भारत में करोड़ों लोग प्रतिदिन व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं। परिवार, मित्र, व्यवसाय और ग्राहकों से संपर्क रखने के लिए यह सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म बन चुका है।
लेकिन इसी लोकप्रियता का फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं। आज व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए लोगों को ब्लैकमेल करना, पैसे ऐंठना और उनकी डिजिटल पहचान का दुरुपयोग करना एक आम साइबर अपराध बन गया है।
कई लोग शर्म या डर की वजह से शिकायत नहीं करते, जिसके कारण अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि आप इस प्रकार के फ्रॉड का शिकार हुए हैं तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करें।
व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम क्या है?
व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम वह साइबर अपराध है जिसमें अपराधी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को धोखे में लेकर उसकी निजी जानकारी, फोटो, वीडियो या धन प्राप्त करने का प्रयास करता है।
यह स्कैम कई रूपों में सामने आता है—
- सेक्सटॉर्शन
- रोमांस स्कैम
- फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर धमकी
- फर्जी साइबर सेल अधिकारी
- बैंकिंग फ्रॉड
- स्क्रीन रिकॉर्डिंग ब्लैकमेल
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम
व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम के सबसे आम प्रकार
1. सेक्सटॉर्शन वीडियो कॉल स्कैम
यह भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले व्हाट्सएप स्कैम में से एक है।
यह फ्रॉड कैसे किया जाता है?
पीड़ित व्यक्ति को किसी अनजान नंबर से वीडियो कॉल आती है। अक्सर प्रोफाइल फोटो आकर्षक दिखाई जाती है ताकि व्यक्ति कॉल उठा ले। कॉल रिसीव करते ही:
- फ्रौड़स्टर अश्लील वीडियो या तस्वीरें दिखाता है।
- पूरी वीडियो कॉल गुप्त रूप से रिकॉर्ड कर ली जाती है।
- बाद में स्क्रीनशॉट या एडिटेड वीडियो तैयार किए जाते हैं।
इसके बाद पीड़ित को धमकी दी जाती है कि पैसे नहीं दिए तो वीडियो परिवार, दोस्तों या सोशल मीडिया पर भेज दिया जाएगा।
सच्चाई क्या है?
- अधिकांश मामलों में वीडियो एडिट की हुई होती है।
- रिकॉर्डिंग के साथ छेड़छाड़ की जाती है।
- फ्रौड़स्टर पीड़ित को व्यक्तिगत रूप से जानता भी नहीं होता।
- यह पूरा फ्रॉड डर और शर्मिंदगी का फायदा उठाकर किया जाता है।
2. फेक पुलिस या डिजिटल अरेस्ट वीडियो कॉल स्कैम
इस स्कैम में फ्रौड़स्टर खुद को पुलिस, CBI, ED या साइबर क्राइम अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं।
यह फ्रॉड कैसे किया जाता है?
पीड़ित को वीडियो कॉल की जाती है, जिसमें नकली पुलिस स्टेशन या वर्दी पहने हुए लोग दिखाई देते हैं।
फिर झूठे आरोप लगाए जाते हैं, जैसे:
- आपके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हुआ है।
- आपके नाम से अवैध सामान बरामद हुआ है।
- आपका आधार कार्ड या मोबाइल नंबर किसी अपराध से जुड़ा हुआ है।
- इसके बाद गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे मांगे जाते हैं।
महत्वपूर्ण बात भारत में कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पैसे मांगकर जांच या गिरफ्तारी की प्रक्रिया नहीं करती।
3. रिश्तेदार या दोस्त बनकर पैसे मांगने वाला स्कैम
इस स्कैम में फ्रौड़स्टर किसी रिश्तेदार या दोस्त की पहचान का इस्तेमाल करते हैं। वे चोरी की गई फोटो या AI से तैयार की गई आवाज का उपयोग करके कहते हैं:
- मेरा एक्सीडेंट हो गया है।
- मैं किसी परेशानी में फंस गया हूं।
- मुझे तुरंत पैसों की जरूरत है।
- वीडियो कॉल देखकर कई लोग भरोसा कर लेते हैं और पैसे भेज देते हैं।
4. फेक जॉब इंटरव्यू स्कैम
इस स्कैम में लोगों को अच्छी नौकरी का लालच देकर वीडियो इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। यह फ्रॉड कैसे किया जाता है? इंटरव्यू के नाम पर फ्रौड़स्टर लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, अन्य निजी दस्तावेज मांगते हैं। कई मामलों में बाद में रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस या ट्रेनिंग शुल्क के नाम पर पैसे भी मांगे जाते हैं।
5. फेक कस्टमर केयर वीडियो कॉल स्कैम
इस स्कैम में फ्रौड़स्टर खुद को बैंक, टेलीकॉम कंपनी या ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी का अधिकारी बताते हैं।
यह फ्रॉड कैसे किया जाता है?
वे व्यक्ति को स्क्रीन शेयर करने, कोई एप्लिकेशन डाउनलोड करने, बैंकिंग जानकारी बताने, OTP साझा करने के लिए कहते हैं। जैसे ही व्यक्ति यह जानकारी देता है, उसके बैंक खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं।
याद रखें, किसी भी अनजान वीडियो कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच अवश्य करें। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।
ये स्कैम सफल क्यों हो जाते हैं?
अधिकांश साइबर फ्रॉड तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर सफल होते हैं। फ्रौड़स्टर जानते हैं कि घबराहट या डर की स्थिति में लोग अक्सर बिना सोचे-समझे निर्णय ले लेते हैं।
वे आमतौर पर लोगों को फंसाने के लिए डर, घबराहट, शर्मिंदगी, जल्दबाजी, किसी अधिकारी या भरोसेमंद व्यक्ति पर विश्वास का सहारा लेते हैं।
जब कोई व्यक्ति अचानक डर या दबाव में आ जाता है, तो वह कई बार बिना जांच-पड़ताल किए पैसे भेज देता है या अपनी निजी जानकारी साझा कर देता है। यही कारण है कि किसी भी कॉल, मैसेज या वीडियो कॉल पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले उसकी सच्चाई की पुष्टि करना बहुत जरूरी है।
व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम की पहचान कैसे करें?
यदि आपको निम्न में से कोई संकेत दिखाई दे, तो तुरंत सावधान हो जाएं:
- किसी अनजान या विदेशी नंबर से वीडियो कॉल आना।
- हाल ही में बने हुए व्हाट्सएप प्रोफाइल से कॉल आना।
- कॉल उठाते ही अश्लील वीडियो या आपत्तिजनक हरकतें दिखाना।
- किसी को जानकारी न देने या बात को गुप्त रखने के लिए कहना।
- गिरफ्तारी, पुलिस कार्रवाई या कानूनी परेशानी की धमकी देना।
- तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाना।
- बिना समय दिए जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर करना।
- OTP, बैंक खाते की जानकारी, ATM विवरण या UPI PIN मांगना।
- पैसे नहीं देने पर कानूनी कार्रवाई, बदनामी या वीडियो वायरल करने की धमकी देना।
याद रखें, कोई भी वास्तविक बैंक, सरकारी विभाग या कानून प्रवर्तन एजेंसी व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पैसे, OTP या बैंकिंग जानकारी नहीं मांगती। ऐसे किसी भी कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच अवश्य करें।
यदि आपको कोई संदिग्ध वीडियो कॉल आए तो क्या करें?
- घबराएं नहीं फ्रौड़स्टर का मुख्य उद्देश्य आपको डराना और घबराहट में गलत फैसला लेने के लिए मजबूर करना होता है। शांत रहें। बिना सोचे-समझे कोई कदम न उठाएं।
- तुरंत कॉल काट दें यदि कॉल संदिग्ध लगे, तो उसे तुरंत समाप्त कर दें। अनजान व्यक्ति से बातचीत जारी न रखें। वीडियो कॉल पर किसी भी प्रकार की जानकारी साझा न करें।
- नंबर को ब्लॉक करें कॉल करने वाले नंबर को तुरंत व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दें। इससे वह व्यक्ति दोबारा आपसे संपर्क नहीं कर पाएगा।
- अकाउंट की रिपोर्ट करें व्हाट्सएप के रिपोर्ट फीचर का उपयोग करके उस अकाउंट की शिकायत करें। इससे ऐसे फर्जी अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
- किसी भी स्थिति में पैसे न भेजें डर, धमकी या दबाव में आकर कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें। अधिकांश मामलों में जब फ्रौड़स्टर को पता चलता है कि व्यक्ति डर नहीं रहा है, तो वे खुद ही संपर्क करना बंद कर देते हैं।
याद रखें, घबराने के बजाय शांत रहकर सही कदम उठाना ही ऐसे व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
यदि आप व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम का शिकार हो चुके हैं, तो क्या करें?
स्टेप 1: सभी सबूत सुरक्षित रखें
सबसे पहले फ्रॉड से जुड़े सभी सबूत सुरक्षित कर लें, जैसे:
- व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट,
- कॉल करने वाले का मोबाइल नंबर,
- पैसे मांगने वाले संदेश,
- धमकी भरे मैसेज,
- प्रोफाइल फोटो और प्रोफाइल विवरण।
- याद रखें, जांच और कानूनी कार्रवाई में ये सबूत बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
स्टेप 2: तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें
यदि आपके साथ फ्रॉड हुआ है, तो बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी जल्दी कार्रवाई होने और नुकसान कम करने की संभावना बढ़ेगी।
स्टेप 3: नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। शिकायत करते समय निम्न जानकारी उपलब्ध रखें स्क्रीनशॉट, मोबाइल नंबर और अन्य संपर्क विवरण, बैंक या UPI ट्रांजैक्शन की जानकारी, घटना का पूरा विवरण।
स्टेप 4: FIR दर्ज कराएं
यदि मामले में ब्लैकमेल, जबरन पैसे मांगना, फर्जी पहचान का उपयोग करना या आर्थिक नुकसान शामिल है, तो आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करा सकते हैं। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस कानूनी जांच और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर सकती है।
याद रखें, ऐसे मामलों में चुप रहने या डरने के बजाय तुरंत शिकायत करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। जितनी जल्दी कार्रवाई की जाएगी, उतनी ही बेहतर मदद मिलने की संभावना होगी।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय
व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम या अन्य ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में घटना की परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराएं लागू हो सकती हैं।
1. धारा 318 – धोखाधड़ी (Cheating)
यदि फ्रौड़स्टर झूठी जानकारी, फर्जी पहचान या धोखे का उपयोग करके किसी व्यक्ति से पैसे प्राप्त करता है, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318 लागू हो सकती है।
2. धारा 319 – किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करके धोखाधड़ी (Cheating by Personation)
यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी, सरकारी अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करके फ्रॉड करता है, तो धारा 319 लागू हो सकती है।
3. धारा 351 – आपराधिक डराना-धमकाना (Criminal Intimidation)
यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी, कानूनी कार्रवाई, बदनामी या वीडियो वायरल करने की धमकी दी जाती है, तो यह धारा 351 के तहत अपराध हो सकता है।
4. धारा 308 – जबरन वसूली (Extortion)
यदि किसी व्यक्ति को डराकर, धमकाकर या ब्लैकमेल करके पैसे मांगे जाते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 308 लागू हो सकती है।
5. धारा 356 – मानहानि (Defamation)
यदि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए उसकी फर्जी, झूठी या एडिट की गई फोटो, वीडियो या अन्य कंटेंट प्रसारित की जाती है, तो धारा 356 के तहत कानूनी उपाय उपलब्ध हो सकते हैं।
याद रखें, व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम, ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में पीड़ित व्यक्ति कानून की मदद ले सकता है और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग कर सकता है।
इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय
व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और अन्य साइबर फ्रॉड के मामलों में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (IT), 2000 की विभिन्न धाराएं भी लागू हो सकती हैं।
1. धारा 66C – पहचान की चोरी (Identity Theft)
यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की फोटो, पहचान, दस्तावेज या अन्य व्यक्तिगत जानकारी का गलत उपयोग करके फ्रॉड करता है, तो IT एक्ट, 2000 की धारा 66C लागू हो सकती है।
2. धारा 66D – कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करके किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण कर धोखाधड़ी
यह साइबर फ्रॉड के मामलों में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली धाराओं में से एक है। यदि फ्रौड़स्टर इंटरनेट, मोबाइल, सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी का रूप धारण कर धोखाधड़ी करता है, तो धारा 66D लागू हो सकती है।
3. धारा 67
यदि कोई व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील कंटेंट भेजता, साझा करता या प्रसारित करता है, तो IT एक्ट, 2000 की धारा 67 लागू हो सकती है।
4. धारा 67A
यदि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से यौन रूप से स्पष्ट (Sexually Explicit) कंटेंट प्रसारित की जाती है, तो धारा 67A लागू हो सकती है। इस धारा के तहत अधिक कठोर दंड का प्रावधान है।
याद रखें, व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम, सेक्सटॉर्शन, फर्जी पहचान का उपयोग, अश्लील कंटेंट भेजना और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में IT एक्ट, 2000 पीड़ितों को महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 की भूमिका
आज कई साइबर फ्रॉड ऐसे होते हैं जिनमें फ्रौड़स्टर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी का गलत उपयोग करते हैं। यह जानकारी उन्हें विभिन्न तरीकों से मिल सकती है, जैसे:
- डेटा लीक,
- फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन,
- मोबाइल कॉन्टैक्ट्स और अन्य जानकारी की चोरी,
- बिना अनुमति एकत्र किए गए डेटाबेस।
इसी प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 बनाया गया है। इस कानून का उद्देश्य लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखना और उसके गलत उपयोग को रोकना है।
यदि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी उसकी अनुमति के बिना एकत्र की जाती है, साझा की जाती है या गलत तरीके से उपयोग की जाती है, तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
डिजिटल युग में अपनी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपने बैंक खाते और पैसों की सुरक्षा करना।
क्या पुलिस फ्रौड़स्टर का पता लगा सकती है?
हाँ, कई मामलों में पुलिस और साइबर जांच एजेंसियां फ्रौड़स्टर तक पहुंचने में सफल होती हैं। जांच के दौरान अधिकारी विभिन्न डिजिटल और तकनीकी साधनों का उपयोग कर सकते हैं, जैसे:
- मोबाइल नंबर की जांच,
- IP एड्रेस की ट्रैकिंग,
- बैंक और UPI ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड,
- डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्य,
- कॉल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का विश्लेषण।
हालांकि, ऐसे मामलों में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज की जाती है, उतनी ही अधिक संभावना होती है कि जांच एजेंसियां सबूत सुरक्षित कर सकें, पैसे के लेन-देन को ट्रैक कर सकें और फ्रौड़स्टर की पहचान कर सकें।
इसीलिए यदि आप किसी साइबर फ्रॉड या व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम का शिकार होते हैं, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए। त्वरित कार्रवाई से अपराधी तक पहुंचने और नुकसान कम करने की संभावना बढ़ जाती है।
सुरक्षित रहने के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां
व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम और अन्य साइबर फ्रॉड से बचने के लिए निम्न सावधानियां अपनाएं:
- किसी अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल का जवाब देने से बचें।
- अपनी व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक रूप से साझा न करें।
- अपने सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्रिय करें।
- सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स को सुरक्षित रखें।
- किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN या पासवर्ड साझा न करें।
- किसी भी कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
- परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर फ्रॉड के बारे में जागरूक करें।
- किसी भी संदिग्ध व्हाट्सएप अकाउंट या नंबर की तुरंत रिपोर्ट करें।
साइबर जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा क्यों है?
साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदलते रहते हैं। आज के समय में फ्रॉड केवल मैसेज या फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें नई तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है, जैसे:
- वीडियो कॉल,
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI),
- वॉइस क्लोनिंग,
- डीपफेक तकनीक।
ऐसी स्थिति में सबसे प्रभावी सुरक्षा जागरूकता और सतर्कता है। जो व्यक्ति साइबर फ्रॉड के तरीकों को समझता है, उसके साथ धोखाधड़ी होने की संभावना काफी कम हो जाती है।
निष्कर्ष
व्हाट्सएप वीडियो कॉल केवल कुछ सेकंड की हो सकती है, लेकिन एक छोटी सी गलती के परिणाम लंबे समय तक परेशान कर सकते हैं। फ्रौड़स्टर जानते हैं कि लोग डर और घबराहट में अक्सर बिना सोचे-समझे निर्णय ले लेते हैं। इसलिए वे अपने फ्रॉड की योजना भी इसी आधार पर बनाते हैं।
इन स्कैम की असली ताकत तकनीक नहीं, बल्कि लोगों को डराकर और जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर करना है। यदि आप चेतावनी संकेतों को पहचानते हैं, दबाव में आकर कोई कदम नहीं उठाते और कानून द्वारा उपलब्ध सुरक्षा उपायों का उपयोग करते हैं, तो आप खुद को ऐसे साइबर अपराधों से बचा सकते हैं।
डिजिटल दुनिया में किसी भी जानकारी की पुष्टि करने में लगाए गए कुछ मिनट आपको बड़े आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और भविष्य की परेशानियों से बचा सकते हैं।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
Q.1. व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम क्या है?
व्हाट्सएप वीडियो कॉल स्कैम एक साइबर फ्रॉड है, जिसमें फ्रौड़स्टर वीडियो कॉल का उपयोग करके लोगों को ब्लैकमेल करते हैं, फर्जी पहचान अपनाते हैं, पैसे ऐंठते हैं या उनकी निजी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।
Q.2. यदि व्हाट्सएप वीडियो कॉल के बाद कोई मुझे धमकी दे तो मुझे क्या करना चाहिए?
घबराएं नहीं और पैसे न भेजें। सभी सबूत सुरक्षित रखें, साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और आवश्यकता होने पर पुलिस में शिकायत करें।
Q.3. क्या व्हाट्सएप सेक्सटॉर्शन भारत में अपराध है?
हाँ। घटना की परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 308 (जबरन वसूली), धारा 351 (आपराधिक डराना-धमकाना) तथा IT एक्ट, 2000 की धारा 67 और 67A सहित अन्य प्रावधान लागू हो सकते हैं।
Q.4. क्या पुलिस व्हाट्सएप स्कैमर का पता लगा सकती है?
हाँ, कई मामलों में पुलिस मोबाइल नंबर, डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड, UPI ट्रांजैक्शन और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर फ्रौड़स्टर की पहचान कर सकती है। समय पर शिकायत करना बहुत महत्वपूर्ण है।



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