साइबर बुलिंग का शिकार हो रहे हैं? कानूनी कार्रवाई और बचाव के उपाय

Being a victim of cyberbullying Legal action and prevention tips

आज के डिजिटल दौर में किसी को परेशान करने के लिए सामने आना जरूरी नहीं है। अब मोबाइल, सोशल मीडिया, चैट, ईमेल या फेक अकाउंट के जरिए भी किसी को बार-बार परेशान, धमकाया, बदनाम, ब्लैकमेल या मानसिक रूप से परेशान किया जा सकता है। कई बार यह काम कोई जान-पहचान वाला करता है, और कई बार कोई अनजान व्यक्ति नकली प्रोफाइल बनाकर करता है। लोग इसे अक्सर “ऑनलाइन बुलिंग” कहकर हल्के में लेते हैं, लेकिन सच यह है कि यह बहुत गंभीर मामला हो सकता है। गाली-गलौज वाले मैसेज, बार-बार धमकी देना, फेक अकाउंट बनाना, सोशल मीडिया पर पीछा करना, फोटो या वीडियो से छेड़छाड़ करना, सार्वजनिक रूप से बेइज्जती करना, या जानबूझकर ऑनलाइन बदनाम करना, ये सब किसी व्यक्ति की मानसिक शांति, इज्जत, पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और सुरक्षा पर बहुत बुरा असर डाल सकते हैं।

सबसे खतरनाक बात यह है कि बहुत से लोग लंबे समय तक चुप रहते हैं। उन्हें लगता है कि यह कुछ दिन में बंद हो जाएगा, लोग क्या कहेंगे, पुलिस शायद इसे गंभीरता से नहीं लेगी, या फेक अकाउंट वाले को पकड़ा नहीं जा सकता। लेकिन ऐसी सोच नुकसान बढ़ा सकती है। साइबर बुलिंग को कभी भी “सिर्फ इंटरनेट पर मजाक” समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मामले की गंभीरता के हिसाब से यह कानूनन अपराध हो सकता है, और इसके खिलाफ पुलिस में शिकायत, साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटवाने की मांग, और जरूरत पड़ने पर कोर्ट से मदद ली जा सकती है। सबसे जरूरी बात है, जल्दी कदम उठाना, सारे डिजिटल सबूत सुरक्षित रखना, और शुरू से सही कानूनी रास्ता चुनना।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

साइबर बुलिंग क्या होती है?

साइबर बुलिंग का मतलब है इंटरनेट, मोबाइल, सोशल मीडिया, चैट ऐप, ईमेल, गेमिंग प्लेटफॉर्म या किसी भी ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति को बार-बार परेशान करना, धमकाना, बेइज्जत करना, पीछा करना, बदनाम करना, ब्लैकमेल करना, डराना या मानसिक रूप से परेशान करना। यह कई तरीकों से हो सकती है, जैसे:

  • इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (ट्विटर), स्नैपचैट पर
  • व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, ईमेल के जरिए
  • नकली प्रोफाइल (फर्जी खाता) बनाकर
  • ऑनलाइन चर्चा मंच में
  • ऑनलाइन खेल की बातचीत में
  • यूट्यूब टिप्पणियों के जरिए
  • रिश्ता/मुलाकात वाले ऐप्स पर
  • स्कूल/कॉलेज के समूहों में
  • ऑफिस/कार्यालय के समूहों में
  • गुमनाम संदेश भेजने वाले ऐप या प्लेटफॉर्म पर

साइबर बुलिंग हमेशा सिर्फ एक ही तरह का अपराध नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि सामने वाले ने असल में क्या किया।

साइबर बुलिंग किन-किन तरीकों से होती है?

साइबर बुलिंग कई तरह से हो सकती है। कई बार लोग समझ नहीं पाते कि जो उनके साथ हो रहा है, वह सिर्फ ऑनलाइन मज़ाक नहीं, बल्कि एक गंभीर और कानूनन गलत हरकत है। नीचे साइबर बुलिंग के कुछ आम रूप बहुत आसान भाषा में दिए गए हैं:

1. बार-बार गाली, बेइज्जती या अपमान वाले संदेश: 

अगर कोई व्यक्ति आपको लगातार गंदे, अपमानजनक या नीचा दिखाने वाले संदेश भेज रहा है, तो यह साइबर बुलिंग हो सकती है। जैसे:

  • बार-बार गाली देना
  • लगातार बेइज्जत करना
  • निजी चैट या इनबॉक्स में अपमान करना
  • अश्लील या घटिया भाषा का इस्तेमाल करना

2. ऑनलाइन धमकी देना: 

अगर कोई इंटरनेट या मोबाइल के जरिए आपको डराने या नुकसान पहुँचाने की धमकी देता है, तो यह बहुत गंभीर मामला है। जैसे:

  • मारने-पीटने की धमकी
  • निजी फोटो या वीडियो फैलाने की धमकी
  • परिवार या नौकरी की जगह पर शिकायत करने की धमकी
  • तेजाब हमला, हमला करवाने, या झूठा केस करने की धमकी

3. नकली प्रोफाइल बनाकर बदनाम करना: 

कई बार कोई व्यक्ति आपके नाम से नकली खाता बनाता है और दूसरों से ऐसे बात करता है जैसे वह आप ही हो। इससे आपकी इज्जत और पहचान को नुकसान पहुँच सकता है। जैसे:

  • आपके नाम से फर्जी सोशल मीडिया खाता बनाना
  • आपकी फोटो बिना अनुमति के इस्तेमाल करना
  • दूसरों से आपकी पहचान बनकर चैट करना
  • आपकी छवि खराब करना

4. फोटो या वीडियो से छेड़छाड़ करना: 

अगर कोई आपकी फोटो या वीडियो को बदलकर, जोड़-तोड़कर, या गलत तरीके से इस्तेमाल करके फैलाता है, तो यह बहुत गंभीर साइबर बुलिंग है। जैसे:

  • चेहरे को दूसरी तस्वीर पर लगाना
  • नकली अश्लील फोटो बनाना
  • वीडियो या फोटो को गलत रूप में दिखाना
  • शर्मिंदा करने वाला या यौन रूप से गलत कंटेंट फैलाना
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5. सोशल मीडिया पर बदनामी करना: 

अगर कोई व्यक्ति आपके बारे में झूठी बातें सार्वजनिक रूप से पोस्ट करता है, तो यह आपकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकता है। जैसे:

  • झूठे आरोप लगाना
  • चरित्र पर हमला करना
  • जानबूझकर सबके सामने बेइज्जत करना
  • अफवाह फैलाना

4. ऑनलाइन पीछा करना (साइबर स्टॉकिंग): 

अगर कोई व्यक्ति आपकी ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है और बार-बार संपर्क करने की कोशिश करता है, तो यह साइबर स्टॉकिंग हो सकती है। जैसे:

  • हर पोस्ट, स्टोरी, या गतिविधि पर नजर रखना
  • लगातार अनचाहे संदेश भेजना
  • आपकी दिनचर्या या लोकेशन जानने की कोशिश करना
  • ब्लॉक करने के बाद नए खाते से फिर आना

7. निजी जानकारी सार्वजनिक कर देना: 

अगर कोई आपकी निजी जानकारी इंटरनेट पर फैला देता है, तो यह आपकी सुरक्षा के लिए भी खतरनाक हो सकता है। जैसे:

  • मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर देना
  • घर का पता साझा करना
  • निजी फोटो डाल देना
  • निजी चैट सबके सामने डाल देना

8. ऑनलाइन यौन उत्पीड़न: 

अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन अश्लील, गंदे, या जबरदस्ती वाले यौन संदेश भेजता है, तो यह गंभीर अपराध हो सकता है। जैसे:

  • बिना चाहत के गंदे या यौन संदेश भेजना
  • अश्लील फोटो भेजना
  • बार-बार यौन टिप्पणी करना
  • निजी या अंतरंग फोटो माँगना
  • मना करने पर धमकी देना

9. समूह बनाकर परेशान करना या सबके सामने ट्रोल करना:  

कई बार एक से ज्यादा लोग मिलकर किसी एक व्यक्ति को ऑनलाइन निशाना बनाते हैं। इससे मानसिक दबाव बहुत बढ़ जाता है। जैसे:

  • मिलकर ट्रोल करना
  • कमेंट सेक्शन में एक साथ गाली देना
  • कॉलेज या क्लास समूह में किसी एक को निशाना बनाना
  • ऑफिस समूह में जानबूझकर बेइज्जत करना

10. ब्लैकमेल करना या निजी फोटो/वीडियो के नाम पर दबाव बनाना: 

अगर कोई आपकी निजी फोटो, वीडियो, या चैट के नाम पर पैसे, बात, रिश्ता, या कोई और चीज़ मांगता है, तो यह बहुत गंभीर मामला है। जैसे:

  • “पैसे दो, नहीं तो फोटो वायरल कर दूँगा”
  • “मुझसे बात करो, नहीं तो वीडियो अपलोड कर दूँगा”
  • “रिश्ते में वापस आओ, नहीं तो बदनाम कर दूँगा”

साइबर बुलिंग कानूनी रूप से गंभीर क्यों है?

बहुत से लोग सोचते हैं कि “ये तो सिर्फ ऑनलाइन है”, “सिर्फ मैसेज ही तो हैं”, “फेक अकाउंट है, कुछ नहीं होगा”, या “अगर नजरअंदाज कर देंगे तो खुद बंद हो जाएगा।” लेकिन अक्सर यह सोच गलत होती है। साइबर बुलिंग कोई छोटी बात नहीं है। यह किसी व्यक्ति को मानसिक तनाव, डर, घबराहट, बदनामी, पढ़ाई या नौकरी में नुकसान, परिवार पर दबाव, और कई बार ब्लैकमेल या असल जिंदगी में पीछा किए जाने जैसे गंभीर खतरे तक पहुँचा सकती है।

इसीलिए कानून साइबर बुलिंग को सिर्फ ऑनलाइन मज़ाक नहीं मानता। अगर कोई व्यक्ति बार-बार धमका रहा है, बदनाम कर रहा है, फर्जी अकाउंट बनाकर परेशान कर रहा है, निजी फोटो/वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल कर रहा है, या निजी जानकारी फैला रहा है, तो यह कानूनन गंभीर मामला बन सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में चुप न रहें – सबूत सुरक्षित रखें, स्क्रीनशॉट लें, और समय पर साइबर क्राइम पोर्टल, पुलिस या वकील की मदद लें।

अगर आपके साथ साइबर बुलिंग हो रही है, तो तुरंत क्या करें?

स्टेप 1: सबसे पहले सबूत कभी डिलीट न करें

साइबर बुलिंग के मामलों में सबसे बड़ी गलती लोग यही करते हैं कि घबराकर चैट, ईमेल, कमेंट, पोस्ट या अकाउंट ही डिलीट कर देते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें। अगर आप बिना सबूत सुरक्षित किए मैसेज, ईमेल, कमेंट या फेक प्रोफाइल हटा देंगे, तो बाद में शिकायत या कानूनी कार्रवाई करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सबसे पहले हर चीज़ को उसी हालत में सुरक्षित रखें।

स्टेप 2: स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग तुरंत लें

जिस भी प्लेटफॉर्म पर आपको परेशान किया जा रहा है, उसका पूरा सबूत इकट्ठा करें। स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग में पूरा प्रोफाइल नाम, यूज़रनेम, प्रोफाइल लिंक, तारीख, समय, गंदे या धमकी भरे मैसेज, कमेंट, पोस्ट, स्टोरी, रील, फोटो, ऑडियो नोट और कॉल लॉग सब शामिल करें। सबसे अच्छा तरीका है कि आप सिर्फ स्क्रीनशॉट ही नहीं, बल्कि स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी रखें, जहाँ संभव हो कंटेंट डाउनलोड करें, क्लाउड में सेव करें, और खुद को ईमेल करके बैकअप भी रख लें।

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स्टेप 3: सभी लिंक और URL अलग से सुरक्षित रखें

सिर्फ स्क्रीनशॉट लेना काफी नहीं होता। हमेशा उस फेक अकाउंट, पोस्ट, ट्वीट, रील, चैनल, या ग्रुप का URL भी सेव करें। जैसे प्रोफाइल लिंक, पोस्ट लिंक, ट्वीट लिंक, रील लिंक, चैनल लिंक, और ग्रुप इनवाइट लिंक। कई बार कंटेंट बाद में हटा दिया जाता है, लेकिन लिंक जांच में बहुत काम आता है।

स्टेप 4: पूरी घटना की तारीख और क्रम लिखकर रखें

एक आसान सी टाइमलाइन बनाकर रखें कि यह सब कब शुरू हुआ, किस प्लेटफॉर्म पर हुआ, क्या कहा गया, कितनी बार हुआ, क्या धमकियाँ बढ़ती गईं, सामने वाला जान-पहचान का है या अनजान, और क्या उसने फेक प्रोफाइल भी बनाई। यह छोटी सी लिखित जानकारी बाद में पुलिस, साइबर सेल या वकील को मामला जल्दी समझाने में बहुत मदद करती है।

स्टेप 5: सबूत सुरक्षित करने के बाद ही ब्लॉक करें

ब्लॉक करना आपकी सुरक्षा के लिए जरूरी हो सकता है, लेकिन यह काम सबूत सुरक्षित करने के बाद ही करें। कई लोग पहले ब्लॉक कर देते हैं और बाद में पता चलता है कि जरूरी चैट, प्रोफाइल जानकारी या धमकी वाले संदेश सही तरीके से सेव ही नहीं हुए। इसलिए पहले सबूत बचाएँ, फिर ब्लॉक करें।

स्टेप 6: प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें

जिस प्लेटफॉर्म पर साइबर बुलिंग हो रही है, वहीं उसके इन-ऐप रिपोर्ट फीचर का इस्तेमाल करें। जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स, यूट्यूब, टेलीग्राम, व्हाट्सऐप, स्नैपचैट आदि। प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करने से कई बार फेक अकाउंट हट सकता है, आपत्तिजनक पोस्ट हटाई जा सकती है, या उस व्यक्ति का अकाउंट सस्पेंड हो सकता है। यह कानूनी शिकायत के साथ-साथ एक जरूरी और तुरंत उठाया जाने वाला कदम है।

साइबर बुलिंग की शिकायत कहाँ करें?

आपके पास कई कानूनी विकल्प हैं। अगर आपके साथ साइबर बुलिंग हो रही है, तो आप मामले की गंभीरता के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल, साइबर सेल, या नजदीकी पुलिस स्टेशन – किसी भी जगह शिकायत कर सकते हैं।

विकल्प 1 – नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल

आप सरकारी साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह तरीका खासतौर पर इन मामलों में उपयोगी है:

  • फेक प्रोफाइल, इम्पर्सोनेशन, ऑनलाइन स्टॉकिंग
  • अश्लील / आपत्तिजनक कंटेंट, ऑनलाइन सेक्शुअल हरैस्मेंट
  • धमकी, ब्लैकमेल, बच्चों से जुड़ा ऑनलाइन शोषण

शिकायत करते समय स्क्रीनशॉट, URL / लिंक, मोबाइल नंबर, यूज़रनेम, ईमेल आईडी, प्लेटफॉर्म की जानकारी, तारीख और समय जरूर लगाएँ।

विकल्प 2 – साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन / साइबर सेल

आप साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जिला साइबर सेल, यास्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत कर सकते हैं। स्थानीय पुलिस स्टेशन भी जरूरत होने पर आपकी शिकायत आगे भेज सकता है। साथ में क्या लेकर जाएँ:

  • लिखित शिकायत और पहचान पत्र
  • स्क्रीनशॉट / प्रिंटआउट / सोशल मीडिया लिंक
  • मोबाइल नंबर, डिवाइस की जानकारी, और गवाह (अगर कोई हो)

अगर आरोपी फेक अकाउंट इस्तेमाल कर रहा है, तब भी पुलिस जांच कर सकती है। पुलिस आईपी लॉग, ईमेल ट्रेस, डिवाइस डिटेल, सिम लिंक और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर जांच आगे बढ़ा सकती है।

विकल्प 3 – नजदीकी पुलिस स्टेशन

हर बार यह जरूरी नहीं है कि आप पहले साइबर सेल का ही इंतजार करें। अगर मामला धमकी, स्टॉकिंग, अश्लीलता, ब्लैकमेल, ऑनलाइन सेक्शुअल हरैस्मेंट या बदनामी का है, तो आप सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दे सकते हैं। शिकायत देते समय डायरी / डीडी एंट्री नंबर, रिसीविंग कॉपी या लिखित पावती जरूर मांगें।

अगर पुलिस शिकायत लेने से मना करे: अपनी शिकायत ईमेल, स्पीड पोस्ट, या रजिस्टर्ड पोस्ट से SHO / ACP / DCP / SP / कमिश्नर को भेज दें, ताकि आपके पास लिखित रिकॉर्ड रहे।

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क्या आप आपत्तिजनक कंटेंट हटवा सकते हैं?

कई मामलों में आप ऐसा कर सकते हैं। अगर किसी ने आपके खिलाफ फेक प्रोफाइल, गंदा पोस्ट, आपत्तिजनक फोटो/वीडियो, बदनाम करने वाला कंटेंट, या परेशान करने वाली सामग्री डाली है, तो उसे हटवाने के लिए कानूनी और प्रैक्टिकल दोनों तरीके मौजूद हैं।

आप यह कदम उठा सकते हैं:

  • प्लेटफॉर्म पर पोस्ट या प्रोफाइल को रिपोर्ट करें
  • कंटेंट हटाने (टेकडाउन) की मांग करें
  • हटवाने से पहले पूरा सबूत सुरक्षित रखें
  • रिपोर्ट में साफ लिखें कि मामला इम्पर्सोनेशन, हरैस्मेंट, प्राइवेसी उल्लंघन, या बदनामी का है
  • अगर मामला गंभीर है, तो पुलिस से प्लेटफॉर्म को नोटिस भेजने या डेटा सुरक्षित रखने की मांग करें
  • बहुत जरूरी स्थिति में वकील के जरिए कोर्ट से आदेश भी लिया जा सकता है

कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ तुरंत अपनाएँ ये जरूरी सुरक्षा कदम

कानूनी कार्रवाई करना बहुत जरूरी है, लेकिन सिर्फ शिकायत करना ही काफी नहीं होता। अगर आपके साथ साइबर बुलिंग, फेक अकाउंट, हैकिंग, ब्लैकमेल, या ऑनलाइन हरैस्मेंट हो रहा है, तो आपको तुरंत अपनी डिजिटल सुरक्षा भी मजबूत करनी चाहिए ताकि नुकसान आगे न बढ़े।

तुरंत ये काम करें:

  • अपने सभी पासवर्ड तुरंत बदलें
  • 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करें
  • अनजान डिवाइस से लॉगआउट करें
  • अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें
  • अनजान फॉलोअर्स हटाएँ
  • स्टोरी कौन देख सकता है, उसे सीमित करें
  • अपनी निजी जानकारी छुपाएँ
  • लोकेशन शेयरिंग बंद करें
  • जुड़े हुए ऐप्स (Linked Apps) चेक करें
  • अपने मोबाइल / डिवाइस का बैकअप सेव करें
  • सबसे पहले अपना ईमेल अकाउंट सुरक्षित करें (यह सबसे जरूरी है)

निष्कर्ष

साइबर बुलिंग को कभी भी सिर्फ ऑनलाइन मज़ाक या सोशल मीडिया का छोटा विवाद समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार ऑनलाइन परेशान करना, धमकी देना, बदनाम करना, फेक प्रोफाइल बनाना, मॉर्फ्ड फोटो डालना, अश्लील मैसेज भेजना, ब्लैकमेल करना, या सार्वजनिक रूप से अपमानित करना – ये सब गंभीर बातें हैं और कई मामलों में भारतीय कानून के तहत सीधे कानूनी कार्रवाई योग्य अपराध बन सकते हैं।

अगर आपके साथ साइबर बुलिंग हो रही है, तो घबराएँ नहीं, सबूत डिलीट न करें, और यह मत सोचें कि फेक अकाउंट वाला व्यक्ति कभी पकड़ा नहीं जाएगा। सबसे पहले स्क्रीनशॉट, चैट, लिंक, तारीख और समय सुरक्षित करें, फिर अकाउंट रिपोर्ट करें, अपनी डिजिटल सुरक्षा मजबूत करें, और जरूरत होने पर साइबर सेल, नजदीकी पुलिस स्टेशन, या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर तुरंत शिकायत करें। सही समय पर, सही सबूत के साथ, और सही कानूनी सलाह लेकर की गई कार्रवाई आपकी सुरक्षा, सम्मान, और प्रतिष्ठा बचाने में बहुत मदद कर सकती है।

किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।

FAQs

Q1. क्या साइबर बुलिंग सच में पुलिस का मामला है?

साइबर बुलिंग सिर्फ ऑनलाइन मज़ाक नहीं है। मामले के अनुसार इसमें स्टॉकिंग, धमकी, मानहानि, अश्लीलता, प्राइवेसी का उल्लंघन, फेक अकाउंट, ब्लैकमेल, या ऑनलाइन सेक्शुअल हरैस्मेंट जैसे अपराध शामिल हो सकते हैं।

Q2. अगर अकाउंट फेक है, तब भी क्या शिकायत कर सकते हैं?

फेक अकाउंट होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी बच जाएगा। कई मामलों में ऐसे अकाउंट तकनीकी सबूतों के आधार पर ट्रेस किए जा सकते हैं।

Q3. क्या मुझे उस व्यक्ति को तुरंत ब्लॉक कर देना चाहिए?

हाँ, लेकिन पहले सबूत सुरक्षित करें। ब्लॉक करने से पहले स्क्रीनशॉट, स्क्रीन रिकॉर्डिंग, लिंक, चैट, तारीख और समय जरूर सेव कर लें। उसके बाद ही ब्लॉक करें।

Q4. क्या मैं ऑनलाइन शिकायत कर सकता/सकती हूँ?

हाँ। आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा आप साइबर सेल या नजदीकी पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दे सकते हैं।

Q5. अगर किसी ने मॉर्फ्ड फोटो या निजी फोटो पोस्ट कर दी हो तो क्या करें?

यह बहुत गंभीर मामला है। ऐसी स्थिति में तुरंत सबूत सुरक्षित करें और बिना देरी किए शिकायत करें। ऐसे मामलों में IT एक्ट और भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की संबंधित धाराएँ लागू हो सकती हैं।

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