डीलर NOC नहीं दे रहा है – कंज़्यूमर के लिए कानूनी उपाय क्या हैं?

The dealer is not issuing the NOC – what are the legal remedies for the consumer?

यदि आपने डीलर का पूरा भुगतान कर दिया है, सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं और अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं, तो आपको समय पर NOC (No Objection Certificate) मिलने की उम्मीद होती है। लेकिन कई बार डीलर बिना किसी उचित कारण के NOC देने में देरी करता है, बार-बार बहाने बनाता है या अनावश्यक रूप से कंस्यूमर को परेशान करता है। इससे कानून से जुड़ी प्रक्रिया और अन्य जरूरी काम प्रभावित हो सकते हैं।

ऐसी स्थिति में कंस्यूमर को चुपचाप परेशानी सहने की जरूरत नहीं है। कंस्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 कंस्यूमर को ऐसे अनुचित व्यवहार से सुरक्षा देता है। इस लेख में हम आसान भाषा में जानेंगे कि डीलर को कब NOC जारी करना जरूरी होता है, कंस्यूमर के क्या कानूनी अधिकार हैं और यदि डीलर NOC देने से इंकार करे या अनावश्यक देरी करे, तो उसके खिलाफ कौन-कौन से कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

NOC (No Objection Certificate) क्या होता है?

NOC (No Objection Certificate) एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे डीलर, बैंक, फाइनेंस कंपनी या अन्य संबंधित संस्था जारी करती है। इस दस्तावेज़ के माध्यम से यह बताया जाता है कि संबंधित लेन-देन या कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

सरल शब्दों में, NOC इस बात का प्रमाण होता है कि आपने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं और आपकी ओर से कोई बकाया राशि, दावा या अन्य शर्त बाकी नहीं है।

NOC की आवश्यकता कई मामलों में पड़ सकती है, जैसे—

  • व्हीकल का स्वामित्व (Ownership) ट्रांसफर कराने के लिए।
  • व्हीकल का लोन पूरा होने के बाद।
  • प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त या ट्रांसफर के लिए।
  • किसी एग्रीमेंट को समाप्त करने के लिए।
  • व्यापार से जुड़ी कुछ मंजूरियों (Approvals) के लिए।
  • अन्य कानूनी या कॉन्ट्रैक्ट संबंधी प्रक्रियाओं के लिए।

कंस्यूमर के लिए NOC बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज है, क्योंकि यह साबित करता है कि उसकी ओर से सभी शर्तें पूरी हो चुकी हैं। इसके बाद डीलर या संबंधित संस्था बाद में यह दावा नहीं कर सकती कि कंस्यूमर की कोई राशि या अन्य जिम्मेदारी अभी बाकी है।

कंस्यूमर के लिए NOC क्यों महत्वपूर्ण है?

अक्सर ग्राहकों को NOC की अहमियत तब समझ में आती है, जब इसके बिना उनका कोई जरूरी काम रुक जाता है। NOC कई कानूनी और वित्तीय प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में काम करता है।

1. व्हीकल या अन्य प्रॉपर्टी का ट्रांसफर कराने में मदद करता है

यदि आप अपना व्हीकल या कोई अन्य प्रॉपर्टी बेचना या किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो कई मामलों में NOC की आवश्यकता होती है। NOC न होने पर ट्रांसफर की प्रक्रिया रुक सकती है या उसमें अनावश्यक देरी हो सकती है।

2. यह साबित करता है कि कोई बकाया राशि नहीं है

NOC इस बात का प्रमाण होता है कि आपने अपनी सभी वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं और आपकी ओर से कोई बकाया राशि बाकी नहीं है। इससे भविष्य में होने वाले अनावश्यक विवादों से बचाव होता है।

3. लोन बंद करने की प्रक्रिया आसान हो जाती है

यदि आपने व्हीकल का लोन या फाइनेंस की राशि पूरी तरह चुका दी है, तो NOC लोन बंद कराने और संबंधित रिकॉर्ड अपडेट कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

4. भविष्य के लेन-देन में काम आता है

भविष्य में यदि आप व्हीकल बेचते हैं, नया लोन लेते हैं या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया को पूरा करते हैं, तो NOC की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए इस दस्तावेज़ को सुरक्षित रखना हमेशा फायदेमंद होता है।

5. भविष्य की कानूनी जिम्मेदारियों से सुरक्षा देता है

NOC इस बात का लिखित प्रमाण होता है कि संबंधित लेन-देन पूरी तरह पूरा हो चुका है। यदि बाद में कोई विवाद होता है, तो यह दस्तावेज आपके पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है।

डीलर द्वारा NOC न देना कब गैरकानूनी माना जा सकता है?

हर बार NOC देने में हुई देरी गैरकानूनी नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि डीलर ने NOC क्यों नहीं दी और कंस्यूमर ने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी की हैं या नहीं।

आमतौर पर निम्न परिस्थितियों में NOC न देना गैरकानूनी माना जा सकता है—

  • कंस्यूमर ने पूरा भुगतान कर दिया हो।
  • कोई बकाया राशि बाकी न हो।
  • कंस्यूमर ने एग्रीमेंट की सभी शर्तों का पालन कर दिया हो।
  • डीलर के पास NOC रोकने का कोई वैध कानूनी कारण न हो।
  • डीलर बिना किसी उचित कारण के NOC देने से इंकार कर रहा हो या जानबूझकर देरी कर रहा हो।
  • NOC जारी करने के बदले अतिरिक्त या अनधिकृत पैसे की मांग की जा रही हो।
  • NOC न मिलने के कारण कंस्यूमर को आर्थिक नुकसान या अनावश्यक परेशानी हो रही हो।
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हालांकि, यदि वास्तव में कोई बकाया राशि बाकी हो, एग्रीमेंट की किसी शर्त का उल्लंघन हुआ हो या आवश्यक दस्तावेज पूरे न हों, तो ऐसी स्थिति में डीलर उचित कारण होने तक NOC जारी करने से अस्थायी रूप से इंकार कर सकता है।

इसलिए कानूनी कार्रवाई करने से पहले यह समझना जरूरी है कि डीलर NOC क्यों नहीं दे रहा है। यदि आपने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं और फिर भी डीलर बिना किसी वैध कारण के NOC देने से इंकार करता है, तो भारतीय कानून आपके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कानूनी उपाय प्रदान करता है।

डीलर द्वारा NOC न देने पर कौन-से कानून कंस्यूमर की सुरक्षा करते हैं?

यदि कंस्यूमर ने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं, फिर भी डीलर बिना किसी उचित कारण के NOC देने से इंकार करता है या अनावश्यक देरी करता है, तो भारतीय कानून कंस्यूमर को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। ऐसे मामलों में कंस्यूमर Protection Act, 2019 सबसे महत्वपूर्ण कानून है।

धारा 2(11) – सेवा में कमी (Deficiency in Service)

कंस्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 की धारा 2(11) के अनुसार, यदि कोई सेवा कानून या एग्रीमेंट के अनुसार सही तरीके से प्रदान नहीं की जाती, तो उसे सेवा में कमी माना जा सकता है। यदि कंस्यूमर ने पूरा भुगतान कर दिया है और सभी शर्तें पूरी कर दी हैं, फिर भी डीलर बिना किसी वैध कारण के NOC जारी नहीं करता या बार-बार देरी करता है, तो यह सेवा में कमी मानी जा सकती है। उदाहरण—

  • पूरा भुगतान होने के बाद भी NOC जारी न करना।
  • बिना कारण बार-बार देरी करना।
  • कंस्यूमर के लिखित अनुरोधों को नजरअंदाज करना।
  • ऐसी स्थिति में कंस्यूमर उपयुक्त कंस्यूमर कमीशन में शिकायत दर्ज कर सकता है।

धारा 2(47) – अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस (Unfair Trade Practice)

धारा 2(47) के अनुसार, यदि डीलर जानबूझकर NOC रोककर कंस्यूमर से अतिरिक्त पैसे मांगता है, गलत कारण बताता है या अनावश्यक रूप से परेशान करता है, तो इसे अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस माना जा सकता है। जैसे—

  • NOC देने के लिए अवैध प्रोसेसिंग फीस मांगना।
  • बिना कारण NOC जारी करने से इंकार करना।
  • जानबूझकर प्रक्रिया में देरी करना।

धारा 34 – कंस्यूमर कमीशन में शिकायत

कंस्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 की धारा 34 के तहत कंस्यूमर उचित कंस्यूमर कमीशन में शिकायत दर्ज कर सकता है। यदि NOC न मिलने के कारण कंस्यूमर को आर्थिक नुकसान, मानसिक परेशानी या अन्य नुकसान हुआ है, तो वह कानूनी राहत मांग सकता है।

कंस्यूमर कमीशन कौन-कौन सी राहत दे सकता है? 

धारा 35 से 39 के तहत कंस्यूमर कमीशन मामले की परिस्थितियों के अनुसार—

  • डीलर को NOC जारी करने का आदेश दे सकता है।
  • आर्थिक नुकसान का मुआवजा दिला सकता है।
  • मानसिक परेशानी के लिए कंपनसेशन दिला सकता है।
  • मुकदमे का खर्च दिला सकता है।
  • न्यायहित में अन्य उचित आदेश भी पारित कर सकता है।

यदि डीलर NOC देने से इंकार करे, तो कंस्यूमर को तुरंत क्या करना चाहिए?

यदि डीलर NOC देने से मना करता है या अनावश्यक देरी करता है, तो केवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा न करें। अपने कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के लिए तुरंत कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाएं।

स्टेप 1: लिखित रूप में NOC की मांग करें डीलर को ईमेल, रजिस्टर्ड पोस्ट या किसी अन्य लिखित माध्यम से NOC जारी करने का अनुरोध करें। इससे आपके पास यह साक्ष्य रहेगा कि आपने समय पर NOC की मांग की थी।

स्टेप 2: सभी भुगतान के दस्तावेज सुरक्षित रखें निम्न दस्तावेज हमेशा सुरक्षित रखें—

  • भुगतान की रसीदें।
  • बैंक ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड।
  • लोन क्लोजर सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)।
  • टैक्स इनवॉइस।
  • फाइनल सेटलमेंट से जुड़े दस्तावेज।

ये दस्तावेज साबित करेंगे कि आपने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं।

स्टेप 3: सभी बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें डीलर के साथ हुई सभी बातचीत का रिकॉर्ड संभालकर रखें, जैसे ईमेल, व्हाट्सएप चैट, SMS, पत्र और जहां कानूनी रूप से अनुमति हो वहां कॉल रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखें। ये सभी दस्तावेज भविष्य में कानूनी कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।

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स्टेप 4: NOC न देने का कारण लिखित में मांगें यदि डीलर NOC देने से इंकार करता है, तो उससे लिखित रूप में कारण बताने के लिए कहें। कई बार डीलर लिखित जवाब देने से बचते हैं, क्योंकि बिना उचित कारण के NOC रोकना कानूनी रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता।

स्टेप 5: अनधिकृत भुगतान न करें यदि डीलर NOC देने के बदले अतिरिक्त पैसे या कोई ऐसा शुल्क मांगता है, जिसका एग्रीमेंट में उल्लेख नहीं है, तो केवल NOC प्राप्त करने के लिए भुगतान न करें। ऐसी मांग का साक्ष्य सुरक्षित रखें और आवश्यकता होने पर कानूनी सलाह लें।

डीलर को कानूनी नोटिस भेजें

यदि डीलर बार-बार अनुरोध करने के बाद भी NOC जारी नहीं करता, तो कंस्यूमर कमीशन में शिकायत करने से पहले किसी अधिवक्ता के माध्यम से उसे कानूनी नोटिस भेजा जा सकता है।

हालांकि हर मामले में कानूनी नोटिस भेजना अनिवार्य नहीं होता, लेकिन कई बार केवल नोटिस भेजने से ही विवाद का समाधान हो जाता है। इससे डीलर को यह भी पता चलता है कि कंस्यूमर अपने कानूनी अधिकारों से परिचित है और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

कानूनी नोटिस में क्या शामिल होना चाहिए? 

आमतौर पर नोटिस में निम्न बातें लिखी जाती हैं—

  • लेन-देन का पूरा विवरण।
  • खरीद की तारीख।
  • भुगतान की गई राशि।
  • कंस्यूमर द्वारा पूरी की गई सभी शर्तें।
  • NOC के लिए किए गए अनुरोधों का विवरण।
  • डीलर द्वारा की गई देरी या इंकार।
  • लागू कानूनी प्रावधान।
  • तुरंत NOC जारी करने की मांग।
  • आवश्यकता होने पर कंपनसेशन की मांग।
  • जवाब देने के लिए उचित समय।

कानूनी नोटिस भेजने के लाभ

  • विवाद जल्दी सुलझने की संभावना बढ़ जाती है।
  • कंस्यूमर की गंभीरता स्पष्ट होती है।
  • लिखित साक्ष्य तैयार हो जाता है।
  • भविष्य में कंस्यूमर कमीशन में शिकायत करने पर कंस्यूमर का पक्ष और मजबूत होता है।

डीलर के खिलाफ कंस्यूमर कंप्लेंट कैसे दर्ज करें?

यदि कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी डीलर NOC जारी नहीं करता तो कंस्यूमर, कंस्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत उचित कंस्यूमर कमीशन में शिकायत दर्ज कर सकता है।

स्टेप 1: सभी जरूरी दस्तावेज एकत्र करें

सबसे पहले अपने मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज एकत्र करें। इनमें इनवॉइस, एग्रीमेंट, भुगतान की रसीदें, लोन क्लोजर से जुड़े दस्तावेज (यदि लागू हो), डीलर के साथ हुई लिखित बातचीत, कानूनी नोटिस, पहचान पत्र और अन्य संबंधित साक्ष्य शामिल हो सकते हैं। ये दस्तावेज आपके दावे को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्टेप 2: अपने नुकसान का विवरण तैयार करें

इसके बाद यह तय करें कि NOC न मिलने के कारण आपको कितना आर्थिक या अन्य नुकसान हुआ है। इसमें आर्थिक नुकसान, अतिरिक्त खर्च, मानसिक परेशानी और मुकदमे का संभावित खर्च शामिल हो सकता है। इससे आप कंस्यूमर कमीशन के सामने उचित राहत की मांग कर सकते हैं।

स्टेप 3: कंस्यूमर कंप्लेंट तैयार करें

इसके बाद कंस्यूमर कंप्लेंट तैयार करें। शिकायत में दोनों पक्षों का विवरण, पूरे मामले के तथ्य, डीलर द्वारा की गई गलती, लागू कानूनी प्रावधान और आप किस प्रकार की राहत चाहते हैं, यह स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए। शिकायत के साथ सभी संबंधित दस्तावेज भी संलग्न करें।

स्टेप 4: उचित कंस्यूमर कमीशन में शिकायत दर्ज करें

जब शिकायत पूरी तरह तैयार हो जाए, तो उसे कंस्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के अनुसार जूरिस्डिक्शन वाले उचित कंस्यूमर कमीशन में दाखिल करें। सही आयोग में शिकायत दर्ज करना आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक होता है।

स्टेप 5: सुनवाई में भाग लें

शिकायत दर्ज होने के बाद कंस्यूमर कमीशन डीलर को नोटिस भेजेगा। इसके बाद दोनों पक्षों को अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसलिए सुनवाई के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य समय पर प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।

स्टेप 6: कंस्यूमर कमीशन का आदेश

यदि कंस्यूमर कमीशन यह पाता है कि डीलर ने बिना किसी वैध कारण के NOC जारी नहीं की, तो वह मामले की परिस्थितियों के अनुसार डीलर को NOC जारी करने, कंस्यूमर को मुआवजा देने, मुकदमे का खर्च चुकाने या न्यायहित में अन्य उचित आदेश पारित कर सकता है।

कंस्यूमर कंप्लेंट या सिविल सूट – कौन-सा कानूनी उपाय चुनें?

कई ग्राहकों के मन में यह सवाल होता है कि NOC न मिलने की स्थिति में कंस्यूमर कमीशन में शिकायत करें या सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करें। इसका उत्तर आपके मामले के तथ्यों और विवाद की प्रकृति पर निर्भर करता है।

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कंस्यूमर कंप्लेंट कब करें?

यदि डीलर द्वारा सेवा में कमी की गई है, अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस अपनाया गया है, बिना कारण NOC जारी नहीं की जा रही है या आप मुआवजे की मांग करना चाहते हैं, तो कंस्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत कंस्यूमर कमीशन में शिकायत दर्ज करना उचित विकल्प हो सकता है। यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल और प्रभावी मानी जाती है।

सिविल सूट कब दायर करें?

यदि मामला जटिल एग्रीमेंट, प्रॉपर्टी या स्वामित्व के अधिकार, विस्तृत साक्ष्य या ऐसे कानूनी अधिकारों से जुड़ा है, जिन पर कंस्यूमर कमीशन निर्णय नहीं दे सकता, तो सिविल कोर्ट में सिविल मुकदमा दायर करना उचित हो सकता है।

सही कानूनी उपाय कैसे चुनें?

कुछ मामलों में परिस्थितियों के अनुसार दोनों कानूनी उपाय उपलब्ध हो सकते हैं। इसलिए किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले अपने मामले की पूरी जानकारी किसी अनुभवी अधिवक्ता को बताकर उचित कानूनी सलाह लेना सबसे बेहतर होता है।

कंस्यूमर अक्सर कौन-सी गलतियां करते हैं?

कई बार कंस्यूमर अपनी ही कुछ गलतियों के कारण अपना कानूनी मामला कमजोर कर देते हैं। इसलिए निम्न गलतियों से बचना चाहिए—

  • केवल मौखिक बातों पर भरोसा करना।
  • भुगतान की रसीदें और अन्य दस्तावेज सुरक्षित न रखना।
  • कई वर्षों तक कानूनी कार्रवाई में देरी करना।
  • डीलर के लिखित संदेशों या पत्रों को नजरअंदाज करना।
  • अतिरिक्त या अनधिकृत पैसे देकर उसकी रसीद न लेना।
  • कानूनी सलाह लेने से पहले डीलर को लिखित नोटिस न भेजना।
  • ईमेल, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित न रखना।

यदि कंस्यूमर इन गलतियों से बचता है और समय रहते उचित कदम उठाता है, तो उसके सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

निष्कर्ष

सिर्फ भुगतान प्राप्त कर लेना ही डीलर की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। यदि कंस्यूमर ने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं, तो डीलर का कर्तव्य है कि वह उचित समय के भीतर NOC जारी करे। बिना किसी वैध कारण के NOC रोकना या अनावश्यक देरी करना कंस्यूमर के लिए आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का कारण बन सकता है।

यदि डीलर बिना उचित कारण के NOC जारी नहीं करता, तो कंस्यूमर को अपने सभी दस्तावेज और साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए, लिखित रूप में NOC की मांग करनी चाहिए और आवश्यकता होने पर कंस्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लेना चाहिए। समय पर की गई सही कानूनी कार्रवाई आपके अधिकारों की रक्षा करने और उचित राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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FAQs 

1. क्या पूरा भुगतान करने के बाद भी डीलर NOC देने से इंकार कर सकता है?

यदि आपने पूरा भुगतान कर दिया है, एग्रीमेंट की सभी शर्तें पूरी कर दी हैं और कोई बकाया राशि नहीं है, तो बिना किसी वैध कारण के NOC देने से इंकार करना कंस्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना जा सकता है।

2. यदि डीलर NOC देने में अनावश्यक देरी करे, तो क्या मैं कंस्यूमर कंप्लेंट दर्ज कर सकता हूँ?

हाँ। यदि डीलर की अनावश्यक देरी के कारण आपको आर्थिक नुकसान, मानसिक परेशानी या अन्य असुविधा हुई है, तो आप उचित कंस्यूमर कमीशन में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

3. क्या मैं मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा मांग सकता हूँ?

हाँ। मामले के तथ्यों के आधार पर कंस्यूमर कमीशन आर्थिक नुकसान, मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए भी मुआवजा देने का आदेश दे सकता है।

4. क्या कंस्यूमर कंप्लेंट दर्ज करने से पहले कानूनी नोटिस भेजना जरूरी है?

हर मामले में कानूनी नोटिस भेजना अनिवार्य नहीं है, लेकिन ऐसा करना उचित माना जाता है। इससे डीलर को विवाद सुलझाने का अवसर मिलता है और भविष्य में आपका कानूनी मामला भी मजबूत होता है।

5. डीलर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए?

आपको खरीद की इनवॉइस, भुगतान की रसीदें, एग्रीमेंट, बैंक स्टेटमेंट, ईमेल, व्हाट्सएप चैट, NOC के लिए किए गए लिखित अनुरोध, कानूनी नोटिस और अन्य सभी संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। यही दस्तावेज यह साबित करने में मदद करेंगे कि आपने अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी कर दी थीं और डीलर ने बिना उचित कारण के NOC जारी नहीं की।

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