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Adv. Vikas Puri

I am Advocate Vikas Puri, interested in solving intricate cases. I have 8 years of experience. I have done my graduation in Law. I am enrolled in the Bar Council of Delhi and practicing in Delhi High Court, Karkardooma Court, Patiala House Court, Saket Court, Tis Hazari Court. I'm well trained in the field of Agreements, Cheque Bounce, Couple Protection, Court Marriage, Criminal Matter, Employment Matter, Marriage Registration, Money Recovery, Null & Void Marriage. I love to familiarise myself with tricky rigid cases related to both companies and individuals, identifying legal concerns and creating new and unharmed strategies for my clients.

Adv. Vikas Puri
Important Court Decisions on IPR Cases in India – Know Court Stand on Trademark, Patent and Copyright

भारत में IPR मामलों के महत्वपूर्ण न्यायालयिक फैसले– जानिए ट्रेडमार्क, पेटेंट और कॉपीराइट पर कोर्ट का रुख

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) आज की दुनिया में नवाचार, व्यापार और रचनात्मकता के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत, जो एक उभरता हुआ बाज़ार है, यहाँ ट्रेडमार्क, पेटेंट और कॉपीराइट से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं। जब कोई व्यवसायी एक नया ब्रांड बनाता है, कोई वैज्ञानिक कुछ नया आविष्कार करता है, या कोई …

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What is the Supreme Court's stand on the validity of UCC Know constitutional rights and limitations

UCC की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है? जानिए संवैधानिक अधिकार और सीमाएँ

भारत में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) का मुद्दा कई सालों से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने भी समय-समय पर इस पर अपनी राय रखी है। कोर्ट का कहना है कि अगर सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, सक्सेशन और एडॉप्शन जैसे मामलों में एक समान क़ानून हो, तो यह बराबरी और न्याय को मज़बूत …

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Can bail be granted in the Supreme Court Know the process of bail petition and major decisions

क्या सुप्रीम कोर्ट में बेल मिल सकती है? जानिए बेल पिटीशन की प्रक्रिया और प्रमुख फैसले

बेल एक बहुत महत्वपूर्ण हक है जो किसी भी आरोपी को दिया जाता है। इसका मकसद यह है कि जब तक केस का फैसला नहीं होता, तब तक आरोपी अपनी निजी आज़ादी के साथ बाहर रह सके। कानून का सिद्धांत है – “जब तक दोष साबित न हो, आरोपी निर्दोष माना जाएगा।” इसलिए, गिरफ्तारी और …

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Can the Supreme Court directly intervene in social matters Know the role of PIL and the court

क्या सुप्रीम कोर्ट सामाजिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप कर सकता है? जानिए PIL और कोर्ट की भूमिका

भारत में सुप्रीम कोर्ट सिर्फ निजी विवाद सुलझाने की जगह नहीं है, बल्कि इसे सामाजिक न्याय का रक्षक भी माना जाता है। कई बार जब सरकार या अधिकारी सही कदम नहीं उठाते, तो सुप्रीम कोर्ट आगे आकर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, पर्यावरण की सुरक्षा करता है और संविधान के मूल्यों को बचाता …

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Can a transfer petition be filed in both civil and criminal cases in the Supreme Court Know the procedure and rules

क्या सुप्रीम कोर्ट में सिविल और आपराधिक दोनों मामलों में ट्रांसफर पिटीशन दायर की जा सकती है? जानिए प्रक्रिया और नियम

कानूनी मामले अक्सर तनाव भरे और जटिल होते हैं, खासकर जब इंसाफ, कोर्ट की जगह या सुरक्षा को लेकर चिंता हो। भारत में, जब किसी को लगता है कि उनका केस किसी दूसरी अदालत में चलना चाहिए, तो वे केस को एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट में भेजने की मांग कर सकते हैं। इसे ही …

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Are you unable to repay your loan Know the law and your rights

क्या आप लोन नहीं चुका पा रहे हैं? जानिए कानून और अपने अधिकार

आज की आर्थिक परिस्थितियों में कई लोग घर खरीदने, व्यापार शुरू करने या बच्चों की पढ़ाई जैसे सपनों को पूरा करने के लिए लोन लेते हैं। लेकिन जब इन लोन की किश्तें समय पर चुकाना मुश्किल हो जाता है, तब परेशानी और तनाव शुरू होता है। लोन लेना जितना आसान होता है, उसकी किश्तें समय …

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Is registration of agreement to sell necessary Know the opinion of the court

क्या एग्रीमेंट टू सेल का रजिस्ट्रेशन जरूरी है? जानिए कोर्ट की राय

रियल एस्टेट की बिक्री में दस्तावेज़ों की सही तरीके से तैयारी और कानूनी प्रक्रिया का पालन बहुत ज़रूरी होता है। इन्हीं में से एक अहम दस्तावेज़ होता है – “एग्रीमेंट टू सेल“ यह एक लिखित समझौता होता है, जो खरीदार और विक्रेता के बीच भविष्य में प्रॉपर्टी की बिक्री को लेकर किया जाता है। लेकिन …

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What is land mutation and why is it necessary for land Complete legal information

म्यूटेशन क्या होता है और जमीन के लिए क्यों जरूरी है? पूरी कानूनी जानकारी

जब आप ज़मीन खरीदते हैं या विरासत में कोई प्रॉपर्टी मिलती है, तो ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि रजिस्ट्री हो गई मतलब काम पूरा हो गया। लेकिन यह अधूरा कदम है। रजिस्ट्री के बाद सबसे ज़रूरी प्रक्रिया होती है – म्यूटेशन। अगर म्यूटेशन नहीं कराया, तो सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम नहीं जुड़ता, जिससे आगे …

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Daughters' rights in father's property - Complete information under Hindu Succession Act 2005

पिता की संपत्ति में बेटियों का हक़ – हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के तहत पूरी जानकारी

एक समय था जब बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में कोई विशेष अधिकार नहीं था। उनका हक़ सिर्फ विवाह तक सीमित माना जाता था। लेकिन अब कानून बदल चुका है। 2005 में हुए संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों ने बेटियों को पुत्रों के समान अधिकार दिलाए हैं। अब चाहे बेटी विवाहित …

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Wrong challan or excessive fine Get such fine waived off – Step-by-step guide

गलत चालान या ज़्यादा जुर्माना लगा है? ऐसे जुर्माने को माफ कराएँ – स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

आज के डिजिटल युग में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर ई-चालान (E-Challan) तुरंत आपके मोबाइल या पोर्टल पर दिखने लगता है। यह प्रक्रिया जितनी तेज़ हुई है, उतनी ही तेज़ गलतियाँ भी सामने आ रही हैं – जैसे किसी और की गाड़ी पर आपका चालान, डुप्लीकेट चालान, ज़्यादा फाइन या पुराना मामला। गलत चालान …

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