इंटर-कास्ट या इंटर-रिलिजन लाइव-इन रिलेशनशिप में कानूनी चुनौतियाँ – जानिए अपने कानूनी अधिकार और ज़िम्मेदारी

Legal Challenges in Inter-caste or Inter-religion Live-in Relationships – Know Your Legal Rights and Responsibilities

प्यार जाति, धर्म या समुदाय की सीमाओं को नहीं मानता। आज के समय में कई बालिग लड़का-लड़की शादी से पहले या बिना शादी किए भी आपसी सहमति से साथ रहना (लाइव-इन रिलेशनशिप) चुनते हैं। यह उनका व्यक्तिगत निर्णय होता है, लेकिन कई बार इसी कारण उन्हें परिवार और समाज के विरोध का सामना करना पड़ता है।

इस लेख में हम समझेंगे कि इंटर-कास्ट और इंटर-रिलिजन लाइव-इन रिलेशनशिप की कानूनी स्थिति क्या है, ऐसे जोड़ों को कौन-कौन से कानूनी अधिकार और सुरक्षा प्राप्त हैं, महिलाओं और बच्चों के क्या अधिकार हैं तथा यदि किसी प्रकार की धमकी, उत्पीड़न या हस्तक्षेप हो तो कानून के तहत कौन-कौन से कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

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लाइव-इन रिलेशनशिप क्या होता है?

लाइव-इन रिलेशनशिप वह व्यवस्था है, जिसमें दो बालिग व्यक्ति बिना शादी किए अपनी इच्छा और आपसी सहमति से पति-पत्नी की तरह एक साथ रहते हैं।

शादी की तरह इसमें कोई धार्मिक रस्म, कानूनी प्रक्रिया या मैरिज रजिस्ट्रेशन होना जरूरी नहीं होता। यह रिश्ता दोनों व्यक्तियों की आपसी सहमति, विश्वास और साथ रहने के निर्णय पर आधारित होता है।

भारत में लाइव-इन रिलेशनशिप के लिए कोई अलग कानून नहीं है। फिर भी सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि यदि दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं, तो ऐसा करना गैरकानूनी नहीं है।

हालांकि, केवल साथ रहने से दोनों व्यक्तियों को शादीशुदा पति-पत्नी के समान सभी कानूनी अधिकार अपने-आप नहीं मिल जाते। लेकिन मामले की परिस्थितियों के अनुसार, विशेष रूप से महिलाओं को प्रोटेक्शन ऑफ़ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट, 2005 के तहत कुछ महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार और सुरक्षा मिल सकती है।

इंटर-कास्ट और इंटर-रिलिजन कपल्स की विशेष कानूनी चुनौतियाँ

हालांकि भारतीय कानून दो बालिग लोगों को अपनी इच्छा से साथ रहने का अधिकार देता है, लेकिन व्यवहार में कई जोड़ों को विभिन्न कानूनी और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

1. परिवार का विरोध

कई बार माता-पिता या अन्य रिश्तेदार जाति, धर्म या सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण इस रिश्ते का विरोध करते हैं। कुछ मामलों में परिवार भावनात्मक दबाव बनाता है, जबकि कुछ मामलों में दोनों को जबरन अलग करने की कोशिश भी की जाती है।

2. समाज या समुदाय का दबाव

कई बार गांव की पंचायत, स्थानीय संगठन या समुदाय के लोग बिना किसी कानूनी अधिकार के कपल्स के निजी जीवन में दखल देने लगते हैं। इसमें सामाजिक बहिष्कार करना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, धमकी देना या रिश्ता खत्म करने का दबाव बनाना शामिल हो सकता है।

3. पुलिस में शिकायत करना

कई मामलों में परिवार वाले पुलिस में शिकायत कर देते हैं कि उनके बेटे या बेटी का अपहरण कर लिया गया है, उसे जबरदस्ती रोका गया है या उस पर दबाव डालकर साथ रखा गया है। यदि दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं, तो केवल परिवार के विरोध के आधार पर पुलिस उन्हें अलग नहीं कर सकती। पुलिस का कर्तव्य है कि वह पहले पूरे मामले की सही जांच करे।

4. झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराना

कुछ मामलों में रिश्ते को खत्म कराने के उद्देश्य से झूठी पुलिस शिकायत या आपराधिक आरोप लगाए जाते हैं। यदि शिकायत सही है, तो उसकी जांच होना जरूरी है। लेकिन यदि किसी बालिग कपल्स को परेशान करने के लिए झूठा मामला दर्ज कराया गया है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

5. किराए पर मकान न मिलना

कई बार मकान मालिक केवल जाति, धर्म या लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने के कारण घर किराए पर देने से मना कर देते हैं। इससे ऐसे जोड़ों को रहने के लिए घर ढूंढने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

6. ऑनलाइन उत्पीड़न

कुछ कपल्स सोशल मीडिया या इंटरनेट के माध्यम से भी परेशान किए जाते हैं। उनकी निजी फोटो या वीडियो शेयर करना, अपमानजनक पोस्ट करना, धमकी भरे संदेश भेजना या लगातार ऑनलाइन पीछा करना (साइबर स्टाकिंग) कानून के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है।

7. ऑनर के नाम पर हिंसा या धमकी

दुर्भाग्य से कुछ मामलों में परिवार या समाज के लोग इंटर-कास्ट या इंटर-रिलिजन लाइव-इन रिलेशनशिप का विरोध करते हुए मारपीट, जान से मारने की धमकी या अन्य प्रकार की हिंसा का सहारा लेते हैं। ऐसी स्थिति में प्रभावित व्यक्ति तुरंत पुलिस से सुरक्षा मांग सकते हैं और आवश्यकता होने पर अदालत का भी सहारा ले सकते हैं।

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क्या माता-पिता कानूनी रूप से दो बालिग लोगों को साथ रहने से रोक सकते हैं?

इंटर-कास्ट या इंटर-रिलिजन लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कई जोड़ों के मन में यह सवाल होता है कि क्या उनके माता-पिता उन्हें कानूनी रूप से साथ रहने से रोक सकते हैं।

इसका सीधा उत्तर है – नहीं, यदि दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं।  भारतीय संविधान हर बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार देता है। इसमें अपनी पसंद का साथी चुनने, अपनी पसंद के स्थान पर रहने, अपनी जीवनशैली तय करने और अपने व्यक्तिगत संबंध बनाने का अधिकार भी शामिल है।

माता-पिता अपने बच्चे को सलाह दे सकते हैं, अपनी चिंता व्यक्त कर सकते हैं या इस रिश्ते से असहमति जता सकते हैं। लेकिन वे दो बालिग लोगों को अलग करने के लिए जबरदस्ती, धमकी, गैरकानूनी तरीके से रोककर रखना या हिंसा का सहारा नहीं ले सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि जब कोई व्यक्ति बालिग हो जाता है, तो वह किसके साथ रहेगा और अपना जीवन कैसे जीएगा, इसका निर्णय लेने का अधिकार उसी का होता है।

इसलिए परिवार की सहमति सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन दो बालिग लोगों के साथ रहने के लिए यह कानूनी रूप से जरूरी नहीं है।

क्या पुलिस किसी लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को अलग कर सकती है?

कई कपल्स को यह डर रहता है कि यदि परिवार पुलिस में शिकायत कर दे, तो पुलिस उन्हें जबरदस्ती अलग कर देगी। सामान्य परिस्थितियों में ऐसा नहीं किया जा सकता, यदि—

  • दोनों व्यक्ति बालिग हों।
  • दोनों अपनी इच्छा से साथ रह रहे हों।
  • उन्होंने कोई अपराध न किया हो।

ऐसी स्थिति में पुलिस का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि दोनों अपनी स्वतंत्र इच्छा से साथ रह रहे हैं। यदि दोनों स्पष्ट रूप से बताते हैं कि वे अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं, तो केवल परिवार के विरोध के कारण पुलिस उन्हें अलग नहीं कर सकती और न ही उन्हें जबरन घर भेज सकती है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है, जैसे—

  • यदि दोनों में से कोई एक नाबालिग हो।
  • यदि किसी व्यक्ति को जबरदस्ती या दबाव में साथ रखा गया हो।
  • यदि किसी कॉग्निजेबल ऑफेंस के होने के साक्ष्य हों।
  • यदि किसी शिकायत की कानूनी जांच करना आवश्यक हो।

इन परिस्थितियों को छोड़कर, पुलिस को दो बालिग व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और केवल परिवार के दबाव के कारण उनके निजी जीवन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

यदि परिवार झूठी पुलिस शिकायत दर्ज कर दे तो क्या करें?

दुर्भाग्य से कई मामलों में परिवार वाले रिश्ता खत्म कराने के लिए झूठी पुलिस शिकायत दर्ज करा देते हैं। इससे कपल्स को मानसिक तनाव, सामाजिक परेशानी और कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया होता।

हर शिकायत की जांच उसके तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाती है। लेकिन केवल झूठा आरोप लगाकर दो बालिग लोगों के संवैधानिक अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता।

1. झूठा अपहरण का आरोप

कई बार परिवार यह आरोप लगाता है कि उनकी बेटी का अपहरण कर लिया गया है, जबकि वह अपनी इच्छा से घर छोड़कर अपने साथी के साथ रह रही होती है।

यदि कोई बालिग महिला अपनी इच्छा से अपने साथी के साथ रहने का फैसला करती है, तो केवल परिवार के विरोध के कारण इसे अपहरण नहीं माना जा सकता।

ऐसे मामलों में पुलिस आमतौर पर महिला का बयान दर्ज करती है ताकि यह पता चल सके कि उसने अपनी मर्जी से यह निर्णय लिया है या नहीं।

2. झूठा बंधक बनाकर रखने का आरोप

कुछ मामलों में यह आरोप लगाया जाता है कि एक साथी ने दूसरे को जबरदस्ती अपने पास रोक रखा है।

यदि दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं तथा संबंधित व्यक्ति स्वयं यह बताता है कि उस पर किसी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती नहीं है, तो ऐसे आरोप सामान्यतः टिक नहीं पाते। ऐसे मामलों में व्यक्ति का बयान और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

3. मारपीट या धमकी के झूठे आरोप

कई बार परिवार मारपीट, धमकी या अन्य आपराधिक आरोप भी लगा देता है। पुलिस प्रत्येक शिकायत की जांच उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करती है। यदि जांच में आरोप झूठे या दुर्भावनापूर्ण पाए जाते हैं, तो आरोपी व्यक्ति कानून के अनुसार सक्षम न्यायालय से उचित कानूनी राहत प्राप्त कर सकता है।

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साथ ही यह भी याद रखना जरूरी है कि यदि वास्तव में कोई अपराध हुआ है, तो कानून उसके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करता है। दो बालिग लोगों के साथ रहने का अधिकार किसी भी व्यक्ति को कानून का उल्लंघन करने या अपराध करने की अनुमति नहीं देता।

लाइव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं के कानूनी अधिकार

1. घरेलू हिंसा से सुरक्षा का अधिकार

यदि किसी महिला के साथ लाइव-इन रिलेशनशिप के दौरान, शारीरिक हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, गाली-गलौज या मौखिक उत्पीड़न, सेक्शुअल हरैस्मेंट या यौन उत्पीड़न, आर्थिक शोषण किया जाता है, तो वह डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट, 2005 के तहत कानूनी राहत मांग सकती है, यदि यह कानून उसके मामले पर लागू होता हो।

2. प्रोटेक्शन आर्डर

यदि न्यायालय को लगता है कि महिला की सुरक्षा जरूरी है, तो वह आरोपी को महिला के साथ हिंसा, धमकी या किसी भी प्रकार का उत्पीड़न करने से रोकने के लिए सुरक्षा आदेश जारी कर सकता है।

3. मोनेटरी रिलीफ

यदि कानून और मामले के तथ्य इसकी अनुमति देते हैं, तो न्यायालय महिला को घरेलू हिंसा के कारण हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक राहत देने का आदेश भी दे सकता है।

4. कंपनसेशन

यदि महिला को घरेलू हिंसा के कारण मानसिक पीड़ा, भावनात्मक कष्ट या अन्य नुकसान हुआ है, तो उचित मामलों में न्यायालय मुआवजा देने का आदेश भी दे सकता है।

5. रेजिडेंस आर्डर

मामले के तथ्यों और डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट, 2005 के प्रावधानों के अनुसार, न्यायालय महिला को रहने से संबंधित कानूनी राहत भी दे सकता है।

ध्यान रखें, केवल साथ रहने से ये सभी अधिकार अपने-आप नहीं मिल जाते। प्रत्येक मामले में न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों, संबंध की प्रकृति और कानून के प्रावधानों को देखकर फैसला करता है।

यदि लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को धमकी या उत्पीड़न मिले तो क्या करें?

यदि इंटर-कास्ट या इंटर-रिलिजन लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले किसी कपल्स को परिवार, रिश्तेदारों या किसी अन्य व्यक्ति से धमकी या उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, तो उन्हें इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते सही कानूनी कदम उठाने से उनके अधिकारों और सुरक्षा की बेहतर रक्षा हो सकती है।

स्टेप 1: सभी साक्ष्य सुरक्षित रखें

धमकी या उत्पीड़न से जुड़े सभी साक्ष्य सुरक्षित रखें, जैसे व्हाट्सएप मैसेज, ईमेल, कॉल रिकॉर्डिंग (जहां कानून इसकी अनुमति देता हो), सोशल मीडिया पोस्ट, फोटो, वीडियो, वॉइस मैसेज और यदि उपलब्ध हो तो CCTV फुटेज भी संभालकर रखें, क्योंकि ये सभी साक्ष्य भविष्य में कानूनी कार्रवाई के दौरान आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

स्टेप 2: पुलिस में शिकायत दर्ज करें

यदि आपको अपनी जान, स्वतंत्रता या सुरक्षा को लेकर वास्तविक खतरा महसूस हो, तो तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत की प्राप्ति (Acknowledgement) अवश्य लें, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके।

स्टेप 3: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क करें

यदि स्थानीय पुलिस उचित कार्रवाई नहीं करती, तो आप पुलिस अधीक्षक (SP), पुलिस कमिश्नर या अन्य सक्षम वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर आवश्यक कार्रवाई और सुरक्षा की मांग कर सकते हैं।

स्टेप 4: हाई कोर्ट में पिटीशन दायर करें

यदि पुलिस से शिकायत करने के बाद भी धमकियां जारी रहती हैं, तो आप भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 के तहत संबंधित हाई कोर्ट में पिटीशन दायर करके पुलिस सुरक्षा की मांग कर सकते हैं। कई मामलों में हाई कोर्ट ने बालिग जोड़ों को सुरक्षा प्रदान करने के आदेश दिए हैं।

स्टेप 5: किसी वकील से कानूनी सलाह लें

हर मामले के तथ्य अलग-अलग होते हैं। इसलिए समय रहते किसी अनुभवी वकील से कानूनी सलाह लेने से आपको अपने अधिकारों की सही जानकारी मिलेगी, अनावश्यक कानूनी परेशानियों से बचने में मदद मिलेगी और आप अपने मामले के अनुसार सही कानूनी उपाय चुन सकेंगे।

लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को कौन-कौन से महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए?

यदि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी विवाद उत्पन्न होता है, तो सही दस्तावेज आपके मामले को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए निम्न दस्तावेज सुरक्षित रखना उचित होता है—

  • लाइव-इन एग्रीमेंट (Cohabitation Agreement) – यदि संभव हो, तो दोनों पक्षों के बीच एक लिखित लाइव-इन एग्रीमेंट तैयार कराकर उसे ओथ कमिश्नर के समक्ष नोटराइज कराना चाहिए। इससे यह साबित करने में मदद मिल सकती है कि दोनों व्यक्ति अपनी इच्छा और आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं।
  • आधार कार्ड
  • पासपोर्ट (यदि उपलब्ध हो)
  • वोटर ID कार्ड
  • पैन कार्ड
  • जन्म प्रमाण पत्र या शैक्षणिक प्रमाण पत्र (आयु साबित करने के लिए)
  • एड्रेस प्रूफ
  • दोनों की साथ में खिंचवाई गई फोटो
  • रेंट एग्रीमेंट (यदि दोनों साथ रह रहे हों)
  • बिजली, पानी, गैस या अन्य बिल, जिनसे दोनों के साथ रहने का पता चलता हो
  • संयुक्त बैंक खाते के दस्तावेज, यदि कोई हो
  • यात्रा से जुड़े दस्तावेज
  • व्हाट्सएप चैट, ईमेल या अन्य संदेश, जिनसे यह स्पष्ट हो कि दोनों अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं
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यदि कोई पुलिस शिकायत, कानूनी नोटिस या अन्य कानूनी दस्तावेज हो, तो उसकी प्रतियां भी सुरक्षित रखें।

इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने से आवश्यकता पड़ने पर यह साबित करने में आसानी होती है कि दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी स्वतंत्र इच्छा एवं आपसी सहमति से लाइव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं।

बी.एस. खुशबू बनाम कन्नियाम्मल (2010)

अभिनेत्री खुशबू ने एक सार्वजनिक बयान में शादी से पहले संबंध और लाइव-इन रिलेशनशिप का समर्थन किया था। इसके बाद उनके खिलाफ विभिन्न स्थानों पर कई आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई गईं।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने खुशबू के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि दो बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से लाइव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं, तो केवल इस आधार पर उसे गैरकानूनी या अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल समाज के कुछ लोग किसी रिश्ते से सहमत नहीं हैं, इसलिए किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता।

निष्कर्ष

किसी भी रिश्ते की मजबूती उसकी आपसी समझ, भरोसे और दोनों लोगों की अपनी इच्छा से तय होती है, न कि उनकी जाति, धर्म या समाज की राय से। आज भी इंटर-कास्ट और इंटर-रिलिजन लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कई जोड़ों को परिवार और समाज के विरोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं, तो कानून उनके अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करता है।

यदि किसी कपल्स को धमकी, उत्पीड़न या अनावश्यक कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें घबराने के बजाय अपने अधिकारों की जानकारी रखनी चाहिए, सभी साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए और समय पर कानूनी कदम उठाना चाहिए। सही समय पर की गई कार्रवाई उनके अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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FAQs

1. क्या भारत में इंटर-कास्ट लाइव-इन रिलेशनशिप कानूनी है?

हाँ। यदि दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं, तो इंटर-कास्ट लाइव-इन रिलेशनशिप भारत में कानूनी है और कानून उनके अधिकारों की रक्षा करता है।

2. क्या माता-पिता दो बालिग लोगों को लाइव-इन रिलेशनशिप खत्म करने के लिए मजबूर कर सकते हैं?

नहीं। यदि दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं, तो माता-पिता उन्हें कानूनी रूप से अलग रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

3. क्या इंटर-रिलिजन लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाला जोड़ा पुलिस सुरक्षा मांग सकता है?

हाँ। यदि कपल्स को धमकी, उत्पीड़न या हिंसा का डर है, तो वे पुलिस से सुरक्षा मांग सकते हैं। जरूरत पड़ने पर वे भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 के तहत संबंधित हाई कोर्ट में भी याचिका दायर कर सकते हैं।

4. क्या लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला को कानूनी अधिकार मिलते हैं?

हाँ। मामले के तथ्यों के आधार पर महिला को घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत सुरक्षा, आर्थिक राहत और कानून में उपलब्ध अन्य अधिकार मिल सकते हैं।

5. क्या इंटर-रिलिजन लाइव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग बाद में कानूनी रूप से शादी कर सकते हैं?

हाँ। यदि वे कानून में निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करते हैं, तो स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत कानूनी रूप से शादी कर सकते हैं, चाहे उनकी जाति या धर्म अलग-अलग ही क्यों न हो।

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