किसी महिला की मर्यादा का अपमान करने पर क्या सज़ा होती है? जानिए BNS 2023 की धारा 79

What is the punishment for insulting the modesty of a woman Read Section 79 of the BNS 2023.

सम्मान और गरिमा हर व्यक्ति का मूल अधिकार है। अगर किसी महिला के साथ ऐसे शब्द, इशारे या हरकत की जाती है जिसका मकसद उसकी मर्यादा को ठेस पहुँचाना हो, तो कानून इसे अपराध मानता है।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) लागू होने के बाद आपराधिक कानूनों में बदलाव किया गया है। आज के समय में यह कानून और भी जरूरी हो गया है, क्योंकि उत्पीड़न सिर्फ सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर ही नहीं होता, बल्कि सोशल मीडिया, फोन कॉल, मैसेजिंग ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी होता है।

धारा 79 BNS 2023 को समझना इसलिए जरूरी है ताकि पीड़ित महिला अपने अधिकार जान सके और जिस पर आरोप लगा है, वह भी अपनी कानूनी स्थिति को सही तरह समझ सके।

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भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 79 क्या है?

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 79 उस अपराध से संबंधित है, जिसमें किसी महिला की मर्यादा (Modesty) का अपमान करने की नीयत से शब्द, इशारा या कोई हरकत की जाती है। यह धारा ऐसे किसी भी व्यक्ति को दंडित करती है जो:

  • कोई अशोभनीय या अपमानजनक शब्द बोलता है,
  • कोई अश्लील या आपत्तिजनक आवाज या इशारा करता है,
  • कोई आपत्तिजनक वस्तु दिखाता है,
  • या किसी महिला की निजी जिंदगी (Privacy) में दखल देता है,

और यह सब इस इरादे से करता है कि वह महिला उसे सुने या देखे और उसकी मर्यादा को ठेस पहुँचे।

इस कानून का उद्देश्य महिलाओं को मानसिक उत्पीड़न, छेड़छाड़ और अपमानजनक व्यवहार से बचाना है। यह जरूरी नहीं कि शारीरिक छेड़छाड़ ही हो – केवल शब्दों, इशारों या ऑनलाइन संदेशों के जरिए भी यदि महिला को अपमानित करने की नीयत साबित हो जाती है, तो यह धारा लागू हो सकती है।

धारा 79 BNS 2023 के तहत सजा क्या है?

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 79 के तहत यदि किसी व्यक्ति द्वारा महिला की मर्यादा का अपमान करने की नीयत साबित हो जाती है, तो यह एक आपराधिक अपराध माना जाता है। इस धारा के अनुसार सजा में शामिल हो सकता है:

  • साधारण कारावास – जो अधिकतम 3 साल तक हो सकता है, और
  • जुर्माना – जिसकी राशि कोर्ट परिस्थितियों के अनुसार तय करती है।

इसका मतलब यह है कि यह कोई छोटा या केवल समझाने वाला मामला नहीं है, बल्कि कानून इसे गंभीरता से लेता है। दोष सिद्ध होने पर आरोपी को जेल भी हो सकती है और आर्थिक दंड भी देना पड़ सकता है।

कोर्ट सजा तय करते समय यह देखती है कि घटना की गंभीरता क्या थी, महिला को कितनी मानसिक या सामाजिक परेशानी हुई, और आरोपी का व्यवहार कैसा था। इसलिए ऐसी हरकतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इनके कानूनी परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

कानून में “मर्यादा (Modesty)” का क्या मतलब है?

कानून में “मर्यादा” शब्द की कोई बिल्कुल तय और लिखित परिभाषा नहीं दी गई है। लेकिन समय-समय पर कोर्ट ने अपने फैसलों में इसका मतलब समझाया है।

आम तौर पर “मर्यादा” का मतलब होता है:

  • महिला की शालीनता और सम्मान की भावना,
  • उसकी यौन गरिमा,
  • उसकी निजी जिंदगी का अधिकार,
  • और उसके स्त्री होने के सम्मान की सुरक्षा।

क्या यह अपराध कॉग्निज़ेबल और बेलेबल है?

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 79 के तहत महिला की मर्यादा का अपमान करने वाला अपराध आमतौर पर कॉग्निज़ेबल माना जाता है। इसका मतलब है कि पुलिस बिना कोर्ट की अनुमति के FIR दर्ज कर सकती है और जांच शुरू कर सकती है।

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क्या इसमें बेल मिल सकती है? यह अपराध परिस्थितियों के अनुसार बेलेबल हो सकता है। यदि अपराध की गंभीरता कम है और आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है, तो उसे बेल मिल सकती है। बेल देने या न देने का अंतिम निर्णय संबंधित अदालत लेती है।

किस अदालत में सुनवाई होती है? इस प्रकार के मामलों की सुनवाई मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा की जाती है।

FIR कैसे दर्ज करें? – स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

यदि किसी महिला की मर्यादा का अपमान हुआ है और मामला BNS की धारा 79 के अंतर्गत आता है, तो नीचे दिए गए तरीके से FIR दर्ज की जा सकती है:

1. नजदीकी थाने में शिकायत दें: सबसे पहले अपने नजदीकी पुलिस थाने में जाकर लिखित शिकायत दें। शिकायत में पूरी घटना, तारीख, समय, स्थान और आरोपी का नाम (यदि पता हो) साफ-साफ लिखें।

2. महिला पुलिस अधिकारी के सामने बयान देने का अधिकार: कानून के अनुसार महिला को यह अधिकार है कि उसका बयान महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाए। यदि वह असहज महसूस करती है, तो वह यह मांग कर सकती है।

3. सबूत सुरक्षित रखें

  • मेडिकल रिपोर्ट (यदि शारीरिक छेड़छाड़ हुई हो)
  • व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट
  • गवाहों के नाम और संपर्क
  • सीसीटीवी फुटेज (यदि उपलब्ध हो)
  • डिजिटल सबूत को डिलीट न करें और उसकी कॉपी सुरक्षित रखें।

4. FIR की कॉपी अवश्य लें: FIR दर्ज होने के बाद उसकी सत्यापित कॉपी लेना आपका कानूनी अधिकार है। 

5. मजिस्ट्रेट के सामने बयान: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के संबंधित प्रावधानों के तहत, मजिस्ट्रेट के सामने भी आपका बयान दर्ज हो सकता है, जो आगे ट्रायल में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है।

अगर पुलिस FIR दर्ज न करे तो क्या करें?

यदि पुलिस आपकी शिकायत दर्ज करने से मना कर देती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कानून आपको अन्य विकल्प भी देता है:

  • वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को लिखित शिकायत: आप पुलिस अधीक्षक (SP) या उच्च अधिकारी को लिखित शिकायत भेज सकते हैं।
  • मजिस्ट्रेट के पास आवेदन: BNSS की धारा 156(3) के समकक्ष प्रावधान के तहत आप सीधे मजिस्ट्रेट से FIR दर्ज कराने का आदेश दिलवा सकते हैं।
  • ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग: कई राज्यों में ऑनलाइन पुलिस शिकायत पोर्टल उपलब्ध है, जहां आप डिजिटल शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • स्टेट वूमेन कमीशन से संपर्क: स्टेट वूमेन कमीशन या नेशनल वूमेन कमीशन में भी शिकायत की जा सकती है। वे पुलिस पर कार्रवाई के लिए दबाव बना सकते हैं।

क्या छोटे बच्चे की भी “मर्यादा” मानी जाती है?

पंजाब राज्य बनाम मेजर सिंह (1967) – इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल देखा कि “मर्यादा” का मतलब क्या है और क्या एक बहुत छोटी बच्ची की भी मर्यादा का अपमान हो सकता है। मामला सिर्फ 7½ महीने की बच्ची से जुड़ा था, जिसके साथ आरोपी ने गंभीर यौन अपराध किया।

ट्रायल कोर्ट का मानना था कि इतनी छोटी बच्ची में “लज्जा” या “शर्म” की भावना विकसित नहीं होती, इसलिए उसकी मर्यादा का अपमान नहीं माना जा सकता।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस सोच को सही नहीं माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मर्यादा केवल महिला की मानसिक समझ पर निर्भर नहीं है। एक बच्ची भी स्त्री है, और उसकी गरिमा की रक्षा कानून करता है। इसलिए छोटी बच्ची की भी मर्यादा का अपमान हो सकता है।

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महिला की समानता और गरिमा का अधिकार

पवन कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य (2017) – इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक सभ्य समाज में महिला को भी पुरुष की तरह सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है।

यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत सुरक्षित है।

कोर्ट ने “ईव-टीजिंग” (छेड़छाड़) जैसी घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि सार्वजनिक स्थानों – जैसे स्कूल, कॉलेज, पार्क, रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड – पर महिलाओं को परेशान करना उनके मूल अधिकारों का उल्लंघन है।

महिला की मर्यादा का मूल क्या है?

बाबुल सुप्रियो बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (2021) – इस मामले में कोर्ट ने साफ कहा कि किसी महिला की मर्यादा उसकी स्त्री होने की पहचान और सम्मान से जुड़ी होती है। कोर्ट ने यह भी बताया कि ऐसे मामलों में सबसे ज़रूरी बात यह होती है कि आरोपी की नीयत क्या थी। अगर किसी व्यक्ति ने गलत सोच या गलत मकसद से कोई हरकत की है, तो वही अपराध का मुख्य आधार बनता है। महिला ने उस समय कैसे प्रतिक्रिया दी – यह भी देखा जाता है, लेकिन अगर उसने डर, शर्म या किसी और कारण से तुरंत विरोध नहीं किया, तो इसका मतलब यह नहीं है कि अपराध नहीं हुआ।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई बात या हरकत अश्लील है या नहीं, यह आज के समाज के सामान्य मानकों से तय होगा – यानी एक समझदार और सामान्य व्यक्ति उसे कैसे देखेगा और समझेगा।

अगर यह घटना कार्यस्थल पर हुई हो तो क्या करें?

अगर महिला के साथ गलत व्यवहार ऑफिस, कंपनी, स्कूल, कॉलेज या किसी भी कार्यस्थल पर हुआ है, तो सिर्फ आपराधिक कानून ही नहीं, बल्कि एक अलग विशेष कानून भी लागू होता है। यह कानून है –  सेक्शुअल हरस्मेंट ऑफ़ वूमेन एट वर्कप्लेस एक्ट, 2013 इस कानून के तहत महिला को अतिरिक्त सुरक्षा और अधिकार दिए गए हैं।

महिला क्या कर सकती है?

  • ऑफिस की इंटरनल कंप्लेंट कमिटी में शिकायत दर्ज कर सकती है।
  • अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर सकती है।
  • साथ-साथ आपराधिक मामला भी दर्ज करा सकती है।

अगर आरोपी नाबालिग हो तो क्या होगा?

अगर आरोपी की उम्र 18 साल से कम है, तो मामला सामान्य आपराधिक अदालत में नहीं चलता। ऐसे मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 लागू होता है।

क्या प्रक्रिया होती है?

  • मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के सामने चलता है।
  • नाबालिग को “अपराधी” नहीं, बल्कि “बालक/किशोर” माना जाता है।
  • उसे सुधार और मार्गदर्शन देने पर ज़ोर दिया जाता है, न कि सिर्फ सज़ा देने पर।

क्या माफी मांग लेने से केस खत्म हो जाता है?

नहीं, अपने-आप केस खत्म नहीं होता। यदि मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 79 के तहत दर्ज है, तो यह एक आपराधिक अपराध है। इसका मतलब है कि सिर्फ माफी मांग लेने से पुलिस या कोर्ट स्वतः केस बंद नहीं कर देती।

कब समझौता संभव है?

  • अगर अपराध कानून के अनुसार समझौतायोग्य है, तो कोर्ट की अनुमति से समझौता हो सकता है।
  • लेकिन अगर अपराध समझौतायोग्य नहीं है, तो मामला चलता रहेगा, चाहे दोनों पक्ष आपस में समझौता कर लें।
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कोर्ट क्या देखती है?

अगर दोनों पक्षों में समझौता हो गया है, तो अदालत सजा तय करते समय इसे ध्यान में रख सकती है। इससे सजा कम हो सकती है, लेकिन केस पूरी तरह खत्म हो जाए, यह जरूरी नहीं। सबसे जरूरी बात किसी भी समझौते या माफी से पहले कानूनी सलाह लेना बहुत जरूरी है, ताकि आगे चलकर कोई कानूनी परेशानी न हो।

निष्कर्ष

महिला की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कानूनी कर्तव्य भी है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 79 यह साफ दिखाती है कि किसी महिला की मर्यादा का अपमान करना एक गंभीर आपराधिक अपराध है। कानून मानता है कि ऐसी हरकतें केवल बाहरी चोट नहीं पहुँचातीं, बल्कि महिला को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी नुकसान पहुंचाती हैं।

इस धारा के तहत सजा और कानूनी उपाय का प्रावधान यह संदेश देता है कि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन केवल कानून होना ही काफी नहीं है – अपने अधिकारों की जानकारी होना और समय पर सही कदम उठाना भी बहुत जरूरी है।

चाहे पीड़ित पक्ष हो या आरोपी, दोनों को कानून की प्रक्रिया, अधिकार और परिणाम की सही समझ होनी चाहिए।

अंत में, सच्चा न्याय केवल सजा देने से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, निष्पक्षता और व्यक्ति की गरिमा की रक्षा से मिलता है। धारा 79 BNS 2023 आज के भारत में महिला सम्मान की सुरक्षा का एक मजबूत कानूनी आधार है।

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FAQs

1. क्या BNS 2023 की धारा 79 कॉग्निजेबल अपराध है?

हाँ, आमतौर पर धारा 79 के तहत अपराध संज्ञेय माना जाता है। इसका मतलब है कि पुलिस बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के FIR दर्ज कर सकती है और जांच शुरू कर सकती है।

2. क्या सोशल मीडिया पर महिला की मर्यादा का अपमान करने पर भी धारा 79 लागू होती है?

हाँ। यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन अश्लील मैसेज भेजता है, अपमानजनक टिप्पणी करता है या महिला को निशाना बनाकर आपत्तिजनक पोस्ट करता है, तो उस पर धारा 79 BNS 2023 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

3. धारा 79 के मामले में कौन-कौन से सबूत जरूरी होते हैं?

गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट, सोशल मीडिया मैसेज या कोई भी ऐसा प्रमाण जो यह दिखाए कि जानबूझकर महिला की मर्यादा का अपमान किया गया – महत्वपूर्ण सबूत हो सकते हैं।

4. क्या धारा 79 के मामले में बेल मिल सकती है?

हाँ, मामले की परिस्थितियों और गंभीरता के आधार पर कोर्ट बेल दे सकती है। अदालत आरोपों की प्रकृति, सबूत और आरोपी के पिछले रिकॉर्ड को ध्यान में रखती है।

5. धारा 79 और गंभीर यौन अपराधों में क्या अंतर है?

धारा 79 महिला की मर्यादा का अपमान करने वाले कृत्यों से संबंधित है। जबकि यौन उत्पीड़न या बलात्कार जैसे गंभीर अपराध BNS की अलग और अधिक कठोर धाराओं के तहत आते हैं, जिनमें सजा भी अधिक कड़ी होती है।

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