बिल्डर ने पैसे लेकर फ्लैट नहीं दिया – जानिए कंपनसेशन क्लेम करने का कानूनी तरीका

Builder Took Money but Didn't Hand Over the Flat – Learn the Legal Way to Claim Compensation

घर केवल एक प्रॉपर्टी नहीं होता, बल्कि यह अधिकांश परिवारों के वर्षों की मेहनत, बचत और सुरक्षित भविष्य के सपनों का परिणाम होता है। जब कोई बिल्डर खरीदार से पैसे लेकर तय समय में फ्लैट देने का वादा करता है, तो खरीदार को यह उम्मीद होती है कि उसे समय पर अपने घर का कब्जा मिल जाएगा। लेकिन आज के समय में बिल्डर द्वारा फ्लैट का कब्जा देने में देरी करना रियल एस्टेट सेक्टर की सबसे आम समस्याओं में से एक बन गया है।

कई बार खरीदार पूरी कीमत या अधिकांश भुगतान कर देता है, फिर भी उसे वर्षों तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में खरीदार को एक तरफ बैंक की EMI चुकानी पड़ती है और दूसरी तरफ किराए का खर्च भी उठाना पड़ता है। इससे उसे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।

घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए अब कानून पहले की तुलना में काफी मजबूत हो चुका है। आज बिल्डरों के लिए तय समय-सीमा का पालन करना, सही जानकारी देना और अपने कानूनी दायित्वों को पूरा करना आवश्यक है। यदि कोई बिल्डर फ्लैट देने में अनावश्यक देरी करता है, तो खरीदार उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करके कंपनसेशन, रिफंड, ब्याज और अन्य राहत प्राप्त कर सकता है।

इसलिए यदि बिल्डर ने पैसे लेने के बावजूद समय पर फ्लैट नहीं दिया है, तो अपने कानूनी अधिकारों और उपलब्ध उपायों की जानकारी होना बहुत महत्वपूर्ण है।

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बिल्डर को डिफॉल्ट कब माना जाता है?

यदि बिल्डर अपने वादों, एग्रीमेंट की शर्तों या कानूनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं करता, तो उसे डिफॉल्ट में माना जा सकता है।

उदाहरण के लिए:

  • तय समय के भीतर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया हो।
  • निर्माण कार्य बिना किसी उचित कारण के अधूरा पड़ा हो।
  • प्रोजेक्ट में वादा की गई सुविधाएं उपलब्ध न कराई गई हों।
  • बिल्डर ने बिल्डर-बायर एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन किया हो।
  • बिल्डर ने RERA या अन्य कानूनी नियमों का पालन न किया हो।

हालांकि, हर मामले में यह स्वतः तय नहीं होता कि बिल्डर डिफॉल्ट में है। इसके लिए बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, प्रोजेक्ट की परिस्थितियों और उपलब्ध दस्तावेजों को देखकर निर्णय किया जाता है। इसलिए किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले मामले के तथ्यों की सही जांच करना जरूरी होता है।

देरी से फ्लैट मिलने पर खरीदार को क्या नुकसान होता है?

जब बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता, तो इसका खरीदार पर कई तरह से असर पड़ता है।

1. आर्थिक बोझ बढ़ जाता है कई खरीदारों को एक साथ कई खर्च उठाने पड़ते हैं, जैसे:

  • होम लोन की EMI भरना।
  • किराए के घर का खर्च उठाना।
  • अन्य संबंधित खर्चों का भुगतान करना।

2. मानसिक तनाव और परेशानी कब फ्लैट मिलेगा, प्रोजेक्ट पूरा होगा या नहीं, जैसी अनिश्चितताओं के कारण खरीदार को मानसिक तनाव, चिंता और निराशा का सामना करना पड़ता है।

3. प्रॉपर्टी का लाभ नहीं मिल पाता देरी के कारण खरीदार अपनी प्रॉपर्टी में रह नहीं पाता, उसे किराए पर नहीं दे पाता और न ही जरूरत पड़ने पर बेचकर उसका लाभ उठा पाता है।

4. खर्च लगातार बढ़ते रहते हैं जैसे-जैसे प्रोजेक्ट में देरी होती है, खरीदार पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता जाता है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

इसी कारण कानून बिल्डर द्वारा अनावश्यक देरी को गंभीरता से देखता है और खरीदारों को उचित राहत तथा कंपनसेशन पाने का अधिकार देता है।

क्या खरीदार को कंपनसेशन मांगने का कानूनी अधिकार है?

यदि बिल्डर की देरी, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के कारण खरीदार को नुकसान होता है, तो खरीदार केवल फ्लैट का कब्जा या रिफंड ही नहीं, बल्कि कंपनसेशन मांगने का भी कानूनी अधिकार रखता है।

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 (RERA) के तहत बिल्डर पर यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह प्रोजेक्ट को तय समय के भीतर पूरा करे और खरीदार को कब्जा दे। यदि बिल्डर ऐसा करने में विफल रहता है, तो खरीदार को कानून के तहत राहत और कंपनसेशन मिल सकता है।

विशेष रूप से RERA की धारा 18 के अनुसार, यदि बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता, तो खरीदार परिस्थितियों के अनुसार:

  • जमा की गई राशि का रिफंड,
  • देरी की अवधि का ब्याज,
  • तथा उचित कंपनसेशन प्राप्त करने का अधिकार रखता है।

इसके अलावा, RERA की धारा 71 और धारा 72 के तहत एडजुडिकेटिंग ऑफिसर खरीदार को हुए नुकसान के लिए कंपनसेशन निर्धारित कर सकता है। कंपनसेशन निम्न प्रकार के नुकसान के लिए मांगा जा सकता है:

  • बिल्डर की देरी के कारण हुआ आर्थिक नुकसान।
  • लंबे समय तक किराया देने का अतिरिक्त खर्च।
  • होम लोन की EMI का बोझ।
  • अन्य अतिरिक्त खर्च और वित्तीय दबाव।
  • देरी के कारण हुई असुविधा और कठिनाई।
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यदि बिल्डर की गलती के कारण खरीदार को वास्तविक नुकसान हुआ है, तो कानून उसे उचित कंपनसेशन प्राप्त करने का अधिकार देता है।

बिल्डर से कंपनसेशन पाने की कानूनी प्रक्रिया

यदि आप प्रोजेक्ट को जारी रखना चाहते हैं और बिल्डर की देरी के कारण हुए नुकसान का कंपनसेशन लेना चाहते हैं, तो सही कानूनी प्रक्रिया का पालन करना बहुत जरूरी है। यदि आपका दावा सही दस्तावेजों और सबूतों के साथ तैयार किया जाता है, तो कंपनसेशन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

स्टेप 1: देरी के कारण से हुए नुकसान का हिसाब लगाएं

किसी भी फोरम या अथॉरिटी के पास जाने से पहले यह तय करें कि बिल्डर की देरी के कारण आपको कितना नुकसान हुआ है और आप कितने कंपनसेशन की मांग करना चाहते हैं।

आप निम्न प्रकार के नुकसान के लिए कंपनसेशन मांग सकते हैं:

  • देरी की अवधि का ब्याज, जो कानून या एग्रीमेंट के अनुसार देय हो।
  • किराए का खर्च, यदि फ्लैट समय पर न मिलने के कारण आपको किराए के घर में रहना पड़ा हो।
  • होम लोन की EMI और अतिरिक्त लोन का बोझ, जो देरी के कारण उठाना पड़ा हो।
  • देरी की वजह से हुए अन्य अतिरिक्त खर्च, जिससे आपकी आर्थिक परेशानी बढ़ी हो।
  • मानसिक तनाव, असुविधा और परेशानी, जो बिल्डर की लापरवाही के कारण आपको झेलनी पड़ी हो।

स्टेप 2: कंपनसेशन के दावे से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करें

यदि आप बिल्डर से कंपनसेशन मांगना चाहते हैं, तो यह साबित करना जरूरी होता है कि बिल्डर ने कब्जा देने में देरी की और इस देरी के कारण आपको वास्तव में नुकसान हुआ। इसलिए सभी जरूरी दस्तावेज पहले से एकत्र कर लें। इन दस्तावेजों में शामिल हो सकते हैं:

  • बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, जिसमें कब्जा देने की तय तारीख का उल्लेख हो।
  • अलॉटमेंट लेटर
  • भुगतान की रसीदें और बैंक ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड
  • होम लोन के दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट
  • EMI भुगतान का रिकॉर्ड
  • किराए की रसीदें, यदि फ्लैट न मिलने के कारण आपको किराए के घर में रहना पड़ा हो।
  • बिल्डर के साथ हुई ईमेल, व्हाट्सएप चैट और अन्य लिखित बातचीत
  • बिल्डर द्वारा भेजे गए डिमांड लेटर
  • प्रोजेक्ट के ब्रोशर, विज्ञापन या अन्य दस्तावेज, जिनमें कब्जा देने की समय-सीमा का वादा किया गया हो।

ध्यान रखें: आपके पास जितने मजबूत दस्तावेज और सबूत होंगे, उतना ही आपका कंपनसेशन का दावा मजबूत होगा और राहत मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

स्टेप 3: बिल्डर को लीगल नोटिस भेजें

कानूनी कार्यवाही शुरू करने से पहले बिल्डर को एक लीगल नोटिस भेजना फायदेमंद हो सकता है। इस नोटिस के माध्यम से आप बिल्डर को अपनी समस्या और कंपनसेशन की मांग के बारे में औपचारिक रूप से जानकारी देते हैं।

लीगल नोटिस में निम्न बातें स्पष्ट रूप से लिखनी चाहिए:

  • फ्लैट का कब्जा देने की तय तारीख क्या थी।
  • प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है।
  • देरी के कारण आपको कितना आर्थिक नुकसान हुआ है।
  • आप कितने कंपनसेशन की मांग कर रहे हैं।
  • बिल्डर को जवाब देने या समस्या का समाधान करने के लिए उचित समय-सीमा दें।

महत्वपूर्ण: कई मामलों में लीगल नोटिस मिलने के बाद ही बिल्डर बातचीत के लिए तैयार हो जाता है और विवाद कोर्ट या RERA तक पहुंचे बिना ही सुलझ जाता है। इसलिए कानूनी कार्रवाई से पहले लीगल नोटिस भेजना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

स्टेप 4: RERA अथॉरिटी के सामने शिकायत दर्ज करें

यदि लीगल नोटिस भेजने के बाद भी बिल्डर आपको कंपनसेशन देने के लिए तैयार नहीं होता, तो आप संबंधित स्टेट RERA अथॉरिटी के सामने शिकायत दर्ज कर सकते हैं और अपने नुकसान के लिए कंपनसेशन की मांग कर सकते हैं।

शिकायत में निम्न जानकारी स्पष्ट रूप से लिखनी चाहिए:

  • प्रोजेक्ट का पूरा विवरण।
  • आपने बिल्डर को कितनी राशि का भुगतान किया है।
  • फ्लैट का कब्जा देने की तय तारीख क्या थी।
  • कब्जा देने में कितनी देरी हुई है।
  • देरी के कारण आपको क्या-क्या नुकसान हुआ है।
  • आप कितने कंपनसेशन की मांग कर रहे हैं।

इसके साथ अपने दावे से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, भुगतान की रसीदें, बैंक रिकॉर्ड, किराए की रसीदें, ईमेल और अन्य सबूत भी शिकायत के साथ संलग्न करें।

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ध्यान रखें: जितनी स्पष्ट जानकारी और मजबूत दस्तावेज आप RERA के सामने प्रस्तुत करेंगे, आपके कंपनसेशन का दावा उतना ही मजबूत होगा और राहत मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

स्टेप 5: RERA के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर से कंपनसेशन की मांग करें

RERA एक्ट, 2016 की धारा 71 के तहत कंपनसेशन से जुड़े मामलों की सुनवाई RERA द्वारा नियुक्त एडजुडिकेटिंग ऑफिसर करते हैं।

यदि बिल्डर की देरी के कारण आपको आर्थिक नुकसान या अन्य परेशानी हुई है, तो आप एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के सामने कंपनसेशन की मांग कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान एडजुडिकेटिंग ऑफिसर मुख्य रूप से यह देखते हैं:

  • फ्लैट का कब्जा देने में कितनी देरी हुई है।
  • देरी के लिए बिल्डर ने क्या कारण बताए हैं।
  • देरी की वजह से खरीदार को कितना नुकसान हुआ है।
  • दोनों पक्षों द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और सबूत क्या कहते हैं।

सभी तथ्यों, दस्तावेजों और सबूतों की जांच करने के बाद एडजुडिकेटिंग ऑफिसर मामले के अनुसार खरीदार को उचित कंपनसेशन देने का आदेश दे सकते हैं।

ध्यान रखें: यदि आपके पास अपने नुकसान से जुड़े मजबूत दस्तावेज और सबूत होंगे, तो कंपनसेशन मिलने की संभावना भी अधिक होगी। इसलिए RERA में दावा करते समय अपने सभी रिकॉर्ड सही तरीके से प्रस्तुत करना बहुत महत्वपूर्ण है।

स्टेप 6: सुनवाई में शामिल हों और अपने सबूत पेश करें

जब RERA में आपके मामले की सुनवाई शुरू होती है, तो आपको अपने दावे के समर्थन में जरूरी दस्तावेज और जानकारी प्रस्तुत करनी होती है। सुनवाई के दौरान आप:

  • अपना लिखित पक्ष दाखिल कर सकते हैं।
  • किराए की रसीदें, होम लोन और EMI से जुड़े रिकॉर्ड पेश कर सकते हैं।
  • यह बता सकते हैं कि बिल्डर की देरी के कारण आपको कितनी आर्थिक और मानसिक परेशानी हुई है।
  • यह साबित कर सकते हैं कि आपको जो नुकसान हुआ, वह सीधे तौर पर बिल्डर की देरी और लापरवाही की वजह से हुआ है।
  • वहीं, बिल्डर को भी अपना पक्ष रखने और अपने बचाव में दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाता है।

इसके बाद RERA दोनों पक्षों की बात, दस्तावेजों और सबूतों को ध्यान से देखकर मामले पर फैसला करता है। इसलिए सुनवाई के दौरान सही जानकारी और मजबूत सबूत पेश करना आपके कंपनसेशन के दावे को मजबूत बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्टेप 7: कंपनसेशन का आदेश प्राप्त करें

यदि एडजुडिकेटिंग ऑफिसर यह मान लेते हैं कि बिल्डर की देरी या लापरवाही के कारण खरीदार को वास्तव में नुकसान हुआ है, तो वे बिल्डर को कंपनसेशन देने का आदेश दे सकते हैं।

इस आदेश में निम्न राहत शामिल हो सकती है:

  • आर्थिक नुकसान के लिए कंपनसेशन।
  • मानसिक तनाव, परेशानी और असुविधा के लिए कंपनसेशन।
  • जहां लागू हो, वहां ब्याज।
  • मुकदमा लड़ने में हुए उचित खर्च।

इस तरह, यदि बिल्डर की गलती की वजह से आपको नुकसान हुआ है, तो RERA के माध्यम से आपको उचित कंपनसेशन दिलाया जा सकता है।

स्टेप 8: यदि बिल्डर भुगतान न करे, तो आदेश को लागू कराएं

  • कई बार कंपनसेशन का आदेश मिलने के बाद भी बिल्डर स्वेच्छा से भुगतान नहीं करता। ऐसी स्थिति में खरीदार को घबराने की जरूरत नहीं है।
  • यदि बिल्डर आदेश का पालन नहीं करता, तो आप RERA के सामने एग्जीक्यूशन की कार्यवाही शुरू कर सकते हैं, ताकि आदेश को लागू कराया जा सके।
  • इसके बाद संबंधित अथॉरिटी कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठा सकती है, ताकि बिल्डर से आपको मिलने वाली राशि की वसूली की जा सके।

कंपनसेशन की राशि कैसे तय की जाती है?

हर मामले में कंपनसेशन की राशि अलग-अलग हो सकती है। यह कोई तय रकम नहीं होती। संबंधित अथॉरिटी मामले की परिस्थितियों को देखकर यह तय करती है कि खरीदार को कितना कंपनसेशन मिलना चाहिए। कंपनसेशन तय करते समय आमतौर पर निम्न बातों पर ध्यान दिया जाता है:

  • फ्लैट का कब्जा देने में कितनी देरी हुई है।
  • खरीदार ने बिल्डर को कितनी राशि का भुगतान किया है।
  • देरी के कारण खरीदार को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है।
  • बिल्डर-बायर एग्रीमेंट में क्या शर्तें तय की गई थीं।
  • कानून में दिए गए प्रावधान क्या कहते हैं।

इसलिए हर मामले का फैसला उसके अपने तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। यदि खरीदार अपने नुकसान से जुड़े सही दस्तावेज और सबूत पेश करता है, तो उसे उचित कंपनसेशन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट का फैसला

विंग कमांडर आरिफुर रहमान खान और अलेया सुल्ताना एवं अन्य बनाम DLF सदर्न होम्स प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य (2020)

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मामले के तथ्य क्या थे?

  • घर खरीदारों ने DLF के एक रिहायशी प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किए थे और बिल्डर को बड़ी राशि का भुगतान भी कर दिया था। बिल्डर-बायर एग्रीमेंट के अनुसार DLF को तय समय के भीतर फ्लैट का कब्जा देना था।
  • लेकिन DLF ने समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया और काफी देरी कर दी।
  • एग्रीमेंट में यह भी लिखा गया था कि यदि कब्जा देने में देरी होती है, तो बिल्डर खरीदार को केवल ₹5 प्रति वर्ग फुट प्रति माह के हिसाब से कंपनसेशन देगा।
  • खरीदारों ने इसे अनुचित माना और उचित कंपनसेशन की मांग करते हुए कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि: बिल्डर एकतरफा और अनुचित शर्तों का सहारा लेकर कब्जा देने में हुई देरी की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे एग्रीमेंट आमतौर पर बिल्डर द्वारा तैयार किए जाते हैं और खरीदार के पास शर्तों पर बातचीत करने का बहुत कम मौका होता है। इसलिए केवल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर देने का मतलब यह नहीं है कि खरीदार ने हर अनुचित शर्त को स्वीकार कर लिया है।

कोर्ट ने और क्या महत्वपूर्ण बातें कहीं?

  • समय पर फ्लैट का कब्जा न देना “सेवा में कमी” (Deficiency in Service) माना जाएगा।
  • कंज्यूमर फोरम खरीदार को उचित और न्यायसंगत कंपनसेशन दे सकता है, भले ही एग्रीमेंट में बहुत कम कंपनसेशन तय किया गया हो।
  • यदि खरीदार ने देरी के बाद फ्लैट का कब्जा ले लिया हो, तब भी वह देरी की अवधि का कंपनसेशन मांग सकता है।

खरीदारों को कितना कंपनसेशन मिला?

सुप्रीम कोर्ट ने एग्रीमेंट में लिखे ₹5 प्रति वर्ग फुट प्रति माह वाले नियम को उचित नहीं माना। इसके बजाय कोर्ट ने आदेश दिया कि खरीदारों को देरी की अवधि के लिए जमा की गई राशि पर 6% per annum के हिसाब से कंपनसेशन दिया जाए।

निष्कर्ष

घर खरीदना किसी भी परिवार के लिए जीवन का एक बड़ा फैसला होता है। लोग अपनी वर्षों की बचत लगाकर और लोन लेकर अपने सपनों का घर खरीदते हैं। ऐसे में यदि बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता, तो खरीदार को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।

कंपनसेशन मांगना किसी तरह का अतिरिक्त लाभ कमाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह खरीदार का कानूनी अधिकार है। इसका उद्देश्य बिल्डर को उसकी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह बनाना और खरीदार को हुए नुकसान की भरपाई करना है।

यदि बिल्डर ने अपने वादे पूरे नहीं किए हैं, तो खरीदार को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर उचित कानूनी कदम उठाने चाहिए। एक जागरूक खरीदार न केवल अपने हितों की रक्षा करता है, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर काम पूरा करने की संस्कृति को भी मजबूत बनाता है।

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FAQs

1. क्या बिल्डर द्वारा फ्लैट का कब्जा देने में देरी होने पर मैं कंपनसेशन मांग सकता हूँ?

हाँ। यदि बिल्डर की देरी के कारण आपको आर्थिक नुकसान या परेशानी हुई है, तो आप कानून के तहत कंपनसेशन, ब्याज, रिफंड या फ्लैट का कब्जा मांग सकते हैं।

2. क्या बिल्डर ने पैसे लेने के बाद फ्लैट नहीं दिया हो, तो मैं RERA में शिकायत कर सकता हूँ?

हाँ। यदि बिल्डर अपने वादे पूरे नहीं करता और तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता, तो आप RERA में शिकायत दर्ज करके राहत और कंपनसेशन मांग सकते हैं।

3. बिल्डर से कंपनसेशन मांगने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं?

आमतौर पर बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, अलॉटमेंट लेटर, भुगतान की रसीदें, बैंक और लोन रिकॉर्ड, ईमेल, नोटिस तथा प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य दस्तावेज जरूरी होते हैं।

4. क्या मैं कब्जे का इंतजार करने के बजाय रिफंड मांग सकता हूँ?

हाँ। यदि परिस्थितियां उचित हों, तो खरीदार कानून के अनुसार रिफंड, ब्याज और अन्य राहत की मांग भी कर सकता है।

5. क्या मैं बिल्डर के खिलाफ RERA और कंज्यूमर कोर्ट दोनों में जा सकता हूँ?

हाँ। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उचित परिस्थितियों में खरीदार RERA और कंज्यूमर कोर्ट दोनों के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का लाभ ले सकता है। हालांकि, कौन-सा विकल्प आपके मामले में बेहतर रहेगा, यह आपके केस के तथ्यों पर निर्भर करता है।

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