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Adv. Shubham Sonkar

I am Advocate Shubham Sonkar, interested in solving intricate cases. I have 7 years of experience. I have done my graduation in Law. I am enrolled in the Bar Council of Delhi and practicing in Delhi High Court, Karkardooma Court, Patiala House Court, Supreme Court Of India, Tis Hazari Court. I'm well trained in the field of Court Marriage, Criminal Matter, Cyber Fraud, Divorce, Family, High Court, Property. I love to familiarise myself with tricky rigid cases related to both companies and individuals, identifying legal concerns and creating new and unharmed strategies for my clients.

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Is marrying a minor girl a crime in India Know its legal consequences

क्या भारत में नाबालिग लड़की से शादी करना अपराध है? जानिए इसके कानूनी परिणाम

भारत में शादी एक सामाजिक और धार्मिक अनुष्ठान के रूप में देखी जाती है। लेकिन जब बात बाल विवाह की आती है, तो यह परंपरा, कानून की नज़र में एक अपराध बन जाती है। वर्तमान समय में जहां शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की बात हो रही है, वहीं कई जगह आज भी 15-16 साल की …

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क्या घरेलू हिंसा के तहत बहु को घर से निकला जा सकता है?

क्या घरेलू हिंसा के तहत बहु को घर से निकला जा सकता है?

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत शुरू की गई पहल में एक महिला को अपने घर निकला जा सकता है या नहीं के संबंध में इसके प्रावधान की संवैधानिकता की जांच करने पर सहमति बन गई है।  धारा 19(1)(बी) के प्रावधान की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली एक सास की ओर …

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मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए कौन गवाह बन सकता है?

मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए कौन गवाह बन सकता है?

भारत में विवाह कई रूपों में किए जाते हैं। भारत का संविधान प्रथागत और मैरिज रजिस्ट्रेशन दोनों को वैध विवाह का दर्जा देता है। प्रथागत विवाह कानून द्वारा मान्यता प्राप्त विशिष्ट रीति-रिवाजों के आधार पर मान्य हैं। विशेष विवाह अधिनियम विवाह पंजीकरण के संबंध में कुछ प्रावधान प्रदान करता है। संबंधित अधिनियमों में विवाह पंजीकरण …

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भारत में कानूनों की कमी से "रेप की महामारी" फैल रही है।

क्या भारत में न्याय प्रकिया की देरी से रेप की महामारी फैल रही है।

रेप या बलात्कार दुनिया में होने वाला एक घिनौना सच है, जो समाज में लिंगवाद को दर्शाता है। जहां पुरुषों और महिलाओं के बीच जमीन-असमान का फर्क साफ़ दिखाई पड़ता है और यह संदेश मिलता है की महिलाएं शक्ति वितरण के मामले में पुरुषों से कहीं ज्यादा कमजोर है, जो कि भारत में कानूनों की …

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पति के परिजनों के आरोपों पर ध्यान ना देना, न्याय का दुरुपयोग है।

पति के परिवार के आरोपों पर ध्यान ना देना, न्याय का दुरुपयोग है।

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने वैवाहिक विवादों के सम्बंध में एक बेहद ही महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अपने निर्णय में तेलंगाना की उच्च न्यायालय ने कहा है कि परिवार न्यायालय अधिनियम 1984 के तहत वैवाहिक विवादों में परिजनों के द्वारा लगाए गए ग़लत आरोप यदि अनियंत्रित रहे तो यह न्याय के ग़लत इस्तेमाल को प्रेरित करेगा। …

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शादी का पंजीकरण कराते समय इन बातों का ध्यान रखें

शादी का रजिस्ट्रेशन कराने से पहले इन बातों का ध्यान रखें।

भारतीय संस्कृति में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना जाता है। यह दो व्यक्तियों के बीच शेष जीवन एक साथ बिताने के लिए एक पवित्र व्यवस्था है। विवाह में प्रवेश करने के बाद अपनी शादी को पंजीकृत करना सबसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी का  काम है। शादी का पंजीकरण कराना बहुत ही आवश्यक और मददगार भी …

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क्या हॉस्पिटल कैशलेस सुविधा देने से इंकार कर सकता है?

क्या हॉस्पिटल कैशलेस सुविधा देने से इंकार कर सकता है?

भारत की इंश्योरेंस रेगुलेरिटी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) ने ऑब्ज़र्व किया कि हाल ही में कई हॉस्पिटल अपने पॉलिसी-होल्डर्स को बिना पैसों के ट्रीटमेंट करने या कैशलेस सुविधा देने से मना कर रहे हैं। आईआरडीएआई के सेक्शन 31 (डी) के अनुसार बीमा/इंश्योरेंस कंपनियों का प्राइवेट और पब्लिक हेल्थकेयर इंस्टीटूशन्स के साथ समझौता होता है। नेटवर्क …

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सहमति से बने संबंध को बलात्कार क्यों नहीं कहा जा सकता है?

सहमति से बने संबंध को रेप क्यों नहीं कहा जा सकता है?

आजकल भारत में तेजी से नई सभ्यता बढ़ रही है। इस सभ्यता के अनुसार एक लड़के और लड़की के बीच का अंतर कम हुआ है। लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते है, एक सकरात्मक और एक नकारात्मक। कई बार एक पुरुष और महिलाओं के साथ में रहने की वजह से इसके काफी सारे नकारात्मक …

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वकील की मौजूदगी में ही अपना बयान क्यों दर्ज करना चाहिए।

वकील की मौजूदगी में ही अपना बयान क्यों दर्ज करना चाहिए।

जब भी आप किसी केस में शामिल होते हैं तो अक्सर आप से पुलिस द्वारा सवाल जवाब पूछे जाते हैं। ऐसे में आप अपने स्टेटमेंट या बयान दबाव में होने की वजह से या डर कर दे देते हैं। जिसका कभी कभी बाद में बहुत नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में हमें यह सावधानी रखनी …

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आख़िर पति ही हमेशा कष्ट क्यों सहें

पति भी वैवाहिक मामले ट्रांसफर करा सकते है।

जुलाई 2015 में भारत की उच्चतम न्यायालय ने वैवाहिक मामलों के स्थानांतरण के मामले में और उस पर पतियों को होने वाले कष्ट को ले कर टिप्पणी की थी। यह टिप्पणी एक रूप से विशेष समझी जानी चाहिए। क्योंकि पिछले दो दशकों से भारत की उच्चतम न्यायालय ने पत्नियों के वैवाहिक मामलों के स्थानांतरण के …

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