कई बार माता-पिता को अपनी नौकरी में ट्रांसफर, दूसरे शहर में शिफ्ट होने, पैसों की परेशानी, स्कूल से संतुष्ट न होने या बच्चे की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों के कारण उसका स्कूल बदलना पड़ता है। ऐसी स्थिति में माता-पिता पुराने स्कूल से बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) मांगते हैं।
लेकिन परेशानी तब होती है, जब स्कूल यह कहकर TC देने से मना कर देता है कि बच्चे की कुछ फीस अभी बाकी है। इस वजह से बच्चे को नए स्कूल में एडमिशन लेने में परेशानी हो सकती है और उसकी पढ़ाई भी रुक सकती है।
ऐसी स्थिति में एक जरूरी सवाल उठता है: क्या स्कूल सिर्फ फीस बाकी होने के कारण बच्चे का स्कूल बदलने से रोक सकता है?
स्कूल को बकाया फीस वसूलने के लिए कानूनी तरीका अपनाने का अधिकार हो सकता है। लेकिन फीस बाकी होने के कारण बच्चे का TC रोकना सही है या नहीं, यह एक अलग कानूनी सवाल है। कई मामलों में कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ फीस के विवाद के कारण बच्चे की आगे की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए।
ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
ट्रांसफर सर्टिफिकेट, जिसे आम भाषा में TC कहा जाता है, वह डॉक्यूमेंट है जो स्कूल किसी बच्चे के स्कूल छोड़ने पर जारी करता है। इसमें आमतौर पर ये जानकारियां होती हैं:
- बच्चे का नाम और जन्मतिथि।
- उसने आखिरी बार किस क्लास में पढ़ाई की है।
- बच्चे का एडमिशन नंबर।
- स्कूल में एडमिशन लेने और स्कूल छोड़ने की तारीख।
- पढ़ाई से जुड़ी जरूरी जानकारी।
- बच्चे के व्यवहार और स्कूल के दूसरे जरूरी रिकॉर्ड।
नया स्कूल इस सर्टिफिकेट की मदद से बच्चे की पिछली पढ़ाई से जुड़ी जानकारी चेक करता है और एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करता है। इसलिए, अगर पुराना स्कूल TC देने से मना कर देता है, तो बच्चे को नए स्कूल में एडमिशन लेने में परेशानी हो सकती है। उसे एडमिशन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है और उसकी पढ़ाई भी रुक सकती है।
TC सिर्फ स्कूल और माता-पिता के बीच का एक डॉक्यूमेंट नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बच्चे की पढ़ाई और उसके आगे के भविष्य पर पड़ सकता है।
क्या स्कूल फीस बाकी होने के कारण TC देने से मना कर सकता है?
भारत के सभी स्कूलों पर एक जैसा नियम लागू नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्कूल किस राज्य में है, वह किस कानून के तहत चलता है और किस बोर्ड से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, सिर्फ फीस बाकी होने के कारण स्कूल बच्चे का TC रोकने का अधिकार नहीं मान सकता। स्कूल बकाया फीस वसूलने के लिए कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है, लेकिन बच्चे को दूसरे स्कूल में दाखिला लेने से रोकना अलग बात है।
इस संबंध में केरल हाई कोर्ट ने अमित के. टोगी बनाम शिक्षा निदेशक (CBSE), 2025 निर्णय दिनांक 17 सितंबर 2025 में महत्वपूर्ण फैसला दिया। इस मामले में छात्र का TC स्कूल ने फीस बकाया होने के कारण जारी नहीं किया था। कोर्ट ने कहा कि स्कूल फीस बाकी होने के आधार पर TC रोक नहीं सकता, क्योंकि ऐसा करने से बच्चे की पढ़ाई और शिक्षा पाने के अधिकार पर असर पड़ता है। कोर्ट ने स्कूल को TC जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल कानून के अनुसार बकाया फीस वसूलने की कार्रवाई कर सकता है।
इसी तरह, फातिमा ज़हरा (नाबालिग) बनाम CBSE क्षेत्रीय कार्यालय और अन्य, 2023 में भी केरल हाई कोर्ट ने कहा था कि फीस बकाया होने के कारण बच्चे का TC नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने स्कूल को TC जारी करने का निर्देश दिया और बकाया फीस की वसूली के लिए कानून के अनुसार कार्रवाई करने की छूट भी दी।
इन फैसलों से यह बात स्पष्ट होती है कि स्कूल फीस वसूलने के लिए कानूनी रास्ता अपना सकता है, लेकिन केवल फीस बाकी होने के कारण बच्चे की पढ़ाई को बीच में रोकना या उसे दूसरे स्कूल में जाने से रोकना उचित नहीं है। ध्यान रखें कि किसी मामले में लागू होने वाला नियम संबंधित राज्य के कानून, स्कूल की मान्यता और बोर्ड के नियमों पर भी निर्भर कर सकता है।
TC के संबंध में RTE एक्ट क्या कहता है?
राइट ऑफ़ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन एक्ट, 2009 (RTE एक्ट) में बच्चों को एक स्कूल से दूसरे स्कूल में जाने के संबंध में महत्वपूर्ण सुरक्षा दी गई है।
धारा 5 – दूसरे स्कूल में दाखिला लेने का अधिकार
RTE एक्ट की धारा 5 बच्चे को अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के लिए दूसरे स्कूल में दाखिला लेने का अधिकार देती है।
इस धारा के अनुसार, अगर किसी बच्चे को एक स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूल में जाना पड़ता है, चाहे वह उसी राज्य में हो या किसी दूसरे राज्य में, तो उसे दूसरे योग्य स्कूल में दाखिला लेने का अधिकार है, ताकि उसकी प्रारंभिक शिक्षा बीच में न रुके।
धारा 5(3) के अनुसार, जिस स्कूल में बच्चे का आखिरी बार दाखिला हुआ था, वहां के हेड टीचर या स्कूल के प्रभारी व्यक्ति को तुरंत उसका TC जारी करना होगा।
इस धारा में यह भी बताया गया है कि:
- अगर बच्चे के पास TC नहीं है या उसे जमा करने में देरी हो रही है, तो दूसरे स्कूल में उसका दाखिला रोकने या उसमें देरी करने का यह कारण नहीं बन सकता।
- TC जारी करने में देरी करने पर हेड टीचर या स्कूल के प्रभारी व्यक्ति के खिलाफ लागू सर्विस रूल्स के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि TC मिलने में परेशानी होने के कारण बच्चे की पढ़ाई न रुके।
क्या धारा 5 हर प्राइवेट स्कूल पर लागू होता है?
नहीं। इस बात को समझना जरूरी है कि RTE एक्ट की धारा 5 हर प्राइवेट स्कूल पर एक समान तरीके से लागू नहीं होती।
इस धारा में RTE एक्ट की धारा 2(n)(iii) और 2(n)(iv) के अंतर्गत आने वाले कुछ स्कूलों को बाहर रखा गया है। इनमें ऐसे प्राइवेट स्कूल भी शामिल हैं जिन्हें अपने खर्चों के लिए सरकार से कोई आर्थिक सहायता या ग्रांट नहीं मिलती।
इसलिए माता-पिता को यह नहीं मानना चाहिए कि धारा 5 का नियम हर प्राइवेट स्कूल पर बिल्कुल एक जैसा लागू होगा।
RTE एक्ट लागू होगा या नहीं, यह स्कूल की कैटेगरी और बच्चे की स्थिति पर निर्भर करता है। हालांकि, अगर किसी स्कूल पर धारा 5 सीधे लागू नहीं होती, तब भी राज्य के शिक्षा संबंधी कानून, बोर्ड के नियम और कोर्ट के फैसलों के तहत बच्चे को सुरक्षा मिल सकती है।
अगर स्कूल CBSE से जुड़ा हुआ है, तो क्या नियम हैं?
अगर बच्चा CBSE से मान्यता प्राप्त स्कूल में पढ़ता है, तो ऐसे मामलों में CBSE अफिलिएशन बाय-लॉस, 2018 के नियम भी महत्वपूर्ण होते हैं।
चैप्टर 7, क्लॉज़ 7.4 – स्कूल फीस
इस क्लॉज के अनुसार, अगर कोई बच्चा स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूल में जाता है, तो आमतौर पर फीस उसी महीने तक ली जानी चाहिए, जिस महीने में उसने स्कूल छोड़ा है। सिर्फ इसलिए कि माता-पिता ने बाद में TC के लिए आवेदन किया है, स्कूल आवेदन वाले महीने तक फीस नहीं मांग सकता, जब तक संबंधित सरकार ने कोई अलग नियम न बनाया हो।
हालांकि, इस नियम का मतलब यह नहीं है कि पहले से बकाया फीस माफ हो जाएगी। स्कूल कानून के अनुसार बकाया फीस वसूल सकता है।
दिल्ली हाई कोर्ट – फीस बाकी होने पर स्कूल TC रोक नहीं सकता (2019)
जुलाई 2019 में दिल्ली हाई कोर्ट के सामने एक ऐसा मामला आया, जिसमें स्कूल ने बच्चों के माता-पिता की फीस बकाया होने के कारण उनके TC जारी करने से मना कर दिया था।
इस वजह से बच्चों को दूसरे स्कूल में दाखिला लेने में परेशानी हो रही थी।
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट, 1973 के तहत आने वाला प्राइवेट स्कूल केवल फीस बाकी होने के कारण बच्चे का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने से मना नहीं कर सकता। कोर्ट ने स्कूल को बच्चों के सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि स्कूल का बकाया फीस वसूलने का अधिकार अलग है और बच्चे को जरूरी एजुकेशन डॉक्यूमेंट देने की जिम्मेदारी अलग। स्कूल केवल फीस के विवाद के कारण TC रोककर माता-पिता पर फीस भरने का दबाव नहीं बना सकता।
यह फैसला दिल्ली के कानून के आधार पर दिया गया था। दूसरे राज्यों के स्कूलों पर इसका लागू होना वहां के संबंधित कानूनों पर निर्भर करेगा।
अगर माता-पिता आर्थिक परेशानी के कारण फीस नहीं भर पा रहे हैं, तो क्या करें?
कई बार नौकरी छूटने, बिजनेस में नुकसान, मेडिकल खर्च या दूसरी आर्थिक परेशानियों के कारण माता-पिता समय पर स्कूल की फीस नहीं भर पाते।
ऐसी स्थिति में माता-पिता को स्कूल से लिखित में बात करनी चाहिए और अपनी परेशानी के बारे में बताना चाहिए। वे स्कूल से ये अनुरोध कर सकते हैं:
- बकाया फीस जमा करने के लिए कुछ और समय दिया जाए।
- फीस किस्तों में जमा करने की अनुमति दी जाए।
- अगर नियमों में अनुमति है, तो लेट फीस या अतिरिक्त चार्ज कम या माफ किया जाए।
- बकाया फीस की पूरी जानकारी लिखित में दी जाए।
- फीस के विवाद को अलग से सुलझाते हुए बच्चे का TC जारी किया जाए, अगर कानून के तहत इसकी मांग की जा सकती है।
स्कूल माता-पिता के अनुरोध पर अपने नियमों और मामले की परिस्थितियों के अनुसार विचार कर सकता है।
हालांकि, केवल आर्थिक परेशानी होने से फीस भरने की जिम्मेदारी अपने आप खत्म नहीं हो जाती। बकाया फीस चुकाने की जिम्मेदारी और स्कूल की TC जारी करने की जिम्मेदारी, दोनों अलग-अलग कानूनी मुद्दे हैं।
अगर स्कूल TC देने से मना कर रहा है, तो माता-पिता क्या करें?
अगर स्कूल फीस बकाया होने के कारण बच्चे का TC देने से मना कर रहा है, तो माता-पिता ये कदम उठा सकते हैं:
स्टेप 1: लिखित में आवेदन दें सबसे पहले स्कूल के प्रिंसिपल को TC जारी करने के लिए लिखित आवेदन दें। आवेदन में बच्चे का नाम, क्लास, एडमिशन नंबर और स्कूल छोड़ने की तारीख लिखें। साथ ही स्कूल से अनुरोध करें कि बिना किसी अनावश्यक देरी के TC जारी किया जाए।
स्टेप 2: मना करने का कारण लिखित में मांगें अगर स्कूल TC देने से मना करता है, तो उससे इसका कारण लिखित में मांगें। साथ ही, उस नियम या प्रावधान की कॉपी भी मांगें, जिसके आधार पर स्कूल TC रोकने का अधिकार बता रहा है। इससे माता-पिता को स्कूल की बात समझने और आगे की कार्रवाई तय करने में मदद मिलेगी।
स्टेप 3: बकाया फीस की पूरी जानकारी मांगें स्कूल से बकाया फीस का पूरा हिसाब लिखित में मांगें। इसमें देखें कि कहीं इन चार्जेज को तो शामिल नहीं किया गया है:
- ट्यूशन फीस
- ट्रांसपोर्ट चार्ज
- सालाना या एक्टिविटी चार्ज
- लेट पेमेंट चार्ज
- स्कूल छोड़ने के बाद के महीनों की फीस
अगर किसी रकम का हिसाब गलत लगता है, तो लिखित में आपत्ति दर्ज करें और स्कूल से उसका कारण पूछें।
स्टेप 4: लिखित रिमाइंडर या लीगल नोटिस भेजें अगर स्कूल फिर भी TC जारी नहीं करता है, तो माता-पिता वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेज सकते हैं। नोटिस में बताया जा सकता है कि फीस बकाया होने के कारण TC रोकना कानून के अनुसार गलत हो सकता है। स्कूल से एक उचित समय के भीतर TC जारी करने की मांग की जा सकती है।
इसमें यह भी बताया जा सकता है कि माता-पिता सही तरीके से बकाया फीस के मामले को अलग से सुलझाने के लिए तैयार हैं, बशर्ते वे कानूनी रूप से उस रकम का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार हों।
स्टेप 5: शिक्षा विभाग में शिकायत करें अगर स्कूल कोई जवाब नहीं देता है, तो माता-पिता संबंधित शिक्षा अधिकारी या विभाग में शिकायत कर सकते हैं। स्कूल किस राज्य में है और किस बोर्ड से जुड़ा है, इसके आधार पर इन अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है:
- डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन अफसर
- राज्य का शिक्षा विभाग
- डायरेक्टरेट ऑफ़ एजुकेशन
- स्कूल की मान्यता या निगरानी करने वाला संबंधित विभाग
- CBSE से जुड़े स्कूल के मामले में CBSE का रीजनल ऑफिस, अगर मामला उसके अधिकार क्षेत्र में आता है।
किस अधिकारी के पास शिकायत करनी है, यह स्कूल की मान्यता, बोर्ड और राज्य के लागू नियमों पर निर्भर करता है।
स्टेप 6: कानूनी मदद लें अगर स्कूल लगातार TC देने से मना कर रहा है और इससे बच्चे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो माता-पिता किसी वकील से सलाह ले सकते हैं। मामले की परिस्थितियों के अनुसार, संबंधित कोर्ट में रिट याचिका या दूसरी उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके जरिए कोर्ट से स्कूल को TC और दूसरे जरूरी एजुकेशन डॉक्यूमेंट जारी करने का आदेश देने की मांग की जा सकती है।
माता-पिता को कौन-कौन सी सावधानियां रखनी चाहिए?
स्कूल बदलते समय माता-पिता कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर बेवजह के विवाद से बच सकते हैं।
- TC के लिए हमेशा लिखित में आवेदन दें और उसकी रिसीविंग अपने पास रखें।
- अगर संभव हो, तो सही बकाया फीस जमा कर दें।
- फीस जमा करने से पहले स्कूल से पूरा हिसाब लिखित में मांगें।
- फीस की रसीद और स्कूल के साथ हुई बातचीत या पत्राचार की कॉपी संभालकर रखें।
- स्कूल को पहले ही बता दें कि बच्चा किस तारीख से स्कूल छोड़ने वाला है।
- नए एकेडमिक सेशन से काफी पहले TC के लिए आवेदन कर दें।
- बच्चे की मार्कशीट, रिपोर्ट कार्ड और दूसरे एजुकेशन रिकॉर्ड की कॉपी अपने पास रखें।
- अगर स्कूल TC देने से मना करता है, तो केवल मौखिक जवाब पर भरोसा न करें, बल्कि मना करने का कारण लिखित में मांगें।
निष्कर्ष
माता-पिता और स्कूल के बीच फीस को लेकर विवाद होने का असर बच्चे की पढ़ाई पर नहीं पड़ना चाहिए। स्कूल को कानून के अनुसार बकाया फीस वसूलने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए उसे कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
अगर स्कूल TC देने से मना करता है, तो माता-पिता को बिना वजह समझे इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहिए। वे स्कूल से मना करने का कारण लिखित में मांग सकते हैं, फीस के हिसाब की जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर संबंधित शिक्षा अधिकारी या कोर्ट का सहारा ले सकते हैं। साथ ही, अगर वास्तव में कोई फीस बकाया है, तो उसे अलग से सुलझाना चाहिए।
फीस का विवाद कानून के अनुसार सुलझाया जाना चाहिए, न कि बच्चे की पढ़ाई और नए स्कूल में दाखिले के रास्ते में रुकावट डालकर।
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FAQs
Q1. क्या स्कूल फीस बकाया होने के कारण बच्चे का TC देने से मना कर सकता है?
हर मामले में ऐसा नहीं कर सकता। कई मामलों में कोर्ट ने कहा है कि स्कूल केवल बकाया फीस वसूलने के लिए बच्चे का TC नहीं रोक सकता। हालांकि, यह संबंधित राज्य के कानून, बोर्ड के नियमों और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
Q2. क्या प्राइवेट स्कूल भी फीस बाकी होने पर TC रोक सकता है?
यह स्कूल पर लागू शिक्षा कानूनों और नियमों पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को फीस बकाया होने के बावजूद TC जारी करने का आदेश दिया है। हालांकि, स्कूल को कानून के अनुसार बकाया फीस वसूलने का अधिकार रहता है।
Q3. RTE एक्ट की धारा 5 TC के बारे में क्या कहती है?
RTE एक्ट की धारा 5 के अनुसार, इस प्रावधान के तहत आने वाले स्कूल के हेड टीचर या प्रभारी व्यक्ति को बच्चे के दूसरे स्कूल में जाने पर तुरंत TC जारी करना होता है। TC देने में देरी के कारण दूसरे योग्य स्कूल में बच्चे का एडमिशन रोका या टाला नहीं जा सकता।
Q4. क्या स्कूल बच्चे के स्कूल छोड़ने के बाद के महीनों की फीस भी मांग सकता है?
यह स्कूल पर लागू फीस संबंधी नियमों पर निर्भर करता है। CBSE अफिलिएशन बाय-लॉस, 2018 के क्लॉज़ 7.4 के अनुसार, अगर सरकार ने कोई अलग नियम नहीं बनाया है, तो आमतौर पर फीस उसी महीने तक ली जानी चाहिए, जिस महीने में बच्चे ने स्कूल छोड़ा है, न कि उस महीने तक जिसमें TC के लिए आवेदन किया गया है।
Q5. अगर स्कूल TC देने से मना करे, तो माता-पिता कहां शिकायत कर सकते हैं?
माता-पिता जिला शिक्षा अधिकारी, राज्य शिक्षा विभाग, शिक्षा निदेशालय या संबंधित सक्षम अधिकारी के पास शिकायत कर सकते हैं। अगर स्कूल CBSE से जुड़ा है, तो मामले के अनुसार CBSE के रीजनल ऑफिस में भी शिकायत की जा सकती है।


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