किसी आपराधिक केस में अदालत द्वारा नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी होना एक गंभीर स्थिति होती है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। सामान्य नोटिस या सम्मन की तरह यह साधारण प्रक्रिया नहीं है। NBW जारी होने पर पुलिस को यह अधिकार मिल जाता है कि वह व्यक्ति को गिरफ्तार करके सीधे अदालत के सामने पेश करे। लेकिन यह समझना जरूरी है कि NBW खुद में सज़ा नहीं है। यह केवल अदालत का एक कानूनी तरीका है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति कोर्ट में उपस्थित हो, खासकर तब जब पहले भेजे गए सम्मन या बेलेबल वारंट का पालन नहीं हुआ हो।
हमारे संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। इसलिए गिरफ्तारी को केवल औपचारिक या जल्दबाजी में नहीं किया जाना चाहिए। अगर NBW जारी हो भी गया है, तब भी कानून व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी रोकने या कानूनी सुरक्षा पाने के कई उपाय देता है।
इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि NBW क्या होता है, आपकी कानूनी स्थिति क्या है, आपके पास कौन-कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं, और आप अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए अदालत की प्रक्रिया का पालन कैसे कर सकते हैं।
नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) क्या होता है?
नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) एक लिखित आदेश होता है, जिसे आपराधिक अदालत जारी करती है। इस आदेश के माध्यम से पुलिस को निर्देश दिया जाता है कि संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार करके सीधे अदालत के सामने पेश किया जाए।
यह वारंट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 72 से 75 के तहत जारी किया जाता है। धारा 72 के अनुसार वारंट लिखित रूप में होता है, उस पर मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर होते हैं और वह तब तक प्रभावी रहता है जब तक अदालत उसे रद्द न कर दे या उसका पालन न हो जाए।
NBW कब जारी किया जाता है?
आमतौर पर अदालत तुरंत NBW जारी नहीं करती।:
- पहले वह सम्मन जारी करती है,
- फिर बेलेबल वारंट जारी कर सकती है,
- और यदि व्यक्ति फिर भी कोर्ट में उपस्थित नहीं होता या अदालत को लगता है कि वह जानबूझकर बच रहा है, तब NBW जारी किया जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य सज़ा देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि व्यक्ति अदालत में उपस्थित हो।
अदालत नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) क्यों जारी करती है?
अदालत आमतौर पर NBW तभी जारी करती है जब उसे लगता है कि व्यक्ति सामान्य तरीके से कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहा है। यह कदम अचानक नहीं उठाया जाता, बल्कि पहले आसान तरीके अपनाए जाते हैं।
अदालत NBW इन स्थितियों में जारी कर सकती है:
- आरोपी बार-बार कोर्ट में पेश नहीं हो रहा हो।
- अदालत द्वारा भेजा गया सम्मन नजरअंदाज किया गया हो।
- बेलेबल वारंट जारी होने के बाद भी पालन न किया गया हो।
- अदालत को लगे कि आरोपी जानबूझकर ट्रायल से बच रहा है।
- मामला गंभीर प्रकृति का हो।
आमतौर पर NBW आखिरी कदम होता है। जब पहले दिए गए नोटिस, सम्मन या बेलेबल वारंट का असर नहीं होता, तब अदालत सख्त कदम उठाते हुए नॉन-बेलेबल वारंट जारी करती है। इसका उद्देश्य सज़ा देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि आरोपी अदालत के सामने उपस्थित हो।
कोर्ट नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) क्यों जारी करती है?
कोर्ट आमतौर पर NBW तभी जारी करती है जब उसे लगता है कि व्यक्ति सामान्य तरीके से कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहा है। यह कदम अचानक नहीं उठाया जाता, बल्कि पहले आसान तरीके अपनाए जाते हैं।
अदालत NBW इन स्थितियों में जारी कर सकती है:
- आरोपी बार-बार कोर्ट में पेश नहीं हो रहा हो।
- अदालत द्वारा भेजा गया सम्मन नजरअंदाज किया गया हो।
- बेलेबल वारंट जारी होने के बाद भी पालन न किया गया हो।
- अदालत को लगे कि आरोपी जानबूझकर ट्रायल से बच रहा है।
- मामला गंभीर प्रकृति का हो।
आमतौर पर NBW आखिरी कदम होता है। जब पहले दिए गए नोटिस, सम्मन या बेलेबल वारंट का असर नहीं होता, तब अदालत सख्त कदम उठाते हुए नॉन-बेलेबल वारंट जारी करती है। इसका उद्देश्य सज़ा देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि आरोपी अदालत के सामने उपस्थित हो।
क्या NBW जारी होते ही तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी?
ज़रूरी नहीं। नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी होने के बाद पुलिस को आपको गिरफ्तार करने का अधिकार मिल जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसी समय या उसी दिन गिरफ्तारी हो ही जाएगी।
अक्सर गिरफ्तारी से पहले आपको मौका मिल सकता है कि आप खुद अदालत में उपस्थित होकर NBW रद्द (कैंसल) कराने या कानूनी सुरक्षा लेने के लिए आवेदन करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात है – देरी न करें। जैसे ही आपको NBW की जानकारी मिले, तुरंत अपने वकील से संपर्क करें और अदालत में उचित आवेदन दाखिल करें। समय पर उठाया गया सही कानूनी कदम आपकी गिरफ्तारी टाल सकता है और स्थिति को संभाल सकता है।
पहला कदम – वारंट की सही जानकारी वेरीफाई करें
घबराने से पहले सबसे पहले यह जरूरी है कि आप वारंट की पूरी और सही जानकारी पता करें। इन बातों की पुष्टि करें:
- वारंट किस अदालत ने जारी किया है?
- यह किस केस नंबर से जुड़ा है?
- वारंट किस कारण से जारी किया गया?
- यह कब जारी हुआ था?
कई बार अधूरी या गलत जानकारी से अनावश्यक डर पैदा हो जाता है। आपका वकील अदालत की फाइल देखकर या ऑनलाइन केस स्टेटस चेक करके सही स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
सही जानकारी मिलने के बाद ही अगला कानूनी कदम सही तरीके से उठाया जा सकता है।
कानूनी उपाय 1 – NBW कैंसल कराने के लिए आवेदन दें
अगर आपके खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी हो गया है, तो सबसे सामान्य और पहला कानूनी उपाय है – उसी अदालत में आवेदन देना जिसने वारंट जारी किया है, और उससे वारंट रद्द (रिकॉल) करने की प्रार्थना करना। अदालत उचित कारण होने पर NBW को रद्द कर सकती है।
आप आवेदन में कौन-कौन से कारण बता सकते हैं?
- आपको सुनवाई की तारीख की जानकारी नहीं थी
- अचानक मेडिकल इमरजेंसी हो गई थी
- यात्रा या कोई जरूरी कारण से अनुपस्थित थे
- आपका पता बदल गया था
- वकील की गलती से तारीख छूट गई
- आप आगे से रेगुलर रूप से कोर्ट में उपस्थित रहने के लिए तैयार हैं
अगर अदालत को आपका कारण सही और सच्चा लगता है, तो अक्सर NBW रद्द कर दिया जाता है।
आवेदन कैसे किया जाता है?
आपका वकील निम्नलिखित कदम उठाता है:
- NBW रद्द करने के लिए लिखित आवेदन तैयार करता है
- आपकी अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट रूप से बताता है
- जरूरी दस्तावेज (जैसे मेडिकल पेपर आदि) संलग्न करता है
- अदालत से वारंट रद्द करने का अनुरोध करता है
- भविष्य में हर तारीख पर उपस्थित रहने का लिखित आश्वासन (अंडरटेकिंग) देता है
क्या आपको खुद अदालत में उपस्थित होना जरूरी है?
अधिकतर मामलों में अदालत चाहती है कि आरोपी खुद उपस्थित होकर सहयोग दिखाए। इससे अदालत को भरोसा होता है कि आप आगे से प्रक्रिया का पालन करेंगे। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में, पहले अस्थायी राहत (इंटरिम प्रोटेक्शन) के लिए आवेदन किया जा सकता है, ताकि व्यक्तिगत रूप से पेश होने से पहले गिरफ्तारी न हो। सबसे जरूरी बात है — देरी न करें और तुरंत कानूनी कदम उठाएँ।
कानूनी उपाय 2 – एंटीसिपेटरी बेल के लिए आवेदन करें
अगर आपको गिरफ्तारी का डर है, तो आप भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 482 के तहत एंटीसिपेटरी बेल के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह आवेदन सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट में किया जाता है।
एंटीसिपेटरी बेल मतलब है कि यदि पुलिस आपको गिरफ्तार करने आए, तो आपको पहले से ही कानूनी सुरक्षा मिल जाए और तुरंत जेल न जाना पड़े। कुछ परिस्थितियों में, NBW जारी होने के बाद भी अदालत एंटीसिपेटरी बेल दे सकती है।
अदालत इन बातों को ध्यान में रखती है:
- मामला कितना गंभीर है
- आपका पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं
- आप कोर्ट में क्यों उपस्थित नहीं हो पाए
- क्या आपके भाग जाने की संभावना है
यदि अदालत को लगे कि आप जांच और सुनवाई में सहयोग करेंगे, तो वह आपको राहत दे सकती है।
कानूनी उपाय 3 – सरेंडर करना बेहतर है या छुपना?
अगर एंटीसिपेटरी बेल नहीं मिलती है, तो दूसरा रास्ता यह है कि आप खुद अदालत में उपस्थित होकर आत्मसमर्पण करें। इसके बाद आप रेगुलर बेल के लिए आवेदन कर सकते हैं। कई मामलों में, स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करना अदालत पर अच्छा प्रभाव डालता है। इससे यह साबित होता है कि आप भागने की कोशिश नहीं कर रहे और कानून का सम्मान कर रहे हैं। अक्सर स्वेच्छा से सरेंडर करने पर बेल जल्दी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर बिना सही नोटिस के NBW जारी हो गया हो तो क्या करें?
कई बार ऐसा होता है कि आपको कभी सही तरीके से सम्मन मिला ही नहीं, और फिर भी आपके खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी कर दिया गया। यदि आपको सुनवाई की तारीख की जानकारी ही नहीं थी, तो आप NBW की वैधता को अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
यह आपके पक्ष में मजबूत आधार हो सकता है, यदि:
- सम्मन आपके सही पते पर सर्व नहीं हुआ था
- आपको व्यक्तिगत रूप से नोटिस नहीं मिला
- सर्विस की प्रक्रिया कानूनी तरीके से पूरी नहीं हुई
ऐसी स्थिति में आपका वकील अदालत को यह बता सकता है कि बिना उचित नोटिस दिए NBW जारी करना उचित नहीं था। यदि अदालत को लगे कि सच में नोटिस की प्रक्रिया सही नहीं थी, तो NBW रद्द (कैंसल) किया जा सकता है। इसलिए सबसे पहले यह जांचना जरूरी है कि क्या आपको कानूनी रूप से सही तरीके से नोटिस दिया गया था या नहीं।
NBW का पासपोर्ट और प्रॉपर्टी पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहता। कई मामलों में इसका असर आपकी यात्रा, प्रॉपर्टी और वित्तीय मामलों पर भी पड़ सकता है।
1. लुक आउट सर्कुलर जारी हो सकता है
अगर अदालत या जांच एजेंसी को लगे कि आप देश छोड़कर जा सकते हैं, तो आपके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया जा सकता है। इसका मतलब है कि एयरपोर्ट या इमिग्रेशन पर आपको रोका जा सकता है, भले ही आप सामान्य रूप से यात्रा कर रहे हों।
2. पासपोर्ट जब्त किया जा सकता है
अदालत आपकी विदेश यात्रा रोकने के लिए पासपोर्ट जमा कराने का आदेश दे सकती है। कुछ मामलों में पासपोर्ट अथॉरिटी भी पासपोर्ट को इम्पाउंड कर सकती है। जब तक अदालत या संबंधित अधिकारी अनुमति न दें, आप विदेश यात्रा नहीं कर सकते।
3. प्रॉपर्टी अटैच की जा सकती है
यदि अदालत को लगता है कि आरोपी जानबूझकर छिप रहा है या पेश नहीं हो रहा है, तो कानून के तहत उसकी प्रॉपर्टी कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। यह कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है जब व्यक्ति लंबे समय तक अदालत से बचता रहता है।
4. बैंक अकाउंट प्रभावित हो सकते हैं
कुछ गंभीर मामलों, जैसे आर्थिक अपराध या धोखाधड़ी, में जांच एजेंसियां बैंक अकाउंट फ्रीज करने की कार्रवाई कर सकती हैं। इससे लेन-देन पर रोक लग सकती है, जिससे आर्थिक परेशानी हो सकती है।
क्या NBW को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
हाँ, बिल्कुल। यदि निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) आपका NBW रद्द करने से मना कर दे, तो आप हाई कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। आप निम्न कानूनी प्रावधानों के तहत हाई कोर्ट जा सकते हैं:
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 – यह हाई कोर्ट की विशेष (इनहेरेंट) शक्तियाँ हैं, जिनका उपयोग न्याय के हित में किया जाता है।
- रिट पिटीशन – यदि आपको लगे कि आपका मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है या आदेश अनुचित है।
यदि हाई कोर्ट को लगे कि NBW जरूरत से ज्यादा सख्त है, बिना पर्याप्त कारण के जारी किया गया है, या आपके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, तो वह हस्तक्षेप कर सकता है और उचित राहत दे सकता है। इसलिए अगर ट्रायल कोर्ट से राहत नहीं मिलती, तो मामला वहीं खत्म नहीं होता। आपके पास ऊपरी अदालत में जाने का कानूनी अधिकार हमेशा रहता है।
क्या NBW आपराधिक रिकॉर्ड माना जाता है?
नहीं। नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) अपने-आप में कोई सज़ा या स्थायी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता। यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य आरोपी को अदालत में पेश करना होता है। लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, कोर्ट में उपस्थित न हुआ जाए, या कानूनी कदम न उठाए जाएँ, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इससे गिरफ्तारी, सख्त आदेश या अन्य कानूनी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं।
नॉन-बेलेबल वारंट से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय
वास्तविक मामलों से यह समझने में मदद मिलती है कि अदालतें NBW को कैसे देखती हैं और किन परिस्थितियों में जारी करना सही मानती हैं।
1. रघुवंश दीवानचंद भसीन बनाम महाराष्ट्र राज्य, (2012) 9 SCC 791
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नॉन-बेलेबल वारंट सामान्य तरीके से या जल्दीबाज़ी में जारी नहीं किया जाना चाहिए। अदालत को पहले यह देखना चाहिए कि क्या आरोपी जानबूझकर कोर्ट की कार्यवाही से बच रहा है। अगर ऐसा ठोस आधार नहीं है, तो सीधे NBW जारी करना उचित नहीं है।
2. सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (2021) 1 SCC 676
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NBW आखिरी उपाय (Last Resort) होना चाहिए। पहले सम्मन और बेलेबल वारंट जैसे कम सख्त उपाय अपनाने चाहिए।
जब ये सभी उपाय असफल हो जाएँ, तभी NBW जारी किया जाना चाहिए।
3. राज्य बनाम दाऊद इब्राहिम कासकर, 1997
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि NBW उन मामलों में जरूरी हो सकता है, जहाँ आरोपी फरार हो या कानून से जानबूझकर बच रहा हो। ऐसी स्थिति में अदालत सख्त कदम उठा सकती है ताकि आरोपी को अदालत के सामने लाया जा सके।
निष्कर्ष
नॉन-बेलेबल वारंट एक गंभीर न्यायिक कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपके कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं। अदालत का उद्देश्य केवल आपकी उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है, जबकि संविधान आपकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की भी रक्षा करता है। जरूरी बात यह है कि आप समय पर कार्रवाई करें, सही नीयत के साथ अदालत के सामने पेश हों और बिना देरी उचित कानूनी राहत मांगें। अदालत हमेशा सहयोग और जिम्मेदार व्यवहार को महत्व देती है। सही समय पर सही कानूनी सलाह लेने से स्थिति को संभाला जा सकता है। NBW कोई अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि केवल एक कानूनी प्रक्रिया है।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
1. क्या बिना पहले सम्मन दिए सीधे नॉन-बेलेबल वारंट जारी हो सकता है?
आमतौर पर अदालत पहले सम्मन या बेलेबल वारंट जारी करती है। लेकिन अगर मामला गंभीर हो या अदालत को लगे कि आरोपी भाग सकता है, तो सीधे नॉन-बेलेबल वारंट भी जारी किया जा सकता है।
2. नॉन-बेलेबल वारंट कितने समय तक वैध रहता है?
यह वारंट तब तक प्रभावी रहता है जब तक उसे लागू (एक्जीक्यूट), रद्द (कैंसल) या वापस (रिकॉल) नहीं किया जाता। यह अपने-आप समय के साथ खत्म नहीं होता।
3. क्या नॉन-बेलेबल वारंट लंबित होने पर विदेश यात्रा कर सकते हैं?
नहीं। ऐसी स्थिति में यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि एयरपोर्ट पर आपको रोका जा सकता है। यात्रा से पहले वारंट की समस्या हल कर लेना बेहतर है।
4. क्या नॉन-बेलेबल वारंट नौकरी या बैकग्राउंड वेरिफिकेशन को प्रभावित करता है?
हाँ। लंबित आपराधिक केस या वारंट बैकग्राउंड जांच में सामने आ सकते हैं। इससे खासकर सरकारी या नियमबद्ध क्षेत्रों में नौकरी पर असर पड़ सकता है।
5. क्या मेरे खिलाफ NBW होने पर मेरे परिवार के लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है?
नहीं। नॉन-बेलेबल वारंट केवल उसी व्यक्ति के खिलाफ जारी होता है, जिसका नाम केस में है। परिवार के सदस्यों को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, जब तक वे अलग से केस में शामिल न हों।



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