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Adv. Shubham Sonkar

I am Advocate Shubham Sonkar, interested in solving intricate cases. I have 7 years of experience. I have done my graduation in Law. I am enrolled in the Bar Council of Delhi and practicing in Delhi High Court, Karkardooma Court, Patiala House Court, Supreme Court Of India, Tis Hazari Court. I'm well trained in the field of Court Marriage, Criminal Matter, Cyber Fraud, Divorce, Family, High Court, Property. I love to familiarise myself with tricky rigid cases related to both companies and individuals, identifying legal concerns and creating new and unharmed strategies for my clients.

Adv. Shubham Sonkar
कोर्ट मैरिज में विटनेस अरेंज कैसे करें।

कोर्ट मैरिज में विटनेस अरेंज कैसे करें।

गवाह/विटनेस शब्द का मतलब उस व्यक्ति से है जो एक्सेप्ट करता है कि यह एक्टिविटी होते समय मै उस सिचुएशन में प्रेजेंट था। हालाँकि, विटनेस का अलग अलग सिचुऎशन्स में अलग अलग मतलब हो सकता है: वह व्यक्ति जो किसी इंसिडेंट (क्राइम या एक्सीडेंट) होने के समय इंसिडेंट की जगह पर प्रेजेंट था, उसे विटनेस …

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परेंट्स की इनकम और उनका पढ़ा लिखा होना, बच्चे की कस्टडी तय करने का एकमात्र तरीका नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

परेंट्स की इनकम और उनका पढ़ा लिखा होना, बच्चे की कस्टडी तय करने का एकमात्र तरीका नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

बच्चों की कस्टडी हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के सेक्शन 26 के तहत दी जाती है। आईये जानते है इस केस में कोर्ट ने क्या फैसला लिया है।  केस क्या है:- निमिश एस अग्रवाल v/s श्रीमती रूही अग्रवाल के केस में, फादर ने लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपने बच्चे की कस्टडी मांगते हुए एक …

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क्या आपसी सहमति से डाइवोर्स की डिक्री को अपील या सूट द्वारा चैलेंज किया जा सकता है?

क्या आपसी सहमति से डाइवोर्स की डिक्री को अपील या सूट द्वारा चैलेंज किया जा सकता है?

आरोप है कि पति के परिवार ने दहेज के लिए उसकी फिर से शादी करने का फैसला किया और उसकी भाभी ने उसकी बेटी को छीन लिया और उसे तलाक के कागज पर (आपसी सहमति से) हस्ताक्षर करने की धमकी दी। उसने आगे दावा किया कि उसे अदालत में पेश होने के लिए मजबूर किया …

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किसी को क्रिमिनल लायबिलिटी के लिए, कंपनी का पार्टनर होने की वजह से दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

किसी को क्रिमिनल लायबिलिटी के लिए, कंपनी का पार्टनर होने की वजह से दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिलीप हरिरामनी v/s बैंक ऑफ बड़ौदा के केस के दौरान कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के सेक्शन 138 के तहत चेक बाउंस होने पर किसी व्यक्ति पर क्रिमिनल लायबिलिटी, सिर्फ इसलिए नहीं लगाई जा सकती क्योंकि वह भी लोन लेने वाली कम्पनी का एक पार्टनर है या वह उस …

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वाइफ द्वारा हस्बैंड को पेरेंट्स से अलग रहने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता- हाई कोर्ट

वाइफ द्वारा हस्बैंड को पेरेंट्स से अलग रहने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता- हाई कोर्ट

जज गौतम भादुड़ी और जज एनके चंद्रवंशी की बेंच ने 27 फरवरी 2017 को कोरबा की एक फैमिली कोर्ट के आर्डर को चुनौती दी। यह चुनौती एक हस्बैंड द्वारा फाइल की गयी पिटीशन पर सुनवाई करते समय दी गयी थी। बेंच के अनुसार अगर कोई वाइफ अपने हस्बैंड को उसके पेरेंट्स से अलग करने पर …

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चाइल्ड कस्टडी के लिए पुरुषों के क्या अधिकार है

चाइल्ड कस्टडी के लिए पुरुषों के क्या अधिकार है?

जब एक मैरिड कपल एक साथ रहने को तैयार नहीं होते और डाइवोर्स लेने का फैसला लेते है, तो उस सिचुएशन में सबसे ज्यादा पीड़ित उनका 18 साल से कम उम्र का बच्चा होता है, जो उस कपल से पैदा हुआ है। वह बच्चा कस्टडी के नाम पर अपने पेरेंट्स से अलग हो जाता है। …

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तीन तलाक भारत में गैरकानूनी है।

तीन तलाक भारत में गैरकानूनी है।

तलाक! तलाक! तलाक! आपने फिल्मों में सुना और देखा होगा कि कैसे मुस्लिम हस्बैंड तीन बार तलाक कहकर अपनी वाइफ को तलाक दे देते है और तुरंत उन्हें छोड़ देते है। इस सिचुएशन में वाइफ अपनी शादी को बचाने के लिए कोई उपाय ना होने पर बेसहारा रह जाती है। आज इस ब्लॉग में हम …

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क्या वाइफ अपने हस्बैंड से अलग घर में रहने पर भी मेंटेनेंस की हकदार है

क्या वाइफ अपने हस्बैंड से अलग घर में रहने पर भी मेंटेनेंस की हकदार है?

दिल्ली हाई कोर्ट के अनुसार एक वाइफ अपने हस्बैंड से अलग रहने पर भी हस्बैंड से मेंटेनेंस लेने की हकदार है, चाहे हस्बैंड वाइफ एक ही घर में रहते हो या अलग अलग घर में। इस साल की शुरुआत में, इंटरिम मेंटेनेंस के लिए एक महिला की पिटीशन को स्वीकार करते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट …

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हिंदू कानून के तहत बच्चे की मेंटेनेंस का अधिकार।

हिंदू कानून के तहत बच्चे की मेंटेनेंस का अधिकार।

बच्चों के पालन-पोषण में उनके बचपन की देखभाल एक बहुत जरूरी रोल निभाती है। दोनों पेरेंट्स इसका एक अविश्वसनीय रूप से जरूरी हिस्सा है। फ्यूचर में बच्चे की क्षमता और निपुणता उसके बचपन की देखभाल और सपोर्ट पर डिपेंड होती है। यह माता और पिता दोनों की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चे की उन्नति …

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हाईकोर्ट की एप्रोच से सुप्रीम कोर्ट निराश, दी जमानत।

हाईकोर्ट की एप्रोच से सुप्रीम कोर्ट निराश, दी जमानत।

एक विश्वसनीय प्रिंट मीडिया स्रोत के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के साथ-साथ अन्य बेंचों में अगस्त 2021 तक लगभग 1,83,000 आपराधिक अपीलें पेंडिंग हैं। उत्तर प्रदेश की कई जेलों में 7214 कैदी हैं, जो अपनी सज़ा के आर्डर के तहत 10 साल से ज्यादा जेल की सजा काट चुके हैं। इन दोषियों की आपराधिक अपीलें हाई …

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