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Adv. Vidhi Saini

Advocate Vidhi Saini is a law graduate and has been advising and helping clients for the past 3 years and is master at organizing complex situations. I am currently working in Rohini Court, Tis Hazari Court and am registered with the Delhi Bar Council . My area of competence in the field of drafting is the creation of Any Legal Notice, Consumer Court Issue, Criminal Matter, Divorce, Maintenance. I counsel, advise, and practice in this area. I advise both companies and individuals in my capacity as counsel, identifying legal concerns and creating fresh strategies for resolving challenging problems.

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सेक्शन 164 के तहत किन बयानों को कॉन्फेशन कहा जा सकता है?

जैसा कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, 1973 के सेक्शन 164 के तहत बताया गया है कि किसी भी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या जुडिशियल मजिस्ट्रेट इन्वेस्टीगेशन के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा उसे दिए गए कॉन्फेशन को रिकॉर्ड कर सकता है, भले ही वह केस उसके अधिकार क्षेत्र का नहीं है।  सीआरपीसी के सेक्शन 164 में कॉन्फेशनल स्टेटमेंट …

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म्यूच्यूअल डाइवोर्स के क्या फायदे हैं?

म्यूच्यूअल डाइवोर्स के क्या फायदे हैं?

भारत में कुछ कानून/लॉ शादी के साथ-साथ डाइवोर्स लॉ को भी कण्ट्रोल करते हैं, इनमें भारतीय क्रिस्चियन मैरिज एक्ट, 1872, हिंदू मैरिज एक्ट, मुस्लिम मैरिज एक्ट, स्पेशल मैरिज एक्ट शामिल हैं। इस निम्नलिखित लेख में हम  भारतीय कानून के तहत दिए गया डाइवोर्स के एक प्रकार म्यूच्यूअल डाइवोर्स के कांसेप्ट को समझेंगे – कानून द्वारा …

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The complete legal process for getting back the money you borrow: A detailed guide

उधार दिए पैसे वापस लेने की पूरी कानूनी प्रक्रिया: एक विस्तृत मार्गदर्शिका

उधार देना हमेशा एक विश्वास का संकेत होता है—चाहे वो दोस्ती का हो, व्यापार का या पारिवारिक रिश्ते का। लेकिन जब कोई समय पर पैसा वापस नहीं करता, तो यह भरोसा भारी चिंता और कानूनी झंझट में बदल सकता है। भारत में, यदि कोई व्यक्ति या संस्था उधार लिए पैसे लौटाने में असफल रहती है, …

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SC GRANTS RELIEF TO CLASS-4 EMPLOYEE AGAINST DISMISSAL ORDER

डिसमायसल आर्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने क्लास-4 के एम्प्लोयी को दी राहत

यह ऑब्ज़र्व करते हुए कि ‘ड्यूटी से गायब होना पार्लियामेंट की शक्तियों या आर्मी में एक बड़ा कदाचार/मिसकंडक्ट है, लेकिन सिविलियन एम्प्लॉयमेंट के केस में ऐसा नहीं है’, सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल गवर्नमेंट के उस फैसले को क्रिटिसाइज़ किया, जिसमें एक ग्रेड IV के एम्प्लोयी को उसकी ड्यूटी से गायब होने पर मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टील …

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क्या भारत में धर्म बदलना गैरकानूनी है?

क्या भारत में धर्म बदलना गैरकानूनी है?

भारत के संविधान के आर्टिकल 25 के अनुसार, सभी व्यक्तियों को पब्लिक आर्डर, नैतिकता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आज़ादी से धर्म का पालन करने, मानने और उसका प्रचार करने का अधिकार दिया गया है। जहां तक धर्म बदलने की बात है अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म में परिवर्तित/कन्वर्ट  होना चाहता है, …

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कम्पेन्सेशन के आधार पर अब बहू भी फेयर प्राइस शॉप की हकदार हो सकती है।

कम्पेन्सेशन के आधार पर अब बहू भी फेयर प्राइस शॉप की हकदार हो सकती है।

भारत में, हम एक पुरुष प्रधान समाज में रहते हैं, जहाँ पुरुषों को अभी भी बिज़नेस और काम के लिए पहली प्रायोरिटी मिलती है, जबकि महिलाओं को हमेशा ही पुरुषों से कम आँका जाता है और ना के बराबर प्रायोरिटी दी जाती है, उन्हें ज़्यादातर घर के कामों की तरफ धकेल दिया जाता है। यह …

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क्या एक वाइफ सेक्शन 377 के तहत अपने हस्बैंड पर एफआईआर कर सकती है?

क्या एक वाइफ सेक्शन 377 के तहत अपने हस्बैंड पर एफआईआर कर सकती है?

भारत में, इंडियन पीनल कोड का सेक्शन 377 हमेशा से ही सामाजिक या खुले तौर पर बात करने के लिए एक टैबू माना जाता रहा है। बहुत सारे लोग इसके बारे में डिटेल में जानते थे, लेकिन ज्यादातर लोगों की इस टॉपिक पर अपनी ही राय और सोंच थी, जो हमेशा बहुत ही भ्रम से …

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महिलाओं को गैर-जमानती अपराधों के साथ मौत या उम्रकैद तक की सजा के लिए भी जमानत दी जा सकती है।

महिलाओं को गैर-जमानती अपराधों के साथ मौत या उम्रकैद तक की सजा के लिए भी जमानत दी जा सकती है।

नेथरा v कर्नाटक स्टेट के केस में, कर्नाटक के हाई कोर्ट ने माना कि मौत या उम्रकैद की सज़ा वाले क्राइम्स में बेल नहीं दी जा सकती है, भारत में ऐसा कोई कानून/लॉ नहीं है। जज एम नागपरसन्ना ने अपने हस्बैंड की हत्या की एक आरोपी महिला को बेल देते हुए यह बात कही थी। …

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रेप लॉ जेंडर-न्यूट्रल होने चाहिए और पुरुष को बहलाने वाली महिला को भी दंडित किया जाना चाहिए।

रेप लॉ जेंडर-न्यूट्रल होने चाहिए और पुरुष को बहलाने वाली महिला को भी दंडित किया जाना चाहिए।

भारत में फोर्थ नंबर पर आने वाला सबसे मुख्य क्राइम रेप है। रेप को आम तौर पर पुरुष द्वारा, एक महिला के अगेंस्ट किया गया क्राइम माना जाता है। हालाँकि, यह क्राइम पुरुषों, होमोसेक्सुअल्स और ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के अगेंस्ट भी होता है। यूनाइटेड स्टेटस अमेरिका में डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सेंटर द्वारा की गयी एक …

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डोमेस्टिक वायलेंस के केस का फैसला लेने से पहले जज डोमेस्टिक इंसिडेंट रिपोर्ट पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

डोमेस्टिक वायलेंस के केस का फैसला लेने से पहले जज डोमेस्टिक इंसिडेंट रिपोर्ट पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

प्रभा त्यागी v कमलेश देवी के केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। जिसमे अब मजिस्ट्रेट को डीवी एक्ट के तहत आर्डर पास करने से पहले  प्रोटेक्शन ऑफिसर द्वारा फाइल की गयी डोमेस्टिक इंसिडेंट रिपोर्ट पर विचार करने की जरूरत नहीं है। जज एम आर शाह और जज बी वी नागरथा की बेंच …

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