कई रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी में एक कॉमन पैसेज होता है, जिसका इस्तेमाल कई लोग आने-जाने के लिए करते हैं। इस रास्ते से लोग अपने घर, दुकान, पार्किंग और दूसरी साझा सुविधाओं तक पहुंचते हैं। अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसाइटी में कॉमन रास्ते में कॉरीडोर, सीढ़ियां, मुख्य गेट, आने-जाने का रास्ता और दूसरी साझा जगहें शामिल हो सकती हैं। समस्या तब शुरू होती है, जब कोई व्यक्ति कॉमन पैसेज को अपनी निजी जगह समझकर उस पर कब्जा करने लगता है।
ऐसा करने से उन लोगों को परेशानी होती है, जिन्हें कानून के अनुसार उस रास्ते का इस्तेमाल करने का अधिकार है। कई सवालों का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आपको उस रास्ते का इस्तेमाल करने का कानूनी अधिकार है या नहीं। अगर रास्ता सभी के इस्तेमाल के लिए है या आपको उस पर आने-जाने का कानूनी अधिकार (Right of Way) मिला हुआ है, तो कोई दूसरा व्यक्ति आमतौर पर गैरकानूनी तरीके से आपका रास्ता बंद नहीं कर सकता।
कॉमन पैसेज क्या होता है?
कॉमन पैसेज ऐसी जगह या रास्ता होता है, जिसका इस्तेमाल कानून के अनुसार एक से ज्यादा व्यक्ति या प्रॉपर्टी मालिक कर सकते हैं। ऐसा रास्ता प्रॉपर्टी के दस्तावेजों, बिल्डिंग के नक्शे, अपार्टमेंट या सोसाइटी के नियमों, ईजमेंट राइट या लंबे समय से चले आ रहे कानूनी रास्ते के अधिकार के आधार पर हो सकता है। कॉमन पैसेज के कुछ उदाहरण हैं:
- ऐसा रास्ता जिसका इस्तेमाल कई लोग आने-जाने के लिए करते हैं।
- कई घरों को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला रास्ता।
- अपार्टमेंट की साझा गैलरी या कॉरिडोर
- कॉमन सीढ़ियां या लॉबी।
- ऐसा रास्ता जिसका इस्तेमाल कई प्रॉपर्टी मालिक करते हैं।
- बिल्डिंग के मंजूर नक्शे में दिया गया साझा रास्ता।
- हाउसिंग सोसाइटी के निवासियों के लिए बनाया गया आने-जाने का रास्ता।
यह समझना जरूरी है कि दो प्रॉपर्टी के बीच खाली जगह होने से वह अपने आप कॉमन पैसेज नहीं बन जाती। यह जानने के लिए कि वह जगह कॉमन रास्ता है या नहीं, सेल डीड, कन्वेयंस डीड, मंजूर लेआउट प्लान, बिल्डिंग प्लान, सोसाइटी के दस्तावेज और दूसरे संबंधित रिकॉर्ड देखने जरूरी हैं।
अगर इन दस्तावेजों में किसी रास्ते को कॉमन एरिया दिखाया गया है, तो कोई एक व्यक्ति उस पर अकेले अपना अधिकार नहीं जता सकता और न ही ऐसा इस्तेमाल कर सकता है जिससे दूसरे लोगों का रास्ता इस्तेमाल करने का अधिकार खत्म हो जाए।
कॉमन रास्ते पर गैरकानूनी कब्जा किसे कहते हैं?
जब कोई व्यक्ति बिना कानूनी अधिकार के किसी साझा जगह पर कब्जा कर लेता है, रास्ता बंद कर देता है या वहां अपना निर्माण कर लेता है, तो इसे गैरकानूनी कब्जा कहा जा सकता है। कॉमन रास्ते पर कब्जा कई तरीकों से किया जा सकता है:
- रास्ते पर दीवार बनाना: कोई पड़ोसी साझा रास्ते के बीच दीवार बनाकर दूसरों का आना-जाना मुश्किल या पूरी तरह बंद कर सकता है।
- गेट या ताला लगाना: कोई व्यक्ति कॉमन रास्ते पर गेट लगाकर उसमें ताला लगा देता है, जिससे दूसरे लोग उस रास्ते का इस्तेमाल नहीं कर पाते।
- अपनी प्रॉपर्टी का निर्माण बढ़ाना: कोई व्यक्ति अपने घर, दुकान या बाउंड्री वॉल को बढ़ाकर कॉमन एरिया की जगह पर कब्जा कर सकता है।
- रास्ते में गाड़ी खड़ी करना: कोई निवासी कॉमन रास्ते में बार-बार गाड़ी खड़ी करके दूसरों का आना-जाना रोक सकता है।
- अपना सामान रखना: कॉमन गलियारे में अलमारी, फर्नीचर, निर्माण का सामान, गमले या दूसरी चीजें रखना भी नियमों और परिस्थितियों के अनुसार गलत हो सकता है।
- आने-जाने का एकमात्र रास्ता बंद करना: कोई व्यक्ति दूसरी प्रॉपर्टी तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बंद कर सकता है। इससे वहां रहने वाले लोगों को परेशानी होती है और उनके आने-जाने का अधिकार भी प्रभावित हो सकता है।
- सोसाइटी के कॉमन एरिया पर कब्जा करना: कोई निवासी बिना कानूनी अधिकार के कॉमन लॉबी, सीढ़ियों, ड्राइववे या दूसरी साझा जगह को अपने निजी इस्तेमाल में ले सकता है।
ध्यान रखें कि हर अस्थायी रुकावट को स्थायी गैरकानूनी कब्जा नहीं कहा जा सकता। लेकिन अगर थोड़े समय के लिए भी रास्ता रोकने से किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकार पर गंभीर असर पड़ता है, तो ऐसी रुकावट भी गैरकानूनी हो सकती है।
कॉमन पैसेज पर कब्जे के खिलाफ आपके कानूनी अधिकार क्या हैं?
भारतीय कानून कॉमन पैसेज पर गैरकानूनी कब्जे और रास्ता रोकने के खिलाफ सुरक्षा देता है। आपके अधिकार इस बात पर निर्भर करते हैं कि पैसेज की स्थिति क्या है।
इंडियन ईसमेंट एक्ट, 1882 के तहत आने-जाने का अधिकार
इस कानून की धारा 4 के तहत किसी व्यक्ति को अपनी प्रॉपर्टी तक पहुंचने के लिए दूसरे की जमीन से होकर जाने का अधिकार मिल सकता है। यह अधिकार लिखित समझौते, प्रॉपर्टी की परिस्थितियों, रास्ते की जरूरत या लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल से मिल सकता है।
धारा 15 के अनुसार, निजी जमीन पर रास्ते का अधिकार पाने के लिए आमतौर पर 20 साल और सरकारी जमीन के मामले में 30 साल तक लगातार, खुले तौर पर और बिना रुकावट रास्ते का इस्तेमाल करना जरूरी है।
सिर्फ लंबे समय तक रास्ते का इस्तेमाल करने से अपने आप कानूनी अधिकार नहीं मिलता। कानून की शर्तें पूरी होना जरूरी है।
RERA, 2016 के तहत साझा जगहों के अधिकार
RERA के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स में साझा जगहों के इस्तेमाल और अधिकारों की सुरक्षा की गई है।
- धारा 2(n): इसमें सीढ़ियां, लिफ्ट, आने-जाने के रास्ते, पार्किंग और दूसरी साझा सुविधाएं शामिल हैं।
- धारा 17: साझा जगहों का मालिकाना हक लागू नियमों के अनुसार संबंधित निवासी संघ या प्राधिकरण को सौंपा जाता है।
अगर बिल्डर या कोई अन्य व्यक्ति साझा जगह पर कब्जा करता है, तो प्रभावित निवासी RERA के तहत शिकायत कर सकते हैं। हालांकि, हर पैसेज विवाद RERA के दायरे में नहीं आता।
अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसाइटी के नियम
अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसाइटी में राज्य के संबंधित कानून और सोसाइटी के नियम लागू हो सकते हैं। कोई निवासी साझा सीढ़ियों, गलियारे या रास्ते पर अकेले अपना अधिकार नहीं जता सकता। कब्जे की शिकायत मिलने पर सोसाइटी नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।
कानूनी कार्रवाई से पहले आपको क्या करना चाहिए?
कोर्ट जाने से पहले अपने कानूनी अधिकार और कॉमन पैसेज पर कब्जे से जुड़े सबूत इकट्ठा करें।
- स्टेप 1: प्रॉपर्टी के दस्तावेज देखें सेल डीड, प्रॉपर्टी समझौता, मंजूर नक्शा, सोसाइटी के नियम और बंटवारे के दस्तावेज जांचें। देखें कि पैसेज को साझा जगह या आने-जाने के रास्ते के रूप में दिखाया गया है या नहीं।
- स्टेप 2: फोटो और वीडियो लें अगर किसी ने दीवार बनाई है, गेट लगाया है या सामान रखकर रास्ता रोका है, तो उसकी साफ तस्वीरें और वीडियो लें। असली तस्वीरें और वीडियो सुरक्षित रखें।
- स्टेप 3: मंजूर नक्शे की कॉपी लें संबंधित सरकारी विभाग से मंजूर नक्शे की प्रमाणित कॉपी लें। इससे यह साबित करने में मदद मिल सकती है कि पैसेज साझा इस्तेमाल के लिए है या निर्माण नियमों के खिलाफ किया गया है।
- स्टेप 4: कब्जा करने वाले व्यक्ति की पहचान करें पता करें कि रुकावट किसने बनाई है—पड़ोसी, प्रॉपर्टी मालिक, किराएदार, बिल्डर या सोसाइटी के किसी सदस्य ने। इससे सही व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
- स्टेप 5: शिकायतों का रिकॉर्ड रखें सोसाइटी, बिल्डर या सरकारी विभाग में की गई शिकायतों और उनके जवाबों की कॉपी सुरक्षित रखें। ये कोर्ट में आपके काम आ सकते हैं।
कॉमन पैसेज पर गैरकानूनी कब्जे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कैसे करें?
अगर कब्जा करने वाला व्यक्ति कॉमन पैसेज से रुकावट हटाने से मना करता है, तो आप ये कानूनी कदम उठा सकते हैं।
कानूनी नोटिस भेजें कब्जा करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस भेजकर रुकावट हटाने की मांग करें। नोटिस में अपने आने-जाने के अधिकार, कब्जे की जानकारी और रुकावट हटाने की समय-सीमा का उल्लेख करें।
नगर निगम में शिकायत करें अगर कॉमन पैसेज पर अवैध निर्माण या दीवार बनाई गई है, तो नगर निगम या विकास प्राधिकरण में लिखित शिकायत करें। साथ में तस्वीरें, प्रॉपर्टी के कागजात और मंजूर नक्शे की कॉपी लगाएं। शिकायत की रसीद संभालकर रखें।
हाउसिंग सोसाइटी में शिकायत करें अगर कॉमन पैसेज सोसाइटी का हिस्सा है, तो प्रबंध समिति को लिखित शिकायत दें। सोसाइटी अपने नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। कार्रवाई न होने पर संबंधित अधिकारी या कोर्ट में शिकायत की जा सकती है।
सिविल कोर्ट में केस करें अगर कब्जा नहीं हटाया जाता, तो स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट, 1963 के तहत कोर्ट से ये आदेश मांगे जा सकते हैं:
- धारा 38 – स्थायी रोक का आदेश: किसी व्यक्ति को आपका रास्ता रोकने या आपके अधिकार में रुकावट डालने से रोकना।
- धारा 39 – रुकावट हटाने का आदेश: कॉमन पैसेज पर बनाई गई दीवार या दूसरी रुकावट हटाने का आदेश।
अस्थायी रोक का आदेश मांगें अगर पड़ोसी केस के दौरान भी निर्माण कर रहा है या रास्ता बंद कर सकता है, तो सिविल प्रोसीजर कोड, 1908 के आर्डर XXXIX, रूल्स 1 और 2 के तहत अस्थायी रोक का आदेश मांगा जा सकता है।
कोर्ट यह देखता है कि आपके पास अधिकार के सबूत हैं या नहीं, किस पक्ष को कम नुकसान होगा और क्या आपको ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी बाद में भरपाई मुश्किल हो।
क्या गैरकानूनी कब्जे के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर सकते हैं?
अगर कॉमन पैसेज पर कब्जे के साथ कोई आपराधिक हरकत भी हुई है, तो पुलिस में शिकायत की जा सकती है। उदाहरण के लिए:
- रास्ते का इस्तेमाल करने पर किसी को धमकी देना या मारपीट करना।
- गेट, दीवार या दूसरी चीजों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना।
- जबरदस्ती करके किसी को आने-जाने से रोकना।
- जान से मारने या नुकसान पहुंचाने की धमकी देना।
मामले के तथ्यों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
हालांकि, कॉमन पैसेज से जुड़ा हर विवाद आपराधिक मामला नहीं होता। मालिकाना हक, जमीन की सीमा या आने-जाने के अधिकार से जुड़े विवाद आमतौर पर दीवानी मामले होते हैं।
पुलिस आमतौर पर प्रॉपर्टी के मालिकाना हक का अंतिम फैसला नहीं कर सकती। रास्ते से रुकावट हटाने और कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के लिए कोर्ट जाना पड़ सकता है। अगर आपकी सुरक्षा को तुरंत खतरा है, तो बिना देरी किए पुलिस से संपर्क करें।
अगर पड़ोसी दावा करे कि कॉमन पैसेज उसकी प्रॉपर्टी है तो क्या करें?
प्रॉपर्टी विवाद में पड़ोसी यह दावा कर सकता है कि विवादित पैसेज उसकी निजी जमीन का हिस्सा है और उसे वहां दीवार बनाने या गेट लगाने का अधिकार है। ऐसी स्थिति में कोर्ट इन बातों की जांच कर सकता है:
- दोनों प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री।
- मालिकाना हक के पुराने दस्तावेज।
- मंजूर नक्शा।
- राजस्व या नगर निगम के रिकॉर्ड।
- आने-जाने के अधिकार से जुड़े दस्तावेज।
- पैसेज के इस्तेमाल का पुराना इतिहास।
- क्या पैसेज साझा इस्तेमाल के लिए बनाया गया था।
अगर विवाद जमीन के मालिकाना हक या सीमा को लेकर है, तो कोर्ट पहले इस बात का फैसला कर सकता है।
सिर्फ किसी जगह को कॉमन पैसेज कहने से उस पर कानूनी अधिकार साबित नहीं होता। इसी तरह, पड़ोसी के केवल दावा करने से वह जगह उसकी निजी प्रॉपर्टी नहीं बन जाती।
सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले
सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में बताया है कि किसी व्यक्ति के कानूनी प्रॉपर्टी अधिकारों में रुकावट डालने पर वह कोर्ट से सुरक्षा मांग सकता है।
हीरो विनोथ (माइनर) बनाम सेशम्मल (2006)
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे की जमीन से रास्ता पाने के अधिकार से जुड़े नियमों को समझाया। कोर्ट ने बताया कि केवल सुविधा के लिए किसी रास्ते की जरूरत होना, रास्ते का कानूनी अधिकार पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कानून की शर्तें पूरी होना जरूरी है।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है? यह समझने में मदद करता है कि किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति दूसरे की जमीन से होकर आने-जाने का कानूनी अधिकार मांग सकता है।
बच्छज नाहर बनाम नीलिमा मंडल (2008)
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रास्ते के अधिकार का दावा करते समय उसके कानूनी आधार और जरूरी तथ्यों को केस में साफ तौर पर बताना जरूरी है। सिर्फ रास्ते का अधिकार मांगने से कोर्ट आदेश नहीं दे सकता। दावे को सही तथ्यों और सबूतों से साबित करना होता है।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है? रास्ते का अधिकार मांगने वाले व्यक्ति को बताना चाहिए कि उसे यह अधिकार लिखित अनुमति, रास्ते की जरूरत या लंबे समय तक इस्तेमाल के आधार पर मिला है।
क्या आप खुद कब्जा हटा सकते हैं?
आमतौर पर आपको खुद दीवार तोड़कर, गेट हटाकर या जबरदस्ती पैसेज पर कब्जा करके रुकावट नहीं हटानी चाहिए। भले ही आपको लगे कि कब्जा गैरकानूनी है, फिर भी ऐसा करने से नया विवाद या आपराधिक शिकायत हो सकती है। इसके बजाय सबूत सुरक्षित रखें, लिखित शिकायत करें और संबंधित सरकारी विभाग या कोर्ट से मदद लें। अगर कोर्ट रुकावट हटाने का आदेश देता है और दूसरा पक्ष उसका पालन नहीं करता, तो आप कानून के अनुसार कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करवाने की मांग कर सकते हैं। इससे आप बिना किसी नए कानूनी विवाद में पड़े अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।
निष्कर्ष
कॉमन पैसेज उन सभी लोगों के इस्तेमाल के लिए होता है, जिन्हें वहां से आने-जाने का कानूनी अधिकार है। कोई भी व्यक्ति इसे अपनी निजी जगह समझकर दूसरों का रास्ता बंद नहीं कर सकता।
ऐसी रुकावट के खिलाफ कानून में शिकायत और कोर्ट जाने के विकल्प मौजूद हैं। लेकिन केस मजबूत बनाने के लिए सही दस्तावेज और सबूत होना जरूरी है।
कॉमन पैसेज सभी के साझा इस्तेमाल के लिए है। किसी एक व्यक्ति को दूसरों के आने-जाने का अधिकार छीनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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FAQs
1. क्या पड़ोसी कानूनी रूप से कॉमन पैसेज बंद कर सकता है?
आमतौर पर नहीं। अगर पैसेज साझा इस्तेमाल के लिए है या किसी व्यक्ति को वहां से आने-जाने का कानूनी अधिकार है, तो पड़ोसी उसे जबरदस्ती बंद नहीं कर सकता।
2. कॉमन पैसेज पर कब्जा होने पर क्या कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं?
आप कब्जा करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस भेज सकते हैं, सोसाइटी या नगर निगम में शिकायत कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर कोर्ट में केस कर सकते हैं।
3. क्या कॉमन पैसेज पर बनाई गई दीवार हटाने के लिए केस कर सकते हैं?
हां। अगर दीवार से आपके कानूनी रास्ते के अधिकार में रुकावट आती है, तो स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट , 1963 की धारा 39 के तहत कोर्ट से दीवार हटाने का आदेश मांग सकते हैं।
4. क्या कब्जे की शिकायत नगर निगम में कर सकते हैं?
हां। अगर कब्जा अवैध निर्माण या मंजूर नक्शे के नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है, तो संबंधित नगर निगम या विकास प्राधिकरण में शिकायत कर सकते हैं।
5. क्या पुलिस निजी कॉमन पैसेज से कब्जा हटा सकती है?
अगर मामले में धमकी, मारपीट या कोई दूसरी आपराधिक हरकत हुई है, तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है। लेकिन निजी जमीन के मालिकाना हक और रास्ते के अधिकार का फैसला आमतौर पर दीवानी कोर्ट करता है।


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