ससुराल वाले दहेज के लिए मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न कर रहे हैं? तुरंत क्या करें

Are your in-laws mentally or physically harassing you for dowry What to do immediately

आज भी भारत में दहेज उत्पीड़न केवल एक सामाजिक समस्या नहीं बल्कि महिलाओं की जान और सम्मान से जुड़ा गंभीर कानूनी मुद्दा बन चुका है। हाल ही में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और लखनऊ जैसे शहरों से ऐसी कई दर्दनाक खबरें सामने आईं, जहां नवविवाहित महिलाओं ने कथित दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। कई मामलों में परिवारों ने पति और ससुराल वालों पर लगातार दहेज मांगने, मानसिक दबाव बनाने और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।

हाल ही में चर्चित ट्विशा शर्मा केस ने पूरे देश को झकझोर दिया। नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद परिवार ने दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के गंभीर आरोप लगाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया और दूसरी पोस्टमार्टम जांच के आदेश भी दिए। इस केस ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया कि दहेज और मानसिक उत्पीड़न आज भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा है।

ऐसे मामलों से यह साफ होता है कि दहेज उत्पीड़न केवल घरेलू विवाद नहीं है, बल्कि यह भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध है। भारतीय न्याय व्यवस्था महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए कई मजबूत कानूनी अधिकार प्रदान करती है, जैसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराएं, घरेलू हिंसा कानून, मेंटेनेंस का अधिकार और पुलिस सुरक्षा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ससुराल वाले दहेज के लिए मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न कर रहे हैं, तो पीड़ित महिला को तुरंत कौन-कौन से कानूनी कदम उठाने चाहिए? इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि सबूत कैसे इकट्ठा करें, FIR कैसे दर्ज कराएं, कोर्ट से प्रोटेक्शन कैसे लें और अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल कैसे करें।

क्या आप को कानूनी सलाह की जरूरत है ?

दहेज उत्पीड़न क्या होता है?

दहेज उत्पीड़न का मतलब है शादी से जुड़ी गैरकानूनी दहेज मांगों को लेकर महिला को मानसिक, शारीरिक, आर्थिक या भावनात्मक रूप से परेशान करना। जब पति, ससुराल वाले या परिवार के अन्य लोग पैसे, गाड़ी, घर, गिफ्ट, जेवर या अन्य सामान की मांग करते हैं और उसे पूरा न करने पर महिला के साथ गलत व्यवहार करते हैं, तो इसे दहेज उत्पीड़न माना जा सकता है। दहेज उत्पीड़न कई तरीकों से हो सकता है, जैसे:

  • मायके से पैसे या महंगे सामान लाने का दबाव बनाना
  • मानसिक दबाव बनाना
  • मारपीट करना
  • गाली-गलौज या अपमान करना
  • घर से निकालने की धमकी देना
  • खाना, इलाज या जरूरी सुविधाएं न देना
  • परिवार वालों पर दबाव बनाना
  • महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने जैसा व्यवहार करना

कई बार यह उत्पीड़न धीरे-धीरे शुरू होता है और समय के साथ गंभीर रूप ले लेता है। भारतीय कानून ऐसे व्यवहार को गंभीर अपराध मानता है।

भारतीय कानून में दहेज की परिभाषा मुख्य रूप से डाउरी प्रोहिबिशन एक्ट, 1961 की धारा 2 के तहत दी गई है। इस कानून के अनुसार दहेज का मतलब ऐसी कोई भी रकम, प्रॉपर्टी, कीमती सामान, गिफ्ट या आर्थिक मांग से है जो शादी के संबंध में मांगी जाए या दी जाए। दहेज में शामिल हो सकते हैं:

  • नकद पैसा
  • गाड़ी
  • फ्लैट या जमीन
  • महंगे गिफ्ट
  • सोना-चांदी और जेवर
  • बिजनेस या नौकरी से जुड़ी आर्थिक मांग
  • शादी के बाद बार-बार पैसों की मांग

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 क्या है?

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा की गई क्रूरता (Cruelty) से संबंधित है। यह प्रावधान विशेष रूप से उन महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया है जिन्हें शादी के बाद दहेज की मांग, मानसिक उत्पीड़न, मारपीट या अन्य प्रकार की प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

इस धारा के तहत यदि पति, सास-ससुर या पति के अन्य रिश्तेदार महिला को दहेज के लिए परेशान करते हैं, धमकी देते हैं, मानसिक दबाव बनाते हैं या शारीरिक हिंसा करते हैं, तो यह कानूनी अपराध माना जा सकता है।

क्या शादी के बाद दहेज मांगना भी गैरकानूनी हो सकता है?

केवल शादी के समय की गई मांग ही दहेज नहीं मानी जाती। यदि शादी के बाद भी पति या ससुराल वाले बार-बार पैसे, गाड़ी, प्रॉपर्टी, जेवर, बिजनेस के लिए पैसा या किसी अन्य आर्थिक मदद की मांग करते हैं और उसे पूरा न करने पर महिला को परेशान करते हैं, तो यह दहेज उत्पीड़न माना जा सकता है।

ऐसी मांगों के साथ कई बार मानसिक दबाव, मारपीट, गाली-गलौज, धमकी, अपमान या घर से निकालने जैसी घटनाएं भी जुड़ी होती हैं। भारतीय कानून के अनुसार शादी के बाद लगातार की जाने वाली गैरकानूनी आर्थिक मांगें भी दहेज उत्पीड़न के दायरे में आ सकती हैं।

दहेज उत्पीड़न होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

स्टेप 1 – सबसे पहले अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें

यदि पति, ससुराल वाले या कोई अन्य व्यक्ति आपके साथ मारपीट, धमकी या गंभीर मानसिक उत्पीड़न कर रहा है, तो सबसे पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें। जरूरत पड़ने पर तुरंत किसी सुरक्षित स्थान जैसे मायके, रिश्तेदार के घर या भरोसेमंद व्यक्ति के पास चले जाएं। ऐसी स्थिति में अकेले सहने की बजाय अपनी जान और सुरक्षा को प्राथमिकता देना बहुत जरूरी होता है।

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स्टेप 2 – भरोसेमंद लोगों को तुरंत जानकारी दें

यदि दहेज को लेकर परेशानी शुरू हो गई है, तो बात को छिपाने की बजाय अपने माता-पिता, करीबी रिश्तेदार, भरोसेमंद दोस्त या वकील को इसकी जानकारी दें। कई महिलाएं सामाजिक दबाव या डर की वजह से चुप रहती हैं, लेकिन समय पर लोगों को बताना आगे चलकर कानूनी मदद और सुरक्षा दोनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

स्टेप 3 – सभी सबूत संभालकर रखें

दहेज उत्पीड़न से जुड़े हर महत्वपूर्ण सबूत को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है। जैसे व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, धमकी भरे मैसेज, बैंक ट्रांजैक्शन, मेडिकल रिपोर्ट, चोटों की फोटो या कोई भी लिखित बातचीत। ये सबूत भविष्य में पुलिस शिकायत, कोर्ट केस या कानूनी कार्रवाई के दौरान आपके पक्ष को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

स्टेप 4 – चोट लगने पर तुरंत मेडिकल जांच करवाएं

यदि आपके साथ मारपीट या शारीरिक हिंसा हुई है, तो तुरंत अस्पताल या डॉक्टर के पास जाकर मेडिकल जांच करवाएं। मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टर के रिकॉर्ड बाद में महत्वपूर्ण कानूनी सबूत बन सकते हैं। कई बार महिलाएं डर या शर्म के कारण मेडिकल जांच नहीं करवातीं, जिससे बाद में मामला साबित करना मुश्किल हो सकता है।

स्टेप 5 – पुलिस में शिकायत दर्ज करें

यदि दहेज मांग, धमकी, मानसिक उत्पीड़न या मारपीट लगातार हो रही है, तो बिना ज्यादा देरी किए पुलिस में शिकायत दर्ज करवानी चाहिए। आप महिला थाना, स्थानीय पुलिस स्टेशन या महिला हेल्पलाइन की मदद ले सकती हैं। समय पर शिकायत करना भविष्य में बड़ी परेशानी और गंभीर हिंसा से बचाने में मदद कर सकता है।

पुलिस कंप्लेंट कैसे फाइल करें?

  • पहले पूरी शिकायत तैयार करें पुलिस शिकायत लिखते समय दहेज उत्पीड़न से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें साफ-साफ लिखें। इसमें यह बताएं कि कब-कब आपको परेशान किया गया, किसने दहेज की मांग की, क्या धमकी दी गई, क्या मारपीट या मानसिक उत्पीड़न हुआ और कौन-कौन लोग इसमें शामिल थे। जितनी स्पष्ट और सही जानकारी होगी, शिकायत उतनी मजबूत मानी जाएगी।
  • जरूरी सबूत साथ में लगाएं शिकायत के साथ उपलब्ध सभी सबूत भी जमा करें। जैसे व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट, ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग, मेडिकल रिपोर्ट, बैंक रिकॉर्ड, फोटो या धमकी भरे मैसेज। यदि सभी सबूत तुरंत उपलब्ध न हों, तब भी जो रिकॉर्ड मौजूद हैं उन्हें सुरक्षित रखना और पुलिस को देना महत्वपूर्ण होता है।
  • पुलिस में FIR दर्ज करवाएं यदि मामला गंभीर दहेज उत्पीड़न, धमकी, मारपीट या क्रूरता से जुड़ा है, तो पुलिस FIR दर्ज कर सकती है। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस कानूनी जांच शुरू करती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। शिकायत दर्ज कराने में अनावश्यक देरी न करना हमेशा बेहतर माना जाता है।

क्या महिलाएं दहेज उत्पीड़न की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती हैं?

आज कई राज्यों में महिलाओं के लिए ऑनलाइन शिकायत की सुविधा उपलब्ध है। यदि महिला तुरंत पुलिस स्टेशन नहीं जा सकती, तो वह राज्य पुलिस पोर्टल, महिला हेल्पलाइन या ऑनलाइन शिकायत प्रणाली के माध्यम से शिकायत भेज सकती है। ऑनलाइन शिकायत के बाद पुलिस मामले की जांच या संपर्क शुरू कर सकती है।

क्या तुरंत पुलिस सुरक्षा मांगी जा सकती है?

यदि महिला को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हो रहा हो, मारपीट की आशंका हो या गंभीर धमकियां मिल रही हों, तो वह तुरंत पुलिस सुरक्षा की मांग कर सकती है। ऐसी स्थिति में पुलिस से तत्काल सहायता, सुरक्षा या आवश्यक कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया जा सकता है।

घरेलू हिंसा कानून के तहत महिला को कौन सी कानूनी राहत मिल सकती है?

यदि किसी महिला को पति या ससुराल वालों द्वारा घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक नियंत्रण या मारपीट का सामना करना पड़ रहा है, तो वह घरेलू हिंसा कानून के तहत कई महत्वपूर्ण कानूनी राहत मांग सकती है।

1. प्रोटेक्शन आर्डर कोर्ट आरोपी व्यक्ति को महिला को धमकाने, परेशान करने, संपर्क करने या हिंसा करने से रोकने का आदेश दे सकती है। इसका उद्देश्य महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।

2. रेजिडेंस आर्डर महिला को वैवाहिक घर से जबरदस्ती नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट महिला को घर में रहने का अधिकार देने या वैकल्पिक रहने की व्यवस्था करने का आदेश दे सकती है।

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3. मॉनेटरी रिलीफ महिला अपने खर्च, मेडिकल खर्च, नुकसान या आर्थिक सहायता के लिए कोर्ट से आर्थिक राहत मांग सकती है।

4. मेंटेनेंस यदि महिला खुद का खर्च चलाने में असमर्थ है, तो वह पति से मेंटेनेंस यानी मासिक आर्थिक सहायता की मांग कर सकती है।

5. मुआवजा मानसिक उत्पीड़न, शारीरिक हिंसा, अपमान या भावनात्मक नुकसान होने पर महिला मुआवजा मांग सकती है।

6. बच्चे की कस्टडी जरूरत पड़ने पर महिला अपने बच्चे की अस्थायी कस्टडी या बच्चे से मिलने के अधिकार के लिए भी कोर्ट से राहत मांग सकती है।

कानूनी और अन्य सहायता जरूर लें

दहेज उत्पीड़न का सामना करना किसी भी महिला के लिए मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से बहुत कठिन हो सकता है। ऐसी स्थिति में महिला को चुप रहने या अकेले सब कुछ सहने की बजाय समय पर कानूनी सलाह, काउंसलिंग और प्रोफेशनल मदद लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। सही समय पर ली गई कानूनी सहायता कई बार महिला के अधिकारों की सुरक्षा, सही सबूत सुरक्षित रखने और आगे होने वाली हिंसा या उत्पीड़न को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार

भारतीय कानून के तहत कई परिस्थितियों में महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता पाने का अधिकार दिया गया है। यदि कोई महिला दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा या मानसिक प्रताड़ना का सामना कर रही है, तो वह डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (DLSA) से संपर्क कर सकती है। DLSA के माध्यम से महिला को:

  • मुफ्त कानूनी सलाह
  • शिकायत दर्ज कराने में सहायता
  • कोर्ट में उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी
  • जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रतिनिधित्व, जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।

महिलाएं नेशनल कमीशन फॉर वूमेन से भी सहायता ले सकती हैं। वहां महिलाओं को शिकायत सहायता, कानूनी जानकारी और सुरक्षा संबंधी मदद उपलब्ध कराई जा सकती है।

समय पर कानूनी सहायता लेने से महिला को अपने अधिकार समझने, सही कदम उठाने और भविष्य की कानूनी प्रक्रिया में गलतियों से बचने में काफी मदद मिल सकती है।

यदि दहेज उत्पीड़न के कारण महिला की मृत्यु हो जाए तो क्या होता है?

जब दहेज की मांग, मानसिक उत्पीड़न, मारपीट या लगातार दबाव इतना बढ़ जाए कि महिला की मौत हो जाए, तो भारतीय कानून इसे बहुत गंभीर अपराध मानता है। ऐसे मामलों में पति और ससुराल वालों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 80 – दहेज मृत्यु (Dowry Death)

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 80 विशेष रूप से “दहेज मृत्यु” से संबंधित है। यह धारा उन मामलों में लागू हो सकती है जहाँ:

  • महिला की मृत्यु शादी के 7 साल के अंदर हुई हो,
  • मौत जलने, चोट लगने या संदिग्ध/असामान्य परिस्थितियों में हुई हो,
  • मृत्यु से पहले महिला को दहेज के लिए परेशान या प्रताड़ित किया गया हो,
  • पति या ससुराल वालों द्वारा दहेज को लेकर मानसिक, शारीरिक उत्पीड़न किया गया हो।
  • ऐसी स्थिति में कानून उस मृत्यु को “दहेज मृत्यु” मान सकता है।

धारा 80 कब लागू हो सकती है? 

  • सामान्य रूप से पुलिस और कोर्ट यह देखते हैं कि:
  • क्या महिला की मृत्यु शादी के 7 साल के भीतर हुई,
  • क्या मौत सामान्य नहीं बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई,
  • क्या महिला को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था,
  • और क्या मौत से कुछ समय पहले भी दहेज को लेकर उत्पीड़न हो रहा था।
  • यदि ये बातें साबित होती हैं, तो धारा 80 के तहत मामला दर्ज हो सकता है।

धारा 80 के तहत सजा क्या है? 

यह बहुत गंभीर अपराध माना जाता है। कानून के अनुसार कम से कम 7 साल की जेल हो सकती है, और सजा आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है।

क्या पति और ससुराल वाले दोनों के खिलाफ मामला हो सकता है? 

हाँ। यदि जांच में पति, सास, ससुर या अन्य रिश्तेदारों की भूमिका सामने आती है, तो उन सभी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।

किन प्रकार की मृत्यु में धारा 80 लागू हो सकती है? 

यह धारा ऐसे मामलों में लागू हो सकती है जहाँ महिला की मृत्यु जलने से, जहर देने से, संदिग्ध आत्महत्या से, गंभीर चोटों से, या अन्य असामान्य परिस्थितियों में हुई हो, और उसका संबंध दहेज उत्पीड़न से जुड़ा हो।

क्या दहेज उत्पीड़न के कारण आत्महत्या होने पर भी कार्रवाई हो सकती है? 

हाँ। यदि लगातार दहेज उत्पीड़न, मारपीट या मानसिक दबाव के कारण महिला आत्महत्या कर लेती है, तो पति और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।

दहेज मृत्यु मामलों में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले

कंस राज बनाम पंजाब राज्य, 2000

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज मृत्यु साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि महिला के साथ हुई क्रूरता या दहेज उत्पीड़न का सीधा संबंध उसकी असामान्य मृत्यु से था।

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सामान्य घरेलू झगड़े या छोटी-मोटी पारिवारिक बहस को दहेज मृत्यु नहीं माना जा सकता। यह साबित होना जरूरी है कि महिला को मृत्यु से कुछ समय पहले दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर मामले में बिना सही सबूत के केवल आरोपों के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती।

सतबीर सिंह बनाम हरियाणा राज्य, 2021

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113B को स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि यदि अभियोजन यह साबित कर दे कि महिला की मृत्यु से पहले उसे दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था, तो कोर्ट यह मान सकती है कि पति या ससुराल वाले जिम्मेदार हैं।

इसके बाद आरोपी पक्ष पर यह जिम्मेदारी आ जाती है कि वह अपनी बेगुनाही साबित करे। यह फैसला दहेज मृत्यु मामलों में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे पीड़ित पक्ष को कानूनी सहायता मजबूत होती है।

कैलियापेरुमल बनाम तमिलनाडु राज्य, 2004

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दहेज मृत्यु साबित करने के लिए जरूरी शर्तों को स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि:

  • महिला की मृत्यु शादी के 7 साल के भीतर हुई हो,
  • मृत्यु सामान्य न होकर संदिग्ध या असामान्य परिस्थितियों में हुई हो,
  • और मृत्यु से पहले महिला को दहेज के लिए परेशान किया गया हो।

यदि ये बातें साबित होती हैं, तो मामला दहेज मृत्यु के रूप में माना जा सकता है। यह फैसला आज भी दहेज मृत्यु मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत माना जाता है।

निष्कर्ष

आज भी भारत में दहेज उत्पीड़न और दहेज से जुड़ी मौतें एक बहुत गंभीर सामाजिक और कानूनी समस्या बनी हुई हैं। कानून सख्त होने और जागरूकता बढ़ने के बावजूद कई महिलाएं शादी के बाद मानसिक प्रताड़ना, पैसों की मांग, मारपीट, धमकी और घरेलू दबाव का सामना करती हैं। कई बार महिलाएं परिवार टूटने के डर, समाज की बदनामी या आर्थिक निर्भरता के कारण लंबे समय तक चुप रहती हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

अक्सर महिलाएं शादी को प्यार, सम्मान और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद के साथ शुरू करती हैं, लेकिन कुछ मामलों में उन्हें लगातार दहेज की मांग, अपमान और मानसिक दबाव झेलना पड़ता है। कई परिवार शुरुआती विवादों को “घर का मामला” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर कदम न उठाने से उत्पीड़न खतरनाक रूप ले सकता है।

आज भी देशभर में दहेज मौत, संदिग्ध आत्महत्या, घरेलू हिंसा और मानसिक क्रूरता के मामले लगातार सामने आते हैं। यह केवल कानूनी अपराध नहीं बल्कि समाज की एक गंभीर समस्या है, जहाँ लालच, सामाजिक दबाव और गलत पारिवारिक सोच महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को प्रभावित करते हैं।

ऐसी स्थिति में महिलाओं के लिए अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। भारतीय कानून महिलाओं को सुरक्षा, कानूनी सहायता और न्याय पाने के कई अधिकार देता है।

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FAQs

1. भारत में दहेज उत्पीड़न के मामले में ससुराल वालों के खिलाफ कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है?

महिला धारा 85, भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत FIR दर्ज करवा सकती है। इसके अलावा वह घरेलू हिंसा कानून और डाउरी प्रोहिबिशन एक्ट, 1961 के तहत भी कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

2. क्या दहेज के लिए मानसिक उत्पीड़न भी अपराध माना जा सकता है?

हाँ। बार-बार पैसे, गाड़ी, गिफ्ट या अन्य चीजों की मांग करना, मानसिक दबाव बनाना, बेइज्जत करना या धमकी देना मानसिक क्रूरता माना जा सकता है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

3. दहेज उत्पीड़न या मारपीट शुरू होने पर महिला को तुरंत क्या करना चाहिए?

सबसे पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें। यदि खतरा हो तो सुरक्षित जगह जाएं, सबूत जैसे चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, मेडिकल रिपोर्ट और फोटो सुरक्षित रखें, भरोसेमंद लोगों को बताएं और तुरंत पुलिस या वकील से संपर्क करें।

4. क्या दहेज उत्पीड़न के मामले में पत्नी को कोर्ट से मेंटेनेंस और सुरक्षा मिल सकती है?

हाँ। कोर्ट महिला को मेंटेनेंस, रहने का अधिकार, प्रोटेक्शन आर्डर, मुआवजा और बच्चों की कस्टडी जैसी राहत दे सकता है, यदि मामले की परिस्थितियां उचित हों।

5. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 80 क्या है?

धारा 80 दहेज मृत्यु (Dowry Death) से संबंधित है। यदि शादी के 7 साल के अंदर महिला की संदिग्ध या असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हो जाए और उससे पहले उसे दहेज के लिए परेशान किया गया हो, तो यह गंभीर अपराध माना जा सकता है।

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