दिल्ली में कोर्ट मैरिज कैसे करें? पूरी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और फीस

Court marriage in delhi

शादी ज़िंदगी के सबसे बड़े और अहम फैसलों में से एक होती है। जहाँ कई लोग पारंपरिक तरीके से शादी करना पसंद करते हैं, वहीं कुछ कपल्स एक ऐसा तरीका चुनते हैं जो आसान, सुरक्षित और कानूनी रूप से मज़बूत हो। दिल्ली जैसे बड़े शहर में, जहाँ अलग-अलग सोच और पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं, कोर्ट मैरिज आज एक आम और भरोसेमंद विकल्प बन चुकी है।

कोर्ट मैरिज कपल्स को कानूनी सुरक्षा, साफ़ प्रक्रिया और बराबरी का अधिकार देती है। यह उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद होती है जो सामाजिक दबाव, धार्मिक अड़चनों या ज़्यादा खर्च से बचना चाहते हैं। अगर शादी से पहले इसकी कानूनी प्रक्रिया समझ ली जाए, तो देरी, उलझन और बेवजह के तनाव से आसानी से बचा जा सकता है।

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भारतीय कानून के तहत कोर्ट मैरिज क्या है?

कोर्ट मैरिज दो लोगों की शादी को कानूनी तरीके से पूरा करने की एक प्रक्रिया है। यह शादी कोर्ट में तय कानूनों के अनुसार होती है। दिल्ली में कोर्ट मैरिज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें धर्म या जाति की कोई बाधा नहीं होती। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार है।

Court Marriage in delhi और मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग कानून लागू होते हैं, जैसे स्पेशल मैरिज एक्ट, हिंदू मैरिज एक्ट, आदि।

कोर्ट मैरिज पारंपरिक शादी से बिल्कुल अलग होती है। पारंपरिक शादी में धार्मिक रस्में और समारोह होते हैं, जबकि कोर्ट मैरिज में कोई रीति-रिवाज नहीं होते। यह शादी सीधे कोर्ट में मैरिज रजिस्ट्रार और गवाहों की मौजूदगी में कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरी की जाती है।

दिल्ली में कोर्ट मैरिज के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

दिल्ली में कोर्ट मैरिज के लिए कुछ आसान शर्तें पूरी करना ज़रूरी होता है:

  • लड़के की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए
  • लड़की की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए
  • दोनों अविवाहित हों, या पहले से तलाकशुदा हों, या विधवा/विधुर हों
  • दोनों अपनी मर्ज़ी से शादी के लिए सहमत हों
  • दोनों का रिश्ता कानून में बताए गए निषिद्ध रिश्तों में न आता हो (अगर किसी विशेष रिवाज़ से अनुमति न हो)
  • पति या पत्नी में से कम से कम एक व्यक्ति दिल्ली में पिछले 30 दिनों से रह रहा हो

दिल्ली में कोर्ट मैरिज किस कानून के तहत होती है?

दिल्ली में कोर्ट मैरिज स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत होती है। इस कानून के तहत:

  • शादी को एक कानूनी (सिविल) समझौता माना जाता है
  • लड़का और लड़की का धर्म या जाति मायने नहीं रखती
  • शादी मैरिज ऑफिसर (SDM) के सामने होती है
  • रजिस्ट्रेशन होते ही पति-पत्नी के कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियाँ शुरू हो जाती हैं

दिल्ली में शादी से जुड़े अन्य कानून

दिल्ली में कोर्ट मैरिज मुख्य रूप से स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत होती है। लेकिन भारत में शादी अलग-अलग धर्मों के अनुसार उनके पर्सनल लॉ के तहत भी मान्य होती है।

  • हिंदू मैरिज एक्ट, 1955: यह कानून हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के लोगों पर लागू होता है। आमतौर पर शादी पहले धार्मिक रीति-रिवाजों से होती है और बाद में उसका रजिस्ट्रेशन कराया जाता है।
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ: मुस्लिम शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) के तहत होती है। इसे निकाह कहा जाता है। कानूनी सुरक्षा के लिए निकाह का रजिस्ट्रेशन करवाना बेहतर होता है
  • इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872: यह कानून उन शादियों पर लागू होता है, जहाँ पति या पत्नी में से कोई एक ईसाई हो। शादी चर्च के पादरी या मैरिज रजिस्ट्रार के सामने होती है।
  • पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट, 1936: यह कानून पारसी समुदाय की शादियों पर लागू होता है। शादी धार्मिक तरीके से पारसी पादरी के सामने होती है।
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दिल्ली में कोर्ट मैरिज कहाँ की जाती है? (जूरिस्डिक्शन)

दिल्ली में कोर्ट मैरिज की अर्जी उस इलाके के मैरिज ऑफिसर (SDM) के पास दी जाती है, जहाँ दूल्हा या दुल्हन में से कोई एक कम से कम 30 दिनों से रह रहा हो।

दिल्ली के प्रमुख SDM ऑफिस इस प्रकार हैं:

  • सेंट्रल दिल्ली
  • साउथ दिल्ली
  • नॉर्थ दिल्ली
  • ईस्ट दिल्ली 
  • वेस्ट दिल्ली
  • न्यू दिल्ली

सही SDM ऑफिस में आवेदन करना बहुत ज़रूरी है। गलत जगह अर्जी देने से केस रिजेक्ट हो सकता है या बेवजह देरी हो सकती है।

दिल्ली में कोर्ट मैरिज के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

लड़का और लड़की के लिए:

  • पहचान पत्र – आधार कार्ड / पासपोर्ट / वोटर आईडी
  • जन्म तिथि का प्रमाण – जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट
  • पता प्रमाण – बिजली का बिल, किरायानामा, आधार कार्ड आदि
  • पासपोर्ट साइज फोटो – आमतौर पर 4 से 6 फोटो
  • वैवाहिक स्थिति का प्रमाण – अगर पहले शादी हुई थी तो तलाक की डिक्री, और विधवा/विधुर होने पर मृत्यु प्रमाण पत्र

गवाहों के लिए (3 गवाह ज़रूरी):

  • पहचान पत्र – आधार कार्ड / पासपोर्ट / वोटर आईडी
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • गवाहों की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए और वे मानसिक रूप से स्वस्थ होने चाहिए।

दिल्ली में कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया

स्टेप 1: शादी का नोटिस देना कोर्ट मैरिज के लिए सबसे पहले लड़का और लड़की को स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत मैरिज ऑफिसर (SDM) के पास शादी का नोटिस देना होता है। इस नोटिस में दोनों के नाम, पते, जन्म तिथि, पेशा और वैवाहिक स्थिति की जानकारी होती है और दोनों को इस पर साइन करना होता है।

स्टेप 2: 30 दिन का नोटिस पीरियड नोटिस जमा होने के बाद SDM ऑफिस में इसे 30 दिनों के लिए नोटिस बोर्ड पर लगाया जाता है, ताकि अगर किसी को कोई कानूनी आपत्ति हो तो वह सामने आ सके। अगर इस दौरान कोई वैध आपत्ति नहीं आती, तो शादी की प्रक्रिया आगे बढ़ जाती है।

स्टेप 3: आपत्ति होने की स्थिति अगर कोई व्यक्ति शादी पर आपत्ति करता है, तो मैरिज ऑफिसर यह जांच करता है कि आपत्ति कानूनी रूप से सही है या नहीं। यह जांच आमतौर पर 30 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाती है और अगर आपत्ति बेबुनियाद हो तो उसे खारिज कर दिया जाता है।

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स्टेप 4: घोषणा और शादी पूरी करना नोटिस पीरियड पूरा होने के बाद कपल को मैरिज ऑफिसर के सामने तीन गवाहों के साथ हाज़िर होना होता है। सभी लोग एक घोषणा पत्र पर साइन करते हैं और इसके बाद उसी दिन या तय की गई तारीख पर शादी कानूनी रूप से पूरी कर दी जाती है।

स्टेप 5: मैरिज सर्टिफिकेट मिलना सभी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जो शादी का कानूनी प्रमाण होता है। यह सर्टिफिकेट पासपोर्ट, वीज़ा, बैंक और अन्य सभी कानूनी कामों के लिए मान्य होता है।

दिल्ली में कोर्ट मैरिज की फीस

दिल्ली में कोर्ट मैरिज की सरकारी फीस बहुत कम होती है। आमतौर पर नोटिस देने और शादी रजिस्टर कराने की फीस लगभग ₹15000 से ₹20000 होती है। इसके अलावा अगर आपको अफिडेविट बनवाना हो या फोटो-कॉपी करानी हो, तो उसका अलग से थोड़ा खर्च आ सकता है। अगर आप वकील की मदद लेते हैं, तो उनकी प्रोफेशनल फीस अलग होती है।

दिल्ली में कोर्ट मैरिज में कितना समय लगता है?

दिल्ली में कोर्ट मैरिज पूरा होने में आमतौर पर 30 से 35 दिन लगते हैं। नोटिस देने के बाद 30 दिन का नोटिस पीरियड होता है। यह समय पूरा होते ही उसी दिन शादी और मैरिज सर्टिफिकेट मिल सकता है। अगर दस्तावेज़ सही न हों, सही SDM ऑफिस न चुना गया हो या कोई आपत्ति आ जाए, तो प्रक्रिया में थोड़ी देरी हो सकती है।

क्या दिल्ली में कोर्ट मैरिज ऑनलाइन हो सकती है?

दिल्ली में कोर्ट मैरिज की पूरी प्रक्रिया अभी पूरी तरह ऑनलाइन संभव नहीं है, लेकिन कुछ सुविधाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं। नोटिस फॉर्म को आप ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं और उसे भरकर संबंधित SDM ऑफिस में जमा कर सकते हैं।

कुछ जिलों में आप ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुकिंग भी कर सकते हैं, ताकि ऑफिस में लंबी कतारों से बचा जा सके और समय पर उपस्थित हो सकें।

लेकिन ध्यान रहे कि शारीरिक उपस्थिति हर हाल में जरूरी है। दोनों पक्षों और कम से कम तीन गवाहों को शादी के दिन SDM ऑफिस में उपस्थित होना अनिवार्य है। इसके बिना शादी वैध नहीं मानी जाएगी।

दिल्ली में कोर्ट मैरिज को आसान कैसे बनाएं?

क्या करें?

  • सही SDM चुनें: Court Marriage in delhi  उसी इलाके के SDM ऑफिस में होती है, जहाँ दूल्हा या दुल्हन में से कोई एक पिछले 30 दिनों से रहता हो। सही ऑफिस में आवेदन करने से आपका केस रिजेक्ट नहीं होगा और प्रक्रिया जल्दी पूरी होगी।
  • सभी दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें: पहचान पत्र (Aadhaar / Passport / Voter ID), जन्म प्रमाण पत्र, पता प्रमाण, पासपोर्ट साइज फोटो, और वैवाहिक स्थिति के दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें। इससे नोटिस दाखिल करने और शादी के दिन कोई देरी नहीं होगी।
  • नोटिस और 30 दिन के नियम समझें: स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नोटिस 30 दिन के लिए SDM ऑफिस में प्रदर्शित किया जाता है। इसे सही तरीके से भरना और समझना ज़रूरी है। कोई आपत्ति आने पर मैरिज अफसर जांच करता है। इससे शादी कानूनी रूप से सुरक्षित बनती है।
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क्या न करें?

  • गलत पता न दें: नोटिस दाखिल करते समय गलत या पुराने पते का इस्तेमाल करना आपके आवेदन को रिजेक्ट करवा सकता है। हमेशा सही और अपडेटेड पता दें।
  • फर्जी एजेंट या बिचौलियों पर भरोसा न करें: कई लोग कोर्ट मैरिज में मदद देने का झूठा वादा करते हैं और पैसे लेकर गायब हो जाते हैं। केवल भरोसेमंद वकील या सीधे SDM ऑफिस के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करें।
  • बिना मैरिज सर्टिफिकेट शादी मान लेना: शादी सिर्फ नोटिस देने या तारीख तय करने से पूरी नहीं होती। SDM ऑफिस में गवाहों के साथ उपस्थित होकर घोषणा पर साइन करना और सर्टिफिकेट लेना ज़रूरी है। बिना सर्टिफिकेट, शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी जाएगी।

निष्कर्ष

Court Marriage in delhi  सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सरलता, समानता और सुरक्षा चुनने का तरीका है। जब दो वयस्क कानून के माध्यम से अपना जीवन साथ बिताने का फैसला करते हैं, तो यह प्रक्रिया पारदर्शिता और सम्मान सुनिश्चित करती है, बिना किसी अनावश्यक बाधा के। सही दस्तावेज़, सही मार्गदर्शन और धैर्य के साथ, कोर्ट मैरिज एक सुरक्षित और कानूनी रूप से मान्य शुरुआत बन जाती है।

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FAQs

1. क्या अलग धर्म के लोग अपने व्यक्तिगत कानूनों के तहत शादी कर सकते हैं?

नहीं। अलग धर्म के लोग अपने व्यक्तिगत कानूनों (जैसे हिंदू मैरिज एक्ट या मुस्लिम लॉ) के तहत शादी नहीं कर सकते। उन्हें कानूनी मान्यता के लिए स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत शादी करनी होगी।

2. क्या दिल्ली में कोर्ट मैरिज के लिए गवाह जरूरी हैं?

हाँ। कोर्ट मैरिज के लिए तीन वयस्क गवाह होना अनिवार्य है। गवाहों के पास वैध पहचान पत्र होना चाहिए और शादी के समय उपस्थित रहना जरूरी है।

3. दिल्ली में कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट मिलने में कितना समय लगता है?

नोटिस दाखिल करने और 30 दिन की प्रतीक्षा अवधि पूरी होने के बाद शादी तुरंत की जा सकती है। शादी का ऑफिसियल सर्टिफिकेट आमतौर पर उसी दिन या कुछ कामकाजी दिनों में जारी कर दिया जाता है।

4. क्या धार्मिक शादी को दिल्ली में रजिस्टर करना अनिवार्य है?

धार्मिक समारोह (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई या पारसी) वैध होते हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन करना कानूनी सुरक्षा, संपत्ति हक, पासपोर्ट, वीज़ा और अन्य अधिकारों के लिए जरूरी है।

5. क्या नोटिस अवधि में कोई कोर्ट मैरिज पर आपत्ति कर सकता है?

हाँ। 30 दिन की नोटिस अवधि में कोई भी वैध आपत्ति (जैसे नाबालिग शादी, निषिद्ध संबंध) दर्ज कर सकता है। इसके बाद मैरिज अफसर उस आपत्ति की जांच करेगा और फिर शादी आगे बढ़ेगी।

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