Has an NRI husband abandoned his wife after marriage What legal action can the wife take in India

NRI पति ने शादी के बाद पत्नी को छोड़ दिया? भारत में पत्नी क्या कानूनी कार्रवाई कर सकती है?

अगर शादी के बाद पति अपनी पत्नी को छोड़ देता है, तो पत्नी को भावनात्मक और पैसों से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अगर पति विदेश में रहता है, तो परेशानी और बढ़ सकती है, क्योंकि पत्नी को उसका सही पता, नौकरी की जानकारी या वह इस समय कहां रह रहा है, यह पता नहीं होता।

ऐसी स्थिति में पत्नी को यह नहीं मान लेना चाहिए कि विदेश में रहने के कारण पति के खिलाफ कोई कानूनी कदम नहीं उठाया जा सकता। भारतीय कानून के तहत पत्नी को राहत मिल सकती है। हालांकि, कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि शादी कहां हुई थी, पति-पत्नी कहां रहते थे और मामले में क्या हुआ है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि किस कोर्ट को मामले की सुनवाई करने का अधिकार है।

विदेश मंत्रालय भी विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के पतियों से शादी करने वाली महिलाओं की समस्याओं को पहचानता है। इनमें पत्नी को छोड़ देना, परेशान करना, वीजा बनवाने से मना करना और बच्चों से जुड़े विवाद शामिल हैं। विदेश मंत्रालय भारतीय दूतावासों के माध्यम से ऐसी महिलाओं को कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी देता है।

NRI पति द्वारा शादी के बाद छोड़ देने का क्या मतलब है?

पति का पत्नी को छोड़ देना सिर्फ उसे घर पर अकेला छोड़कर चले जाने तक सीमित नहीं है। अगर पति पत्नी की जिम्मेदारी उठाना बंद कर देता है, उसे जरूरी आर्थिक मदद नहीं देता या वैवाहिक रिश्ता निभाने से पीछे हट जाता है, तो यह भी मामले की परिस्थितियों के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकता है।

ऐसी स्थिति इन मामलों में सामने आ सकती है:

  • शादी के कुछ समय बाद पति विदेश लौट जाता है और पत्नी से बात करना बंद कर देता है।
  • पति पहले किए गए वादों के बावजूद पत्नी का वीजा बनवाने या दोनों के साथ रहने की व्यवस्था करने से मना कर देता है।
  • पति भारत में रह रही पत्नी को छोड़ देता है और उसके खर्च के लिए पैसे नहीं देता।
  • पति पत्नी को वैवाहिक घर से निकाल देता है या उसे घर छोड़ने के लिए मजबूर करता है।
  • पति या उसके परिवार वाले पत्नी को परेशान करते हैं, धमकाते हैं या दहेज की गैरकानूनी मांग करते हैं।
  • पति शादी से पहले अपनी शादीशुदा स्थिति, नौकरी, वीजा या दूसरी जरूरी जानकारी छिपा लेता है।
  • पहली शादी कानूनी रूप से कायम होने के बावजूद पति किसी दूसरी महिला के साथ रहने लगता है या उससे दूसरी शादी कर लेता है।
  • पति विदेश में पत्नी को बिना पैसे, रहने की जगह, जरूरी दस्तावेजों या मदद के छोड़ देता है।

हालांकि, पति-पत्नी का अलग रहना अपने आप में हर मामले में अपराध या कानूनी रूप से साबित हुआ परित्याग नहीं माना जाता। सही कानूनी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वास्तव में क्या हुआ, कौन-सा कानून लागू होता है और कौन-से सबूत उपलब्ध हैं।

उदाहरण के लिए, पति का पत्नी का वीजा बनवाने से मना करना वैवाहिक विवाद में एक महत्वपूर्ण बात हो सकती है, लेकिन इससे अपने आप धोखाधड़ी या क्रूरता साबित नहीं होती। पत्नी को यह बताना होगा कि पति ने उससे क्या वादे किए थे, शादी के बाद क्या हुआ और क्या पति ने जानबूझकर उसे गलत जानकारी दी या उसके साथ गलत व्यवहार किया।

क्या पत्नी भारत में पुलिस शिकायत कर सकती है?

हां, अगर पति या उसके परिवार वालों के काम से भारतीय कानून के तहत कोई अपराध बनता है, तो पत्नी पुलिस में शिकायत कर सकती है। इन परिस्थितियों में पुलिस शिकायत करना उचित हो सकता है:

  • शादी के बाद पत्नी के साथ क्रूरता करना या उसे परेशान करना।
  • दहेज की गैरकानूनी मांग करना।
  • पत्नी के साथ मारपीट करना, उसे धमकी देना या डराना।
  • शादी के लिए जानबूझकर झूठी जानकारी देना या झूठे वादे करके पैसे का नुकसान पहुंचाना, जिससे धोखाधड़ी का मामला बन सकता हो।
  • पत्नी के गहने, पैसे या दूसरी संपत्ति गलत तरीके से अपने पास रख लेना, अगर इससे कानून के तहत कोई अपराध बनता हो।
  • पहली शादी कानूनी रूप से कायम रहते हुए दूसरी शादी करना, अगर मामले में कानून की जरूरी शर्तें पूरी होती हों।

पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सबूतों की जांच करेगी। केवल शादी में अनबन होना, दूसरे देश में साथ रहने को लेकर विवाद होना या पति का रिश्ता जारी रखने से मना करना अपने आप में आपराधिक अपराध साबित नहीं करता।

पत्नी संबंधित घटना वाले क्षेत्र के पुलिस थाने में शिकायत कर सकती है। अगर उसे यह समझने में परेशानी हो कि शिकायत कहां दर्ज करानी है, तो वह पुलिस से मार्गदर्शन मांग सकती है। अगर शिकायत में ऐसा संज्ञेय अपराध बताया गया है जिस पर पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पत्नी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों या संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने उचित कानूनी उपाय अपना सकती है।

अगर पति विदेश में रहता है, तो जांच के दौरान उसकी पहचान, पता, यात्रा की जानकारी और दूसरी जरूरी बातों की पुष्टि करने की जरूरत पड़ सकती है। विदेश में नोटिस या दूसरे कानूनी दस्तावेज भेजने के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।

शिकायत में केवल सामान्य आरोप लगाने के बजाय पूरी घटना साफ-साफ बताएं। पत्नी को यह जानकारी देनी चाहिए कि शादी कब हुई, पति कब विदेश गया या उसे छोड़कर गया, उसने क्या कहा या किया, आर्थिक मदद कब बंद की और इन बातों को साबित करने के लिए कौन-से सबूत उपलब्ध हैं।

क्या पत्नी अपने NRI पति से मेंटेनेंस मांग सकती है?

हां। अगर पति विदेश में रहता है, तब भी पत्नी कानून के तहत उससे मेंटेनेंस का पैसा मांग सकती है। हालांकि, यह अधिकार और मिलने वाली रकम मामले की परिस्थितियों, दोनों की आर्थिक स्थिति और लागू कानून पर निर्भर करती है।

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मेंटेनेंस का उद्देश्य पत्नी के रोजमर्रा के जरूरी खर्चों को पूरा करने में मदद करना है। रकम तय करते समय पति-पत्नी की आमदनी, जरूरतों, आर्थिक स्थिति और दूसरी जरूरी बातों पर विचार किया जा सकता है।

शादी से जुड़े कानून के तहत भरण-पोषण

शादी पर लागू कानून के अनुसार, पत्नी वैवाहिक मुकदमे के दौरान अंतरिम मेंटेनेंस या कानून में दी गई शर्तों के आधार पर स्थायी मेंटेनेंस मांग सकती है।

उदाहरण के लिए, हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 24 में मुकदमे के दौरान मेंटेनेंस और मुकदमे के खर्च के लिए प्रावधान है। धारा 25 में स्थायी मेंटेनेंस से जुड़ा प्रावधान है। इन राहतों के लिए कानून की जरूरी शर्तें पूरी होनी चाहिए।

आपराधिक प्रक्रिया कानून के तहत भरण-पोषण

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 144 के तहत भी योग्य मामलों में मेंटेनेंस मांगा जा सकता है। यह राहत मिलेगी या नहीं, इसका फैसला मामले के तथ्यों और कानून की शर्तों के आधार पर होगा।

घरेलू हिंसा कानून के तहत आर्थिक मदद

अगर पत्नी के साथ घरेलू हिंसा हुई है, तो वह घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत आर्थिक राहत मांग सकती है। परिस्थितियों के अनुसार इसमें पत्नी और बच्चों के मेंटेनेंस के लिए पैसा भी शामिल हो सकता है।

पति की आमदनी विदेश में होने से भारत में मेंटेनेंस का दावा अपने आप खत्म नहीं हो जाता। हालांकि, उसकी आमदनी साबित करने के लिए नौकरी, कंपनी, कारोबार, बैंक या दूसरे आर्थिक रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है।

पत्नी को पति की नौकरी, नियोक्ता, कारोबार, संपत्ति और आमदनी से जुड़ी जो भी जानकारी उपलब्ध है, उसे सुरक्षित रखना चाहिए। अगर पति की सही आमदनी का पता नहीं है, तो पत्नी उपलब्ध जानकारी के आधार पर कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई कर सकती है।

क्या पत्नी घरेलू हिंसा कानून के तहत केस कर सकती है?

हां, अगर मामले की परिस्थितियां डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट, 2005 के दायरे में आती हैं, तो पत्नी इस कानून के तहत कानूनी मदद मांग सकती है।

घरेलू हिंसा का मतलब केवल मारपीट नहीं है। परिस्थितियों के अनुसार इसमें मानसिक रूप से परेशान करना, गाली देना, यौन हिंसा और पैसों से जुड़ी रोक-टोक भी शामिल हो सकती है। उदाहरण के लिए, जरूरी खर्चों के लिए पैसे न देना या महिला को उस संपत्ति से वंचित करना, जिस पर कानून के तहत उसका हक है, आर्थिक हिंसा मानी जा सकती है।

पत्नी संबंधित अदालत से ये राहत मांग सकती है:

  • पति को कुछ खास तरह की हिंसा या परेशान करने वाले कामों से रोकने का आदेश।
  • घर में रहने से जुड़ी राहत।
  • आर्थिक मदद, जिसमें कानून के अनुसार मेंटेनेंस भी शामिल हो सकता है।
  • जरूरत पड़ने पर बच्चों की अस्थायी देखभाल की जिम्मेदारी से जुड़ा आदेश।
  • शारीरिक चोट, मानसिक प्रताड़ना या भावनात्मक परेशानी के लिए मुआवजा।

इस कानून के तहत महिला को साझा घर में रहने का अधिकार भी मिल सकता है। हालांकि, यह अधिकार कानून की शर्तों और मामले की परिस्थितियों के अनुसार तय होता है।

उदाहरण के लिए, अगर NRI पति ने पत्नी को साझा घर से निकाल दिया है, जरूरी खर्चों के लिए पैसे रोककर उसे अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश की है या संदेश भेजकर धमकाया है, तो पत्नी वकील या प्रोटेक्शन अफसर से सलाह लेकर इस कानून के तहत उचित राहत मांग सकती है।

किस अदालत में मामला दाखिल किया जा सकता है और कौन-सी राहत मिल सकती है, यह मामले के तथ्यों और अदालत के अधिकार क्षेत्र पर निर्भर करता है। पत्नी कहां रहती है, घरेलू हिंसा कहां हुई और कानून के कौन-से प्रावधान लागू होते हैं, ये बातें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। पति का विदेश में रहना अपने आप यह तय नहीं करता कि भारत की किस अदालत में मामला दाखिल किया जा सकता है।

क्या पत्नी नेशनल कमीशन फॉर वूमेन से मदद मांग सकती है?

हां। नेशनल कमीशन फॉर वूमेन (NCW) में NRI Cell है, जो विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के पतियों से जुड़े वैवाहिक विवादों में महिलाओं की शिकायतों पर काम करता है।

अगर NRI पति ने पत्नी को छोड़ दिया है, दहेज के लिए परेशान किया है, घरेलू हिंसा की है या पत्नी को पति का पता लगाने और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने में मदद चाहिए, तो वह NCW से संपर्क कर सकती है।

NCW की प्रकाशित जानकारी के अनुसार, शिकायत और मांगी गई मदद के आधार पर आयोग पुलिस अधिकारियों, विदेश में भारतीय दूतावासों, पासपोर्ट अधिकारियों और अन्य सरकारी विभागों के साथ तालमेल कर सकता है। जरूरत के अनुसार कानूनी जानकारी या उचित कार्रवाई के लिए मदद भी मिल सकती है।

NCW में शिकायत करते समय पत्नी को अपनी बात साफ-साफ लिखकर देनी चाहिए। उपलब्ध होने पर इन दस्तावेजों को भी साथ लगाना उपयोगी होगा:

  • विवाह प्रमाणपत्र या शादी का कोई अन्य प्रमाण।
  • पति का पूरा नाम, फोटो, पासपोर्ट की जानकारी और विदेश का पता, यदि उपलब्ध हो।
  • पति की नौकरी या कारोबार से जुड़ी जानकारी, यदि मालूम हो।
  • विवाद से जुड़े संदेश, ईमेल और कॉल रिकॉर्ड।
  • पैसों के लेन-देन, दहेज की मांग या अन्य आर्थिक लेन-देन का विवरण, जहां लागू हो।
  • पहले दर्ज कराई गई पुलिस शिकायतों या अदालत में चल रहे मामलों की प्रतियां।

ध्यान रखें कि NCW में शिकायत करना हर तरह की अदालती कार्रवाई का विकल्प नहीं है। इससे यह गारंटी भी नहीं मिलती कि पति को विदेश से भारत वापस लाया जाएगा। हालांकि, उचित मामले में संबंधित अधिकारियों से मदद और तालमेल पाने के लिए यह एक उपयोगी रास्ता हो सकता है।

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क्या भारत सरकार विदेश में रह रहे पति का पता लगाने में मदद कर सकती है?

हां, पत्नी विदेश मंत्रालय (MEA) या संबंधित देश में भारतीय एम्बेसी, या हाई कमीशन से मदद मांग सकती है।

ये संस्थाएं शिकायत को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी देने में मदद कर सकती हैं। पत्नी विदेश में रहने वाले पति द्वारा छोड़ी गई पात्र भारतीय महिलाओं के लिए MEA की कानूनी और आर्थिक सहायता योजना के बारे में भी पूछ सकती है। सहायता मिलना योजना की शर्तों और पात्रता पर निर्भर करता है।

पत्नी को पति का आखिरी ज्ञात पता, पासपोर्ट या वीजा की जानकारी, नौकरी का विवरण, फोन नंबर और पहचान से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।

ध्यान रखें कि भारतीय एम्बेसी अदालत की तरह पति को अपने आप भारत लौटने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। जरूरी कानूनी कार्रवाई संबंधित अधिकारियों को लागू कानून के अनुसार करनी होती है।

क्या पत्नी तलाक के लिए केस कर सकती है?

हां। अगर पत्नी शादी को आगे जारी नहीं रखना चाहती, तो वह अपनी शादी पर लागू कानून के तहत तलाक या न्यायिक अलगाव के लिए कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर सकती है।

अगर शादी हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत हुई है, तो कानून में बताई गई शर्तें पूरी होने पर पत्नी तलाक या न्यायिक अलगाव की मांग कर सकती है।

मामले की परिस्थितियों के अनुसार, पति की क्रूरता या बिना उचित कारण पत्नी को छोड़कर चले जाना तलाक का आधार बन सकता है। हालांकि, कानून में परित्याग (Desertion) के लिए कुछ खास शर्तें हैं। केवल कुछ समय तक अलग रहने से यह अपने आप साबित नहीं हो जाता कि पति ने कानूनी अर्थ में पत्नी को छोड़ दिया है। अदालत मामले की परिस्थितियों, दोनों पक्षों के व्यवहार और लागू कानून की शर्तों को देखेगी।

पत्नी को यह नहीं मानना चाहिए कि उसे पति के लौटने का अनिश्चित समय तक इंतजार करना ही होगा। वह अलग रहने की अवधि, उसके कारणों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर वकील से सही कानूनी रास्ते के बारे में सलाह ले सकती है।

अगर पति कहता है कि उसने किसी विदेशी अदालत से पहले ही तलाक ले लिया है, तो पत्नी को सावधान रहना चाहिए। विदेशी अदालत से मिला तलाक का आदेश भारत में हर मामले में अपने आप मान्य नहीं होता। उसकी मान्यता इस बात पर निर्भर कर सकती है कि शादी पर कौन-सा कानून लागू होता है, विदेशी अदालत को मामला सुनने का अधिकार था या नहीं, तलाक किस आधार पर दिया गया और जरूरी कानूनी शर्तें पूरी हुई थीं या नहीं।

वाई. नरसिम्हा राव बनाम वाई. वेंकट लक्ष्मी, (1991) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय शादी के संदर्भ में विदेशी अदालत से मिले तलाक के आदेश को भारत में मान्यता देने के सवाल पर विचार किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत के वैवाहिक फैसले को भारत में मान्य होने के लिए लागू कानूनी शर्तें पूरी करनी होती हैं।

अगर पत्नी को विदेशी अदालत से कोई नोटिस मिलता है या उसे पता चलता है कि विदेश में उसके खिलाफ तलाक की कार्यवाही शुरू हो गई है, तो उसे संबंधित कागजात की प्रतियां लेकर जल्द से जल्द कानूनी सलाह लेनी चाहिए। विदेशी अदालत के नोटिस को नजरअंदाज करने से अपने अधिकारों की रक्षा करना मुश्किल हो सकता है।

अगर पति पत्नी को विदेश ले जाने से मना कर दे तो क्या करें?

अगर पति ने शादी से पहले पत्नी को विदेश ले जाने या उसका वीजा बनवाने का वादा किया था, लेकिन शादी के बाद मना कर दिया, तो पत्नी को पहले पूरे मामले और उपलब्ध सबूतों की जांच करनी चाहिए।

केवल वीजा बनवाने से मना करना अपने आप में अपराध नहीं है। लेकिन अगर पति ने जानबूझकर जरूरी बातें छिपाईं, शादी के लिए झूठे वादे किए या धोखाधड़ी अथवा क्रूरता की, तो परिस्थितियों के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पत्नी को ये सबूत सुरक्षित रखने चाहिए:

  • वीजा बनवाने के वादे वाले संदेश और ईमेल।
  • विदेश जाने से जुड़ी बातचीत।
  • पति की नौकरी या इमिग्रेशन स्थिति से जुड़े दस्तावेज।
  • पति या उसके परिवार को दिए गए पैसों का प्रमाण।
  • शादी के बाद हुई घटनाओं से जुड़े रिकॉर्ड।

वकील इन तथ्यों के आधार पर बता सकता है कि वैवाहिक मामला, पुलिस शिकायत, मेंटेनेंस या कोई दूसरी कानूनी कार्रवाई उचित होगी या नहीं। सभी दस्तावेज न होने पर भी मदद लेने में देरी न करें।

क्या पति को गिरफ्तार किया जा सकता है या उसका पासपोर्ट जब्त हो सकता है?

पति द्वारा पत्नी को छोड़ देने मात्र से उसकी गिरफ्तारी या पासपोर्ट जब्त होना अपने आप तय नहीं होता। अगर शिकायत से किसी अपराध का पता चलता है, तो जांच अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं। मामले के आधार पर पति का पता लगाने या उसे कानूनी कार्यवाही में शामिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों से उचित कदम उठाने का अनुरोध किया जा सकता है।

नेशनल कमीशन फॉर वूमेन (NCW) की जानकारी के अनुसार, उचित मामलों में आयोग पुलिस और पासपोर्ट अधिकारियों के साथ तालमेल कर सकता है।

हालांकि, केवल शिकायत दर्ज होने से गिरफ्तारी, लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी होना या पासपोर्ट जब्त होना जरूरी नहीं है। हर कार्रवाई के लिए अलग कानूनी शर्तें पूरी होनी चाहिए और सक्षम अधिकारी को निर्णय लेना होता है।

इसलिए पत्नी को उपलब्ध सबूतों के साथ शिकायत करनी चाहिए और वकील की मदद से उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करनी चाहिए। किसी खास नतीजे की गारंटी नहीं मानी जा सकती।

NRI शादी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले

नीरजा सराफ बनाम जयंत वी. सराफ, (1994)

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NRI पति द्वारा पत्नी को छोड़ देने जैसी परिस्थितियों में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान दिया। यह फैसला ऐसे मामलों को समझने में महत्वपूर्ण है, जहां पति विदेश चला जाता है और वैवाहिक विवाद भारत और दूसरे देश से जुड़ जाता है।

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वाई. नरसिम्हा राव बनाम वाई. वेंकट लक्ष्मी, (1991)

यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण है, जहां भारतीय कानून के तहत हुई शादी में पति विदेशी अदालत से तलाक ले लेता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत के तलाक के आदेश को भारत में मान्यता देने के लिए जरूरी कानूनी शर्तें पूरी होनी चाहिए।

इन फैसलों का मतलब यह नहीं है कि हर NRI पति द्वारा पत्नी को छोड़ने पर एक जैसा कानूनी परिणाम होगा। सही कार्रवाई मामले के तथ्यों, लागू कानून, सबूत और अदालत के अधिकार क्षेत्र पर निर्भर करती है।

पत्नी को किन गलतियों से बचना चाहिए?

ऐसी स्थिति में जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय इन बातों का ध्यान रखें:

  • पति के लौटने या पैसे देने के केवल मौखिक वादों पर भरोसा न करें।
  • तलाक या समझौते से जुड़े कागजात समझे बिना हस्ताक्षर न करें।
  • यह न मानें कि विदेशी अदालत से मिला तलाक भारत में अपने आप मान्य हो जाएगा।
  • संदेश, पैसों के रिकॉर्ड और पति के विदेश के पते से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखने में देरी न करें।
  • ऐसे आरोप न लगाएं, जिन्हें उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सही तरीके से साबित नहीं किया जा सकता।
  • यह न मानें कि केवल पुलिस शिकायत करने से मेंटेनेंस और वैवाहिक विवाद की हर समस्या हल हो जाएगी।
  • भारत या विदेश की अदालत से मिले नोटिस को नजरअंदाज न करें।

अगर विदेश जाकर पति से मिलने पर आपकी सुरक्षा, वीजा या जरूरी दस्तावेजों को खतरा हो सकता है, तो बिना उचित सलाह के ऐसा कदम न उठाएं।

अगर जान या सुरक्षा को तुरंत खतरा है, तो स्थानीय पुलिस या आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें। अगर पत्नी विदेश में फंस गई है, तो स्थानीय अधिकारियों और नजदीकी भारतीय एम्बेसी, उच्चायोग या वाणिज्य एम्बेसी से मदद मांगें।

निष्कर्ष

NRI पति द्वारा पत्नी को छोड़ देने का मतलब यह नहीं है कि पत्नी के पास कोई कानूनी रास्ता नहीं बचता। मामले के तथ्यों के अनुसार, वह भरण-पोषण, घरेलू हिंसा से सुरक्षा, तलाक, पुलिस शिकायत या नेशनल कमीशन फॉर वूमेन (NCW) और विदेश में भारतीय अधिकारियों से मदद मांग सकती है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि वास्तव में क्या हुआ, कौन-से सबूत उपलब्ध हैं और कौन-सा कानूनी रास्ता सही रहेगा। पति के विदेश में रहने से कानूनी प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है, लेकिन इससे पत्नी के कानूनी अधिकार अपने आप खत्म नहीं होते। समय पर सही कदम उठाने से वह अपनी सुरक्षा, आर्थिक हितों और अधिकारों की रक्षा कर सकती है।\

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FAQs

1. क्या विदेश में रहने वाले NRI पति के खिलाफ भारत में केस कर सकती हूं?

हां, अगर मामले में जरूरी कानूनी शर्तें और अदालत के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी शर्तें पूरी होती हैं। सही अदालत का चुनाव मामले, पक्षों के रहने की जगह और घटना कहां हुई, इस पर निर्भर करता है।

2. क्या NRI पति द्वारा खर्च न देने पर मेंटेनेंस मांग सकती हूं?

हां, लागू वैवाहिक कानून, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता या घरेलू हिंसा कानून के तहत मेंटेनेंस मांगा जा सकता है। पात्रता और रकम मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगी।

3. अगर NRI पति फोन उठाना बंद कर दे तो क्या करें?

संदेश, ईमेल, पति के आखिरी ज्ञात पते और नौकरी से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखें। जरूरत के अनुसार वकील, पुलिस, NCW के NRI Cell या संबंधित अधिकारियों से मदद लें।

4. क्या NRI पति के खिलाफ NCW में शिकायत कर सकती हूं?

हां। NCW का NRI Cell पति द्वारा छोड़ने, दहेज के लिए परेशान करने, घरेलू हिंसा और विदेश में पति का पता लगाने जैसे मामलों में शिकायत लेता है। मदद शिकायत और लागू प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

5. क्या NRI पति विदेश से बिना बताए तलाक ले सकता है?

पति विदेश में तलाक की कार्यवाही शुरू कर सकता है, लेकिन विदेशी अदालत से मिला तलाक भारत में मान्य होगा या नहीं, यह लागू कानून और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जानकारी मिलने पर संबंधित दस्तावेज लेकर जल्द कानूनी सलाह लें।

6. क्या पत्नी को छोड़ने पर NRI पति गिरफ्तार हो सकता है?

केवल पत्नी को छोड़ देने से पति की गिरफ्तारी अपने आप नहीं होती। अगर मामले के तथ्यों से कोई अपराध बनता है, तो पुलिस और संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।

7. अगर NRI पति मेरे गहने या पैसे लेकर चला गया तो क्या करें?

गहनों के बिल, फोटो, बैंक विवरण, पैसे भेजने की रसीदें और बातचीत के संदेश सुरक्षित रखें। मामले के अनुसार पैसे या संपत्ति वापस पाने की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अगर किसी अपराध की कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तो शिकायत भी की जा सकती है।

8. अगर वकील की फीस देने के पैसे नहीं हैं तो क्या कानूनी मदद मिल सकती है?

आप अपने जिले की डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DLSA) से संपर्क करके मुफ्त कानूनी सहायता के लिए पात्रता पूछ सकती हैं। इसके अलावा, विदेश में रहने वाले भारतीय या विदेशी पति द्वारा छोड़ी गई पात्र महिलाओं के लिए विदेश मंत्रालय की कानूनी और आर्थिक सहायता योजना के बारे में भी जानकारी ले सकती हैं।

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