कोर्ट ने एक्स-पार्टी डिक्री पास कर दी है? तुरंत उसे रद्द या चैलेंज कैसे करें?

The court has passed an ex-parte decree How can I immediately cancel or challenge it

कानून का एक बुनियादी सिद्धांत यह है कि किसी भी व्यक्ति के अधिकारों से जुड़ा फैसला लेने से पहले उसे अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की सुनवाई के बिना उसके खिलाफ आदेश पारित कर दिया जाए, तो यह अन्यायपूर्ण माना जाता है।

भारतीय सिविल प्रक्रिया कानून इस स्थिति को समझता है और ऐसे मामलों के लिए कानूनी उपाय देता है, जहाँ किसी पक्ष को सुने बिना एकतरफा (एक्स-पार्टी) डिक्री पारित हो गई हो। यह ब्लॉग बताएगा कि एक्स-पार्टी डिक्री क्या होती है और उसे कानून के अनुसार कैसे चुनौती दी जा सकती है या रद्द कराया जा सकता है।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

एक्स-पार्टी डिक्री क्या होती है?

एक्स-पार्टी डिक्री वह आदेश होता है जो अदालत तब पास करती है, जब केस का दूसरा पक्ष (प्रतिवादी/रिस्पॉन्डेंट) सुनवाई के समय अदालत में मौजूद नहीं होता।

ऐसी स्थिति आमतौर पर तब बनती है:

  • जब रिस्पॉन्डेंट सुनवाई की तारीख पर अदालत में हाज़िर नहीं होता
  • अदालत मान लेती है कि उसे सम्मन (कोर्ट नोटिस) सही तरीके से मिल चुका था
  • वादी (मुकदमा करने वाला) अपनी बात और सबूत अदालत के सामने रख देता है
  • अदालत केवल वादी के सबूतों के आधार पर फैसला सुना देती है

क्या एक्स-पार्टी डिक्री का मतलब यह है कि आप हमेशा के लिए केस हार गए?

नहीं। एक्स-पार्टी डिक्री आने का यह अर्थ नहीं होता कि अब आपके पास कोई रास्ता नहीं बचा। कानून आपको दोबारा अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देता है। आप समय रहते ये कदम उठा सकते हैं:

  • अदालत में आवेदन देकर एक्स-पार्टी डिक्री को रद्द (सेट-असाइड) कराने की मांग कर सकते हैं
  • उच्च अदालत में अपील दाखिल कर सकते हैं
  • कुछ परिस्थितियों में डिक्री के निष्पादन (एग्जीक्यूशन) को भी चुनौती दे सकते हैं
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जितनी जल्दी कार्रवाई की जाए, उतना ही बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है।

अक्सर एक्स-पार्टी डिक्री क्यों हो जाती है?

  • आपको कभी कोर्ट का सम्मन मिला ही नहीं
  • गलत या पुराना पता लिख दिया गया
  • बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी के कारण आप उपस्थित नहीं हो पाए
  • यात्रा या कोई मजबूरी रही
  • वकील की लापरवाही या गलती
  • सुनवाई की तारीख को लेकर गलतफहमी

यदि आपके पास कोई वास्तविक और सही कारण है, तो अदालत ऐसे कारणों को गंभीरता से देखती है और उचित मौका देती है।

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पहला कदम – डिक्री की सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त करें

पहला कदम यह है कि आप तुरंत उसी अदालत में आवेदन देकर जजमेंट (फैसला) और डिक्री की सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त करें। साथ ही केस से जुड़े आदेश और पूरी फाइल की जानकारी भी लें। इन दस्तावेज़ों से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि अदालत ने किस आधार पर फैसला दिया है और आपके खिलाफ क्या आदेश पारित हुआ है। बिना इन कागज़ों के आप न तो एक्स-पार्टी डिक्री को रद्द कराने के लिए सही तरीके से आवेदन कर पाएंगे और न ही अपील या कोई अन्य कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे। इसलिए देरी किए बिना प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करना बेहद जरूरी है।

मुख्य उपाय – सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की ऑर्डर 9 रूल 13 के तहत आवेदन

यह सबसे प्रभावी कानूनी तरीका है जिसके द्वारा आप अदालत से निवेदन कर सकते हैं कि एक्स-पार्टी डिक्री को रद्द (सेट-असाइड) किया जाए।

इस आवेदन का उद्देश्य यह बताना होता है कि आपको मुकदमे में अपना पक्ष रखने का वास्तविक अवसर नहीं मिला, इसलिए फैसला एकतरफा हो गया।

आधार:
  • आपको कभी भी मुकदमे का सम्मन (नोटिस) सही तरीके से प्राप्त नहीं हुआ, या
  • किसी उचित और वास्तविक कारण (जैसे बीमारी, आपात स्थिति, गलत तारीख की जानकारी, वकील की लापरवाही आदि) से आप अदालत में उपस्थित नहीं हो पाए।
  • यदि अदालत आपके कारणों से संतुष्ट हो जाती है, तो वह एक्स-पार्टी डिक्री रद्द कर केस को दोबारा सुनवाई के लिए बहाल कर सकती है।

आवेदन करने की की समय सीमा क्या है?

ऑर्डर 9 रूल 13 के तहत आवेदन आमतौर पर उस तारीख से 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए, जिस दिन आपको एक्स-पार्टी डिक्री के बारे में जानकारी मिली हो। अगर किसी ठोस और सही कारण से देरी हो गई है, तो आप लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत अदालत से देरी माफ करने (डिले कंडोनेशन) की प्रार्थना कर सकते हैं। अदालत आपके कारणों को देखकर तय करती है कि देरी माफ की जाए या नहीं। इसलिए जैसे ही डिक्री की जानकारी मिले, तुरंत कार्रवाई करना आपके लिए सबसे सुरक्षित होता है।

आवेदन दाखिल करने की प्रक्रिया क्या है?

  • सबसे पहले एक आवेदन तैयार किया जाता है, जिसमें साफ-साफ बताया जाता है कि आप कोर्ट की तारीख पर क्यों उपस्थित नहीं हो पाए।
  • इस आवेदन के साथ एफिडेविट लगाया जाता है, जिसमें आप शपथ लेकर अपने बताए गए तथ्यों को सही बताते हैं।
  • अपने समर्थन में जो भी दस्तावेज हों (जैसे मेडिकल पेपर, यात्रा प्रमाण, नोटिस न मिलने का प्रमाण), उन्हें आवेदन के साथ संलग्न किया जाता है।
  • यह आवेदन उसी कोर्ट में दाखिल किया जाता है, जिसने एक्स-पार्टी डिक्री पास की थी।
  • कोर्ट दूसरी पार्टी को नोटिस भेजती है, ताकि वे भी अपनी बात रख सकें।
  • तय तारीख पर कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनती है
  • सभी तथ्यों को देखकर कोर्ट तय करती है कि एक्स-पार्टी डिक्री रद्द की जाए या नहीं
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अगर कोर्ट आवेदन स्वीकार कर ले तो क्या होता है? 

यदि कोर्ट आपका आवेदन स्वीकार कर लेती है, तो पहले से पास की गई एक्स-पार्टी डिक्री रद्द कर दी जाती है, पुराना मुकदमा फिर से बहाल हो जाता है, आपको अपना लिखित बयान दाखिल करने का अवसर मिलता है और मामला दोबारा सामान्य तरीके से सुनवाई के लिए आगे बढ़ता है।

एक्स-पार्टी डिक्री के खिलाफ अपील करने के अन्य विकल्प क्या है?

अगर आपके खिलाफ एक्स-पार्टी डिक्री पास हो गई है, तो आपके पास एक और कानूनी रास्ता यह है कि आप सिविल प्रोसीजर कोड, 1908 की धारा 96(2) के तहत सीधे अपील दायर कर सकते हैं। इस अपील में आप कोर्ट से यह अनुरोध करते हैं कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला कानूनी रूप से गलत है और उसे रद्द या संशोधित किया जाए।

यह उपाय खास तौर पर तब उपयोगी होता है, जब फैसले में गंभीर कानूनी गलतियाँ हों, कानून की गलत व्याख्या की गई हो, या रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों के आधार पर मामला आपके पक्ष में मजबूत हो। अपील में आप केवल अपनी अनुपस्थिति का कारण नहीं बताते, बल्कि पूरे जजमेंट की सही-गलतता को चुनौती देते हैं। अगर अपीलीय कोर्ट संतुष्ट हो जाती है, तो वह एक्स-पार्टी डिक्री को रद्द कर सकती है या मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज सकती है।

क्या दोनों उपाय एक साथ अपनाए जा सकते हैं? 

हाँ, कानून में दोनों उपाय उपलब्ध हैं, यानी आप ऑर्डर 9 रूल 13 CPC के तहत आवेदन भी कर सकते हैं और धारा 96(2) CPC के तहत अपील भी दायर कर सकते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि यदि आपकी अपील का फैसला हो जाता है, तो उसके बाद ऑर्डर 9 रूल 13 के तहत दिया गया आवेदन प्रभावी नहीं रह सकता। इसलिए किसी भी कदम से पहले अनुभवी वकील से सही कानूनी सलाह लेना बेहद आवश्यक है, ताकि आपके मामले के अनुसार सबसे बेहतर विकल्प चुना जा सके।

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ऑर्डर 9 रूल 13 बनाम धारा 96(2)

ऑर्डर 9 रूल 13धारा 96(2)
इसका फोकस इस बात पर होता है कि आप सुनवाई के दिन अदालत में क्यों उपस्थित नहीं हो पाए।इसका फोकस मामले के गुण-दोष (मेरिट) और फैसले की कानूनी सही-गलत पर होता है।
इसमें यह दिखाया जाता है कि सम्मन सही तरीके से तामील नहीं हुआ या कोई उचित कारण था।इसमें यह बताया जाता है कि कोर्ट का निर्णय तथ्य या कानून के अनुसार गलत है।
आवेदन उसी अदालत में दाखिल किया जाता है जिसने एक्स-पार्टी डिक्री पास की थी।अपील उच्च न्यायालय या अपीलीय अदालत में दायर की जाती है।
प्रक्रिया सरल और तेज होती है।प्रक्रिया विस्तृत होती है और समय अधिक लग सकता है।
उद्देश्य एक्स-पार्टी डिक्री को रद्द कराकर मुकदमा फिर से शुरू करवाना होता है।उद्देश्य पूरे फैसले को चुनौती देकर बदलवाना या रद्द करवाना होता है।

निष्कर्ष

एक्स-पार्टी डिक्री दिखने में भले ही अंतिम लगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपका केस हमेशा के लिए खत्म हो गया है। भारतीय कानून मानता है कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा और उचित मौका मिलना चाहिए।

अगर आप समय पर सही कानूनी कदम उठाते हैं, तो आप अपना मामला फिर से खुलवा सकते हैं और अपनी बात अदालत के सामने रख सकते हैं। कानून किसी को उसकी मजबूरी या वास्तविक अनुपस्थिति के लिए सज़ा देने के लिए नहीं बना है, बल्कि न्याय और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बना है।

एक बार कोर्ट में उपस्थित न हो पाने का मतलब यह नहीं कि आपकी आवाज़ हमेशा के लिए दब गई है।

किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।

FAQs

1. अगर मुझे कई महीनों बाद एक्स-पार्टी डिक्री के बारे में पता चले, तो क्या मैं इसे चैलेंज कर सकता/सकती हूँ?

हाँ। आप फिर भी एक्स-पार्टी डिक्री को रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आपको देरी का सही कारण बताना होगा। यदि कारण उचित हुआ, तो अदालत देरी माफ कर सकती है।

2. क्या एक्स-पार्टी डिक्री रद्द कराने का आवेदन देने से अपने आप एग्जीक्यूशन (कार्रवाई) रुक जाती है?

नहीं। इसके लिए अलग से स्टे (रोक) का आवेदन देना पड़ता है। जब तक स्टे नहीं मिलता, डिक्री पर कार्रवाई चल सकती है।

3. क्या एक्स-पार्टी डिक्री को आंशिक रूप से रद्द किया जा सकता है?

आमतौर पर डिक्री या तो पूरी तरह रद्द होती है या बिल्कुल नहीं। लेकिन कुछ मामलों में अदालत परिस्थितियों के अनुसार विशेष निर्देश दे सकती है।

4. अगर सामने वाले पक्ष ने जानबूझकर गलत पता देकर एक्स-पार्टी डिक्री करवाई हो तो क्या होगा?

यह धोखाधड़ी और गलत जानकारी देना माना जाता है। अदालत इसे गंभीरता से लेती है और डिक्री रद्द कर सकती है, साथ ही जुर्माना भी लगा सकती है।

5. क्या एक्स-पार्टी डिक्री रद्द कराने के आवेदन में मेरी व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी है?

आमतौर पर नहीं। आपका वकील आपकी ओर से पेश हो सकता है। लेकिन जरूरत पड़ने पर अदालत आपको व्यक्तिगत रूप से बुला सकती है।

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