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Adv. Anjali Sandeep Kshirsagar

I am Anjali Sandeep Kshirsagar, professionally an advocate. I have 5 years experience in the realm of law. I have completed my Law I have been enrolled in the Bar council of Delhi and practicing in Delhi High Court. I'm more passionate about creating Criminal, Criminal Matter, Cyber Fraud, Money Recovery. I'm a good fit for people with businesses and individual conflicts and capable of resolving sensitive and complicated issues, identifying legal concerns, recognizing compliance with legal challenges.

Adv. Anjali Sandeep Kshirsagar
लोन वापस लेने में कानूनी नोटिस की क्या भूमिका है?

लोन वापस लेने में कानूनी नोटिस की क्या भूमिका है?

कोई मुकदमा शुरू करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई कानूनी नोटिस को जारी करना होता है। क्योंकि इससे अदालत के बाहर समझौता संभव हो सकता है। कानूनी नोटिस पक्षकारों के बीच विचार-विमर्श का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, जिससे पक्षकारों का अदालती कार्यवाही पर खर्च होने वाला समय और संसाधन बच जाता है। कई बार …

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जीएसटी रजिस्ट्रेशन कब जरूरी है?

जीएसटी रजिस्ट्रेशन कब जरूरी है?

जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैसे करें और GST कराने के क्या फायदे है। साथ ही, क्या जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है? इन सभी बातों को जानने के लिए आपको यह लेख पड़ना होगा।  जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने के फायदे: रजिस्ट्रेशन का सेक्शन 22 क्या है? किसका रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं है? (धारा 23) सीजीएसटी की धारा 23 के …

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मैरिज सर्टिफिकेट डाउनलोड करने की ऑनलाइन प्रक्रिया क्या है?

मैरिज सर्टिफिकेट डाउनलोड करने की ऑनलाइन प्रक्रिया क्या है?

किन्ही दो लोगों के मध्य विवाह एक बहुत ही पवित्र रिश्ता होता है। विवाह का विधिक पंजीकरण कराना विवाह के लिए अत्यधिक आवश्यक होता है। किसी भी विवाह का पंजीकरण करा कर मैरिज सर्टिफिकेट प्राप्त करने से पति पत्नी को कई प्रकार की सुविधाएं प्राप्त हो सकती हैं। यह वीजा परमिट , होम लोन , …

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जीएसटी रजिस्ट्रेशन का पूरा प्रोसेस क्या है?

जीएसटी रजिस्ट्रेशन का पूरा प्रोसेस क्या है?

भारत सरकार के नियमों के अनुसार, हर साल 40 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यवसायों और व्यवपारियों को सामान्य टैक्स योग्य संस्थाओं के रूप में पंजीकृत होना और अपने प्रोडक्ट्स और सेवाओं के अनुरूप टैक्स (जीएसटी) भरना जरूरी है। हालाँकि, 40 लाख रुपये तक के कारोबार की सीमा अलग-अलग राज्यों के हिसाब से …

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क्या चर्च द्वारा मुहैया कराया गया सर्टिफिकेट कानूनी रूप से मान्य है?

क्या चर्च द्वारा मुहैया कराया गया सर्टिफिकेट कानूनी रूप से मान्य है?

भारत में मुसलमानों के बाद ईसाई दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है। ईसाई जोड़ों का विवाह भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872 द्वारा शासित होता है, जो शादी के अनुष्ठान के लिए चर्च के पादरी या मंत्री की उपस्थिति की प्राथमिक शर्त को निर्धारित करता है। हर धर्म मे विवाह के साथ ही एक प्रमाण …

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Has there been fraud in marriage registration Know what legal recourse you have

शादी के रजिस्ट्रेशन में धोखाधड़ी की गई है? जानिए क्या है आपके पास कानूनी रास्ता

विवाह न सिर्फ एक सामाजिक अनुबंध है, बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया भी है। अगर शादी के पंजीकरण में कोई पक्ष झूठ बोलकर, दस्तावेज़ों में हेराफेरी कर के या वैवाहिक स्थिति छुपाकर रजिस्ट्रेशन करवाता है, तो यह सिर्फ नैतिक धोखा नहीं बल्कि एक कानूनी अपराध है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि शादी के रजिस्ट्रेशन में …

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Alimony in Hindu Marriage Act Rights and Procedure under Sections 24 and 25

हिंदू विवाह अधिनियम में गुजारा भत्ता: धारा 24 और 25 के तहत अधिकार और प्रक्रिया

गुजारा भत्ता एक कानूनी अधिकार है, जो शादीशुदा जोड़ों के बीच विवाह के बाद के विवादों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब पति-पत्नी के बीच रिश्ता टूटता है या वे अलग हो जाते हैं, तो एक पक्ष को दूसरे पक्ष से भरण-पोषण के रूप में एक निश्चित राशि की आवश्यकता हो सकती है। हिंदू विवाह …

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वाइफ या गर्लफ्रेंड द्वारा झूठा केस करने पर क्या बदले में उन्ही पर केस किया जा सकता है?

महिला पार्टनर अगर झूठा केस करे तो क्या काउंटर केस किया जा सकता है?

किसी भी मुकदमे या केस को फाइल करने के लिए सबसे पहला स्टेप सीआरपीसी एक्ट के सेक्शन 154 के तहत फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट या एफआईआर करना होता है। इसके बाद एक्ट के तहत आपके केस की आपराधिक कार्यवाही (criminal Proceedings) शुरू कर दी जाती है। फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट या एफआईआर वह डॉक्युमेंट होता है जिसमे …

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रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट कराने का क्या फायदा है?

रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट कराने का क्या फायदा है?

एक रेंट एग्रीमेंट किसी भी विवाद या किसी भी पक्ष द्वारा किए गए किसी भी उल्लंघन के मामले में दोनों पक्षों की रक्षा करने में मदद करता है। यह मालिक की संपत्ति को सुरक्षा प्रदान करता है और किरायेदारों को मालिक की गैरकानूनी मांगों से भी बचाता है। एक अच्छी तरह से तैयार किए गए …

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एग्रीमेंट कितने प्रकार के होते है?

एग्रीमेंट कितने प्रकार के होते है?

एग्रीमेंट या समझौता सामान्य रूप से बिज़नेस का एक मह्त्वपूर्ण हिस्सा होता हैं। यह एक बिज़नेस को अलग अलग कानूनी स्थितियों में फंसने से बचाने के लिए बनाये जाते हैं। कुछ सामान्य एग्रीमेंट जो ज्यादातर हर बिज़नेस में बनवाये जाते है वह है – साझेदारी (partnership) एग्रीमेंट, क्षतिपूर्ति (indemnity) समझौते, गैर-प्रकटीकरण (non-disclosure) समझौते, पट्टा (lease) …

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