किसी भी समाज में कानून का पालन बहुत जरूरी है और हर व्यक्ति का जीवन कीमती है। जब कोई किसी और की जान लेने की कोशिश करता है, लेकिन सफल नहीं होता, तब भी कानून इसे बहुत गंभीर अपराध मानता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 पुराने IPC की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के समान है और ऐसे असफल प्रयासों पर सजा देने पर ध्यान केंद्रित करती है।
इस धारा में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है इरादा मतलब, हत्या का इरादा होना। परिणाम (व्यक्ति की मौत या जीवित रहना) कम मायने रखता है। कानून का मकसद है ऐसे हिंसक व्यवहार को रोकना और लोगों को सुरक्षित रखना, ताकि कोई भी हत्या की योजना या प्रयास करने से पहले सोचे।
BNS की धारा 109 क्या कहती है?
- अगर कोई व्यक्ति किसी की जान लेने की कोशिश करता है, लेकिन सफल नहीं होता, तो उसे 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
- अगर इस प्रयास में किसी को चोट पहुँचती है, तो कोर्ट उस व्यक्ति को आजीवन कारावास भी दे सकती है।
- और अगर आरोपी पहले से ही आजीवन कारावास काट रहा है और ऐसी कोशिश करता है, तो उसे फांसी या बची हुई जिंदगी तक की जेल दी जा सकती है।
इस धारा का मुख्य उद्देश्य है हत्या का इरादा रखने वालों को गंभीर सजा देना, चाहे हत्या सफल हुई हो या नहीं।
धारा 109 BNS क्यों महत्वपूर्ण है?
कानून में जीवन सबसे बुनियादी अधिकार है। BNS के अनुसार किसी की जान लेने की कोशिश भी गंभीर अपराध मानी जाती है, भले ही व्यक्ति बच जाए।
इस कानून में मुख्य ध्यान नतीजे (मृत्यु) पर नहीं बल्कि इरादे और किए गए कार्य पर है। यदि किसी का व्यवहार ऐसा है कि अगर मौत हो जाती तो यह हत्या होती, तो उस व्यक्ति को कड़ी सज़ा भुगतनी होगी। यह प्रावधान हिंसक व्यवहार को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए बनाया गया है।
BNS 109, के अध्याय VI (मानव जीवन से संबंधित अपराध) का हिस्सा है। यह पुरानी IPC की हत्या के प्रयास संबंधी धाराओं की जगह लेता है और आधुनिक अपराध न्याय मानकों के अनुसार इरादे और हानि पर ध्यान केंद्रित करता है।
धारा 109 BNS के मुख्य कानूनी सिद्धांत
- इरादा या ज्ञान: अपराधी ने किसी की जान लेने का इरादा होना चाहिए या उसे पूरी तरह पता होना चाहिए कि उसके कार्य से अगर मृत्यु हो जाती तो यह हत्या होती। आकस्मिक या बिना इरादे वाले कार्य इस धारा में नहीं आते।
- ऐसा कार्य जो मृत्यु का कारण बन सकता हो: केवल इरादा ही पर्याप्त नहीं है, कार्य ऐसा होना चाहिए कि अगर मृत्यु हो जाती तो यह हत्या मानी जाती। जैसे, किसी पर गोली चलाना, छुरा घोंपना या ज़हर मिलाना।
- परिणाम घातक होना जरूरी नहीं: हत्या का प्रयास वही माना जाता है जिसमें मौत नहीं हुई। अगर व्यक्ति बच भी जाए, तब भी आरोपी को Section 109 Bns के तहत दंडित किया जा सकता है।
- चोट या हानि हुई: अगर प्रयास से चोट या हानि होती है भले ही मौत न हो, तो सज़ा और कठोर हो सकती है, और कोर्ट जीवन भर की सज़ा भी दे सकती है।
धारा 109 Bns के आसान उदाहरण
- उदाहरण 1: A ने B को मारने के लिए गोली चलाई, लेकिन B बच गया। भले ही मौत नहीं हुई, A को धारा 109 Bns के तहत मुकदमा चल सकता है।
- उदाहरण 2: C ने D के खाने में ज़हर मिलाया, लेकिन D ने नहीं खाया। यह भी हत्या का प्रयास माना जाएगा।
- उदाहरण 3: E ने F को मारने के लिए गहरे पानी में धक्का दिया, लेकिन F को बचा लिया गया। इसे भी हत्या का प्रयास माना जाएगा।
पुलिस कार्रवाई और बेल के नियम – क्या जानना जरूरी है
धारा 109 BNS गंभीर अपराधों से संबंधित है। इस वजह से:
- यह संज्ञेय अपराध है – पुलिस आरोपी को बिना कोर्ट की अनुमति गिरफ्तार कर सकती है।
- यह गैर-बेल योग्य है – बेल आम तौर पर स्वतः नहीं मिलती और कोर्ट के विवेक पर निर्भर करती है, जो अपराध की गंभीरता को दर्शाती है।
इसका मतलब है कि इस मामले में सरकार खुद कार्रवाई करती है और आरोपी पर मुकदमे से पहले ही अदालत की कड़ी निगरानी रहती है।
कानूनी प्रक्रिया और मुकदमे की कार्यवाही
जब धारा 109 BNS के तहत कोई अपराध दर्ज होता है, तो इसके लिए कानूनी प्रक्रिया कई चरणों में होती है। इसे आसान और क्लाइंट‑फ्रेंडली भाषा में समझें:
1. FIR दर्ज करना: पीड़ित या कोई गवाह पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराता है। पुलिस पहली जानकारी के आधार पर FIR (First Information Report) दर्ज करती है और मामले की जांच शुरू करती है। FIR दर्ज होना कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत है और आरोपी पर कानूनी कार्रवाई का पहला कदम माना जाता है।
2. जांच (Investigation): पुलिस घटनास्थल पर जाकर सबूत इकट्ठा करती है, गवाहों से बयान लेती है और घटनाक्रम की सत्यता जांचती है। यदि अपराध गंभीर है, तो विशेषज्ञों की राय भी ली जा सकती है। जांच के बाद पुलिस आरोप पत्र (Chargesheet) तैयार करती है, जो अदालत में पेश किया जाता है।
3. गिरफ्तारी और बेल (Arrest and Bail Hearing): क्योकि यह अपराध गंभीर और गैर-बेल योग्य है, इसलिए आरोपी को पुलिस गिरफ्तारी कर सकती है। बेल अपने आप नहीं मिलती, इसे केवल अदालत के विवेक पर निर्भर किया जाता है। अदालत आरोपी के सबूतों, अपराध की गंभीरता और पीड़ित की सुरक्षा की स्थिति देखकर बेल देने या न देने का फैसला करती है।
4. मुकदमे की सुनवाई (Trial): धारा 109 के तहत मामलों को गंभीरता के कारण सीधे सेशंस कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा जाता है। कोर्ट में मामले की पूरी जांच होती है और दोनों पक्ष, प्रॉसिक्यूशन और डिफेन्स अपने सबूत, गवाह और विशेषज्ञ राय पेश करते हैं।
5. सबूत और दलीलें (Evidence and Arguments): प्रॉसिक्यूशन पक्ष यह साबित करता है कि आरोपी ने जानबूझकर किसी की जान लेने का प्रयास किया और उसकी हरकतें हत्या के इरादे के अनुरूप थीं। डिफेन्स पक्ष आरोपी के पक्ष में डिफेन्स पेश करता है, जैसे कि इरादा नहीं था, घटना दुर्घटना थी या आरोपी मानसिक रूप से प्रभावित था।
6. निर्णय और सज़ा (Judgment and Sentencing): सभी सबूतों, गवाहों और कानूनी दलीलों के आधार पर अदालत निर्णय देती है। यदि आरोपी दोषी पाया जाता है, तो अदालत धारा 109 के अनुसार सज़ा सुनाती है, जिसमें 10 साल तक की जेल, जुर्माना या गंभीर चोट होने पर उम्रकैद भी हो सकती है।
धारा 109 के आरोप का बचाव
धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास के मामले में बचाव करना कानूनी रणनीति पर निर्भर करता है। कुछ सामान्य बचाव इस प्रकार हैं:
- इरादे की कमी (Lack of Intent): अगर आरोपी ने सच में किसी को मारने का इरादा नहीं किया और उसकी हरकतें हत्या की मंशा के बिना हुईं, तो यह धारा 109 का मामला कमजोर हो सकता है।
- दुर्घटना या आत्म‑रक्षा (Accident or Self‑Defence): अगर घटना गलती से हुई या ऐसी परिस्थिति में हुई जहाँ आत्म‑रक्षा जरूरी थी, तो कोर्ट आरोपी को धारा 109 के तहत दोषी नहीं ठहराएगी।
- सबूतों की कमी (Insufficient Evidence): अगर अभियोजन पक्ष के पास स्पष्ट सबूत नहीं हैं कि आरोपी ने जानबूझकर किसी की जान लेने की कोशिश की, तो आरोपी बरी हो सकता है।
- मानसिक स्थिति (Mental Condition): अगर आरोपी मानसिक रूप से सक्षम नहीं था और उसका इरादा बनाने की क्षमता नहीं थी जैसे कोई बीमारी तो यह कानूनी बचाव माना जा सकता है।
पीड़ितों और आरोपी के लिए व्यावहारिक सलाह
अगर आप या आपका कोई प्रिय व्यक्ति हत्या के प्रयास का शिकार हुआ है:
- तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएँ।
- तुरंत मेडिकल और कानूनी मदद लें।
- सबूत सुरक्षित रखें जैसे मेडिकल रिपोर्ट, वीडियो, मैसेज, गवाह आदि।
- अपने वकील को पूरी और ईमानदार जानकारी दें — इससे मामला मजबूत बनता है।
अगर कोई व्यक्ति धारा 109 के तहत आरोपी है:
- तुरंत क्रिमिनल वकील से संपर्क करें।
- बिना वकील के पुलिस से बात न करें।
- अपनी रक्षा के लिए सबूत इकट्ठा करें (जैसे गवाहों के बयान, आत्म‑रक्षा के हालात)।
- अपने वकील के साथ सभी कानूनी बचावों पर ध्यानपूर्वक विचार करें।
निष्कर्ष
Section 109 BNS केवल एक कानून नहीं है, बल्कि समाज के जीवन के महत्व को दर्शाने वाला आईना है। यह याद दिलाता है कि किसी की जान लेने का इरादा और जानबूझकर की गई कार्रवाई गंभीर अपराध है और इसके लिए सख्त सजा हो सकती है। यह कानून सिर्फ सजा देने के लिए नहीं, बल्कि एक नैतिक और सामाजिक चेतावनी के रूप में भी है कि किसी की जान को खतरे में डालना कानून के नजरिए में गंभीर माना जाता है।
पीड़ितों के लिए, BNS धारा 109 उन्हें न्याय दिलाने और सुरक्षा का भरोसा देने का अधिकार देती है। संभावित अपराधियों के लिए यह चेतावनी है कि केवल इरादा ही नहीं, बल्कि लापरवाही और खतरनाक कोशिशों पर भी निगरानी रखी जाती है। यह कानून समाज और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाता है और स्पष्ट करता है कि जीवन की कीमत बेहद ज्यादा है।
अंत में, BNS Section 109 केवल सजा देने का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज की नैतिक सोच और जीवन के महत्व को कानून में सुरक्षित करती है। यह बताता है कि सिर्फ इरादा ही नहीं, बल्कि किये गए कार्य भी कानून में महत्वपूर्ण होते हैं।
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अन्य मुख्य धाराएं
FAQs
1. धारा 109 BNS
धारा 109 BNS हत्या के प्रयास से संबंधित है। इसमें कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी की जान लेने की कोशिश करता है, लेकिन पीड़ित बच जाता है, तब यह अपराध बनता है।
2. धारा 109 BNS में सजा क्या है?
इस अपराध में दोषी को दस साल तक जेल हो सकती है। अगर कोई चोट या गंभीर नुकसान हुआ हो तो जीवन‑पर्यंत कारावास या जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
3. क्या धारा 109 संज्ञेय अपराध है?
हाँ, यह संज्ञेय अपराध है। पुलिस इस अपराध में आरोपी को बिना कोर्ट की अनुमति गिरफ्तार कर सकती है। यह गैर-बेल योग्य अपराध भी माना जाता है।
4. हत्या के प्रयास में बेल मिल सकती है?
बेल हत्या के प्रयास में अधिकार नहीं है। आरोपी केवल कोर्ट के विवेक पर ही बेल के लिए आवेदन कर सकता है। अदालत परिस्थिति और गंभीरता के अनुसार फैसला करती है।
5. हत्या और हत्या के प्रयास में अंतर क्या है?
हत्या में पीड़ित की मौत हो जाती है। हत्या के प्रयास में आरोपी ने जानबूझकर मौत का प्रयास किया, लेकिन पीड़ित बच जाता है। सजा दोनों में गंभीर होती है।



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