भारत में डाइवोर्स के बाद वाइफ के प्रॉपर्टी के अधिकार क्या है?

भारत में डाइवोर्स के बाद वाइफ के प्रॉपर्टी के अधिकार क्या है?

डाइवोर्स का सीधा और सरल मतलब है, कपल का कानूनी तौर पर अलग होना। यह कपल के इमोशनल स्ट्रेस की वजह तो है ही। साथ ही, डाइवोर्स के चलते कई कानूनी मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा करने की जरूरत होती है। इनमे से एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, डाइवोर्स के बाद “प्रॉपर्टी का बँटवारा”। आईये जानते है किस प्रकार की संपत्ति का कैसे कोर्ट द्वारा बंटवारा किया जाता है।

इम-मूवेबल प्रॉपर्टी/अचल संपत्ति:- 

ऐसी प्रॉपर्टी जिसे एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, उसे इम-मूवेबल प्रॉपर्टी या अचल संपत्ति कहते है। आईये देखते है डाइवोर्स के बाद वाइफ के इम-मूवेबल या अचल संपत्ति जैसे- ज़मीन और मकान के क्या अधिकार है।

(1) जब प्रॉपर्टी हस्बैंड के नाम हो:-

अगर कोई संपत्ति हस्बैंड के नाम पर रजिस्टर्ड है। तो उसे संपत्ति पर वाइफ का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कानून की नज़र में संपत्ति का मालिक वही है, जिसके नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड है।

दूसरी तरफ, अगर किसी संपत्ति को खरीदने में हस्बैंड और वाइफ दोनों ने मिलकर भुगतान किया है, लेकिन वह संपत्ति केवल हस्बैंड के नाम पर रजिस्टर्ड है। तब भी वाइफ उस संपत्ति में अपने हिस्से का दावा नहीं कर सकती। बैंक स्टेटमेंट या अन्य वैलिड प्रूफ से अपना योगदान साबित करने पर भी वाइफ को यह हक़ नहीं मिल सकता।

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(2) जॉइंट प्रॉपर्टी के केस में:- 

आजकल, जॉइंट प्रॉपर्टी खरीदना आम बात होती जा रही है। जॉइंट प्रॉपर्टी का मतलब हस्बैंड और वाइफ दोनों के नाम पर संपत्ति का रेजिस्ट्रेशन कराना। अगर प्रॉपर्टी हस्बैंड और वाइफ दोनों के नाम पर रजिस्टर्ड है। तो डाइवोर्स के बाद, वाइफ उस प्रॉपर्टी में अपना दावा कर सकती है। लेकिन, वाइफ उतनी ही संपत्ति का दावा कर सकती है, जितने अमाउंट का भुगतान उसने संपत्ति खरीदने में किया है।

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हालाँकि, अगर वाइफ ने जॉइंट प्रॉपर्टी खरीदने के लिए पूरे अमाउंट का भुगतान अकेले किया है। तो डाइवोर्स के समय वाइफ को साबित करना होगा कि उसने प्रॉपर्टी खरीदने में पूरा भुगतान खुद किया है। केवल तभी वह संपत्ति में अपना पूरा अधिकार ले सकती है। इसी तरह, अगर हस्बैंड ने जॉइंट प्रॉपर्टी के लिए पूरा भुगतान किया है। तो डाइवोर्स के बाद वाइफ उस प्रॉपर्टी पर अपने अधिकारों का दावा कर सकती है।

(3) जब कपल अलग हो गए हो, लेकिन डाइवोर्स नहीं हुआ:- 

अगर हस्बैंड दूसरी शादी कर लेता है, तब भी उसकी पहली वाइफ और बच्चों को उसकी संपत्ति में अधिकार मिलता है। हालांकि, हस्बैंड की दूसरी वाइफ से जो बच्चे हुए है, उन्हें भी संपत्ति में हिस्सा दिया जाता है।

मूवेबल प्रॉपर्टी/चल संपत्ति के केस में:-

किसी व्यक्ति का ऐसा कोई पर्सनल सामान, जिसे एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया जा सकता है, उसे मूवेबल या चल संपत्ति कहते है। आईये देखते है डाइवोर्स के बाद वाइफ के मूवेबल या चल संपत्ति जैसे – स्त्रीधन, बीमा आदि के क्या अधिकार है।

(1) स्त्रीधन:- 

स्त्रीधन का मतलब वह चीजें जो एक महिला को उसकी शादी के समय गिफ्ट्स के रूप में मिलती है। इसमें नकद रूपये, फाइनेंसियल कार्ड और ज्वेलरी जैसे गिफ्ट्स होते हैं। डाइवोर्स के बाद भी महिला का अपने स्त्रीधन पर पूरा अधिकार होता है। हालाँकि, अगर हस्बैंड ने इन गिफ्ट्स के लिए भुगतान किया है, तो हस्बैंड भी डाइवोर्स के बाद उन वस्तुओं पर अपना दावा पेश कर सकता है।

(2) इन्वेस्टमेंट/इंश्योरेन्स(बीमा):-

हस्बैंड द्वारा की गयी किसी भी पर्सनल इन्वेस्टमेंट में वाइफ का कोई अधिकार नहीं होगा। वाइफ ऐसे किसी इंश्योरेन्स पर भी दावा नहीं कर पाएगी, जिसके लिए हस्बैंड के नाम से भुगतान किया गया है।

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हालाँकि, अगर कपल का कानूनी रूप से डाइवोर्स नहीं हुआ, वह केवल एक दूसरे से अलग रह रहे है। तो इस सिचुएशन में हस्बैंड की मृत्यु के बाद, वाइफ अपने हस्बैंड की फाइनेंसियल प्रॉपर्टी पर अपने हक़ का दावा कर सकती है।

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