भारत में डाइवोर्स के लिए पुरुषों के अधिकार क्या है?

भारत में डाइवोर्स के लिए पुरुषों के अधिकार क्या है?

कानून के तहत, सभी के साथ सेम बीहेवियर होना चाहिए। लेकिन कई बार अलग-अलग सिचुऎशन्स के चलते कानून में भी फर्क करना पड़ता है। जैसे भारत में पुरुषों और महिलाओं के लिए डाइवोर्स लेने की प्रोसेस, तरीके और शर्तों में अंतर है। उदाहरण के लिए, हिंदू मैरिज एक्ट में दोनों पार्टनर्स भरण-पोषण के लिए दावा …

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भारत में अडल्ट्री से जुड़े नए कानून – जानिए 497 की समाप्ति के बाद क्या बदला?

New laws related to adultery in India - Know what changed after the end of 497

भारतीय समाज में विवाह को एक पवित्र संस्था माना गया है। जब कोई विवाहित पुरुष या महिला अपने जीवनसाथी के अलावा किसी और के साथ सहमति से यौन संबंध बनाता है, तो इसे अडल्ट्री (व्यभिचार) कहा जाता है। पहले यह एक आपराधिक अपराध था, लेकिन अब कानून में बड़ा बदलाव हो चुका है। इस लेख …

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अगर पार्टनर जान-बूझकर आपको छोड़ दे

अगर आपका पार्टनर जान-बूझकर आपको छोड़ दे तो क्या करें?

शादी की डोर बहुत नाज़ुक होती है। कई बार ये किसी कारण से टूट भी जाती है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का पार्टनर उसे बिना किसी गलती के ही हमेशा के लिए छोड़ कर चला जाये तो क्या इसके लिए कोई कानून है? जी हाँ। कानून की भाषा में इसे “डीज़रशन” या “परित्याग” कहते हैं। …

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डाइवोर्स के बाद महिलाओं के एलिमनी से जुड़े अधिकार क्या है?

डाइवोर्स के बाद महिलाओं के मेंटेनेंस से जुड़े अधिकार क्या है?

शादी एक ज़िन्दगी भर का कमिटमेंट होता है। जब दो लोगों की शादी होती है। तो एक दूसरे की तरफ उनके कुछ कर्तव्य भी होते है। दुर्भाग्यवश कुछ शादियां टूट जाती है। लेकिन शादी टूटने या डाइवोर्स होने पर भी सारे दायित्व ख़त्म नहीं होते है। जैसे की डाइवोर्स के बाद भी एलिमनी देना, बच्चों …

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भारत में चाइल्ड कस्टडी से जुड़े कानून क्या हैं?

What are the laws related to child custody in India

किसी भी परिवार में तलाक या विवाह विच्छेद की स्थिति बेहद नाजुक होती है, और जब इसमें बच्चों की कस्टडी का मुद्दा जुड़ता है, तो स्थिति और भी जटिल हो जाती है। बच्चों के साथ क्या सही होगा, इसका निर्णय किसी एक गार्डियन  पर नहीं छोड़ा जा सकता। इस अध्याय में यह बताया गया है …

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कोर्ट मैरिज सही प्रोसेस से परफॉर्म ना करने के परिणाम।

कोर्ट मैरिज सही प्रोसेस से ना करने के परिणाम।

आजकल, लोग कई कारणों से जल्दबाज़ी में कोर्ट मैरिज कर लेते है। कारण कुछ भी हो सकता है जैसे – समय की कमी, पैसों की बचत या फिर फैमिली की मर्जी के बिना अपने प्यार से शादी करना, आदि। लेकिन यह जानना जरूरी है कि कोर्ट मैरिज करने का सही प्रोसीजर क्या है? क्योंकि कानूनी …

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हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत जुडीशियल सेपरेशन और डाइवोर्स का क्या दायरा है?

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत जुडीशियल सेपरेशन और डाइवोर्स का क्या दायरा है?

जुडीशियल सेपरेशन और डाइवोर्स दोनों अलग है। आईये जानते है कोर्ट के अनुसार इन दोनों के क्या दायरे है। जुडीशियल सेपरेशन और डाइवोर्स के दायरे:- (1) हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के सेक्शन 13(1) के तहत जुडीशियल सेपरेशन और डाइवोर्स दोनों सेम आधारों पर मिलते है, लेकिन दोनों अलग-अलग तरह राहत पहुंचाते है। (2) जुडीशियल सेपरेशन …

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कोर्ट मैरिज का सही और लीगल तरीका क्या है?

What is the correct and legal way of court marriage

कोर्ट मैरिज क्यों और कब करें? कोर्ट मैरिज एक कानूनी और वैधानिक तरीका है, जिसमें दो बालिग व्यक्ति बिना किसी धार्मिक अनुष्ठान के, आपसी सहमति से विवाह करते हैं। यह प्रक्रिया भारत के स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत होती है, जो धर्म, जाति या राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना विवाह की अनुमति देता है। …

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भारत में तलाक के बाद दोबारा शादी कब कर सकते हैं? – पूरी कानूनी जानकारी

When can you remarry after divorce in India – Complete legal information

तलाक एक अंत नहीं, एक नई शुरुआत तलाक का फैसला किसी भी जोड़े के लिए आसान नहीं होता। यह एक दर्दनाक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन तलाक का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जीवन यहीं समाप्त हो गया। कई लोग तलाक के बाद एक नई शुरुआत करना चाहते हैं — चाहे वह दूसरी शादी …

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शादी के कितने समय बाद तलाक लिया जा सकता है? जानें पूरी कानूनी प्रक्रिया

How long after marriage can a divorce be taken Know the entire legal process

भारत में विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि यह एक कानूनी अनुबंध भी है। यह एक ऐसी संस्था है, जो पति-पत्नी के बीच कई अधिकारों और जिम्मेदारियों का निर्धारण करती है।  जब यह संबंध बिगड़ते हैं और एक साथ रहना संभव नहीं होता, तो तलाक एक कानूनी उपाय बन जाता है। लेकिन, क्या शादी …

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