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Adv. Anjali Sandeep Kshirsagar

I am Anjali Sandeep Kshirsagar, professionally an advocate. I have 5 years experience in the realm of law. I have completed my Law I have been enrolled in the Bar council of Delhi and practicing in Delhi High Court. I'm more passionate about creating Criminal, Criminal Matter, Cyber Fraud, Money Recovery. I'm a good fit for people with businesses and individual conflicts and capable of resolving sensitive and complicated issues, identifying legal concerns, recognizing compliance with legal challenges.

Adv. Anjali Sandeep Kshirsagar
डाइवोर्स के दौरान हस्बैंड के फाइनेंसियल अधिकार क्या है?

डाइवोर्स के दौरान हस्बैंड के फाइनेंसियल अधिकार क्या है?

हम में से ज्यादातर लोग इस फैक्ट को जानते हैं कि एक वाइफ को अपने हस्बैंड से अलग होने के दौरान या डाइवोर्स के बाद मेंटेनेंस का दावा करने का अधिकार है, लेकिन हस्बैंड के पास भी यह मेंटेनेंस का अधिकार है, जिसके बारे में  काफी लोगों को पता नहीं है। कानून के अनुसार, हस्बैंड …

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अपराधियों को पॉलिटिक्स में आने से कौन रोक सकता है?

अपराधियों को पॉलिटिक्स में आने से कौन रोक सकता है?

जज दिनेश कुमार सिंह की बेंच ने अतुल कुमार सिंह उर्फ ​​अतुल राय पुत्र श्री भरत सिंह v उत्तर प्रदेश राज्य (2022) के केस में बेल एप्लीकेशन पर फैसला सुनाते हुए यह कहा कि क्रिमिनल्स को पॉलिटिक्स में प्रवेश/एंटर करने से रोकने के लिए ‘सामूहिक इच्छाशक्ति’ दिखाना संसद/पार्लियामेंट की जिम्मेदारी है ताकि उन्हें लेजिस्लेचर को …

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What to do if someone does not return the borrowed money

अगर कोई उधारी के पैसे वापस ना करे तो क्या करें?

भारत में उधारी देना एक आम सामाजिक व्यवहार है, जो अक्सर रिश्तों और विश्वास पर आधारित होता है। हालांकि, जब बात उधारी लौटाने की आती है, तो कई बार सामने वाला व्यक्ति बार-बार टालमटोल करता है या पैसे लौटाने से मना कर देता है। ऐसे में उधार देने वाले व्यक्ति को मानसिक दबाव और सामाजिक …

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नए एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल, 2021 के तहत एडवोकेट्स को अरेस्ट नहीं किया जा सकता

नए एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल, 2021 के तहत एडवोकेट्स को अरेस्ट नहीं किया जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने हरि शंकर रस्तोगी v गिरिधर शर्मा (1978) के केस में यह ऑब्ज़र्व किया कि ‘बार काउन्सि जुडीशियल सिस्टम का ही विस्तार/एक्सटेंशन है और एक एडवोकेट कोर्ट का एक ऑफ़िसर होता है। एक एडवोकेट कोर्ट के प्रति जवाबदेह होता है और हाई प्रोफेशनल एथिक्स के द्वारा चलाया जाता है। जुडीशियल सिस्टम की सफलता …

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डाइवोर्स लेने के लिए, लंबे समय का सेपरेशन एफिडेविट काफी है।

डाइवोर्स लेने के लिए, लंबे समय का सेपरेशन एफिडेविट काफी है।

राजू सिंह v ट्विंकल कंवर के केस में, हस्बैंड द्वारा हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 13-बी के तहत फाइल की गयी जॉइंट पिटीशन को फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। लेकिन, हस्बैंड ने फैमिली कोर्ट के इस फैसले को चुनौती राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राजस्थान हाई कोर्ट के जज विजय बिश्नोई ने …

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हाई कोर्ट के जजों को उनके दौरे पर गिफ्ट्स ना दें: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट

हाई कोर्ट के जजों को उनके दौरे पर गिफ्ट्स ना दें: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट

हाल ही में एक दिलचस्प घटना तब हुई जब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने एक सर्कुलर जारी करयह कहा कि सबोर्डिनेट कोर्ट्स के जुडिशल ऑफिसर्स को हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को अपने साथ लेकर आने और जाने, यात्रा करने, होटल में ठहरने, भोजन की व्यवस्था करने या गिफ्ट्स देने  आदि …

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आईटी एक्ट का सेक्शन 67ए सेक्सुअल रिलेशन्स तक ही सीमित नहीं है, इसमें न्यूड वीडियो शामिल भी होगा- बॉम्बे हाई कोर्ट

आईटी एक्ट का सेक्शन 67ए सेक्सुअल रिलेशन्स तक ही सीमित नहीं है, इसमें न्यूड वीडियो शामिल भी होगा- बॉम्बे हाई कोर्ट

एस्टार नज़रुल अहमद v महाराष्ट्र राज्य के केस में एंटीसिपेट्री बेल की एप्लीकेशन पर फैसला लेते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि आईटी एक्ट के सेक्शन 67ए के तहत किसी व्यक्ति की न्यूड वीडियो को शेयर करना अपराध/क्राइम है। जज भारती ने यह ऑब्ज़र्व किया कि आईटी एक्ट के सेक्शन 67 के तहत “सेक्सुअली इम्प्लीसिट” …

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When and how to send a legal notice – Know the process, benefits and legal importance

लीगल नोटिस कब और कैसे भेजें? – जानिए प्रक्रिया, फायदे और कानूनी महत्व

हम सभी जीवन में कभी न कभी ऐसे हालातों से गुजरते हैं जब हमें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानून का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन कोर्ट-कचहरी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोग डर जाते हैं। ऐसे में लीगल नोटिस एक ऐसा विकल्प बन जाता है जो कानूनी कार्रवाई की शुरुआत करता है, लेकिन …

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लव मैरिज के बाद रेप केस फाइल हो तो क्या करें।

लव मैरिज के बाद रेप केस फाइल हो तो क्या करें।

अपने पार्टनर के साथ बिना उसकी सहमति के सेक्सुअल रिलेशन्स बनाने को रेप के रूप में जाना जाता है। यह महिलाओं की सहमति के अगेंस्ट भारत में चौथी सबसे कॉमन होने वाली क्रिमिनल एक्टिविटी है और इसे सबसे जघन्य अपराधों में से एक माना जाता है। हर साल, रेप की कोशिश करने के एक हजार …

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वसीयत को बाद के एक समझौते से रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

वसीयत को बाद के एक समझौते से रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

एक ऐसा एक्सटर्नल साइन, फैक्ट्स, इनफार्मेशन या कुछ भी ऐसा जो लीगली सच्चाई को साबित करने के लिए कोर्ट में जज के सामने पेश किया जाता है। स्पेशली, एक ऐसा व्यक्ति जो जानबूझकर अपने द्वारा किये गए क्राइम को खुद एक्सेप्ट करता है और अपने सह-साजिशकर्ताओं के खिलाफ गवाही देता है, उसे सबूत या एविडेंस …

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