सुप्रीम कोर्ट में SLP कैसे फाइल करें? जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया

Supreme Court Special Leave Petition

जब हाई कोर्ट से फैसला आपके खिलाफ आ जाता है, तो यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि व्यक्ति निराश, परेशान और उलझन में आ जाए। ऐसे समय में ज़्यादातर क्लाइंट के मन में यही सवाल आते हैं कि क्या अब मामला यहीं खत्म हो गया है, क्या अब कोई रास्ता बचा है, और क्या सुप्रीम कोर्ट में जाकर इंसाफ मिल सकता है। यह स्थिति भावनात्मक रूप से भी कठिन होती है, क्योंकि फैसला सीधे आपके अधिकारों और भविष्य को प्रभावित करता है।

अक्सर लोग सुनते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में SLP (Special Leave Petition) दाखिल की जा सकती है, लेकिन यह समझना बहुत ज़रूरी है कि SLP कोई सीधी या ऑटोमैटिक अपील नहीं होती। इसका मतलब यह है कि सिर्फ SLP डाल देने से यह तय नहीं हो जाता कि सुप्रीम कोर्ट आपका केस सुनेगा ही। सुप्रीम कोर्ट केवल उन्हीं मामलों में SLP स्वीकार करता है, जहाँ कोई गंभीर कानूनी गलती, अन्याय या महत्वपूर्ण सवाल शामिल हो।

इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि Special Leave Petition (SLP) क्या होती है, कौन दाख़िल कर सकता है, कब दाख़िल करनी चाहिए और इसकी पूरी कानूनी प्रक्रिया क्या है।

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स्पेशल लीव पिटिशन क्या होती है?

स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) वह पिटीशन होती है जो सीधे भारत के सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाती है। इसके जरिए कोई व्यक्ति किसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से अपील करने की विशेष अनुमति मांगता है। SLP निम्नलिखित के आदेश या फैसले के खिलाफ दायर की जा सकती है:

  • किसी भी हाई कोर्ट
  • किसी भी ट्रिब्यूनल
  • भारत की किसी भी कोर्ट के खिलाफ

SLP भारत के संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत दायर की जाती है। अनुच्छेद 136 सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार देता है कि वह अपनी इच्छा से तय करे कि किसी मामले में अपील की अनुमति दी जाए या नहीं।

SLP की प्रकृति – क्या यह आपका अधिकार है?

SLP फाइल करना कोई ऐसा अधिकार नहीं है जो हर व्यक्ति को अपने-आप मिल जाए। सिर्फ SLP डाल देने से यह तय नहीं होता कि सुप्रीम कोर्ट उस केस को सुनेगा ही

SLP में फैसला पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर करता है। कोर्ट पहले यह देखता है कि क्या निचली कोर्ट के फैसले में कोई बड़ी गलती हुई है या किसी के साथ गंभीर अन्याय हुआ है।

अगर कोर्ट को लगता है कि मामला साधारण है या पहले ही सही तरीके से तय हो चुका है, तो वह SLP को शुरुआत में ही खारिज कर सकता है।

आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट वही SLP स्वीकार करता है जिसमें:

  • बहुत बड़ा अन्याय हुआ हो
  • कानून को गलत तरीके से लागू किया गया हो
  • या मामला जनहित से जुड़ा हो
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सरल शब्दों में, SLP हर केस के लिए नहीं होती, यह सिर्फ खास और गंभीर मामलों में ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनी जाती है।

SLP कब फाइल की जा सकती है?

SLP तब फाइल की जा सकती है जब नीचे बताई गई स्थितियाँ मौजूद हों:

  • किसी हाई कोर्ट ने अंतिम फैसला सुना दिया हो,
  • उस फैसले के खिलाफ कोई सामान्य अपील का रास्ता न बचा हो,
  • मामले में कानून से जुड़ा कोई गंभीर सवाल हो,
  • किसी व्यक्ति के साथ न्याय न हुआ हो,
  • निचली कोर्ट ने अपने अधिकार से बाहर जाकर फैसला दिया हो,
  • या किसी के मौलिक अधिकारों पर असर पड़ा हो

किन आदेशों के खिलाफ SLP फाइल की जा सकती है?

SLP निम्नलिखित प्रकार के आदेशों के खिलाफ फाइल की जा सकती है:

  • सिविल मामलों के फैसलों के खिलाफ
  • क्रिमिनल मामलों के फैसलों के खिलाफ
  • कभी-कभी अस्थायी (इंटरिम) आदेशों के खिलाफ भी (बहुत खास मामलों में)
  • ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए आदेशों के खिलाफ
  • किसी विशेष कानून के तहत पारित आदेशों के खिलाफ

लेकिन ध्यान रखें: SLP सिर्फ प्रशासनिक आदेशों के खिलाफ फाइल नहीं की जा सकती।

SLP फाइल करने की समय-सीमा

SLP फाइल करने के लिए समय-सीमा बहुत महत्वपूर्ण होती है। देर होने पर केस खतरे में पड़ सकता है। समय-सीमा इस प्रकार है:

  • हाई कोर्ट के फैसले की तारीख से 90 दिन के अंदर SLP फाइल करनी होती है
  • यदि हाई कोर्ट ने सर्टिफिकेट देने से मना किया हो, तो 60 दिन के अंदर SLP फाइल करनी होती है

अगर किसी कारण से देरी हो जाए, तो साथ में देरी माफी की अर्जी (Condonation of Delay Application) लगानी पड़ती है और यह बताना होता है कि देरी क्यों हुई।

SLP कौन फाइल कर सकता है?

SLP वही व्यक्ति या संस्था फाइल कर सकती है जो फैसले से सीधे प्रभावित हुई हो। Special Leave Petition फाइल कर सकते हैं:

  • वह पक्ष जिसके खिलाफ फैसला आया हो
  • कोई पीड़ित व्यक्ति
  • कानूनी वारिस, यदि मामला इसकी अनुमति देता हो
  • कोई कंपनी या संस्था

SLP फाइल करने के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत होती है?

  • जिस फैसले को चुनौती देनी है उसकी सर्टिफाइड कॉपी
  • निचली अदालत में दायर किए गए सभी जरूरी कागज़ों की कॉपी
  • पिटीशनर्स का एफिडेविट
  • वकील को केस लड़ने की अनुमति देने वाला वकालतनामा
  • अगर केस देर से फाइल हो रहा है, तो देरी माफी की अर्जी
  • कोर्ट फीस, जो तय होती है

SLP फाइल करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

स्टेप 1: फैसले की प्रमाणित प्रति जुटाएँ SLP फाइल करने से पहले फैसले की प्रमाणित कॉपी और निचली अदालत के सभी दस्तावेज़ तैयार रखें। इससे कोर्ट को केस की पूरी कहानी स्पष्ट और संगठित रूप में पेश की जा सकेगी।

स्टेप 2: एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AOR) को हायर करें सुप्रीम कोर्ट में Special Leave Petition केवल AORवकील के जरिए ही फाइल होती है। अनुभवी वकील चुनें जो दस्तावेज़ तैयार कर सके और कोर्ट प्रक्रिया का सही मार्गदर्शन दे सके, ताकि आपकी पिटीशन तकनीकी कारणों से खारिज न हो।

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स्टेप 3: SLP का ड्राफ्ट तैयार करें SLP में केस का सारांश, घटनाओं की तारीखें, कानून से जुड़े सवाल, चुनौती के कारण और कोर्ट से मांगी राहत स्पष्ट रूप से लिखें। एक संगठित और तार्किक ड्राफ्ट कोर्ट पर अच्छा प्रभाव डालता है और सुनवाई की संभावना बढ़ाता है।

स्टेप 4: SLP दायर करें SLP को फिजिकली या ई-फाइलिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जमा करें। हलफनामे, वकालतनामा और सभी दस्तावेज़ सही और व्यवस्थित हों। अधूरे या गलत दस्तावेज़ Special Leave Petition खारिज होने या सुनवाई में देरी का कारण बन सकते हैं।

स्टेप 5: सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जांच रजिस्ट्री जांचती है कि दस्तावेज़ पूरे हैं, फॉर्मेट सही है और समय-सीमा पूरी हुई है। यदि कोई कमी हो, तो सुधार का मौका दिया जाता है। इसलिए दस्तावेज़ और प्रक्रिया पर पूरा ध्यान दें ताकि SLP बिना बाधा आगे बढ़ सके।

क्या SLP ऑनलाइन ई-फाइलिंग के जरिए फाइल की जा सकती है?

SLP सुप्रीम कोर्ट के ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए ऑनलाइन फाइल की जा सकती है, लेकिन कुछ कदम अभी भी फिजिकल तौर पर जरूरी हैं।

ऑनलाइन क्या किया जा सकता है:

  • SLP को ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड करना
  • फैसले की स्कैन की हुई कॉपी लगाना
  • पिटीशनर्स का एफिडेविट अपलोड करना
  • वकालतनामा और अन्य जरूरी दस्तावेज़ अपलोड करना
  • कोर्ट फीस ऑनलाइन भुगतान करना

ऑनलाइन क्या पूरी तरह नहीं हो सकता:

  • ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स का फिजिकल वेरिफिकेशन
  • AOR द्वारा हस्ताक्षर
  • सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत हाजिरी

ऑनलाइन फाइलिंग कानूनी प्रक्रिया को बाइपास नहीं करती। पिटीशन तभी मान्य होगी जब कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जांच और सभी प्रक्रिया पूरी हो जाए।

SLP फाइल करने के बाद क्या होता है?

SLP फाइल करने के बाद सबसे पहले एडमिशन स्टेज होती है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट यह तय करता है कि पिटीशन को सुना जाए या खारिज किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट इस दौरान यह कर सकती है:

  • पिटीशन को खारिज कर देना, अगर कोर्ट को लगे कि मामला सुनने योग्य नहीं है,
  • विपक्षी पार्टी को नोटिस जारी करना ताकि वे अपना पक्ष रख सकें, या                                                                                                                                                            
  • निचली अदालत के फैसले या आदेश पर अस्थायी रोक लगा देना, ताकि मामले की सुनवाई तक आदेश लागू न हो।

अगर कोर्ट अनुमति दे देती है:

  • SLP अब सिविल अपील या क्रिमिनल अपील में बदल जाती है, या   
  • केस अंतिम सुनवाई के लिए आगे बढ़ता है, जहां कोर्ट पूरे मामले की गहन जांच कर फैसला सुनाती है।

SLP फाइल करने के लिए क्या फीस होती है?

सुप्रीम कोर्ट में SLP फाइल करने के लिए कोर्ट फीस और कुछ अन्य खर्चे लगते हैं।

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कोर्ट फीस:

SLP फाइल करने के लिए सरकार को आमतौर पर ₹1,500 फीस देनी होती है (केस के प्रकार के हिसाब से थोड़ा बदल सकती है)। इसे आप ऑनलाइन या सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कर सकते हैं।

अन्य खर्चे:

  • AOR की फीस – यह जरूरी है, क्योंकि केवल AOR ही SLP फाइल कर सकता है।
  • ड्राफ्टिंग खर्चे – पिटीशन, सिनोप्सिस और वकालतनामा तैयार करने के लिए।
  • अन्य छोटे खर्चे – प्रिंटिंग, फोटोकॉपी और एफिडेविट की नोटरी फीस।

निष्कर्ष

Special Leave Petition फाइल करना कानूनी तौर पर एक गंभीर कदम है और इसे सोच-समझकर ही उठाना चाहिए। इसका इस्तेमाल हर छोटे-मोटे फैसले के खिलाफ नहीं किया जाता। यह सिर्फ उन मामलों में होता है जहाँ साफ अन्याय हुआ हो या महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठता हो। सुप्रीम कोर्ट अपने अनुच्छेद 136 के अधिकार का इस्तेमाल बहुत सतर्कता से करती है, ताकि न्याय प्रणाली में संतुलन और निष्पक्षता बनी रहे।

अगर सही कानूनी सलाह, समय पर कार्रवाई और मजबूत कारण हों, तो SLP सबसे उच्च स्तर पर न्याय पाने का एक शक्तिशाली साधन बन सकता है। प्रक्रिया को पहले से समझना पिटीशनर्स को सटीक और आत्मविश्वासी निर्णय लेने में मदद करता है।

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FAQs

1. क्या SLP सिविल और क्रिमिनल दोनों मामलों में फाइल की जा सकती है?

हाँ। SLP सिविल, क्रिमिनल या ट्रिब्यूनल के अंतिम फैसलों के खिलाफ फाइल की जा सकती है। यह सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई का मौका देती है, भले ही साधारण अपील का रास्ता न हो।

2. अगर मूल पक्ष का निधन हो गया हो, तो SLP कौन फाइल कर सकता है?

अगर जो व्यक्ति मूल पक्ष था उसका निधन हो गया है, तो उसका कानूनी वारिस या अधिकृत प्रतिनिधि SLP फाइल कर सकता है। इसके लिए उन्हें अपने हित को साबित करने वाले दस्तावेज़ दिखाने होंगे।

3. क्या सुप्रीम कोर्ट बिना सुनवाई के SLP खारिज कर सकती है?

हाँ। SLP सुप्रीम कोर्ट की मर्जी पर होती है। अगर पिटीशन कमजोर, आधारहीन या कानून से जुड़ा गंभीर सवाल नहीं रखती, तो कोर्ट इसे सुनवाई किए बिना खारिज कर सकती है।

4. क्या SLP फाइल करने की कोई समय सीमा है?

हाँ। आम तौर पर SLP हाई कोर्ट के फैसले के 90 दिन के भीतर फाइल करनी होती है। अगर देरी हो जाए, तो सही कारण बताकर की अर्जी लगानी पड़ती है।

5. क्या SLP लंबित रहते हुए अस्थायी राहत या स्टे मिल सकता है?

हाँ। सुप्रीम कोर्ट निचली अदालत के आदेश पर रोक या अस्थायी सुरक्षा दे सकती है। लेकिन यह ऑटोमेटिक नहीं मिलता, इसके लिए आपको कोर्ट से विशेष रूप से अनुरोध करना होगा।

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