पति खर्चा देने से मना कर रहा है – मेंटेनेंस के लिए कोर्ट में आवेदन कैसे करें?

Husband is refusing to pay maintenance – How to apply for maintenance in court

शादी के बाद पत्नी और बच्चों का खर्च उठाना पति की कानूनी जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं। अगर पति घर का खर्च, किराया, दवाई, राशन या जरूरी जरूरतों के लिए पैसे देना बंद कर दे, तो पत्नी को चुपचाप इंतज़ार करने की जरूरत नहीं है। वह सिर्फ पति की मर्जी पर निर्भर रहने के लिए मजबूर नहीं है।

भारतीय कानून ऐसी स्थिति को गंभीरता से देखता है और पत्नी को मेंटेनेंस मांगने का अधिकार देता है। अगर पति खर्च नहीं दे रहा, तो पत्नी कोर्ट में आवेदन कर सकती है। सही समय पर सही कानूनी कदम उठाना बहुत जरूरी है। यह ब्लॉग महिलाओं को आसान भाषा में उनके अधिकार समझाने और सही रास्ता दिखाने के लिए है।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

मेंटेनेंस क्या होता है?

मेंटेनेंस का मतलब है वह पैसा जो पत्नी और बच्चों के जरूरी खर्चों के लिए दिया जाता है, ताकि वे अपना जीवन सम्मान के साथ जी सकें। यानि मेंटेनेंस सिर्फ ज़िंदा रहने भर के लिए नहीं होता, बल्कि इंसान की बुनियादी जरूरतें पूरी हों और वह इज्जत के साथ जीवन जी सके, इसके लिए होता है।

मेंटेनेंस में आमतौर पर क्या-क्या शामिल होता है?

मेंटेनेंस में आमतौर पर ये खर्च शामिल हो सकते हैं:

  • खाने-पीने का खर्च
  • किराया / रहने का खर्च
  • बिजली और पानी का बिल
  • कपड़ों का खर्च
  • दवाई और इलाज का खर्च
  • रोज़मर्रा का घर खर्च
  • बच्चों की पढ़ाई का खर्च
  • पत्नी की जरूरी व्यक्तिगत जरूरतें
  • कुछ मामलों में कोर्ट केस का खर्च भी

मेंटेनेंस का मतलब ऐशो-आराम देना नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि पत्नी को सिर्फ किसी तरह गुजारा करने लायक पैसा मिले।

कोर्ट आमतौर पर यह देखती है कि पत्नी बुनियादी सुविधाओं और सम्मान के साथ जीवन जी सके। अगर पति अच्छी कमाई करता है, तो कोर्ट यह भी ध्यान रखती है कि पत्नी को उसी के अनुसार उचित और वाजिब खर्च मिले।

भारत में पत्नी किन कानूनों के तहत मेंटेनेंस मांग सकती है?

भारत में पत्नी एक से ज्यादा कानूनों के तहत मेंटेनेंस मांग सकती है। यह केस की परिस्थिति पर निर्भर करता है।

धारा 144, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS)

  • यह मेंटेनेंस लेने का सबसे आम और जल्दी राहत देने वाला कानून है। अगर पति कमाने के बावजूद पत्नी या बच्चों का खर्च नहीं देता, तो मजिस्ट्रेट मासिक मेंटेनेंस का आदेश दे सकता है।
  • मुस्लिम महिला भी अपनी स्थिति और मामले की परिस्थिति के अनुसार मेंटेनेंस मांग सकती है। वह धारा 144, मुस्लिम वूमेन एक्ट, 1986 और कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों के आधार पर अपने खर्च और उचित आर्थिक सहायता का दावा कर सकती है।

हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955

अगर तलाक या कोई मैट्रिमोनियल केस चल रहा है, तो हिंदू पत्नी इन धाराओं के तहत मेंटेनेंस मांग सकती है:

  • धारा 24अंतरिम मेंटेनेंस, यानी केस चलने के दौरान खर्चा और कोर्ट केस का खर्च।
  • धारा 25परमानेंट एलीमोनी, यानी अंतिम आदेश / डिक्री के बाद परमानेंट एलीमोनी और मेंटेनेंस

धारा 18, हिन्दू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 (HAMA)

इस धारा के अनुसार, हिंदू पत्नी अपने जीवनकाल में पति से भरण-पोषण पाने की हकदार है। यानी पति पर पत्नी का खर्च उठाना कानूनी जिम्मेदारी है।

धारा 20, डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट, 2005

अगर पति ने पत्नी को घर से निकाला, खर्चा बंद किया, या घरेलू हिंसा की, तो पत्नी कोर्ट से मेंटेनेंस / आर्थिक राहत मांग सकती है। इसमें खाना, किराया, दवाई, बच्चों का खर्च, रोज़मर्रा का घर खर्च और अन्य जरूरी खर्च शामिल हो सकते हैं। अगर पति खर्च नहीं दे रहा, तो मजिस्ट्रेट उसे उचित राशि देने का आदेश दे सकता है।

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954

इस एक्ट के तहत पत्नी मेंटेनेंस मांग सकती है। धारा 36 के अनुसार, अगर पत्नी की अपनी आय नहीं है, तो वह केस चलने के दौरान अंतरिम मेंटेनेंस मांग सकती है। वहीं धारा 37 के तहत पत्नी को अंतिम निर्णय के बाद परमानेंट एलीमोनी, एकमुश्त राशि या नियमित भुगतान के रूप में मिल सकता है।

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मेंटेनेंस न मिलने पर तुरंत क्या करें?

1. सबूत इकट्ठा करें: सबसे पहले व्हाट्सएप चैट, बैंक रिकॉर्ड, खर्च की रसीदें, मेडिकल बिल, बच्चों की फीस रसीदें और पति के खर्च न देने वाले मैसेज सुरक्षित रखें। ये केस मजबूत करते हैं।

2. खर्च की सूची बनाएं: हर महीने के जरूरी खर्चों की एक साफ सूची बनाएं, जैसे किराया, राशन, बिजली, दवाइयाँ, बच्चे की फीस, ट्रेवल और अन्य जरूरी खर्च। यह कोर्ट में बहुत काम आती है।

3. सही वकील से कानूनी सलाह लें: कोर्ट जाने से पहले एक अच्छे वकील से सलाह लेना बहुत जरूरी है। कई बार लोग गलत कानून के तहत केस लगा देते हैं, जिससे मामला कमजोर हो सकता है। आपकी स्थिति के अनुसार धारा 144 BNSS, DV एक्ट, या हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 24/25 जैसे अलग-अलग कानूनी रास्ते उपलब्ध हो सकते हैं।

4. जरूरत हो तो लीगल नोटिस भेजें: हर केस में लीगल नोटिस भेजना जरूरी नहीं होता, लेकिन कई मामलों में यह बहुत फायदेमंद साबित होता है। लीगल नोटिस भेजने से पति पर दबाव बनता है, और कई बार वह कोर्ट जाने से पहले ही खर्च देने या समझौते के लिए तैयार हो जाता है। यह बाद में कोर्ट में भी आपके पक्ष को मजबूत कर सकता है।

5. कोर्ट में तुरंत आवेदन करें: अगर पति खर्च नहीं दे रहा, तो देरी बिल्कुल न करें। जितनी जल्दी आप कोर्ट में आवेदन करेंगी, उतनी जल्दी राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी और आर्थिक परेशानी कम होगी।

केस दाखिल करने से पहले क्या-क्या इकट्ठा करें?

कोर्ट जाने से पहले सभी जरूरी कागज़ और सबूत इकट्ठा कर लें। जितने मजबूत सबूत होंगे, उतना मजबूत आपका मेंटेनेंस का मामला होगा।

1. जरूरी कागज़: सबसे पहले ये कागज़ तैयार रखें

  • शादी का प्रमाण (मैरिज सर्टिफिकेट, शादी की फोटो, कार्ड आदि)
  • पत्नी का पहचान पत्र
  • पति की पहचान संबंधी जानकारी (अगर उपलब्ध हो)
  • पते का प्रमाण
  • बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (अगर बच्चे हैं)

2. पति ने खर्चा नहीं दिया – इसका सबूत

यह दिखाना जरूरी है कि पति ने जानबूझकर खर्चा नहीं दिया। इसके लिए व्हाट्सएप चैट, ईमेल, बैंक खाता विवरण, लीगल नोटिस की कॉपीसुरक्षित रखें।

3. पति की कमाई या रहन-सहन का सबूत 

अगर संभव हो, पति की आय और रहन-सहन से जुड़े सबूत रखें: सैलरी स्लिप, कंपनी की डिटेल, गाड़ी या प्रॉपर्टी की जानकारी,या अतिरिक्त कमाई का सबूत।

4. अपने खर्च का पूरा हिसाब रखें

अपने हर महीने के सभी जरूरी खर्चों का एक साफ और सही हिसाब तैयार रखें, जैसे किराया, राशन या भोजन, दवाइयाँ, बच्चों की फीस, बिजली-पानी का बिल, आने-जाने का खर्च, फोन-इंटरनेट का खर्च और अन्य निजी जरूरी खर्च। यह खर्चों की सूची कोर्ट में बहुत काम आती है और मेंटेनेंस की सही राशि तय करने में मदद करती है।

हमेशा सही, सच्चा और वास्तविक खर्च का हिसाब बनाएं। बिना सबूत के खर्च बढ़ाकर न दिखाएं, क्योंकि कोर्ट वास्तविक और उचित खर्च को ज्यादा महत्व देती है।

कोर्ट में मेंटेनेंस के लिए आवेदन कैसे करें?

अगर पति खर्चा नहीं दे रहा, तो पत्नी कोर्ट में मेंटेनेंस के लिए आवेदन कर सकती है। सही तरीके से आवेदन करना बहुत जरूरी है, ताकि केस मजबूत रहे और जल्दी राहत मिल सके।

स्टेप 1: सबसे पहले सही कानून चुनें

सबसे पहले अपनी स्थिति के अनुसार सही कानून चुनना जरूरी है। अगर सिर्फ खर्चा चाहिए तो धारा 144 BNSS, घरेलू हिंसा हो तो DV एक्ट, और तलाक का केस चल रहा हो तो HMA की धारा 24 या 25 लागू हो सकती है।

स्टेप 2: मेंटेनेंस की पिटीशन तैयार करें

इसके बाद वकील की मदद से एक पिटीशन तैयार की जाती है। इसमें शादी की तारीख, शादी का स्थान, पति-पत्नी कब तक साथ रहे, पति का व्यवहार कैसा रहा, पति ने कब से खर्च देना बंद किया, पत्नी की वर्तमान स्थिति क्या है, बच्चे हैं या नहीं, पति की आय का अनुमान कितना है, पत्नी के हर महीने के खर्च क्या हैं, और कोर्ट से कौन-सी राहत मांगी जा रही है, ये सभी बातें लिखी जाती हैं।

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स्टेप 3: सही कोर्ट में मामला दाखिल करें

मेंटेनेंस का मामला आमतौर पर फॅमिली कोर्ट या मजिस्ट्रेट कोर्ट में दाखिल किया जाता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि केस धारा 144 BNSS, DV एक्ट, या किसी मैट्रिमोनियल लॉ के तहत लगाया जा रहा है। कई मामलों में पत्नी उस जगह भी केस कर सकती है जहाँ वह अभी रह रही है, जहाँ पति रहता है, या जहाँ दोनों आखिरी बार साथ रहे थे।

स्टेप 4: कोर्ट पति को नोटिस भेजती है

जब केस दाखिल हो जाता है, तो कोर्ट पति को एक नोटिस भेजती है। इस नोटिस में पति को बताया जाता है कि पत्नी ने मेंटेनेंस के लिए आवेदन किया है और उसे कोर्ट में उपस्थित होकर अपना जवाब देना है।

स्टेप 5: पति अपना जवाब दाखिल करता है

नोटिस मिलने के बाद पति कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करता है। अक्सर पति यह कहता है कि पत्नी खुद घर छोड़कर गई, पत्नी खुद कमाती है, उसकी आय कम है, वह पहले से खर्च दे रहा है, या बच्चे उसके पास हैं। इसलिए शुरुआत से ही सही सबूत रखना बहुत जरूरी होता है।

स्टेप 6: अंतरिम मेंटेनेंस जरूर मांगें

मेंटेनेंस का मामला कई बार लंबा चल सकता है। इसलिए केस के साथ ही अंतरिम मेंटेनेंस की मांग करना बहुत जरूरी है। इससे पत्नी को केस खत्म होने का इंतज़ार किए बिना, बीच में ही हर महीने कुछ खर्चा मिलना शुरू हो सकता है।

स्टेप 7: सबूत और दस्तावेज़ पेश किए जाते हैं

इसके बाद केस में सबूतों का चरण आता है। इसमें शादी के कागज़, खर्च की रसीदें, बैंक रिकॉर्ड, पति की आय से जुड़े दस्तावेज़, हलफनामा, बच्चों की फीस, मेडिकल बिल और अन्य जरूरी कागज़ कोर्ट में दिए जाते हैं। यही सबूत तय करते हैं कि पत्नी को कितनी रकम मिलनी चाहिए।

स्टेप 8: कोर्ट अंतिम आदेश देती है

सभी बातें सुनने और सबूत देखने के बाद कोर्ट अंतिम आदेश देती है। कोर्ट पति को हर महीने एक तय रकम देने का आदेश दे सकती है, या कुछ मामलों में एकमुश्त रकम भी तय कर सकती है। यह पूरी तरह केस की परिस्थिति, पति की आय और पत्नी की जरूरतों पर निर्भर करता है।

मेंटेनेंस की राशि कैसे तय की जाती है?

यह सबसे आम सवाल होता है, कोर्ट कितनी मेंटेनेंस तय करेगी? इसका कोई एक तय फॉर्मूला नहीं होता। हर मामले में रकम अलग हो सकती है।

कोर्ट आमतौर पर यह देखती है कि पति की असली कमाई कितनी है, उसका रहन-सहन कैसा है, पत्नी की अपनी आय है या नहीं, बच्चे कितने हैं, शादी के दौरान परिवार किस स्तर पर रह रहा था, किराया कितना है, दवाइयों और बच्चों की पढ़ाई का खर्च कितना है। अगर पति पर कुछ असली और जरूरी जिम्मेदारियाँ हैं, तो कोर्ट उन्हें भी देखती है।

कई बार पति अपनी कमाई कम दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन कोर्ट सिर्फ उसकी बताई हुई सैलरी पर भरोसा नहीं करती। कोर्ट उसके रहन-सहन, गाड़ी, यात्रा, सोशल मीडिया, व्यापार, खर्च करने के तरीके, पढ़ाई और कमाने की क्षमता को भी देख सकती है। यानी कोर्ट सिर्फ कागज़ पर लिखी आय नहीं, बल्कि असल कमाने की क्षमता भी देखती है।

कई मामलों में कोर्ट मेंटेनेंस आवेदन दाखिल करने की तारीख से भी दे सकती है, सिर्फ आदेश की तारीख से नहीं। इसका मतलब यह है कि बाद में पिछला पूरा बकाया भी एक साथ बन सकता है, जो काफी बड़ी रकम हो सकती है।

अगर पति कोर्ट के मेंटेनेंस आदेश का पालन न करे तो क्या करें?

अगर कोर्ट के आदेश के बाद भी पति मेंटेनेंस नहीं देता, तो पत्नी ये कानूनी कदम उठा सकती है:

  • Execution Petition (आदेश लागू कराने की अर्जी) दाखिल करें
  • पति की सैलरी अटैच कराने की मांग करें
  • पति का बैंक खाता अटैच कराने की मांग करें
  • जरूरत पड़ने पर संपत्ति अटैच कराने की मांग करें
  • बकाया रकम वसूलने के लिए रिकवरी कार्यवाही शुरू करें
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सोनाली भाटिया बनाम अभिवंश नारंग, 2021 में दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कहा कि अगर पति जानबूझकर कोर्ट के मेंटेनेंस आदेश का पालन नहीं करता, अपनी सही आय छुपाता है और बार-बार बहाने बनाकर भुगतान से बचता है, तो उसके खिलाफ Contempt of Court (अदालत की अवमानना) की कार्रवाई की जा सकती है।

इस मामले में पत्नी ने हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 24 के तहत अंतरिम मेंटेनेंस प्राप्त किया था, लेकिन पति ने आदेश का पालन नहीं किया। कोर्ट ने पाया कि पति ने अपनी वास्तविक आय और बैंक खातों की पूरी जानकारी नहीं दी और जानबूझकर आदेश की अवहेलना की। इसलिए दिल्ली हाई कोर्ट ने पति को अवमानना का दोषी मानते हुए ₹2,000 जुर्माना और 3 महीने की साधारण कैद की सजा दी। यह फैसला स्पष्ट करता है कि मेंटेनेंस का आदेश केवल कागज़ी आदेश नहीं है, बल्कि उसका पालन न करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

क्या बाद में मेंटेनेंस की रकम बढ़ाई जा सकती है?

अगर समय के साथ परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, तो पत्नी कोर्ट से मेंटेनेंस की रकम बढ़ाने (Enhancement) या बदलवाने (Modification) की मांग कर सकती है।

जैसे अगर बच्चे की स्कूल फीस बढ़ गई हो, पति की सैलरी बढ़ गई हो, महंगाई के कारण खर्च बढ़ गया हो, पत्नी की तबीयत खराब हो गई हो या इलाज का खर्च बढ़ गया हो, या किराया बढ़ गया हो, तो ऐसी स्थिति में कोर्ट से मेंटेनेंस बढ़ाने की मांग की जा सकती है।

इसी तरह, अगर पति की परिस्थितियों में सच में कोई बड़ा बदलाव आया है, तो वह भी कोर्ट से रकम कम करने की मांग कर सकता है। लेकिन इसके लिए उसे सच्चा और ठोस कारण साबित करना होगा।

निष्कर्ष

मेंटेनेंस कानून का मकसद सिर्फ पैसे दिलाना नहीं है, बल्कि पत्नी को सम्मान, सुरक्षा और उसका कानूनी हक दिलाना भी है। अगर पति पत्नी और बच्चों का खर्च देने से मना करता है, तो कानून पत्नी को कोर्ट के जरिए राहत पाने का पूरा अधिकार देता है।

सही समय पर किया गया मेंटेनेंस का केस पत्नी की तुरंत आर्थिक जरूरतें पूरी करने, उसे आर्थिक परेशानी से बचाने और पति की कानूनी जिम्मेदारी तय करने में बहुत मदद करता है। इसलिए अगर पति खर्च नहीं दे रहा, तो जल्दी कानूनी कदम उठाना ही सबसे सही और मजबूत रास्ता होता है।

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FAQs

Q1. क्या मैं तलाक लिए बिना भी मेंटेनेंस का केस कर सकती हूँ?

हाँ, बिल्कुल। मेंटेनेंस मांगने के लिए पहले तलाक लेना जरूरी नहीं है। पत्नी शादी कायम रहते हुए भी कोर्ट में खर्चा मांग सकती है।

Q2. मेंटेनेंस पाने का सबसे तेज कानूनी रास्ता कौन-सा है?

अक्सर मामलों में धारा 144, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) को मेंटेनेंस पाने का सबसे तेज और व्यावहारिक कानूनी रास्ता माना जाता है।

Q3. अगर मैं नौकरी करती हूँ, तो क्या फिर भी मेंटेनेंस मांग सकती हूँ?

अगर आपकी कमाई आपके खर्च के लिए पर्याप्त नहीं है, या पति की कमाई आपसे काफी ज्यादा है, तो आप फिर भी मेंटेनेंस मांग सकती हैं।

Q4. क्या मैं अपने बच्चे के लिए भी मेंटेनेंस मांग सकती हूँ?

आप अपने बच्चे के लिए भी मेंटेनेंस मांग सकती हैं। इसमें स्कूल फीस, दवाइयों का खर्च, रोज़मर्रा का खर्च और अन्य जरूरी जरूरतें शामिल हो सकती हैं।

Q5. अगर कोर्ट के आदेश के बाद भी पति पैसा न दे तो क्या करें?

अगर पति कोर्ट के आदेश के बाद भी मेंटेनेंस नहीं देता, तो आप आदेश लागू कराने की अर्जी दाखिल कर सकती हैं। कोर्ट जरूरत पड़ने पर वसूली की कार्यवाही, वारंट, वेतन अटैच, बैंक खाता अटैच या अन्य कानूनी कदम उठा सकती है।

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