भारत में कानूनी रूप से गिफ्ट डीड कैसे रजिस्टर करें एक पूरी गाइड

A Complete Guide to Legally Registering a Gift Deed in India

भारत में परिवार के सदस्यों के बीच प्रॉपर्टी का ट्रांसफर करना एक आम बात है। कई बार माता-पिता अपनी प्रॉपर्टी अपने बच्चों को अपने जीवनकाल में ही देना चाहते हैं। पति-पत्नी भी एक-दूसरे को प्रॉपर्टी गिफ्ट कर सकते हैं, और लोग प्यार और स्नेह के कारण अपने रिश्तेदारों को भी प्रॉपर्टी उपहार में दे देते हैं। ऐसे मामलों में गिफ्ट डीड प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का एक कानूनी और सुरक्षित तरीका है।

हालांकि, बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि केवल लिखित घोषणा या मौखिक वादा करके भी प्रॉपर्टी किसी को दी जा सकती है। लेकिन वास्तव में, भारत में ईमूवेबल प्रॉपर्टी को गिफ्ट करने के लिए कानून द्वारा तय की गई कुछ जरूरी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है। इन शर्तों को पूरा किए बिना गिफ्ट कानूनी रूप से वैध नहीं माना जाता।

सही तरीके से तैयार और रजिस्टर की गई गिफ्ट डीड न केवल गिफ्ट देने वाले और गिफ्ट पाने वाले, दोनों के हितों की सुरक्षा करती है, बल्कि भविष्य में परिवार के सदस्यों के बीच होने वाले विवादों की संभावना भी कम करती है। इसलिए, गिफ्ट डीड के माध्यम से प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने से पहले उसकी कानूनी प्रक्रिया को समझना बहुत जरूरी है।

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गिफ्ट डीड क्या होती है?

गिफ्ट डीड एक कानूनी दस्तावेज होती है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति को बिना किसी पैसे या बदले में कोई लाभ लिए स्वेच्छा से उपहार (Gift) के रूप में दे देता है।

जो व्यक्ति प्रॉपर्टी देता है, उसे डोनर (Donor) कहा जाता है, जबकि जो व्यक्ति प्रॉपर्टी प्राप्त करता है, उसे डोनी (Donee) कहा जाता है। गिफ्ट डीड को कानूनी रूप से वैध होने के लिए निम्नलिखित शर्तों का पूरा होना जरूरी है—

  • प्रॉपर्टी देने का फैसला व्यक्ति की अपनी इच्छा से किया गया हो।
  • उस पर किसी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती न हो।
  • प्रॉपर्टी के बदले कोई पैसा या अन्य लाभ न लिया गया हो।
  • जिस व्यक्ति को प्रॉपर्टी दी जा रही है, वह उसे स्वीकार करे।

गिफ्ट डीड से जुड़े कानूनी प्रावधान

भारत में गिफ्ट डीड से संबंधित नियम मुख्य रूप से ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 और रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत निर्धारित किए गए हैं। ये कानून बताते हैं कि ईमूवेबल प्रॉपर्टी को गिफ्ट के रूप में कानूनी तरीके से ट्रांसफर करने के लिए किन शर्तों और प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है।

ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 122 गिफ्ट की परिभाषा और उसकी आवश्यक शर्तों को स्पष्ट करती है, जबकि धारा 123 के अनुसार ईमूवेबल प्रॉपर्टी की गिफ्ट को वैध बनाने के लिए गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन आवश्यक होता है।

इसके अलावा, रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत गिफ्ट डीड का विधिवत रजिस्ट्रेशन कराया जाना जरूरी है, ताकि प्रॉपर्टी का ट्रांसफर कानूनी रूप से मान्य हो सके।

कौन-कौन सी प्रॉपर्टी गिफ्ट की जा सकती है?

किसी व्यक्ति के पास यदि किसी प्रॉपर्टी का वैध मालिकाना हक है, तो वह उसे गिफ्ट डीड के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को उपहार के रूप में दे सकता है। गिफ्ट की जाने वाली प्रॉपर्टी में शामिल हैं—

  • एग्रीकल्चरल लैंड
  • फ्लैट
  • प्लॉट
  • कमर्शियल प्रॉपर्टी
  • विरासत में प्राप्त प्रॉपर्टी
  • स्वयं खरीदी या अर्जित की गई प्रॉपर्टी
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क्या गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन जरूरी है?

ईमूवेबल प्रॉपर्टी की गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन कराना बहुत जरूरी होता है। रजिस्ट्रेशन से गिफ्ट डीड को कानूनी मान्यता मिलती है और यह प्रॉपर्टी ट्रांसफर का आधिकारिक रिकॉर्ड बन जाता है। गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन कराने से कई फायदे होते हैं, जैसे—

  • प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को साबित करने में मदद मिलती है।
  • भविष्य में होने वाले विवादों की संभावना कम हो जाती है।
  • लेन-देन का सरकारी रिकॉर्ड तैयार हो जाता है।
  • म्यूटेशन की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
  • गिफ्ट पाने वाले व्यक्ति (Donee) के मालिकाना हक को कानूनी मजबूती मिलती है।

गिफ्ट डीड रजिस्ट्रेशन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

स्टेप 1: गिफ्ट डीड का ड्राफ्ट तैयार करें

गिफ्ट डीड को सही और पूरी जानकारी के साथ तैयार करना बहुत जरूरी होता है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो। गिफ्ट डीड में निम्नलिखित जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी जानी चाहिए—

  • गिफ्ट देने वाले व्यक्ति (Donor) का नाम और अन्य विवरण।
  • गिफ्ट प्राप्त करने वाले व्यक्ति (Donee) का नाम और अन्य विवरण।
  • गिफ्ट की जा रही प्रॉपर्टी का पूरा विवरण।
  • दोनों पक्षों के बीच का संबंध।
  • यह घोषणा कि प्रॉपर्टी अपनी इच्छा से गिफ्ट की जा रही है।
  • प्रॉपर्टी के बदले कोई पैसा या अन्य लाभ नहीं लिया जा रहा है।
  • गिफ्ट प्राप्त करने वाले व्यक्ति द्वारा गिफ्ट स्वीकार करने का उल्लेख।

स्टेप 2: जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करें

गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन कराने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना बहुत महत्वपूर्ण है। दस्तावेज पूरे और सही होने से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाती है। आमतौर पर निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है—

  • गिफ्ट देने वाले (Donor) और गिफ्ट प्राप्त करने वाले (Donee) के पहचान प्रमाण।
  • दोनों पक्षों के पते का प्रमाण।
  • पैन कार्ड  
  • पासपोर्ट साइज फोटो।
  • प्रॉपर्टी के टाइटल दस्तावेज (मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज)।
  • एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट, यदि आवश्यक हो।
  • प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें।
  • आधार कार्ड।
  • स्थानीय नियमों के अनुसार मांगे जाने वाले अन्य जरूरी दस्तावेज।

सलाह दी जाती है कि रजिस्ट्रेशन से पहले सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच कर लें, ताकि बाद में किसी तरह की देरी या परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्टेप 3: स्टाम्प ड्यूटी की जानकारी प्राप्त करें

गिफ्ट डीड पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी की राशि हर राज्य में अलग-अलग होती है। कई राज्यों में प्रॉपर्टी गिफ्ट माता-पिता, बच्चों, पति-पत्नी या अन्य करीबी परिवार के सदस्यों के बीच की जाती है, तो स्टाम्प ड्यूटी में छूट या रियायती दरों का लाभ भी दिया जाता है। इसलिए, गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन कराने से पहले अपने राज्य में लागू स्टाम्प ड्यूटी की दरों की सही जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।

स्टेप 4: स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान करें

  • गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन कराने से पहले संबंधित राज्य के नियमों के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान करना होता है।
  • सभी निर्धारित शुल्क समय पर जमा करें।
  • भुगतान की रसीद और अन्य प्रमाण सुरक्षित रखें, क्योंकि भविष्य में उनकी आवश्यकता पड़ सकती है।
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स्टेप 5: सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाएं

  • गिफ्ट डीड के रजिस्ट्रेशन के लिए आमतौर पर गिफ्ट देने वाले (Donor) और गिफ्ट प्राप्त करने वाले (Donee) को संबंधित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में स्वयं उपस्थित होना पड़ता है।
  • उनके साथ गवाहों की उपस्थिति भी आवश्यक हो सकती है।
  • कौन-सा सब-रजिस्ट्रार ऑफिस होगा, यह प्रॉपर्टी की लोकेशन पर निर्भर करता है।
  • सभी पक्षों की उपस्थिति और जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर ही गिफ्ट डीड की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

स्टेप 6: गिफ्ट डीड पर साइन करें

  • इस स्टेप में गिफ्ट डीड को अंतिम रूप दिया जाता है।
  • गिफ्ट देने वाला व्यक्ति गिफ्ट डीड पर साइन करता है।
  • गिफ्ट प्राप्त करने वाला व्यक्ति गिफ्ट स्वीकार करने की सहमति के रूप में साइन करता है।
  • गवाह भी दस्तावेज पर साइन करके इसकी पुष्टि करते हैं।
  • इस प्रक्रिया से यह साबित होता है कि गिफ्ट दोनों पक्षों की इच्छा और सहमति से की गई है।

स्टेप 7: रजिस्ट्रार द्वारा वेरिफिकेशन

  • सब-रजिस्ट्रार गिफ्ट डीड और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच करता है।
  • दोनों पक्षों की पहचान की पुष्टि की जाती है।
  • सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है।
  • यह देखा जाता है कि गिफ्ट डीड पर सही तरीके से साइन किए गए हैं या नहीं।
  • स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के भुगतान की पुष्टि की जाती है।
  • यदि सभी जानकारी और दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो गिफ्ट डीड की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

स्टेप 8: गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन

  • जब सब-रजिस्ट्रार सभी दस्तावेजों और कानूनी औपचारिकताओं से संतुष्ट हो जाता है, तो गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता है।
  • रजिस्ट्रेशन के बाद प्रॉपर्टी का ट्रांसफर कानूनी रूप से प्रभावी हो जाता है।
  • गिफ्ट प्राप्त करने वाला व्यक्ति (Donee) प्रॉपर्टी का वैध मालिक माना जाता है।

स्टेप 9: रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड प्राप्त करें

  • रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गिफ्ट डीड की रजिस्टर्ड कॉपी प्राप्त कर लें।
  • इस दस्तावेज को सुरक्षित स्थान पर संभालकर रखें।
  • भविष्य में म्यूटेशन, टैक्स या किसी कानूनी जरूरत के समय इसकी आवश्यकता पड़ सकती है।

स्टेप 10: प्रॉपर्टी का म्यूटेशन कराएं

  • गिफ्ट डीड के रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित नगर निगम या राजस्व विभाग में म्यूटेशन के लिए आवेदन करें।
  • म्यूटेशन के माध्यम से सरकारी रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है।
  • इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड गिफ्ट प्राप्त करने वाले व्यक्ति (Donee) के नाम पर अपडेट हो जाए।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

रेनिकुंटला राजम्मा बनाम के. सरवनम्मा (2014)

इस मामले में एक महिला ने अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड बनाई, लेकिन अपने जीवनकाल तक प्रॉपर्टी के कुछ उपयोग के अधिकार अपने पास सुरक्षित रखे। बाद में गिफ्ट डीड की वैधता को चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने कहा 

यदि गिफ्ट डीड कानून के अनुसार सही तरीके से बनाई और रजिस्टर की गई है, तो केवल इस वजह से वह अमान्य नहीं होगी कि दाता (Donor) ने अपने जीवनकाल के लिए कुछ सीमित अधिकार अपने पास रखे हों। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि—

  • गिफ्ट प्राप्त करने वाले व्यक्ति (Donee) द्वारा गिफ्ट स्वीकार करना जरूरी है।
  • गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
  • दाता द्वारा अपने जीवनकाल तक कुछ सीमित अधिकार अपने पास रखने से गिफ्ट डीड अपने आप अमान्य नहीं हो जाती।
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गिफ्ट डीड बनाने से पहले ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें

गिफ्ट डीड बनाने से पहले थोड़ी सावधानी बरतने से भविष्य की कानूनी परेशानियों और पारिवारिक विवादों से बचा जा सकता है। इसलिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें—

  • प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच कर लें।
  • अपने राज्य में लागू स्टाम्प ड्यूटी की दरों की सही जानकारी प्राप्त करें।
  • गिफ्ट डीड में प्रॉपर्टी का पूरा और सही विवरण लिखवाएं।
  • सभी जरूरी दस्तावेजों और रसीदों की कॉपी सुरक्षित रखें।
  • यदि मामला पारिवारिक रूप से जटिल हो, तो किसी अनुभवी वकील से कानूनी सलाह जरूर लें।
  • गिफ्ट डीड के रजिस्ट्रेशन के बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया भी समय पर पूरी कराएं।

निष्कर्ष

गिफ्ट डीड केवल भावनात्मक निर्णय नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। सही दस्तावेज, वैध स्वामित्व की जांच, स्टाम्प ड्यूटी का पालन, समय पर रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन आपको भविष्य के विवादों और आर्थिक नुकसान से बचा सकते हैं। यदि आप अपनी प्रॉपर्टी किसी प्रियजन को उपहार स्वरूप देना चाहते हैं, तो जल्दबाजी करने के बजाय पूरी कानूनी प्रक्रिया को समझकर आगे बढ़ें। उचित कानूनी सलाह और सही दस्तावेजी प्रक्रिया अपनाकर आप अपने परिवार की सुरक्षा और प्रॉपर्टी के शांतिपूर्ण हस्तांतरण को सुनिश्चित कर सकते हैं।

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FAQs

1. क्या भारत में गिफ्ट डीड का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है?

हाँ। अचल प्रॉपर्टी की गिफ्ट डीड को कानूनी रूप से वैध बनाने के लिए उसका रजिस्ट्रेशन कराना आमतौर पर जरूरी होता है।

2. क्या रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड को बाद में रद्द किया जा सकता है?

आमतौर पर रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड को रद्द नहीं किया जा सकता। हालांकि, धोखाधड़ी, जबरदस्ती या अनुचित दबाव जैसे सीमित कानूनी आधारों पर इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

3. क्या माता-पिता गिफ्ट डीड के माध्यम से अपने बच्चों को प्रॉपर्टी दे सकते हैं?

माता-पिता वैध गिफ्ट डीड बनाकर और उसका रजिस्ट्रेशन कराकर अपनी प्रॉपर्टी अपने बच्चों को कानूनी रूप से गिफ्ट कर सकते हैं।

4. क्या गिफ्ट डीड पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देनी पड़ती है?

गिफ्ट डीड पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है। हालांकि, कई राज्यों में करीबी रिश्तेदारों के बीच गिफ्ट करने पर शुल्क में छूट भी दी जाती है।

5. क्या गिफ्ट डीड के लिए गिफ्ट प्राप्त करने वाले व्यक्ति की स्वीकृति जरूरी होती है?

गिफ्ट डीड को वैध माना जाने के लिए गिफ्ट प्राप्त करने वाले व्यक्ति (Donee) द्वारा गिफ्ट को दाता (Donor) के जीवनकाल में स्वीकार करना जरूरी होता है।

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