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Adv. Vidhi Saini

Advocate Vidhi Saini is a law graduate and has been advising and helping clients for the past 3 years and is master at organizing complex situations. I am currently working in Rohini Court, Tis Hazari Court and am registered with the Delhi Bar Council . My area of competence in the field of drafting is the creation of Any Legal Notice, Consumer Court Issue, Criminal Matter, Divorce, Maintenance. I counsel, advise, and practice in this area. I advise both companies and individuals in my capacity as counsel, identifying legal concerns and creating fresh strategies for resolving challenging problems.

Adv. Vidhi Saini
क्या एक दिन में कोर्ट से शादी की जा सकती है ?

क्या एक दिन में कोर्ट से शादी की जा सकती है ?

कानूनन नहीं।यदि आप किसी व्यक्ति से शादी करने की योजना बना रहे हैं, जिससे आप प्यार करते हैं, तो भारत में शादी करने के कई कानूनी तरीके हैं। लेकिन, कोर्ट मैरिज को 1-2 दिनों में पूरा करना संभव नहीं होता है। भारत में कोर्ट मैरिज के लिए कम से कम 30 दिन लगते हैं। सभी …

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एक दिन में कोर्ट मैरिज कैसे कर सकते है?

एक दिन में कोर्ट मैरिज कैसे कर सकते है?

कोर्ट मैरिज (court marriage) करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन करें पहले और सबसे महत्वपूर्ण कदम है दोनों पार्टनर की सहमति और आपसी इच्छा को व्यक्त करना। यदि आप दोनों तय कर लेते हैं कि आप कोर्ट मैरिज करना चाहते हैं, तो आपको आगे बढ़ने की तैयारी करनी होगी। आपको आपके नगर निगम या …

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क्या रेंट एग्रीमेंट जरूरी है

क्या रेंट एग्रीमेंट जरूरी है ?

रेंट एग्रीमेंट: किराएदारों के लिए जरूरी दस्तावेज़ किराए पर रहने वाले लोगों के लिए रेंट एग्रीमेंट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। यह एक समझौता होता है जो मकान के मालिक और किराएदार के बीच होता है और इसमें दोनों की अधिकारों का सम्मान किया जाता है। रेंट एग्रीमेंट के माध्यम से दोनों पक्ष स्वयं को सुरक्षित …

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What is the law regarding pornography in India – Know your rights and limitations

पॉर्नोग्राफी को लेकर भारत में क्या कानून है? – जानिए आपके अधिकार और सीमाएं

क्या आप जानते हैं कि भारत में पोर्न देखना अपराध नहीं है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह आपको जेल तक पहुँचा सकता है? इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि भारत में पोर्नोग्राफी को लेकर क्या कानून हैं, कौन-से मामले में यह वैध है और किन हालातों में यह गैरकानूनी हो जाती है। अश्लील …

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क्या कोर्ट से केस वापस लेने पर पेनेलिटी लगती है?

क्या कोर्ट से केस वापस लेने पर पेनेलिटी लगती है?

कोर्ट से केस वापस लेने के लिए कोई सीधी पेनल्टी नहीं होती है, लेकिन अगर केस वापस लेने के लिए अनुरोध किया जाता है तो वकीलों की फीस और कोर्ट फीस को वहन करना हो सकता है। इसके अलावा, अगर केस के बीच में कोई उच्चाधिकारी आर्डर जारी करता है जिसमें केस वापस लेने का …

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क्या कोर्ट केस वापस लिए जा सकता है?

क्या कोर्ट केस वापस लिए जा सकता है?

हां, भारतीय कानून के अनुसार, किसी भी स्थान पर चल रहे मुकदमे को जब तक फैसला नहीं होता है, तब तक उस मुकदमे को वापस लिया जा सकता है। यदि कोई पक्ष चाहता है कि उनके द्वारा फाइल किए गए मुकदमे को वापस लिया जाए, तो उन्हें उस मुकदमे के वकील के माध्यम से अपील …

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क्या कम्पनी एक्ट के तहत चैरिटी ट्रस्ट को भी रजिस्टर कराया जा सकता है?

क्या कम्पनी एक्ट के तहत चैरिटी ट्रस्ट को भी रजिस्टर कराया जा सकता है?

हाँ, कंपनी एक्ट 2013 के तहत चैरिटी ट्रस्ट को रजिस्टर कराया जा सकता है। लीगल तरीके से किसी भी चैरिटी ट्रस्ट को रजिस्टर कराया जा सकता है ।  चैरिटी ट्रस्ट को रजिस्टर करने के लिए, आपको अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में एक निगम पंजीकरण अधिकारी से संपर्क करना होगा। चैरिटी ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन …

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एक केस में चार्जशीट बनना सबसे जरूरी पहलू क्यों है?

एक केस में चार्जशीट बनना सबसे जरूरी पहलू क्यों है?

एक केस में चार्जशीट बनाने के सबसे जरूरी पहलू उस केस में सम्मिलित तथ्यों और सबूतों को ध्यान से समझना और उन्हें संग्रहीत करना होता है। चार्जशीट एक आधिकारिक दस्तावेज होता है जो एक विशिष्ट क्रिमिनल केस से संबंधित सभी तथ्यों को जमा करता है। चार्जशीट के लिए आवश्यक मुख्य जानकारी निम्नलिखित है: 1.अपराध का …

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भारत में मानहानि की क्या सज़ा है?

भारत में मानहानि की क्या सज़ा है?

भारतीय दंड संहिता के अनुसार, मानहानि के लिए धारा 499 द्वारा प्रावधानित सजा शामिल होती है। यह धारा  कहती है कि अगर कोई व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के सम्मान को क्षति पहुंचाई जाती है तो उसे दोनों में से किसी भांति की सजा हो सकती है: जुर्माना (फाइन) या कारावास (जेल सजा)। इन सजाओं की …

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मर्जी से शादी ना होने पर कितने समय में डाइवोर्स लिया जा सकता है?

मर्जी से शादी ना होने पर कितने समय में डाइवोर्स लिया जा सकता है?

भारतीय विवाह अधिनियम के अनुसार, मर्जी से शादी न होने पर तलाक की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है: 1.तलाक लेने के लिए पहले तीन महीने का विचाराधीन काल लगता है। इस अवधि के बाद, तलाक प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। 2.तलाक की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए, शादीशुदा व्यक्ति को अपने नजदीकी …

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