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Adv. Vidhi Saini

Advocate Vidhi Saini is a law graduate and has been advising and helping clients for the past 3 years and is master at organizing complex situations. I am currently working in Rohini Court, Tis Hazari Court and am registered with the Delhi Bar Council . My area of competence in the field of drafting is the creation of Any Legal Notice, Consumer Court Issue, Criminal Matter, Divorce, Maintenance. I counsel, advise, and practice in this area. I advise both companies and individuals in my capacity as counsel, identifying legal concerns and creating fresh strategies for resolving challenging problems.

Adv. Vidhi Saini
रियल एस्टेट कॉन्ट्रैक्ट्स के प्रकार

रियल एस्टेट कॉन्ट्रैक्ट्स के प्रकार

1872 के भारतीय कॉन्ट्रैक्ट अधिनियम की धारा 2 (एच) के तहत, एक “कॉन्ट्रैक्ट” को “कानून द्वारा लागू करने योग्य व्यवस्था” के रूप में परिभाषित किया गया है। दूसरे शब्दों में, यह एक कॉन्ट्रैक्ट है जो दो या दो से अधिक पार्टियों को बांधता है और उनके बीच कानूनी कर्तव्यों को स्थापित करता है। या तो …

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How to get anticipatory bail under section 482

सेक्शन 482 के तहत ऐंटिसिपेटरी बेल कैसे मिलती है?

ऐंटिसिपेटरी बेल क्या होती है? ऐंटिसिपेटरी बेल यानी अग्रिम जमानत एक ऐसा कानूनी उपाय है जो व्यक्ति को गिरफ्तारी से पहले ही संरक्षण देता है। अगर किसी को आशंका हो कि उसे किसी गैर-जमानती (non-bailable) अपराध में गिरफ्तार किया जा सकता है, तो वह धारा 482 BNSS के तहत सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट में ऐंटिसिपेटरी …

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लीज डीड और सेल डीड में क्या अंतर है?

लीज डीड और सेल डीड में क्या अंतर है?

लीज डीड (Lease Deed) और सेल डीड (Sale Deed) दोनों वस्तुओं को विभिन्न संपत्ति के स्वामित्व या अधिकारों को स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तावेज़ हैं। इस दस्तावेज़ के माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को संपत्ति का मालिकाना हक़ या अधिकार सौंप सकता है। लीज डीड (Lease Deed): सेल डीड (Sale …

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Rape punishment in India and other countries Know the laws of different countries

भारत और अन्य देशों में रेप की सजा: जानिए विभिन्न देशों के कानून

रेप यानि बलात्कार एक ऐसा अपराध है जो न केवल पीड़ित के शरीर को बल्कि उसके मन और आत्मा को भी गहरा आघात पहुंचाता है। यह अपराध मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इसे विश्वभर में कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। भारत जैसे विकासशील देश में जहां सामाजिक संरचना काफी …

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कस्टडी के केस में बच्चे की मर्जी को कितनी वैल्यू दी जाती है

कस्टडी के केस में बच्चे की मर्जी को कितनी वैल्यू दी जाती है?

तलाक के साथ शुरू हुई यह जंग जिसमे सबसे ज्यादा कोई पिस्ता है तो वो है कपल के बच्चे। तलाक स्पष्ट रूप ही, इसमें शामिल दोनों भागीदारों/पार्टनर्स के लिए जीवन का एक बहुत ही कठोर चरण है। हमेशा के लिए एक साथ रहने का फैसला करने वाले दो लोगों को दुर्भाग्य से अलग होना पड़ता …

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रिश्तेदार द्वारा कब्ज़े में ली गयी मृत पिता की प्रॉपर्टी को कैसे छुड़ाएं

रिश्तेदार द्वारा कब्ज़े में ली गयी मृत पिता की प्रॉपर्टी को कैसे छुड़ाएं?

दिवंगत/मृत पिता की संपत्ति यदि आपके चाचा के पास है तो ऐसी स्थिति में आपको कुछ कानूनी प्रक्रियाओं को करना पड़ेगा। क्या मेरे पिता की संपत्ति में मेरे चाचा का भी अधिकार है ? भारतीय संविधान के अनुसार पिता की संपत्ति के अधिकार के संबंध में अलग अलग दो नियम हैं । लेकिन दोनों ही …

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How to get online marriage certificate in Bihar – Complete process, required documents and legal guide

बिहार में ऑनलाइन मैरिज सर्टिफिकेट कैसे बनवाएं? – पूरी प्रक्रिया, ज़रूरी दस्तावेज़ और कानूनी गाइड

शादी के बाद मैरिज सर्टिफिकेट क्यों ज़रूरी है? शादी सिर्फ एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक कानूनी अनुबंध भी है। इसी का प्रमाण होता है – मैरिज सर्टिफिकेट। यह दस्तावेज़ आपके वैवाहिक संबंध की कानूनी पहचान है और सरकारी योजनाओं, वीज़ा आवेदन, पासपोर्ट अपडेट, बीमा क्लेम, और भविष्य के किसी भी कानूनी मामले में बेहद …

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एक कपल शादी के बाद तलाक कब फाइल कर सकता है

एक कपल शादी के बाद तलाक कब फाइल कर सकता है?

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 14 इस प्रकार अधिनियमित की गई थी और यह कहती है कि कोई भी जोड़ा शादी के वर्ष के भीतर किसी भी खराब निर्णय से निपटने के लिए तलाक के लिए फाइल नहीं कर सकता है, क्योंकि हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार तलाक के कुछ आधार हैं जिन्हें संतुष्ट …

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क्या विदेश में किये गए अपराध के लिए भारत में सज़ा दी जा सकती है

क्या विदेश में किये गए अपराध के लिए भारत में सज़ा दी जा सकती है?

भारत में कई बार भारत के कानून के तहत, केस फाइल किया जाता है लेकिन उस केस पर जितना जल्दी एक्शन लिया जाना चाहिए उतना हो देर से होता है ऐसा कानून की लापरवाही की वजह से हो सकता है। हालाँकि, ऐसा केसिस की भरमार और बहुत ज्यादा काम की पेंडेन्सी की वजह से हो …

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अब पुश्तैनी प्रॉपर्टी में बेटियों का अधिकार बेटों से ज्यादा है?

अब पुश्तैनी प्रॉपर्टी में बेटियों का अधिकार बेटों से ज्यादा है?

आजकल घर की बेटियों को बेटों के बराबर मान-सम्मान, पैसा और साथ ही साथ जायदाद में भी बराबर का हक़ दिया जाता है। बेटे और बेटी के बीच का यह भेदभाव खत्म करने मे सबसे बड़ा हाथ कानून का रहा है, जिससे आज यह सिचुएशन संभव हो पाई है। और वह दिन भी अब दूर …

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