कानून और रिश्ते

पति के परिजनों के आरोपों पर ध्यान ना देना, न्याय का दुरुपयोग है।

पति के परिवार के आरोपों पर ध्यान ना देना, न्याय का दुरुपयोग है।

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने वैवाहिक विवादों के सम्बंध में एक बेहद ही महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अपने निर्णय में तेलंगाना की उच्च न्यायालय ने कहा है कि परिवार न्यायालय अधिनियम 1984 के तहत वैवाहिक विवादों में परिजनों के द्वारा लगाए गए ग़लत आरोप यदि अनियंत्रित रहे तो यह न्याय के ग़लत इस्तेमाल को प्रेरित करेगा। …

पति के परिवार के आरोपों पर ध्यान ना देना, न्याय का दुरुपयोग है। Read More »

दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद

कोर्ट के आदेशों का पालन ना करने पर हाईकोर्ट ने तीन महीने की सजा सुनाई।

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा एक व्यक्ति को बार बार न्यायालय के आदेश की अवज्ञा करने पर सजा सुनाई गई थी। न्यायालय द्वारा बार बार दिये जा रहे निर्देशों की अवमानना करने से कुपित हुए न्यायालय ने व्यक्ति पर अर्थदंड लगाकर दण्डित किया है।  दिल्ली हाई कोर्ट के एक वैवाहिक विवाद के मामले में एक व्यक्ति …

कोर्ट के आदेशों का पालन ना करने पर हाईकोर्ट ने तीन महीने की सजा सुनाई। Read More »

शादी का पंजीकरण कराते समय इन बातों का ध्यान रखें

शादी का रजिस्ट्रेशन कराने से पहले इन बातों का ध्यान रखें।

भारतीय संस्कृति में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना जाता है। यह दो व्यक्तियों के बीच शेष जीवन एक साथ बिताने के लिए एक पवित्र व्यवस्था है। विवाह में प्रवेश करने के बाद अपनी शादी को पंजीकृत करना सबसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी का  काम है। शादी का पंजीकरण कराना बहुत ही आवश्यक और मददगार भी …

शादी का रजिस्ट्रेशन कराने से पहले इन बातों का ध्यान रखें। Read More »

What is the easiest process for getting a divorce

तलाक लेने की सबसे आसान प्रक्रिया कौन सी है?

अक्सर लोगों को लगता है कि तलाक लेना मतलब एक लंबी कोर्ट की लड़ाई, सालों-साल चलने वाली तारीखें और मानसिक तनाव। पर सच्चाई ये है कि अगर पति-पत्नी आपसी सहमति से अलग होना चाहें, तो ये प्रक्रिया काफी सरल हो सकती है।तलाक का मतलब सिर्फ रिश्ता खत्म करना नहीं, बल्कि ज़िंदगी में नए अध्याय की …

तलाक लेने की सबसे आसान प्रक्रिया कौन सी है? Read More »

भारत में शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने के 4 महत्वपूर्ण चरण कौन-से है?

शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए 4 महत्वपूर्ण चरण कौन-से है?

चाहे आधुनिक हो या पारंपरिक, विवाह वह मूल संरचना है जिस पर समाज टिका है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विवाह के पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है। जिस से इसका महत्व और भी ज़्यादा बढ़ गया है। यह कई प्रकार के अधिकार भी प्रदान करता है।  चूंकि यह प्रमाणपत्र कई कारणों से बहुत महत्वपूर्ण है, …

शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए 4 महत्वपूर्ण चरण कौन-से है? Read More »

शादी से पहले बनाए जाने वाले प्रीमैरिटल समझौते के बारे में 5 महत्वपूर्ण बातें।

शादी से पहले बनाए जाने वाले प्रीमैरिटल समझौते के बारे में 5 महत्वपूर्ण बातें।

एक विवाह पूर्व समझौता या “प्रीन्यूप्टियल एग्रीमेंट” मूल रूप से किसी शादी से पहले किया जाने वाला एक अनुबंध है। यह एक लिखित और रिकॉर्ड किया गया और नोटरीकृत समझौता है जो आम तौर पर सामान और देनदारियों के विवरण को परिभाषित करता है। साथ ही भविष्य में शादी के टूटने पर इस से जुड़ी …

शादी से पहले बनाए जाने वाले प्रीमैरिटल समझौते के बारे में 5 महत्वपूर्ण बातें। Read More »

क्या कोर्ट द्वारा आदेश दिए गए गुज़ारेभत्ते की रकम को कम कराया जा सकता है?

क्या कोर्ट द्वारा निर्धारित मेंटेनेंस की रकम को कम कराया जा सकता है?

हमारे भारत देश में महिलाओं को बहुत सारे अधिकार दिए गए है। जिनमे से एक गुज़ारा भत्ता या मेंटेनेंस का अधिकार भी है। यह मेंटेनेंस डाइवोर्स केस के दौरान माँगा जा सकता है। साथ ही, एक और परिस्थिति में इसकी मांग की जा सकती है वह है कि अगर दोनों पार्टनर्स का डाइवोर्स हो चुका …

क्या कोर्ट द्वारा निर्धारित मेंटेनेंस की रकम को कम कराया जा सकता है? Read More »

जीवनसाथी द्वारा आपराधिक शिकायत होना क्रूरता और तलाक का आधार है।

जीवनसाथी द्वारा आपराधिक शिकायत होना क्रूरता और तलाक का आधार है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक विलग रह रहे जोड़े को तलाक देते हुए कहा गया कि एक जीवन साथी द्वारा दूसरे के प्रति एक भी झूठी आपराधिक शिकायत दर्ज करना वैवाहिक क्रूरता की श्रेणी में ही आएगा। और इस तरह यह दूसरे जीवनसाथी को इस आधार पर तलाक लेने का अधिकार प्रदान करता है। श्रीनिवास …

जीवनसाथी द्वारा आपराधिक शिकायत होना क्रूरता और तलाक का आधार है। Read More »

आख़िर पति ही हमेशा कष्ट क्यों सहें

पति भी वैवाहिक मामले ट्रांसफर करा सकते है।

जुलाई 2015 में भारत की उच्चतम न्यायालय ने वैवाहिक मामलों के स्थानांतरण के मामले में और उस पर पतियों को होने वाले कष्ट को ले कर टिप्पणी की थी। यह टिप्पणी एक रूप से विशेष समझी जानी चाहिए। क्योंकि पिछले दो दशकों से भारत की उच्चतम न्यायालय ने पत्नियों के वैवाहिक मामलों के स्थानांतरण के …

पति भी वैवाहिक मामले ट्रांसफर करा सकते है। Read More »

अगर गुज़ारे भत्ते का भुगतान ना किया जाए, तो क्या परेशानियां हो सकती है?

अगर भरण पोषण का भुगतान ना किया जाए, तो क्या परेशानियां हो सकती है?

कानून द्वारा तलाक के बाद भरण जीविकोपार्जन में असक्षम जीवनसाथी के पोषण या मेंटनेंस की बात कही गई है। तलाक के केस के बाद न्यायालय अक्सर भरण पोषण का आदेश देती हैं जिन्हें दिया जाना ज़रूरी होता है। मगर क्या हो यदि गुज़ारा भत्ता का भुगतान नहीं किया जाए? आज इस आलेख के माध्यम से …

अगर भरण पोषण का भुगतान ना किया जाए, तो क्या परेशानियां हो सकती है? Read More »