया है, तो उसे जमा करके रिसीविंग / प्राप्ति प्रमाण जरूर लें
  • जो भी डॉक्यूमेंट जमा करें, उसकी कॉपी अपने पास रखें
  • साफ पूछें कि फाइल सिर्फ जांच में लंबित है या उसे कमी वाली / दोषपूर्ण माना गया है
  • अगर देरी बहुत ज्यादा और बिना कारण हो रही है, तो वकील के माध्यम से कानूनी प्रार्थना पत्र भेजा जा सकता है

क्या डॉक्यूमेंट रिजेक्ट होने के बाद आप कोर्ट मैरिज के लिए दोबारा आवेदन कर सकते हैं?

कई मामलों में आप कोर्ट मैरिज के लिए दोबारा नया आवेदन कर सकते हैं। अगर पहले आवेदन में कोई कमी, गलती, या तकनीकी समस्या थी, तो उसे सही करके फ्रेश आवेदन देना अक्सर एक अच्छा और तेज विकल्प होता है।

किन स्थितियों में नया आवेदन देना सही रहता है? 

नया आवेदन देना खासतौर पर तब सही हो सकता है जब:

  • पहले फाइल अधूरी थी
  • 30 दिन निवास का प्रमाण सही नहीं था
  • गलत जिले के ऑफिस में आवेदन दे दिया गया था
  • एफिडेविट में गलती या कमी थी
  • गवाह तैयार नहीं थे
  • अब आपके पास बेहतर और सही डॉक्यूमेंट उपलब्ध हैं
  • पहले वाली फाइल को ठीक से प्रोसेस ही नहीं किया गया

दोबारा आवेदन देने से पहले क्या ध्यान रखें? 

नया आवेदन देने से पहले आपको कुछ जरूरी बातें जरूर समझनी चाहिए:

  • यह साफ करें कि पहले वाला रिजेक्शन लिखित और आधिकारिक था या सिर्फ मौखिक / अनौपचारिक
  • यह जांचें कि क्या नए आवेदन पर फिर से 30 दिन का नोटिस पीरियड लगेगा
  • यह सुनिश्चित करें कि नई फाइल में पुरानी सभी कमियाँ पूरी तरह ठीक कर दी गई हों
  • वही गलती दोबारा बिल्कुल न दोहराएँ
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क्या दोबारा आवेदन देना कभी बेहतर विकल्प हो सकता है? 

कई बार छोटी तकनीकी कमी पर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने से बेहतर होता है कि आप सही डॉक्यूमेंट के साथ नया आवेदन दे दें। ऐसी स्थिति में दोबारा आवेदन करना अक्सर ज्यादा आसान, कम तनाव वाला, और जल्दी परिणाम देने वाला रास्ता बन जाता है।

डॉक्यूमेंट रिजेक्ट होने से बचने के लिए आसान और जरूरी सावधानियाँ

  • अपने सभी डॉक्यूमेंट की 2–3 सेट स्वयं सत्यापित फोटोकॉपी पहले से तैयार रखें
  • आवेदन जमा करते समय और अंतिम तारीख पर सभी मूल डॉक्यूमेंट साथ लेकर जाएँ
  • यह जरूर जांच लें कि हर डॉक्यूमेंट में नाम एक जैसा लिखा हो
  • उम्र साबित करने के लिए मजबूत डॉक्यूमेंट रखें, जैसे जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, या पासपोर्ट
  • स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत आवेदन देने से पहले 30 दिन निवास का प्रमाण पूरी तरह जांच लें
  • एफिडेविट सही और कानूनी तरीके से तैयार करवाएँ
  • गवाहों की उपलब्धता पहले से पक्की कर लें
  • अगर पहले तलाक हो चुका है, तो तलाक के अंतिम आदेश की प्रमाणित प्रति साथ रखें
  • अगर पहले जीवनसाथी की मृत्यु हो चुकी है, तो मृत्यु प्रमाण पत्र साथ रखें
  • आखिरी समय पर जल्दबाजी में सुधार करने से बचें
  • अगर मामला थोड़ा भी संवेदनशील है, तो आवेदन से पहले वकील से डॉक्यूमेंट की जांच जरूर करवा लें

निष्कर्ष

कई कपल्स कोर्ट मैरिज के डॉक्यूमेंट रिजेक्ट होने पर बहुत परेशान और निराश हो जाते हैं, खासकर तब जब वे शादी के लिए मानसिक, भावनात्मक और जरूरी तैयारी पहले ही कर चुके होते हैं। लेकिन सच यह है कि ज्यादातर मामलों में यह समस्या रिश्ते की कानूनी वैधता से नहीं, बल्कि सिर्फ डॉक्यूमेंट की कमी, गलती, या प्रक्रिया की परेशानी से जुड़ी होती है।

अधिकतर स्थितियों में यह दिक्कत सही कारण समझकर, जरूरी सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट तैयार करके, और अगला कानूनी कदम सावधानी से उठाकर ठीक की जा सकती है। अगर समय पर सही कदम उठाया जाए और उचित कानूनी मार्गदर्शन लिया जाए, तो आमतौर पर कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया फिर से सही रास्ते पर लाई जा सकती है।

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FAQs

Q1. अगर मेरे कोर्ट मैरिज के डॉक्यूमेंट रिजेक्ट हो गए, तो क्या इसका मतलब मैरिज कैंसिल हो गई है?

ज्यादातर मामलों में डॉक्यूमेंट रिजेक्ट होने का मतलब सिर्फ इतना होता है कि उनमें कमी, गलती, या सुधार की जरूरत है। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपकी कोर्ट मैरिज अब नहीं हो सकती। अक्सर सही सुधार करने के बाद प्रक्रिया फिर से आगे बढ़ जाती है।

Q2. क्या मैरिज ऑफिसर सिर्फ इसलिए आवेदन रिजेक्ट कर सकता है क्योंकि माता-पिता मौजूद नहीं हैं?

अगर दोनों पक्ष बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी कर रहे हैं, तो सामान्य रूप से माता-पिता की मौजूदगी कानूनी रूप से जरूरी नहीं होतीस्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत सिर्फ माता-पिता के न आने की वजह से आवेदन रोकना या रिजेक्ट करना सही आधार नहीं माना जाता।

Q3. क्या डॉक्यूमेंट सही करने के बाद मैं दोबारा आवेदन कर सकते हैं?

कई मामलों में डॉक्यूमेंट की कमी या गलती दूर करने के बाद नया आवेदन दोबारा दिया जा सकता है। यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि पहले आवेदन किस चरण में रुका था। कभी-कभी पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ सकती है, इसलिए पहले सही कानूनी सलाह लेना बेहतर रहता है।

Q4. अगर मेरे आधार कार्ड में दूसरे शहर का पता है, तो क्या दिक्कत होगी?

ऐसी स्थिति में दिक्कत आ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैरिज नहीं हो सकती। आपको उस जिले में कम से कम 30 दिन निवास का प्रमाण देना पड़ सकता है जहाँ आवेदन किया जा रहा है। इसके लिए दूसरे स्वीकार्य डॉक्यूमेंट और सहायक प्रमाण का उपयोग किया जा सकता है।

Q5. क्या कोर्ट मैरिज डॉक्यूमेंट रिजेक्शन के मामले में हाई कोर्ट मदद कर सकता है?

अगर मैरिज ऑफिसर ने मनमाने तरीके से, गलत कारण से, या कानून के खिलाफ आवेदन रोक दिया है, तो उचित मामलों में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की जा सकती है। ऐसी स्थिति में सही कानूनी सलाह लेना बहुत जरूरी होता है।

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