Can a legal heir claim property without a succession certificate

क्या लीगल हेयर बिना सक्सेशन सर्टिफिकेट के प्रॉपर्टी क्लेम कर सकता है?

परिवार में किसी की मृत्यु होने पर घर के लोगों को बहुत दुख होता है। इस दुख के साथ-साथ उन्हें मृत व्यक्ति के पीछे छूटी जमीन, मकान, बैंक में जमा पैसे और दूसरी प्रॉपर्टी से जुड़े काम भी करने पड़ते हैं।

ऐसे समय में कई लोगों को लगता है कि मृत व्यक्ति की प्रॉपर्टी पाने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट बनवाना जरूरी है। लेकिन ऐसा हर मामले में जरूरी नहीं होता।

लीगल हेयर बिना सक्सेशन सर्टिफिकेट के भी प्रॉपर्टी क्लेम कर सकता है। अगर मृत व्यक्ति के नाम पर जमीन या मकान है, तो उसके कानूनी वारिस जरूरी कागजातों के आधार पर उस प्रॉपर्टी पर अपना हक जता सकते हैं। हालाँकि, बैंक में जमा पैसे या दूसरी प्रॉपर्टी पाने के लिए बैंक या संबंधित विभाग कुछ खास कागजात माँग सकते हैं।

इसलिए, सक्सेशन सर्टिफिकेट बनवाना जरूरी है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी किस तरह की है और मृत व्यक्ति के कानूनी वारिस कौन हैं।

सक्सेशन सर्टिफिकेट क्या होता है?

सक्सेशन सर्टिफिकेट कोर्ट से मिलने वाला एक कागज है, जिसकी मदद से कोई व्यक्ति मृत व्यक्ति के नाम पर जमा कुछ खास तरह के पैसे और निवेश ले सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और उसके पीछे बैंक में जमा पैसे, निवेश या किसी से मिलने वाले पैसे रह जाते हैं, तो सक्सेशन सर्टिफिकेट उन पैसों को लेने में मदद कर सकता है।

सक्सेशन सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 के भाग 10 में दी गई है। इसकी धारा 370 से 390 तक इससे जुड़े अलग-अलग नियम बताए गए हैं। धारा 372 में आवेदन देने की प्रक्रिया और धारा 374 में सर्टिफिकेट में दी जाने वाली जानकारी के बारे में बताया गया है।

यह समझना जरूरी है कि सक्सेशन सर्टिफिकेट से मृत व्यक्ति की हर प्रॉपर्टी पर अपने आप मालिकाना हक नहीं मिल जाता। यह मुख्य रूप से सर्टिफिकेट में लिखे गए पैसों और निवेश से जुड़ा होता है।

उदाहरण: मान लीजिए, किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और उसके पीछे एक मकान और बैंक में जमा पैसे रह जाते हैं। मकान पर अपना हक जताने के लिए कानूनी वारिसों को सिर्फ सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती। लेकिन बैंक में जमा पैसे लेने के लिए बैंक सक्सेशन सर्टिफिकेट या दूसरे जरूरी कागजात माँग सकता है। यह बैंक के नियमों और मामले की स्थिति पर निर्भर करता है।

क्या लीगल हेयर बिना सक्सेशन सर्टिफिकेट के जमीन या मकान पर हक जता सकता है?

हाँ, कई मामलों में लीगल हेयर बिना सक्सेशन सर्टिफिकेट बनवाए भी मृत व्यक्ति की जमीन, मकान, फ्लैट या दूसरी अचल प्रॉपर्टी पर अपना हक जता सकता है।

किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी प्रॉपर्टी किसे मिलेगी, यह उस पर लागू कानून, वसीयत और परिवार की स्थिति पर निर्भर करता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत बनाए हो जाती है, तो उसकी प्रॉपर्टी लागू कानून के अनुसार कानूनी वारिसों को मिल सकती है। किस वारिस को कितना हिस्सा मिलेगा, यह परिवार की स्थिति और लागू कानून पर निर्भर करेगा।

जमीन या मकान पर अपना हक साबित करने के लिए आमतौर पर सक्सेशन सर्टिफिकेट की जगह दूसरे कागजातों की जरूरत पड़ सकती है, जैसे:

  • मृत व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट।
  • मृत व्यक्ति से रिश्ते का सबूत।
  • जमीन या मकान की रजिस्ट्री या दूसरे कागजात।
  • लीगल हेयर सर्टिफिकेट या परिवार के सदस्यों का प्रमाण पत्र, जहाँ जरूरी हो।
  • वसीयत, अगर बनाई गई हो।
  • प्रॉपर्टी के सरकारी रिकॉर्ड।
  • जरूरत पड़ने पर कोर्ट से प्रोबेट या दूसरे आदेश।
  • प्रॉपर्टी का नाम बदलने के लिए जरूरी सहमति पत्र या दूसरे कागजात।

कौन-से कागजात जरूरी होंगे, यह राज्य और संबंधित सरकारी विभाग के नियमों पर निर्भर करता है।

ध्यान रखें: सरकारी रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी का नाम बदल जाने से ही मालिकाना हक पूरी तरह साबित नहीं होता। अगर वारिसों के बीच प्रॉपर्टी को लेकर विवाद है, तो मामले का फैसला कोर्ट से करवाना पड़ सकता है।

सक्सेशन सर्टिफिकेट और लीगल हेयर सर्टिफिकेट में क्या अंतर है?

सक्सेशन सर्टिफिकेट और लीगल हेयर सर्टिफिकेट दोनों अलग-अलग काम के लिए होते हैं। कौन-सा कागज बनवाना जरूरी है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह की प्रॉपर्टी या पैसे लेने हैं।

इसे भी पढ़ें:  क्या किसी सरकारी कर्मचारी को आपराधिक मामले के दौरान ससपेंड किया जा सकता है?
अंतरलीगल हेयर सर्टिफिकेटसक्सेशन सर्टिफिकेट
क्या है?यह मृत व्यक्ति के कानूनी वारिसों की पहचान बताने वाला कागज है।यह कोर्ट से मिलने वाला कागज है, जिससे मृत व्यक्ति के कुछ खास पैसे और निवेश लेने में मदद मिलती है।
किस काम आता है?यह साबित करने में मदद करता है कि मृत व्यक्ति के परिवार में उसके कानूनी वारिस कौन हैं।यह सर्टिफिकेट में लिखे गए पैसे और निवेश लेने या उनसे जुड़े काम करने में मदद करता है।
कौन जारी करता है?आमतौर पर संबंधित सरकारी विभाग या राजस्व अधिकारी जारी करते हैं।संबंधित कोर्ट जारी करता है।
किस कानून के तहत?इसके नियम राज्य और काम के अनुसार अलग हो सकते हैं।यह मुख्य रूप से इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 के तहत आता है।
कहाँ जरूरत पड़ सकती है?सरकारी लाभ लेने, परिवार से जुड़े दावों और दूसरे सरकारी कामों में।मृत व्यक्ति के बैंक में जमा कुछ पैसे, निवेश या दूसरे तय पैसों को लेने में।
जमीन या मकान के लिएप्रॉपर्टी से जुड़े कामों में मदद कर सकता है, लेकिन इससे अपने आप मालिकाना हक साबित नहीं होता।आमतौर पर जमीन या मकान पर विरासत का हक साबित करने के लिए इसकी जरूरत नहीं होती।
क्या यह प्रॉपर्टी का विवाद सुलझाता है?नहीं, इससे मालिकाना हक या वारिसों के हिस्से का विवाद अपने आप नहीं सुलझता।नहीं, इसका काम सर्टिफिकेट में लिखे पैसों और निवेश तक सीमित होता है।
कब बनवाना चाहिए?जब संबंधित विभाग को कानूनी वारिसों की पहचान का सबूत चाहिए।जब मृत व्यक्ति के तय पैसे या निवेश लेने के लिए इसकी जरूरत हो।

जरूरी बात: इनमें से कोई भी सर्टिफिकेट बनवाने से पहले बैंक, सरकारी विभाग या संबंधित कार्यालय से पता कर लें कि कौन-से कागजात चाहिए। जरूरत के हिसाब से नियम अलग हो सकते हैं। किसी भी सर्टिफिकेट को हर तरह के विरासत या प्रॉपर्टी विवाद का आखिरी फैसला नहीं समझना चाहिए।

सक्सेशन सर्टिफिकेट कब जरूरी होता है?

जब किसी लीगल हेयर को मृत व्यक्ति के बैंक में जमा कुछ पैसे, शेयर या दूसरे निवेश लेने हों, तो कुछ मामलों में सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ सकती है।

1. बैंक में जमा पैसे

अगर मृत व्यक्ति का बैंक में खाता था, तो बैंक पैसे देने से पहले कुछ जरूरी कागजात माँग सकता है।

अगर बैंक खाते में नॉमिनी है या कोई दूसरा खाताधारक है, तो प्रक्रिया अलग हो सकती है। कुछ मामलों में बैंक लीगल हेयर सर्टिफिकेट, लिखित गारंटी या दूसरे कागजात भी स्वीकार कर सकता है। अगर पैसे को लेकर परिवार में विवाद है, तो बैंक सक्सेशन सर्टिफिकेट माँग सकता है।

2. शेयर और दूसरे इन्वेस्टमेंट

अगर मृत व्यक्ति के नाम पर शेयर, बॉन्ड या दूसरे निवेश हैं, तो उन्हें वारिस के नाम करने के लिए संबंधित कंपनी या संस्था कुछ कागजात माँग सकती है। हर मामले में सक्सेशन सर्टिफिकेट जरूरी नहीं होता। इसलिए पहले संबंधित संस्था से पता कर लें कि कौन-से कागजात चाहिए।

3. मृत व्यक्ति को किसी से मिलने वाले पैसे

मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने किसी को पैसे उधार दिए थे, लेकिन पैसे वापस मिलने से पहले उसकी मृत्यु हो गई। अब उसके लीगल हेयर को वे पैसे लेने हैं। ऐसे मामले में पैसे लेने का हक साबित करने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ सकती है।

4. पैसों को लेकर परिवार में विवाद

अगर परिवार के कई लोग एक ही पैसे या निवेश पर अपना हक जता रहे हैं, तो बैंक या संबंधित संस्था पैसे देने से मना कर सकती है, जब तक विवाद का समाधान न हो जाए। ऐसे में सक्सेशन सर्टिफिकेट या कोर्ट के किसी दूसरे आदेश की जरूरत पड़ सकती है।

इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 372 में बताया गया है कि सक्सेशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन देते समय कौन-कौन सी जानकारी देनी होती है।

इसे भी पढ़ें:  एक ही प्रॉपर्टी दो लोगों को बेच दी गई? खरीदार के कानूनी अधिकार क्या हैं?

वसीयत होने या न होने पर प्रॉपर्टी का बँटवारा कैसे होता है?

अगर मृत व्यक्ति ने वसीयत बनाई है, तो आमतौर पर उसकी प्रॉपर्टी वसीयत में लिखी बातों के अनुसार बाँटी जाती है। लेकिन यह लागू कानून और किसी कानूनी विवाद पर भी निर्भर करता है। कुछ मामलों में कोर्ट से प्रोबेट या दूसरा आदेश लेना भी जरूरी हो सकता है। जहाँ प्रोबेट जरूरी है, वहाँ सक्सेशन सर्टिफिकेट उसकी जगह नहीं ले सकता।

अगर मृत व्यक्ति ने वसीयत नहीं बनाई है, तो उसकी प्रॉपर्टी पर लागू कानून के अनुसार कानूनी वारिसों को हक मिलता है। किस वारिस को कितना हिस्सा मिलेगा, यह मृत व्यक्ति के धर्म, परिवार के रिश्तों और प्रॉपर्टी के प्रकार पर निर्भर करता है। लीगल हेयर सर्टिफिकेट से वारिसों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे उनके हिस्से का आखिरी फैसला नहीं होता।

उदाहरण: अगर किसी व्यक्ति ने वसीयत में अपना मकान एक परिवार के सदस्य को और अपने निवेश दूसरे सदस्य को देने की बात लिखी है, तो दोनों के नाम करने की प्रक्रिया अलग हो सकती है। वहीं, अगर वसीयत नहीं है, तो प्रॉपर्टी लागू कानून के अनुसार हकदार वारिसों में बाँटी जाएगी।

क्या एक लीगल हेयर दूसरे वारिसों की सहमति के बिना प्रॉपर्टी बेच सकता है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी में किसका कितना हिस्सा है और उसे बेचने के लिए किसके पास कानूनी अधिकार है।

अगर कई लीगल हेयर्स को प्रॉपर्टी विरासत में मिली है, तो आमतौर पर कोई एक वारिस पूरी प्रॉपर्टी को अकेले नहीं बेच सकता। हालाँकि, लागू कानून के अनुसार वह अपने हिस्से को ट्रांसफर कर सकता है।

उदाहरण: अगर तीन भाई-बहनों को एक मकान विरासत में मिला है, तो उनमें से कोई एक कानूनी अधिकार के बिना पूरा मकान नहीं बेच सकता। अगर उनके बीच बँटवारे को लेकर विवाद है, तो वे आपस में बँटवारा कर सकते हैं या कोर्ट जा सकते हैं।

सक्सेशन सर्टिफिकेट से जमीन या मकान के मालिकाना हक और बँटवारे से जुड़ा हर विवाद हल नहीं होता। ऐसे मामलों में कोर्ट से मदद लेनी पड़ सकती है।

अगर बैंक या सरकारी विभाग सक्सेशन सर्टिफिकेट माँगे, तो क्या करें?

अगर बैंक या सरकारी विभाग सक्सेशन सर्टिफिकेट माँगता है, तो सबसे पहले उससे पूछें कि यह क्यों जरूरी है और इसके बदले कौन-से दूसरे कागजात जमा किए जा सकते हैं।

यह भी देखें कि मामला बैंक में जमा पैसों, निवेश, इंश्योरेंस या जमीन-मकान से जुड़ा है। जरूरत के अनुसार बैंक या विभाग लीगल हेयर सर्टिफिकेट, प्रोबेट, कोर्ट का आदेश या दूसरे कागजात माँग सकता है।

अगर मामला जमीन या मकान का है, तो यह पता करें कि वास्तव में सक्सेशन सर्टिफिकेट चाहिए या प्रॉपर्टी के सरकारी रिकॉर्ड में नाम बदलने के लिए कोई दूसरा कागज जरूरी है।

अगर सभी जरूरी कागजात देने के बाद भी बैंक या विभाग आपका सही क्लेम स्वीकार नहीं करता, तो आप लिखित शिकायत दे सकते हैं और वकील से सलाह ले सकते हैं।

ध्यान रखें: सक्सेशन सर्टिफिकेट माँगना हर मामले में गलत नहीं है। इसकी जरूरत प्रॉपर्टी के प्रकार और लागू नियमों पर निर्भर करती है।

उदाहरण: अगर तीन भाई-बहनों को एक मकान विरासत में मिला है, तो उनमें से कोई एक कानूनी अधिकार के बिना पूरा मकान नहीं बेच सकता। अगर उनके बीच बँटवारे को लेकर विवाद है, तो वे आपस में बँटवारा कर सकते हैं या कोर्ट जा सकते हैं।

सक्सेशन सर्टिफिकेट से जमीन या मकान के मालिकाना हक और बँटवारे से जुड़ा हर विवाद हल नहीं होता। ऐसे मामलों में कोर्ट से मदद लेनी पड़ सकती है।

सक्सेशन सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया क्या है?

अगर सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत है, तो इसके लिए इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 के तहत संबंधित कोर्ट में आवेदन देना होता है। आमतौर पर इसकी प्रक्रिया इस तरह होती है:

  • स्टेप 1: प्रॉपर्टी और पैसों की जानकारी जुटाएँ। उन पैसों और निवेश की जानकारी तैयार करें, जिनके लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट चाहिए।
  • स्टेप 2: जरूरी कागजात इकट्ठा करें। इनमें डेथ सर्टिफिकेट, पहचान पत्र, मृत व्यक्ति के परिवार की जानकारी और संबंधित पैसों या निवेश के रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।
  • स्टेप 3: कोर्ट में आवेदन दें। संबंधित जिला जज की कोर्ट में कानून के अनुसार आवेदन दिया जाता है। एक्ट की धारा 371 कोर्ट के अधिकार क्षेत्र और धारा 372 आवेदन की प्रक्रिया से जुड़ी है।
  • स्टेप 4: कोर्ट की प्रक्रिया पूरी करें। कोर्ट नोटिस जारी कर सकता है, आपत्तियाँ माँग सकता है और दिए गए कागजातों की जाँच कर सकता है।
  • स्टेप 5: सक्सेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करें। कोर्ट संतुष्ट होने पर संबंधित पैसों और निवेश के लिए सर्टिफिकेट जारी कर सकता है।
इसे भी पढ़ें:  कंपनी रजिस्टर होने के बाद कौन-से लीगल कम्प्लाइंस ज़रूरी हैं?

इस प्रक्रिया में लगने वाला समय और खर्च कोर्ट, कागजातों और किसी विवाद या आपत्ति के होने पर निर्भर करता है।

अगर वारिसों के बीच विवाद हो, तो क्या कानूनी उपाय हैं?

विरासत में मिली प्रॉपर्टी को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच विवाद हो सकता है। जैसे, कोई वारिस पूरी प्रॉपर्टी पर अपना हक जताए, कोई वसीयत को चुनौती दे या कोई प्रॉपर्टी के कागजात देने से मना करे।

ऐसी स्थिति में ये कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  • लीगल नोटिस: वकील के जरिए दूसरे पक्ष को नोटिस भेजकर अपना हक मानने या विवाद सुलझाने के लिए कहा जा सकता है।
  • डिक्लेरेशन सूट: अपने कानूनी हक या मालिकाना हक की घोषणा के लिए सिविल कोर्ट में केस किया जा सकता है।
  • पार्टिशन सूट: अगर वारिसों के बीच संयुक्त प्रॉपर्टी के बँटवारे पर सहमति नहीं बनती, तो कोर्ट में बँटवारे का केस किया जा सकता है।
  • इंजंक्शन: अगर प्रॉपर्टी को गलत तरीके से बेचने या उसके इस्तेमाल में दखल देने का खतरा है, तो कानूनी आधार होने पर कोर्ट से रोक लगाने का आदेश माँगा जा सकता है।
  • वसीयत से जुड़ी कानूनी कार्यवाही: अगर वसीयत की वैधता या उसमें लिखी बातों को लेकर विवाद है, तो कोर्ट में मामला ले जाना पड़ सकता है।

कौन-सा कानूनी उपाय सही रहेगा, यह मामले की स्थिति, उपलब्ध सबूत और कानून में तय समय-सीमा पर निर्भर करता है। इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले वकील को संबंधित कागजात दिखाकर सलाह लेना बेहतर है।

लीगल हेयर्स के लिए जरूरी सावधानियाँ

विरासत में मिली प्रॉपर्टी पर हक जताने या उसे ट्रांसफर करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

सबसे पहले, मृत व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट और प्रॉपर्टी से जुड़े ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करें। साथ ही, यह पता करें कि कानून के अनुसार किन-किन लोगों का प्रॉपर्टी पर हक बनता है।

अगर वसीयत है, तो उसकी जाँच करवाएँ और पता करें कि आगे कौन-सी कानूनी प्रक्रिया जरूरी है। अगर वसीयत नहीं है, तो लागू कानून के अनुसार वारिसों के हिस्से तय होंगे।

आवेदन, बैंक से हुई बातचीत, प्रॉपर्टी के कागजात और दूसरे वारिसों की आपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड संभालकर रखें। किसी भी रिलिंक्विशमेंट डीड (हक छोड़ने के दस्तावेज) या फैमिली सेटलमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले उसके कानूनी असर को अच्छी तरह समझ लें।

सबसे जरूरी बात: सरकारी रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी का नाम बदलने से ही मालिकाना हक का आखिरी फैसला नहीं हो जाता। अगर वारिसों के बीच विवाद है, तो प्रॉपर्टी बेचने या ट्रांसफर करने से पहले वकील से सलाह लें।

निष्कर्ष

विरासत में मिली हर तरह की प्रॉपर्टी या पैसों के लिए एक ही कागज जरूरी नहीं होता। मकान या जमीन पर हक जताने, बैंक से पैसे लेने और निवेश ट्रांसफर करने के लिए अलग-अलग कागजातों की जरूरत हो सकती है। यह बात समझने से समय और पैसे की बचत हो सकती है।

इसलिए, सक्सेशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन देने से पहले यह पता करें कि आप किस तरह की प्रॉपर्टी या पैसे पर हक जता रहे हैं और उसके लिए कौन-से कागजात जरूरी हैं। अगर वारिसों के बीच विवाद है या परिवार की स्थिति जटिल है, तो वकील से सलाह लेकर अपने कानूनी हक और सही प्रक्रिया को समझें।

किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।

FAQs

1. क्या मैं सक्सेशन सर्टिफिकेट के बिना अपने पिता का मकान विरासत में पा सकता हूँ?

हाँ, कई मामलों में मकान पर विरासत का हक जताने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट जरूरी नहीं होता। हालाँकि, अपना हक साबित करने और प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड में नाम बदलवाने के लिए दूसरे कागजातों की जरूरत हो सकती है।

2. क्या लीगल हेयर सर्टिफिकेट और सक्सेशन सर्टिफिकेट एक ही हैं?

नहीं। लीगल हेयर सर्टिफिकेट मृत व्यक्ति के कानूनी वारिसों की पहचान बताता है, जबकि सक्सेशन सर्टिफिकेट कोर्ट से मिलता है और मृत व्यक्ति के कुछ खास पैसों और निवेश से जुड़ा होता है।

3. क्या बैंक सक्सेशन सर्टिफिकेट के बिना पैसे देने से मना कर सकता है?

हाँ, कुछ मामलों में बैंक सक्सेशन सर्टिफिकेट माँग सकता है। हालाँकि, कुछ स्थितियों में दूसरे कागजात भी स्वीकार किए जा सकते हैं। यह बैंक खाते, नॉमिनी और दूसरे दावेदारों पर निर्भर करता है।

4. क्या लीगल हेयर्स सक्सेशन सर्टिफिकेट के बिना प्रॉपर्टी ट्रांसफर कर सकते हैं?

हाँ, कई मामलों में ऐसा संभव है। इसके लिए वारिसों को अपना कानूनी हक साबित करना होगा और प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड में नाम बदलने या रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

5. अगर एक वारिस सहयोग करने से मना करे, तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में दूसरे वारिस लीगल नोटिस भेज सकते हैं, आपसी सहमति से बँटवारा कर सकते हैं या जरूरत पड़ने पर कोर्ट में केस कर सकते हैं। सही कानूनी उपाय प्रॉपर्टी के कागजात और विवाद की स्थिति पर निर्भर करेगा।

Social Media