जब कोई लड़का-लड़की बिना परिवार की सहमति के कोर्ट मैरिज कर लेते हैं, तो कई परिवार इसे “इज़्ज़त का सवाल” बना लेते हैं। समाज का दबाव, जाति-धर्म का विरोध, या परिवार की सोच अक्सर हिंसा का रूप ले लेती है। सबसे पहले धमकी भरे फोन या मैसेज आते हैं – “घर वापस आ जाओ”, “अभी अलग हो जाओ”, “नहीं माने तो अंजाम बुरा होगा” ।
जब परिवार का विरोध इस हद तक बढ़ जाए कि जान और आज़ादी का खतरा महसूस होने लगे, तब मामला सिर्फ शादी का नहीं रह जाता। यह व्यक्तिगत सुरक्षा, संविधान में मिले अधिकारों और तुरंत कानूनी संरक्षण का विषय बन जाता है।
कई मामलों में परिवार लड़की को ज़बरदस्ती घर ले जाने की कोशिश करता है, लड़के को पीटने या झूठे केस में फँसाने की धमकी दी जाती है। ऐसे में कपल का सबसे बड़ा डर होता है “क्या हमारी शादी वैध है?” क्योंकि अगर शादी ही वैध नहीं होगी, तो सुरक्षा कैसे मिलेगी?
इस ब्लॉग का उद्देश्य यही है कि कपल घबराए नहीं। कानून साफ़ है – बालिग कपल की शादी वैध है और उनकी जान की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। सही समय पर सही कानूनी कदम जान बचा सकता है।
क्या बिना बताए की गई कोर्ट मैरिज वैध है?
सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि 18 साल से ऊपर की लड़की और 21 साल से ऊपर का लड़का अगर अपनी मर्जी से शादी करते हैं, तो वह पूरी तरह वैध है। भारत का संविधान हर नागरिक को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है।
स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954: इस कानून के तहत की गई कोर्ट मैरिज पूरी तरह वैध होती है। इसमें परिवार की सहमति कहीं भी अनिवार्य नहीं है।
हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955: अगर दोनों हिंदू हैं और बालिग हैं, तो विवाह वैध है, चाहे परिवार माने या न माने।
- सुप्रीम कोर्ट कई बार स्पष्ट कर चुका है कि बालिग कपल की शादी पर परिवार रोक नहीं लगा सकता
- धमकी या हिंसा गैरकानूनी है
- ऑनर के नाम पर अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता
- इसलिए पहला डर यहीं खत्म हो जाता है – आपकी शादी वैध है।
कोर्ट मैरिज के बाद धमकियां क्यों मिलने लगती हैं?
कोर्ट मैरिज के बाद कई बार परिवार या रिश्तेदार गुस्से में आ जाते हैं क्योंकि उन्हें समाज का दबाव, तथाकथित “इज़्ज़त” का डर या बच्चों पर अपना नियंत्रण खोने का एहसास होता है। उन्हें लगता है कि परिवार की बात नहीं मानी गई, जिससे उनकी प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा, और इसी कारण वे भावनात्मक या मानसिक रूप से आक्रामक हो जाते हैं।
इसी सोच की वजह से कई बार धमकी भरे फोन, मारपीट, जबरन अलग करने की कोशिश, गैरकानूनी तरीके से घर में बंद करना या झूठी पुलिस शिकायतें तक की जाती हैं। लेकिन यह साफ समझना ज़रूरी है कि ये सब काम कानून के खिलाफ हैं और किसी को भी आपकी शादी या आज़ादी की वजह से आपको परेशान करने का अधिकार नहीं है।
अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें?
सुरक्षा के लिए पुलिस से संपर्क करें
सबसे पहले आपको नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाना चाहिए और लिखित शिकायत देनी चाहिए। शिकायत में साफ-साफ लिखें:
- आपकी शादी का पूरा विवरण
- आपको धमकी देने वाले लोगों के नाम
- किस तरह की धमकियाँ दी जा रही हैं
- आपकी जान और आज़ादी को खतरा है
कानून के अनुसार पुलिस की ज़िम्मेदारी है कि वह आपकी शिकायत दर्ज करे और ज़रूरत पड़ने पर आपको सुरक्षा दे। अगर पुलिस मदद करने से मना करती है, तो यह कानून के खिलाफ है।
हाई कोर्ट से प्रोटेक्शन लें
अगर पुलिस मदद न करे या माता-पिता का साथ दे तो ऐसी स्थिति में देरी न करें और हाई कोर्ट में प्रोटेक्शन पेटिशन (रिट पिटीशन) दाखिल कर सकते हैं। यह पिटीशन संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत लगाई जाती है।
इस पिटीशन में आप कोर्ट से यह मांग कर सकते हैं:
- आपको और आपके जीवनसाथी को पुलिस सुरक्षा दी जाए
- माता-पिता या रिश्तेदारों को परेशान न करने का आदेश दिया जाए
- आपकी जान और आज़ादी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
भारत के लगभग सभी हाई कोर्ट ऐसे मामलों में कोर्ट मैरिज करने वाले कपल्स को नियमित रूप से सुरक्षा देते हैं।
आपके पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले
लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2006)
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से शादी करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। परिवार या समाज को इसमें दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर परिवार के सदस्य ऐसी शादी के कारण धमकी देते हैं, मारपीट करते हैं या नुकसान पहुँचाते हैं, तो यह सीधा आपराधिक अपराध है और पुलिस का कर्तव्य है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे।
शक्ति वाहिनी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया (2018)
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑनर के नाम पर हिंसा, धमकी या दबाव पूरी तरह गैरकानूनी है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी कपल को उसकी पसंद की शादी के कारण नुकसान नहीं पहुँचाया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने यह जिम्मेदारी तय की कि राज्य और पुलिस का कर्तव्य है कि ऐसे कपल्स को समय रहते सुरक्षा और संरक्षण दिया जाए।
इन दोनों फैसलों का मतलब साफ है कि कोर्ट मैरिज करने वाले बालिग कपल्स की सुरक्षा कानून की जिम्मेदारी है, और ये फैसले पुलिस और सभी अदालतों पर बाध्यकारी हैं।
किस कानून के तहत आपको सुरक्षा मिल सकती है?
अगर माता-पिता या रिश्तेदार आपको धमकाते हैं, मारते हैं या ज़बरदस्ती रोकते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत यह सीधे अपराध है। ऐसे मामलों में पुलिस को कार्रवाई करनी ही होती है, चाहे आरोपी माता-पिता ही क्यों न हों।
1. आपराधिक धमकी (धारा 351 BNS): जान, इज़्ज़त या नुकसान की धमकी देना
2. ग़लत तरीके से रोकना या बंद करना:
- धारा 126 BNS – रास्ता रोकना, जाने से मना करना
- धारा 127 BNS – किसी जगह पर ज़बरदस्ती बंद करके रखना, घर में बंद करना या बाहर जाने से रोकना कानूनन गलत है।
3. मारपीट या जानलेवा हमला:
- धारा 130 BNS – हमला करने की कोशिश या मारपीट करना
- धारा 109 BNS – जान से मारने की कोशिश अगर शारीरिक हिंसा होती है या जान का खतरा है, तो ये गंभीर अपराध हैं।
4. अपराध के लिए उकसाना (धारा 45 BNS): अपराध के लिए उकसाना
महत्वपूर्ण बात: कानून में यह कहीं नहीं लिखा कि माता-पिता या रिश्तेदार होने पर कार्रवाई नहीं होगी। पुलिस की कानूनी ज़िम्मेदारी है कि वह शिकायत दर्ज करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए। आपकी जान, आज़ादी और सुरक्षा कानून से ऊपर किसी रिश्ते से नहीं है।
क्या माता-पिता आपके खिलाफ झूठे केस कर सकते हैं?
हाँ, कुछ मामलों में ऐसा होता है कि माता-पिता गुस्से या दबाव में आकर झूठे केस दर्ज करवा देते हैं। वे पुलिस में किडनैपिंग, मिसिंग पर्सन की शिकायत या कभी-कभी झूठे रेप के आरोप तक लगा देते हैं, ताकि कपल पर दबाव बनाया जा सके और उन्हें अलग किया जा सके।
लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है। हमेशा अपने पास ये ज़रूरी काग़ज़ात सुरक्षित रखें:
- मैरिज सर्टिफिकेट
- आधार कार्ड
- उम्र का प्रमाण (जैसे जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट)
- शादी की फोटो
- पुलिस में दी गई शिकायत की कॉपी
ये सभी दस्तावेज़ आपके लिए कानूनी सुरक्षा का काम करते हैं और किसी भी झूठे आरोप या परेशानी में आपकी मदद और बचाव करते हैं।
अगर आपको डर है कि माता-पिता या रिश्तेदार झूठे केस दर्ज करवाकर गिरफ्तारी करवाने की कोशिश कर सकते हैं, तो ऐसी स्थिति में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 482 के तहत एंटीसिपेटरी बेल सबसे प्रभावी कानूनी सुरक्षा होती है। यह बेल गिरफ्तारी से पहले ली जाती है, ताकि पुलिस आपको अचानक पकड़ न सके।
ऐसे मामलों में अदालतें अक्सर एंटीसिपेटरी बेल दे देती हैं, क्योंकि कानून यह मानता है कि बालिग कपल को झूठे मामलों से परेशान नहीं किया जा सकता। इसलिए, अगर गिरफ्तारी का थोड़ा भी डर हो, तो अनुभवी वकील की मदद से तुरंत एंटीसिपेटरी बेल के लिए आवेदन करना सबसे समझदारी भरा कदम होता है।
आम गलतियाँ (जिनसे बचना ज़रूरी है)
- धमकी देने वालों से बहस करना: धमकी देने वालों से बहस करने से स्थिति और बिगड़ती है, खतरा बढ़ता है और बाद में सबूत जुटाना मुश्किल हो जाता है।
- अपनी लोकेशन शेयर करना: अपनी लाइव लोकेशन बताने से आपकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और पीछा या नुकसान की आशंका बढ़ती है।
- बिना कानूनी कवर समझौता करना: कानूनी सुरक्षा लिए बिना किया गया समझौता बाद में आपके खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है और अधिकार कमजोर पड़ जाते हैं।
- अफवाहों में निर्णय लेना: सुनी-सुनाई बातों पर फैसला लेने से गलत कदम उठ सकते हैं, इसलिए हमेशा सही कानूनी सलाह पर ही भरोसा करें।
निष्कर्ष
अपनी मर्जी से की गई शादी समाज के खिलाफ कोई बग़ावत नहीं है, बल्कि बालिग होने और संविधान से मिले अधिकारों का सही इस्तेमाल है। कानून शादी की वैधता यह देखकर तय नहीं करता कि माता-पिता खुश हैं या नहीं, और न ही वह “परंपरा” या “फिक्र” के नाम पर दी जाने वाली धमकियों या डराने को सही मानता है।
जैसे ही आपकी सुरक्षा खतरे में पड़ती है, चुप रहना सही विकल्प नहीं होता। समय पर कानूनी कदम उठाना, लिखित शिकायत करना और कोर्ट से सुरक्षा लेना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। अनुभव बताता है कि जो कपल कानूनी रास्ता अपनाते हैं, वे जल्दी और सुरक्षित तरीके से अपनी ज़िंदगी पर फिर से नियंत्रण पा लेते हैं। कानून सिर्फ शादी को मान्यता देने के लिए नहीं है, बल्कि उस शादी के साथ जुड़ी ज़िंदगी और सुरक्षा की रक्षा करने के लिए भी है।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
1. क्या कोर्ट मैरिज रजिस्टर होने के बाद माता-पिता उसे रोक या रद्द कर सकते हैं?
नहीं। एक बार कोर्ट मैरिज कानूनी रूप से रजिस्टर हो जाए, तो कोई भी माता-पिता या रिश्तेदार उसे रद्द नहीं कर सकता।
2. जान से खतरे की शिकायत करने पर क्या पुलिस सुरक्षा देना ज़रूरी है?
हाँ। अगर जान या आज़ादी को वास्तविक खतरा है, तो पुलिस की कानूनी ज़िम्मेदारी है कि वह सुरक्षा दे।
3. शादी के बाद धमकी देने पर क्या रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया जा सकता है?
हाँ। धमकी देना, डराना या हिंसा करना अपराध है, चाहे करने वाला कोई भी रिश्तेदार क्यों न हो।
4. क्या अलग जाति या अलग धर्म की शादी में कानूनी सुरक्षा कम हो जाती है?
नहीं। बालिगों की शादी को कानून बराबर सुरक्षा देता है, चाहे जाति या धर्म कुछ भी हो।
5. क्या बिना किसी मारपीट के भी कोर्ट से सुरक्षा माँगी जा सकती है?
हाँ। कोर्ट केवल घटना होने के बाद नहीं, बल्कि खतरे की आशंका पर भी सुरक्षा देती है।



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