क्या व्हाट्सएप चैट्स को डाइवोर्स के मामलों में सबूत माना जाता है?

Are WhatsApp chats considered evidence in divorce cases

आज के समय में शादी केवल साथ रहने या आमने-सामने बात करने तक सीमित नहीं है। पति-पत्नी के बीच ज्यादातर बातचीत अब डिजिटल माध्यम से होती है, खासकर व्हाट्सएप पर। झगड़े, धमकियाँ, भावनात्मक दबाव, माफी, स्वीकारोक्ति, यहां तक कि विवाह के बाहर संबंध की बातें भी अक्सर चैट में लिखी रह जाती हैं। यह सारी बातचीत मोबाइल में सेव रहती है।

जब तलाक का मामला शुरू होता है, तब यही चैट्स महत्वपूर्ण सबूत बन सकती हैं। लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि चैट मौजूद है या नहीं – बल्कि यह है कि क्या उसे अदालत में कानूनी रूप से सबूत के तौर पर माना जाएगा या नहीं।

भारतीय कानून इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे व्हाट्सएप चैट, ईमेल, मैसेज) को सबूत के रूप में मानता है। लेकिन उन्हें कोर्ट में स्वीकार कराने के लिए कुछ जरूरी कानूनी नियमों और प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। अगर सही तरीके से पेश नहीं किया गया, तो कोर्ट उसे मानने से इनकार भी कर सकती है।

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क्या व्हाट्सएप चैट कोर्ट में मान्य होती है?

भारतीय कोर्ट व्हाट्सएप चैट को सबूत के रूप में स्वीकार करती हैं – लेकिन केवल तब, जब वह कानून में बताई गई शर्तों को पूरा करे। व्हाट्सएप चैट एक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड है। ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के तहत नियंत्रित किया जाता है।

धारा 63B क्या कहती है?

इस कानून की धारा 63B खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे व्हाट्सएप चैट, ईमेल, ऑडियो-वीडियो फाइल) को कोर्ट में पेश करने के नियम बताती है।

धारा 63B के अनुसार:

  • जिस डिवाइस (मोबाइल/कंप्यूटर) में चैट है, उसके संबंध में एक 63B सर्टिफिकेट देना जरूरी होता है।
  • यह सर्टिफिकेट यह बताता है कि रिकॉर्ड असली है और उसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।
  • सर्टिफिकेट उस व्यक्ति द्वारा दिया जाता है जो उस डिवाइस का नियंत्रण रखता हो।

अगर 63B का पालन न हो तो? 

अगर BSA धारा 63B की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो कोर्ट व्हाट्सएप चैट को सबूत के रूप में स्वीकार करने से मना कर सकती है, भले ही चैट असली हो।

धारा 63B सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है?

जब भी व्हाट्सएप चैट या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड कोर्ट में सबूत के रूप में पेश किया जाता है, तो उसके साथ धारा 63B का सर्टिफिकेट देना बहुत जरूरी होता है। यह प्रावधान भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में दिया गया है।

63B सर्टिफिकेट क्या सुनिश्चित करता है? 

यह सर्टिफिकेट अदालत को यह भरोसा दिलाता है कि:

  • जिस मोबाइल या कंप्यूटर में चैट थी, वह सही तरीके से काम कर रहा था।
  • चैट में कोई छेड़छाड़ (tampering) नहीं की गई है।
  • जो डेटा पेश किया गया है, वह असली और सही है।
  • यानि, यह सर्टिफिकेट इलेक्ट्रॉनिक सबूत की सच्चाई और विश्वसनीयता को प्रमाणित करता है।

यह सर्टिफिकेट कौन दे सकता है? 

धारा 63B के अनुसार, यह सर्टिफिकेट वह व्यक्ति दे सकता है:

  • जो उस डिवाइस को कंट्रोल करता हो (जैसे मोबाइल का मालिक),
  • सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर,
  • या वह व्यक्ति जो उस डिवाइस/सिस्टम को मैनेज करने के लिए जिम्मेदार हो।

किन-किन तलाक के आधारों में व्हाट्सएप चैट काम आ सकती है?

व्हाट्सएप चैट कई मामलों में मजबूत सबूत बन सकती है, खासकर जब तलाक किसी विशेष कानूनी आधार पर मांगा जा रहा हो। अगर चैट सही तरीके से प्रमाणित (धारा 63B के अनुसार) की गई हो, तो अदालत उसे गंभीरता से देखती है।

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1. क्रूरता (Cruelty)

यदि एक जीवनसाथी दूसरे को:

  • गाली-गलौज करता है
  • बार-बार धमकी देता है
  • अपमानजनक भाषा का उपयोग करता है
  • मानसिक दबाव डालता है

तो ऐसी चैट्स मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) साबित करने में मदद कर सकती हैं। लगातार अपमानजनक या धमकी भरे संदेश कोर्ट में महत्वपूर्ण सबूत बन सकते हैं।

2. व्यभिचार / अवैध संबंध (Adultery)

अगर पति या पत्नी किसी अन्य व्यक्ति के साथ:

  • रोमांटिक या अंतरंग बातचीत कर रहे हों
  • निजी फोटो या प्रेमपूर्ण संदेश भेज रहे हों
  • रिश्ते को स्वीकार कर रहे हों

तो ऐसी चैट्स अवैध संबंध के आरोप को मजबूत कर सकती हैं। हालांकि केवल चैट ही पर्याप्त नहीं होती, लेकिन यह परिस्थितिजन्य सबूत (circumstantial evidence) के रूप में बहुत असरदार हो सकती है।

3. परित्याग (Desertion)

अगर कोई जीवनसाथी:

  • साथ रहने से साफ मना कर दे
  • बार-बार यह लिखे कि वह वापस नहीं आएगा/आएगी
  • शादी खत्म करने की बात करे

तो ऐसे मैसेज यह दिखा सकते हैं कि उसने जानबूझकर वैवाहिक जिम्मेदारियों से दूरी बनाई है।

4. घरेलू हिंसा (Domestic Violence)

अगर चैट में:

  • डराने-धमकाने वाले संदेश हों
  • आर्थिक नियंत्रण की बातें हों
  • मारने या नुकसान पहुंचाने की धमकी हो

तो यह घरेलू हिंसा के दावे को मजबूत कर सकता है। ऐसे डिजिटल सबूत महिला या पुरुष दोनों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

क्या डिलीट की गई व्हाट्सएप चैट वापस मिल सकती है?

हाँ, कुछ परिस्थितियों में डिलीट की गई चैट वापस प्राप्त की जा सकती है। लेकिन यह हर मामले में संभव नहीं होता। रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि डेटा पूरी तरह हटाया गया है या बैकअप में सुरक्षित है। चैट इन तरीकों से रिकवर हो सकती है:

  • फोरेंसिक जांच – विशेषज्ञ मोबाइल या डिवाइस की तकनीकी जांच करके डिलीट डेटा निकालने की कोशिश कर सकते हैं।
  • बैकअप रिस्टोरेशन – अगर चैट का बैकअप पहले से लिया गया है (जैसे गूगल ड्राइव या आईक्लाउड पर), तो उसे वापस लाया जा सकता है।
  • क्लाउड डेटा – कुछ मामलों में क्लाउड स्टोरेज से भी डेटा प्राप्त किया जा सकता है।

हालांकि, यह पूरी तरह तकनीकी स्थिति पर निर्भर करता है – जैसे बैकअप कब लिया गया था, डेटा ओवरराइट हुआ या नहीं, आदि। जरूरी मामलों में अदालत फोरेंसिक जांच की अनुमति भी दे सकती है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

क्या सिर्फ स्क्रीनशॉट ही काफी है?

नहीं, केवल स्क्रीनशॉट देना आमतौर पर पर्याप्त नहीं होता। स्क्रीनशॉट को कोर्ट में स्वीकार कराने के लिए निम्न चीजें जरूरी हो सकती हैं:

  • धारा 63B का सर्टिफिकेट
  • यह साबित करना कि मैसेज भेजने वाला कौन था
  • यह प्रमाण कि संबंधित मोबाइल नंबर उसी व्यक्ति का है

अगर ये बातें साबित नहीं की गईं, तो सामने वाला पक्ष यह कह सकता है कि स्क्रीनशॉट से छेड़छाड़ की गई है या वह फर्जी है।

क्या निजी चैट बिना अनुमति के इस्तेमाल की जा सकती है?

यह एक बहुत संवेदनशील और कानूनी रूप से जटिल विषय है।

अगर चैट गैरकानूनी तरीके से हासिल की गई हो –

  • अगर किसी ने मोबाइल हैक किया हो
  • बिना अनुमति पासवर्ड तोड़ा हो
  • किसी के अकाउंट में चोरी से लॉगिन किया हो
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तो ऐसी चैट अदालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। इतना ही नहीं, ऐसा करने वाला व्यक्ति खुद आपराधिक मामले में फँस सकता है (जैसे IT कानून और आपराधिक कानून के तहत)।

अदालतें यह देखती हैं कि सबूत कैसे प्राप्त किया गया। अगर तरीका ही गैरकानूनी है, तो अदालत उस पर आपत्ति कर सकती है।

अगर चैट आपके अपने डिवाइस में मौजूद है – 

अगर चैट आपके खुद के मोबाइल में है और आपने उसे किसी हैकिंग या अवैध तरीके से प्राप्त नहीं किया, तो सामान्यतः उसे सबूत के रूप में पेश किया जा सकता है।

निजता का अधिकार क्या कहता है? 

भारत में निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। इस विषय पर एक ऐतिहासिक फैसला है:

के.एस. पुट्टस्वामी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि निजता (Privacy) एक मौलिक अधिकार है। यानि किसी की निजी जानकारी, निजी बातचीत और व्यक्तिगत डेटा को बिना उचित कारण या कानूनी प्रक्रिया के इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

अदालत संतुलन कैसे बनाती है? 

अदालत दो बातों के बीच संतुलन बनाती है:

  • एक व्यक्ति का निजता का अधिकार
  • और दूसरे पक्ष का न्याय पाने का अधिकार

अगर कोई चैट किसी गंभीर आरोप (जैसे क्रूरता, घरेलू हिंसा, व्यभिचार) को साबित करने के लिए जरूरी है, तो अदालत यह देखेगी कि:

  • क्या सबूत कानूनी तरीके से प्राप्त किया गया?
  • क्या उसका उपयोग न्याय के हित में जरूरी है?

अगर हाँ, तो अदालत उसे स्वीकार कर सकती है। लेकिन अगर चैट चोरी या हैकिंग से प्राप्त की गई है, तो उसे अस्वीकार भी किया जा सकता है।

अंजलि शर्मा बनाम रमन उपाध्याय, 2025

अंजलि शर्मा बनाम रमन उपाध्याय, 2025 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया कि व्हाट्सएप चैट्स को मैट्रिमोनियल डिस्प्यूट में सबूत के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, भले ही वह बिना अनुमति प्राप्त की गई हों।

मूल विवाद यह था कि पति ने अपनी पत्नी के मोबाइल से व्हाट्सएप मैसेज प्राप्त किए और उन्हें तलाक-केस में क्रूरता व व्यभिचार साबित करने के लिए पेश किया। पत्नी ने कहा कि ये चैट्स उसके फोन से बिना उसकी अनुमति से ली गईं, जो उसके प्राइवेसी अधिकार का उल्लंघन है और इसलिए अदालत में स्वीकार नहीं होनी चाहिए।

कोर्ट ने क्या कहा? 

हाई कोर्ट ने कहा कि मैट्रिमोनियल मामलों में व्हाट्सएप चैट्स को प्रासंगिक माना जा सकता है और कोर्ट में स्वीकार किया जा सकता है अगर वह विवाद के समाधान में सहायक हों, भले ही वे बिना अनुमति प्राप्त हुई हों।

दीप्ति कपूर बनाम कुणाल जुल्का, 2020

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे ईमेल, व्हाट्सएप चैट आदि) सबूत के रूप में पेश किए जा सकते हैं, भले ही दूसरा पक्ष यह कहे कि यह उसकी निजता का उल्लंघन है।

कोर्ट ने क्या कहा?

  • शादी के रिश्ते में पूरी तरह “absolute privacy” (पूर्ण निजता) का दावा नहीं किया जा सकता।
  • यदि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मैट्रिमोनियल डिस्प्यूट से जुड़ा है और मामले को समझने में मदद करता है, तो उसे सबूत के रूप में देखा जा सकता है।
  • लेकिन सबूत की प्रामाणिकता (authenticity) साबित करना जरूरी है।

प्रीति जैन बनाम कुणाल जैन (2016)

इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट के सामने सवाल था कि क्या वीडियो रिकॉर्डिंग को अडल्ट्री साबित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

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कोर्ट का निर्णय:

  • यदि वीडियो रिकॉर्डिंग प्रासंगिक (relevant) है और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार प्रस्तुत की गई है, तो उसे सबूत के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।
  • वीडियो अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं होता, लेकिन यह परिस्थितिजन्य साक्ष्य (circumstantial evidence) के रूप में मजबूत आधार बन सकता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस के लिए कानूनी प्रक्रिया (जैसे प्रमाणन) जरूरी है।

निष्कर्ष

आज के समय में रिश्तों की बातचीत अक्सर डिजिटल रूप में सुरक्षित रह जाती है। व्हाट्सएप चैट से कई बार भावनाएँ, इरादे, गलतफहमियाँ और कभी-कभी गंभीर गलत व्यवहार भी सामने आ जाता है। इसी वजह से तलाक के मामलों में अदालतें ऐसी चैट्स पर ध्यान देती हैं। लेकिन केवल मोबाइल में मैसेज होना ही काफी नहीं है – उन्हें कानूनी नियमों के अनुसार पेश करना जरूरी होता है, तभी वे मान्य सबूत बनते हैं।

यह समझना जरूरी है कि डिजिटल सबूत आपके केस को मजबूत बना सकते हैं, लेकिन उन्हें संभालना और पेश करना सही और कानूनी तरीके से होना चाहिए। अगर चैट गलत तरीके से हासिल की गई हो या बिना उचित प्रक्रिया के कोर्ट में दी जाए, तो इससे फायदा होने के बजाय नुकसान भी हो सकता है।

अगर आप तलाक की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, तो भावनाओं में आकर कदम उठाने के बजाय सोच-समझकर और सही कानूनी सलाह लेकर आगे बढ़ें। सबूत सुरक्षित रखें, उनकी सही कानूनी प्रक्रिया पूरी करें और अदालत को कानून के अनुसार सच्चाई तय करने दें। जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया गया डिजिटल सबूत आपकी स्थिति को मजबूत बना सकता है और अदालत को निष्पक्ष निर्णय लेने में मदद करता है।

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FAQs

1. क्या तलाक के मामले में बच्चे की कस्टडी के लिए व्हाट्सएप चैट इस्तेमाल की जा सकती है?

हाँ। अगर व्हाट्सएप मैसेज से यह साबित होता है कि सामने वाला व्यक्ति बच्चे की देखभाल नहीं कर रहा, उसे धमका रहा है, गलत व्यवहार कर रहा है या गैर-जिम्मेदार है, तो ऐसी चैट फैमिली कोर्ट में बच्चे की कस्टडी के दावे को मजबूत कर सकती है।

2. क्या विदेशी नंबर से भेजी गई व्हाट्सएप चैट कोर्ट में मान्य होती है?

हाँ। अगर चैट असली है और सही तरीके से प्रमाणित की गई है, तो विदेशी नंबर से आई चैट भी स्वीकार की जा सकती है।

3. क्या इमोजी और डिलीट किए गए मैसेज तलाक के केस पर असर डाल सकते हैं?

इमोजी, रिएक्शन या “This message was deleted” जैसे संकेत कभी-कभी बातचीत का मतलब और इरादा समझाने में मदद करते हैं। लेकिन डिलीट किए गए मैसेज पर भरोसा करने के लिए तकनीकी जांच (फोरेंसिक जांच) की जरूरत पड़ सकती है।

4. क्या व्हाट्सएप वीडियो कॉल रिकॉर्ड करना कानूनी है?

बिना सामने वाले की अनुमति के वीडियो कॉल रिकॉर्ड करना प्राइवेसी से जुड़ा मामला बन सकता है। कोर्ट पहले यह देखती है कि रिकॉर्डिंग कानूनी तरीके से की गई है या नहीं, तभी उसे सबूत के रूप में स्वीकार किया जाता है।

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