क़ानून और धाराएं

क्या एक ऑन-ड्यूटी पुलिस ऑफ़िसर का वीडियो रिकॉर्ड करना लीगल है?

क्या एक ऑन-ड्यूटी पुलिस ऑफ़िसर का वीडियो रिकॉर्ड करना लीगल है?

भारतीय कानून के तहत अभी कोई भी ऐसा क्लियर कानून या स्पेसिफिक प्रोविज़न नहीं है, जिससे पता लगता हो कि किस सिचुएशन में एक पुलिस ऑफिसर की रिकॉर्डींग की जा सकती है और किस सिचुएशन में नहीं की जा सकती है। यह समझने के लिए रिलेटिड प्रोविज़न्स को डिफाइन करने की जरूरत है कि क्या …

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भारत में दहेज के लिए होने वाली मृत्यु का स्तर क्या है?

भारत में दहेज के लिए होने वाली मृत्यु की संख्या क्या दर्शाती है?

भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) के तहत ”दहेज मृत्यु” या दहेज़ के लिए मर्डर करने की परिभाषा सेक्शन 304बी (1) में बताई गयी है, जिसमें लिखा है कि “जहां किसी महिला की जलने या शारीरिक चोट लगने की वजह से मौत होती है या उसकी शादी के सात साल के अंदर नार्मल सिचुऎशन्स के अलावा उसकी मृत्यु …

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क्या एक व्यक्ति इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से अपने जीवनसाथी की डिटेल्स मांग सकता है?

क्या एक पार्टनर आरटीआई डिपार्टमेंट से दूसरे पार्टनर की इनकम डिटेल्स मांग सकता है?

सेंट्रल इनफार्मेशन कमीशन के एक ऐतिहासिक केस “सुनीता जैन वी. पवन कुमार जैन” के आर्डर के अनुसार इस सवाल का जवाब “हां” है। एक व्यक्ति अपने जीवनसाथी/लाइफ पार्टनर की इनकम डिटेल्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से मांग सकता है। हालाँकि, सेंट्रल इनफार्मेशन का यह फैसला जोधपुर की राहत बानो द्वारा फाइल की गयी अपील के अगेंस्ट …

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सेक्शन 164 के तहत किन बयानों को कॉन्फेशन कहा जा सकता है?

जैसा कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, 1973 के सेक्शन 164 के तहत बताया गया है कि किसी भी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या जुडिशियल मजिस्ट्रेट इन्वेस्टीगेशन के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा उसे दिए गए कॉन्फेशन को रिकॉर्ड कर सकता है, भले ही वह केस उसके अधिकार क्षेत्र का नहीं है।  सीआरपीसी के सेक्शन 164 में कॉन्फेशनल स्टेटमेंट …

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एनआरआई लोगों की प्रॉपर्टी पर इललीगल कब्जे से सुरक्षा के लिए प्रोटेक्शन प्लैन

एनआरआई लोग अपनी प्रॉपर्टी कानूनी तरीके से कैसे सुरक्षित रखें?

भारत में एनआरआई लोगों के नाम पर भी कई प्रॉपर्टीज़ है। यह प्रॉपर्टी कई जरियों से उनके पास होती है, जैसे – विरासत में पूर्वजों से मिली हुई प्रॉपर्टी, अपने रिश्तेदारों के साथ जॉइंट ओनरशिप या भारत में प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट करना आदि। यह प्रॉपर्टीज़ एनआरआई इसीलिए भी खरीदते है ताकि अपने भारत देश से …

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सीआरपीसी के तहत स्टेटमेंट्स मजिस्ट्रेट द्वारा रिकॉर्ड किए जाते है।

सीआरपीसी 164 के तहत ब्यान देने का प्रोसेस क्या है?

स्टेटमेंट ऐसे केसिस में रिकॉर्ड किया जाता है, जहां एक व्यक्ति किसी क्राइम के होने का विटनेस होता है या किसी एक्टिव केस में सबूत का हिस्सा होता है। ऐसे मैटर्स में विटनेस किसी भी न्यायिक/जुडिशियल मजिस्ट्रेट या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने अपना स्टेटमेंट दे सकता है या उस परिदृश्य/सिनेरिओ के बारे में अपना कॉन्फेशन …

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The complete legal process for getting back the money you borrow: A detailed guide

उधार दिए पैसे वापस लेने की पूरी कानूनी प्रक्रिया: एक विस्तृत मार्गदर्शिका

उधार देना हमेशा एक विश्वास का संकेत होता है—चाहे वो दोस्ती का हो, व्यापार का या पारिवारिक रिश्ते का। लेकिन जब कोई समय पर पैसा वापस नहीं करता, तो यह भरोसा भारी चिंता और कानूनी झंझट में बदल सकता है। भारत में, यदि कोई व्यक्ति या संस्था उधार लिए पैसे लौटाने में असफल रहती है, …

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How To File For Suit For Declaration?

सूट डिक्लेरेशन के लिए केस कैसे फाइल करें?

भारतीय लॉयर्स द्वारा लाया गया सबसे पॉपुलर और इफेक्टिव तरीके का सिविल सूट/मुकदमा एक “डिक्लेरेशन सूट” है। कोर्ट के डिक्लेरेशन के आधार/बेस पर, यह डिक्लेरेशन और इंजक्शन रिलीफ दिया जाता है। एक सूट डिक्लेरेशन किसी भी मैटर पर कोर्ट द्वारा लिए गए फैसले के अगेंस्ट उच्च/हायर कोर्ट से की गई रिक्वेस्ट है। ज्यादातर सिचुऎशन्स में, …

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अनमैरिड महिला सहमति से प्रेग्नेंट होने पर 20 हफ्तों के बाद एबॉर्शन नहीं कर सकती

अनमैरिड महिला 20 हफ्तों की प्रेग्नेन्सी के बाद एबॉर्शन नहीं कर सकती है।

शादी के बाद प्रेग्नेंसी और शादी से पहले प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं को आमतौर पर देखा जाता है, लेकिन समाज में अन्य लोगों द्वारा इसे एक्सेप्ट और सपोर्ट नहीं किया जाता है। कई बार यह देखा गया है कि जो महिलाएं रेप, सेक्सुअल हेररेस्मेंट और अन्य सहमति के बिना सेक्सुअल रिलेशन्स बनने की वजह से …

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सीआरपीसी के सेक्शन 125 सामाजिक न्याय के लिए बनाई गई है।

सीआरपीसी के सेक्शन 125 सामाजिक न्याय के लिए बनाई गई है।

मुक्ति v यूपी राज्य के केस में फाइल की गयी एक क्रिमिनल रिविज़न से डील करने के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेक्शन 125 सीआरपीसी सामाजिक न्याय और स्पेशली बच्चों, महिलाएं और बूढ़े माता-पिता की सुरक्षा के लिए लाया गया है। कोर्ट ने आगे कहा कि यह सेक्शन आर्टिकल 15(3) के अंतर्गत आता है …

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