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Adv. Vikas Puri

I am Advocate Vikas Puri, interested in solving intricate cases. I have 8 years of experience. I have done my graduation in Law. I am enrolled in the Bar Council of Delhi and practicing in Delhi High Court, Karkardooma Court, Patiala House Court, Saket Court, Tis Hazari Court. I'm well trained in the field of Agreements, Cheque Bounce, Couple Protection, Court Marriage, Criminal Matter, Employment Matter, Marriage Registration, Money Recovery, Null & Void Marriage. I love to familiarise myself with tricky rigid cases related to both companies and individuals, identifying legal concerns and creating new and unharmed strategies for my clients.

Adv. Vikas Puri
सरोगेसी कराने के लाभ और हानि पर कानूनी तर्क क्या है?

सरोगेसी कराने के लाभ और हानि पर कानूनी तर्क क्या है?

दुनिया इस सवाल पर बंटी हुई है कि क्या किराए की कोख कानूनी और नैतिक रूप से सही प्रथा है। यह निकोल किडमैन, सारा जेसिका पार्कर जैसे पश्चिमी दुनिया के सितारों के साथ-साथ शाहरुख खान और करण जौहर जैसे भारतीय सितारों के साथ सुर्खियों में आया है। यूके में सरोगेसी समझौतों को वैध नहीं किया …

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किन मैटर्स की सुनवाई के लिए डायरेक्ट सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं?

किन मैटर्स की सुनवाई के लिए डायरेक्ट सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं?

पहले संघीय न्यायालय, जिसे भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत गठित किया गया था, ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में सर्वोच्च न्यायालय था। वर्ष 1950 में सर्वोच्च न्यायालय अस्तित्व में आया जिसने संघीय न्यायालय का स्थान ले लिया। देश का सर्वोच्च न्यायालय होने के नाते, सर्वोच्च न्यायालय संविधान के संरक्षक और मौलिक अधिकारों के संरक्षक …

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चोरी और ज़बरदस्ती वसूली करने के बीच क्या अंतर होता है?

चोरी और ज़बरदस्ती वसूली करने के बीच क्या अंतर होता है?

एक राज्य सरकार को ना केवल अपने राज्य में रहने वाले नागरिकों के जीवन की रक्षा करनी चाहिए और सार्वजनिक शांति बनाए रखनी चाहिए, बल्कि उसे यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उन सभी नागरिको की प्रॉपर्टी भी सुरक्षित रहे ताकि सभी नागरिक चिंता मुक्त होकर रह सके और राज्य में भी शान्ति बनी रहे। …

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आरटीआई एप्लीकेशन फाइल करने की पूरी प्रोसेस क्या है?

आरटीआई एप्लीकेशन फाइल करने की पूरी प्रोसेस क्या है?

2005 में लागू हुए सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) ने सभी ऑथॉरिटीज़ के लिए यह जरूरी कर दिया कि वे जनता के द्वारा मांगी गयी इनफार्मेशन उन्हें समय से प्रदान कराएं। यह एक्ट भारत के सभी नागरिकों पर लागू होता है।  इस एक्ट के तहत देश के नागरिकों को यह अधिकार दिया गया है …

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What status is given to prostitution in India

भारत में वेश्यावृत्ति को क्या दर्जा दिया गया है?

वेश्यावृत्ति का इतिहास बहुत पुराना है और यह प्राचीन सभ्यताओं में मौजूद रही है। इसे आम तौर पर “दुनिया का सबसे पुराना पेशा” कहा जाता है, लेकिन भारतीय समाज में इसके प्रति दृष्टिकोण हमेशा नकारात्मक रहा है। हालांकि, भारत में वेश्यावृत्ति एक विवादास्पद और जटिल मुद्दा है। कानूनी दृष्टिकोण से, वेश्यावृत्ति का भारत में एक …

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कानूनी नोटिस और कोर्ट नोटिस के बीच क्या अंतर है?

कानूनी नोटिस और कोर्ट नोटिस के बीच क्या अंतर है?

कैविएट पिटीशन तब दायर की जाती है जब कोई मामला अदालत में लंबित होता है; दूसरी ओर, मुकदमा दायर करने से पहले व्यक्ति को एक कानूनी नोटिस भेजा जाता है और इस मुद्दे के संबंध में शिकायतें उठाई जाती हैं। कैविएट पिटीशन मामले में आपकी रुचि और इरादे के बारे में अदालत को सूचित करती …

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नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के केसों के लिए क्या नई अदालतें बनवाने की जरूरत है?

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के केसों के लिए क्या नई अदालतें बनवाने की जरूरत है?

वैसे तो भारत में न्याय व्यवस्था के लचीलेपन के कारण हर तरह के केसों में देरी हो ही जाती है। यही कारण हैं कि आज भी लाखों की संख्या में केस पेंडिंग में पड़े हुए हैं । एक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान समय में भारत में लगभग 2.31 करोड़ केस पेंडिंग हैं । जिसमें से …

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हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट एक दूसरे से कैसे अलग है?

हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट एक दूसरे से कैसे अलग है?

हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट भारत के दो ऐसे जरूरी एक्ट्स हैं। यह मैरिज एक्ट्स भारत में होने वाली शादियों को पंजीकृत या रजिस्टर कराने के लिए बनाये गए है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि भारत के लोग अपने-अपने धर्मों के अनुसार अपनी शादी को कानूनी रूप से कैसे रजिस्टर करा सकते …

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नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के बढ़ते केसिस के लिए और नई अदालतें बनवाने की जरूरत है।

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के बढ़ते केसिस के लिए और नई अदालतें बनवाने की जरूरत है।

वैसे तो भारत में न्याय व्यवस्था के लचीलेपन के कारण हर तरह के केसों में देरी हो ही जाती है । यही कारण हैं कि आज भी लाखों की संख्या में केस पेंडिंग में पड़े हुए हैं । एक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान समय में भारत में लगभग 2.31 करोड़ केस पेंडिंग हैं । जिसमें …

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हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 16(3) के तहत विवाह को रद्द करने के आधार क्या है?

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 16(3) के तहत विवाह को रद्द करने के आधार क्या है?

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 16(3) एक महत्वपूर्ण प्रावधान है जो भारत में विवाह को रद्द करने के आधारों को रेखांकित करता है। यह खंड विवाह को रद्द करने की अवधारणा और उन परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण है जिनमें भारत में विवाह को रद्द किया जा सकता है। हिंदू विवाह अधिनियम एक कानून …

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