अगर बैंक ने लोन की बकाया किस्तों के कारण आपकी प्रॉपर्टी के लिए ऑक्शन नोटिस भेजा है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
ऑक्शन नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि आपकी प्रॉपर्टी बिक चुकी है। अभी भी कुछ कानूनी और व्यावहारिक रास्ते हो सकते हैं। आप बकाया राशि जमा करने, बैंक से सेटलमेंट की बात करने या जरूरत पड़ने पर बैंक की कार्रवाई को कानूनी रूप से चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं।
प्रॉपर्टी के खिलाफ बैंक की कार्रवाई आमतौर पर SARFAESI एक्ट, 2002 के तहत हो सकती है, लेकिन बैंक को इस कानून और संबंधित नियमों का पालन करना जरूरी है। इसलिए घबराने के बजाय सबसे पहले यह समझें: “बैंक की कार्रवाई किस स्टेज पर है और अभी अपनी प्रॉपर्टी बचाने के लिए मैं क्या कदम उठा सकता हूं?”
ऑक्शन नोटिस क्या होता है?
ऑक्शन नोटिस का मतलब है कि बैंक ने लोन की बकाया रकम वसूलने के लिए आपकी गिरवी रखी प्रॉपर्टी को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।
आमतौर पर लोन लेते समय प्रॉपर्टी बैंक के पास सिक्योरिटी के रूप में रखी जाती है। जैसे:
- होम लोन के लिए घर गिरवी रखना।
- बिजनेस लोन के लिए कमर्शियल प्रॉपर्टी गिरवी रखना।
- लोन के बदले जमीन गिरवी रखना।
- कंपनी या बिजनेस के लोन के लिए रिहायशी प्रॉपर्टी सिक्योरिटी के रूप में देना।
अगर लोन की किस्तें लंबे समय तक जमा नहीं होती हैं और लोन खाता NPA हो जाता है, तो बैंक कानून के अनुसार प्रॉपर्टी के खिलाफ रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर सकता है।
SARFAESI एक्ट की धारा 13 के तहत बैंक को कुछ कानूनी अधिकार मिलते हैं। लेकिन बैंक को तय प्रक्रिया और नियमों का पालन करना जरूरी है। अगर बैंक ने धारा 13(4) के तहत कोई कार्रवाई की है, तो उधारकर्ता उसे DRT (डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल) में चुनौती दे सकता है।
इसलिए ऑक्शन नोटिस को सिर्फ बैंक का सामान्य नोटिस समझकर नजरअंदाज न करें। इसे गंभीरता से लें और समय रहते कानूनी सलाह लें।
घबराएं नहीं और ऑक्शन नोटिस को नजरअंदाज न करें
सबसे पहले ऑक्शन नोटिस को ध्यान से पढ़ें। पूरी रकम अभी जमा न कर पाने की वजह से इसे अलग रखकर न छोड़ें। नोटिस में इन बातों को जरूर जांचें:
- उधारकर्ता का नाम।
- बैंक या वित्तीय संस्था का नाम।
- लोन अकाउंट नंबर।
- बैंक ने कितनी रकम बकाया बताई है।
- प्रॉपर्टी का पूरा विवरण।
- ऑक्शन की तारीख और समय।
- रिजर्व प्राइस।
- जमा की जाने वाली रकम की जानकारी।
- बैंक के अधिकृत अधिकारी की जानकारी।
- पहले भेजे गए नोटिस का विवरण।
- क्या प्रॉपर्टी पर कब्जा लिया जा चुका है।
- यह पहला ऑक्शन है या दोबारा ऑक्शन।
ऑक्शन नोटिस को सुरक्षित रखें। साथ ही लोन एग्रीमेंट, बैंक स्टेटमेंट, भुगतान की रसीदें, पहले के नोटिस, कब्जे का नोटिस और बैंक के साथ हुई बातचीत या सेटलमेंट से जुड़े सभी कागजात संभालकर रखें।
बाद में अगर बैंक की बकाया रकम या रिकवरी की प्रक्रिया पर सवाल उठता है, तो ये दस्तावेज आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जांचें कि बैंक ने सही कानूनी प्रक्रिया अपनाई है या नहीं
बैंक बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए सीधे आपकी प्रॉपर्टी का ऑक्शन नहीं कर सकता। SARFAESI एक्ट, 2002 और इससे जुड़े नियमों में बैंक को कुछ जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना होता है।
उदाहरण के लिए, धारा 13(2) के तहत आमतौर पर बैंक 60 दिन का समय देते हुए डिमांड नोटिस भेजता है। अगर उधारकर्ता को बैंक की मांग पर कोई आपत्ति है, तो वह अपनी आपत्ति या जवाब बैंक को दे सकता है। इसके बाद बैंक कानून के अनुसार धारा 13(4) के तहत प्रॉपर्टी पर कब्जा लेने जैसी कार्रवाई कर सकता है।
इसलिए ऑक्शन नोटिस मिलने पर यह जरूर जांचें: “क्या बैंक ने पहले के सभी जरूरी नोटिस और कानूनी प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की है?”
अगर प्रक्रिया में कोई कमी है, तो उसके आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की संभावना हो सकती है।
क्या आपके ऑक्शन नोटिस में 30 दिन का जरूरी समय दिया गया है?
अगर बैंक आपकी प्रॉपर्टी का ऑक्शन कर रहा है, तो ऑक्शन नोटिस और ऑक्शन की तारीख के बीच का समय बहुत महत्वपूर्ण है।
सिक्योरिटी इंटरेस्ट (एनफोर्समेंट) रूल्स, 2002 के रूल 8(6) और रूल 9(1) के अनुसार, प्रॉपर्टी की बिक्री से पहले जरूरी नोटिस और प्रक्रिया का पालन करना होता है। पहली बिक्री के मामले में नोटिस दिए जाने के बाद कम से कम 30 दिन का समय रखा जाना जरूरी है।
इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने एम. राजेंद्रन और अन्य बनाम M/s KPK ऑयल्स एंड प्रोटीन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और अन्य, 2025 में महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की। कोर्ट ने कहा कि बैंक को दो अलग-अलग 30 दिन के नोटिस देने की जरूरत नहीं है। बिक्री का नोटिस उधारकर्ता को दिया और अखबार में प्रकाशित किया जा सकता है, लेकिन नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वास्तविक ऑक्शन से पहले 30 दिन का समय रखना जरूरी है।
इसलिए अगर आपके ऑक्शन नोटिस में बहुत कम समय दिया गया है, तो नोटिस और बैंक की पूरी रिकवरी प्रक्रिया की तुरंत जांच करवाएं।
सिर्फ इसलिए कि ऑक्शन नोटिस बैंक ने भेजा है, यह जरूरी नहीं कि उसकी पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही हो।
जांचें कि बैंक ने बकाया रकम सही बताई है या नहीं
ऑक्शन नोटिस मिलने के बाद यह जरूर जांचें कि बैंक ने बकाया रकम सही तरीके से जोड़ी है या नहीं। कई बार नोटिस में बड़ी रकम लिखी होती है, लेकिन उधारकर्ता को यह पता नहीं होता कि रकम कैसे बनी है। इन चीजों को जरूर जांचें:
- बाकी लोन की मूल रकम।
- ब्याज।
- पेनल चार्ज।
- कानूनी खर्च।
- प्रॉपर्टी के कब्जे और ऑक्शन से जुड़े खर्च।
- पहले किए गए भुगतान।
- बीमा या अन्य रकम, अगर लागू हो।
- बैंक ने किसी रकम को पहले ही एडजस्ट किया है या नहीं।
अगर आपको लगता है कि बैंक ने रकम गलत बताई है, तो लिखित रूप में बैंक को अपनी आपत्ति दें। सिर्फ फोन पर बैंक अधिकारी से बात करने के बजाय लिखित शिकायत या जवाब देना बेहतर है, ताकि आपकी आपत्ति का रिकॉर्ड मौजूद रहे।
क्या आप अभी भी बैंक से समझौते की बात कर सकते हैं?
हां, ऑक्शन नोटिस आने के बाद भी कुछ मामलों में बैंक से बात करके समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। ऑक्शन नोटिस का मतलब यह नहीं है कि बैंक से बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। आप अपनी स्थिति के अनुसार ये विकल्प देख सकते हैं:
- बकाया रकम जमा करना अगर आप रकम की व्यवस्था कर सकते हैं, तो बैंक से अनुरोध कर सकते हैं कि भुगतान स्वीकार करके आगे की कार्रवाई रोकने पर विचार किया जाए।
- वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) अगर पूरी रकम देना संभव नहीं है, लेकिन आप एक बड़ी रकम एक साथ दे सकते हैं, तो बैंक से OTS के लिए बात की जा सकती है। हालांकि OTS आपका कानूनी अधिकार नहीं है और बैंक इसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है।
- लोन री-स्ट्रक्चरिंग कुछ मामलों में बैंक से लोन की किस्तों या भुगतान की नई व्यवस्था के लिए अनुरोध किया जा सकता है। यह लोन और मामले की स्थिति पर निर्भर करता है।
- प्रॉपर्टी खुद बेचकर बैंक का पैसा चुकाना कुछ मामलों में बैंक की सहमति से प्रॉपर्टी बेचकर उसका बकाया चुकाया जा सकता है। अगर बाजार में बेहतर कीमत मिल रही हो, तो यह बैंक के ऑक्शन की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है।
प्रॉपर्टी को छिपकर बेचने या ट्रांसफर करने की कोशिश न करें
बैंक का ऑक्शन नोटिस मिलने के बाद कुछ लोग सोचते हैं कि ऑक्शन होने से पहले वे अपनी प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति को बेच देंगे और बैंक की कार्रवाई से बच जाएंगे। लेकिन ऐसा करना सही तरीका नहीं है।
SARFAESI एक्ट की धारा 13(13) के अनुसार, धारा 13(2) का नोटिस मिलने के बाद उधारकर्ता बैंक की पहले से लिखित मंजूरी के बिना सिक्योर्ड प्रॉपर्टी को बेचने, लीज पर देने या किसी अन्य तरीके से ट्रांसफर करने पर रोक के अधीन होता है।
इसका मतलब यह है कि अगर आपकी प्रॉपर्टी बैंक के पास लोन की सिक्योरिटी के रूप में गिरवी है, तो उसे चुपचाप किसी दूसरे व्यक्ति के नाम करने की कोशिश करना आपके लिए नई कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर आपने बैंक का बकाया चुकाए बिना प्रॉपर्टी किसी खरीदार को बेच दी और बैंक की अनुमति नहीं ली, तो बाद में बैंक उस ट्रांसफर पर आपत्ति उठा सकता है। इससे खरीदार के साथ विवाद भी हो सकता है और आपकी कानूनी स्थिति और मुश्किल हो सकती है।
लेकिन अगर आप प्रॉपर्टी बेचकर बैंक का लोन चुकाना चाहते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई रास्ता नहीं है। आप बैंक से बात करके उसकी लिखित मंजूरी लेने की कोशिश कर सकते हैं और बैंक की शर्तों के अनुसार बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं।
इसलिए: प्रॉपर्टी को छिपकर बेचने की कोशिश न करें। पहले बैंक से बात करें, लिखित मंजूरी लें और जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लेकर आगे बढ़ें।
क्या आप ऑक्शन नोटिस को चुनौती दे सकते हैं?
हां, कुछ मामलों में ऑक्शन की कार्रवाई को कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है।
अगर बैंक ने SARFAESI एक्ट की धारा 13(4) के तहत आपकी प्रॉपर्टी के खिलाफ कोई कार्रवाई की है और आपको लगता है कि बैंक ने कानून या जरूरी नियमों का पालन नहीं किया है, तो आप धारा 17 के तहत DRT में मामला दायर कर सकते हैं।
आमतौर पर ऐसी आवेदन संबंधित कार्रवाई की तारीख से 45 दिन के अंदर दाखिल करनी होती है। इसलिए समय सीमा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
DRT यह देख सकता है कि बैंक ने SARFAESI एक्ट और संबंधित नियमों के अनुसार सही प्रक्रिया अपनाई है या नहीं। मामले के तथ्यों के आधार पर उचित राहत भी मिल सकती है।
इसलिए ऑक्शन पूरा होने का इंतजार न करें। ऑक्शन नोटिस मिलने के बाद ही नोटिस और पूरी रिकवरी प्रक्रिया की जांच करवाएं और जरूरत होने पर समय रहते कानूनी कदम उठाएं।
वकील किन बातों की जांच कर सकता है?
हर मामले की स्थिति अलग होती है। इसलिए ऑक्शन नोटिस मिलने के बाद वकील बैंक की पूरी कार्रवाई और दस्तावेजों की जांच करके यह देख सकता है कि कहीं कोई कानूनी गलती तो नहीं हुई है। वकील आमतौर पर इन बातों की जांच कर सकता है:
- बैंक ने बकाया रकम सही बताई है या नहीं।
- जरूरी नोटिस सही तरीके से भेजे गए हैं या नहीं।
- उधारकर्ता की आपत्ति या जवाब पर बैंक ने ध्यान दिया या नहीं।
- प्रॉपर्टी का कब्जा लेने की प्रक्रिया सही थी या नहीं।
- प्रॉपर्टी का विवरण सही है या नहीं।
- प्रॉपर्टी की कीमत का सही मूल्यांकन हुआ है या नहीं।
- ऑक्शन नोटिस में जरूरी जानकारी दी गई है या नहीं।
- ऑक्शन से पहले जरूरी समय दिया गया है या नहीं।
- सिक्योरिटी इंटरेस्ट (एनफोर्समेंट) रूल्स, 2002 का पालन हुआ है या नहीं।
- रिजर्व प्राइस सही तरीके से तय किया गया है या नहीं।
- ऑक्शन की प्रक्रिया में कोई गलती या अनियमितता हुई है या नहीं।
- प्रॉपर्टी पर बैंक के अधिकार या मॉर्गेज को लेकर कोई विवाद है या नहीं।
- आपके द्वारा किए गए भुगतान को बैंक ने सही तरीके से एडजस्ट किया है या नहीं।
- बैंक ने किसी सेटलमेंट या लोन री-स्ट्रक्चरिंग की बात को नजरअंदाज किया है या नहीं।
हालांकि, केवल यह कहना कि “मेरे पास अभी पैसा नहीं है” अपने आप में बैंक की कानूनी कार्रवाई को गलत नहीं बना देता। इसलिए सिर्फ अनुमान लगाने के बजाय बैंक के नोटिस, लोन रिकॉर्ड और पूरी रिकवरी प्रक्रिया की जांच करवाना जरूरी है।
अगर ऑक्शन की तारीख बहुत पास है तो क्या करें?
अगर आपकी प्रॉपर्टी का ऑक्शन कुछ ही दिनों में होने वाला है, तो तुरंत कदम उठाना जरूरी है। केवल बैंक से बातचीत करते रहने में कई हफ्ते न लगाएं।
स्टेप 1: सभी दस्तावेज एक जगह रखें लोन के कागजात, बैंक के सभी नोटिस, भुगतान की रसीदें और बैंक से हुई बातचीत के रिकॉर्ड संभालकर रखें।
स्टेप 2: पता करें कि मामला किस स्टेज पर है जांचें कि बैंक ने सिर्फ डिमांड नोटिस भेजा है, प्रॉपर्टी पर सांकेतिक या वास्तविक कब्जा लिया है, ऑक्शन नोटिस जारी किया है, ऑक्शन कर दिया है या किसी व्यक्ति को सफल खरीदार घोषित कर दिया है।
स्टेप 3: समय सीमा जांचें SARFAESI मामलों में समय सीमा बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए देरी न करें।
स्टेप 4: बैंक का पूरा अकाउंट स्टेटमेंट लें बैंक ने कितनी रकम बकाया बताई है और उसमें ब्याज, चार्ज और आपके पुराने भुगतान कैसे जोड़े गए हैं, इसकी जांच करें।
स्टेप 5: SARFAESI/DRT मामले के अनुभवी वकील से तुरंत सलाह लें वकील सभी दस्तावेज देखकर यह बता सकता है कि बैंक की कार्रवाई को चुनौती देने का कोई कानूनी आधार है या नहीं।
स्टेप 6: सेटलमेंट की कोशिश भी साथ में करें जरूरत के अनुसार बैंक से OTS, बकाया भुगतान या अन्य समाधान के लिए बातचीत की जा सकती है। कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई और बैंक से बातचीत दोनों साथ-साथ चल सकती हैं।
सबसे जरूरी बात: ऑक्शन की तारीख नजदीक हो तो इंतजार न करें। हर दिन महत्वपूर्ण हो सकता है।
ऑक्शन पूरा हो जाने के बाद क्या होता है?
अगर प्रॉपर्टी का ऑक्शन पूरा हो चुका है, तो मामला पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि ऑक्शन के बाद कोई कानूनी रास्ता नहीं बचता, लेकिन ऐसी स्थिति में कानूनी मामला तथ्यों और कार्रवाई के स्टेज पर ज्यादा निर्भर करता है।
- इसलिए यह सोचकर इंतजार न करें: “ऑक्शन होने के बाद देखेंगे।”
- इसके बजाय बेहतर है कि: “ऑक्शन होने से पहले ही अपने कानूनी विकल्पों की जांच करवा लें।”
सुप्रीम कोर्ट ने SARFAESI एक्ट की धारा 13(8) और प्रॉपर्टी की बिक्री की प्रक्रिया के बीच संबंध पर भी विचार किया है। कोर्ट ने बिक्री के नोटिस के सही तरीके से प्रकाशन और कानून में दिए गए रिडेम्पशन के अधिकार के महत्व पर जोर दिया है।
इसलिए अगर आपको ऑक्शन नोटिस मिल चुका है, तो समय बर्बाद न करें। ऑक्शन से पहले ही दस्तावेजों की जांच करवाकर यह पता करें कि आपके पास कौन-से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं।
क्या बैंक का पैसा जमा करके ऑक्शन रोका जा सकता है?
कुछ मामलों में बैंक का पूरा बकाया पैसा जमा करके प्रॉपर्टी का ऑक्शन रोका जा सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि बैंक की कार्रवाई किस स्टेज पर पहुंच चुकी है और उस समय कौन-से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
SARFAESI एक्ट की धारा 13(8) के तहत, तय समय के अंदर बैंक की बकाया रकम के साथ लागू खर्च, चार्ज और अन्य देय राशि जमा करने पर सिक्योर्ड प्रॉपर्टी की बिक्री को रोकने का अधिकार मिल सकता है।
इसलिए समय बहुत महत्वपूर्ण है। यह न सोचें कि ऑक्शन वाले दिन पैसे की व्यवस्था कर लेने से हर स्थिति में ऑक्शन रुक जाएगा।
अगर आपके पास पैसे की व्यवस्था हो सकती है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें, लिखित रूप में पता करें कि कुल कितनी रकम जमा करनी है और भुगतान करने के बाद बैंक की कार्रवाई पर क्या असर पड़ेगा। भुगतान से पहले बैंक से लिखित पुष्टि लेना आपके हित में रहेगा।
क्या ऑक्शन के बाद बैंक बाकी रकम भी वसूल सकता है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि ऑक्शन से बैंक को कितनी रकम मिली और लोन की कुल बकाया रकम कितनी है।
अगर प्रॉपर्टी बेचने से मिली रकम बैंक की पूरी बकाया रकम चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो कुछ मामलों में बैंक बाकी रकम की वसूली के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है। यह लोन, गारंटी, दस्तावेजों और मामले की स्थिति पर निर्भर करता है।
इसलिए यह न मानें कि: “प्रॉपर्टी का ऑक्शन हो गया, तो मेरा पूरा लोन अपने आप खत्म हो गया।” ऑक्शन के बाद बैंक से अंतिम अकाउंट स्टेटमेंट और बकाया रकम का पूरा हिसाब जरूर लें और जरूरत पड़ने पर उसकी जांच करवाएं।
उधारकर्ताओं को किन सामान्य गलतियों से बचना चाहिए?
- ऑक्शन नोटिस को नजरअंदाज करना यह सबसे बड़ी गलती हो सकती है। नोटिस मिलते ही कार्रवाई की स्थिति समझें।
- ऑक्शन वाले दिन तक इंतजार करना कानूनी मामलों में समय सीमा बहुत महत्वपूर्ण होती है। आखिरी समय तक इंतजार करने से आपका विकल्प प्रभावित हो सकता है।
- सिर्फ फोन पर शिकायत करना महत्वपूर्ण आपत्तियां हमेशा लिखित रूप में दें, ताकि उसका रिकॉर्ड रहे।
- यह मान लेना कि बैंक हमेशा सही है बैंक को कानूनी अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन उसे भी कानून और जरूरी नियमों का पालन करना होता है।
- यह मान लेना कि बैंक की हर कार्रवाई गलत है सिर्फ लोन न चुका पाने से बैंक की हर कानूनी कार्रवाई अवैध नहीं हो जाती।
- गिरवी रखी प्रॉपर्टी को छिपकर बेचने की कोशिश करना इससे नई कानूनी परेशानियां पैदा हो सकती हैं।
- किसी अनजान “सेटलमेंट एजेंट” को पैसे देना हमेशा बैंक या उसके अधिकृत व्यक्ति से सीधे बात करें और हर भुगतान का लिखित रिकॉर्ड रखें।
- समय सीमा जांचे बिना केस करना SARFAESI मामलों में लिमिटेशन बहुत महत्वपूर्ण है। देरी होने से उपलब्ध कानूनी उपाय प्रभावित हो सकते हैं।
- सबसे जरूरी बात: ऑक्शन नोटिस मिलने के बाद घबराएं नहीं, लेकिन देरी भी न करें।
निष्कर्ष
बैंक से ऑक्शन नोटिस मिलना गंभीर मामला है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी प्रॉपर्टी तुरंत चली गई है।
ऐसी स्थिति में देरी न करें। बैंक की बकाया रकम जांचें, पूरी रिकवरी प्रक्रिया और जरूरी नोटिस देखें, सेटलमेंट या भुगतान के विकल्पों पर बैंक से बात करें और जरूरत पड़ने पर समय रहते कानूनी सलाह लें। अगर बैंक ने SARFAESI एक्ट की धारा 13(4) के तहत कार्रवाई की है, तो कुछ मामलों में धारा 17 के तहत DRT में कानूनी उपाय उपलब्ध हो सकता है।
सबसे जरूरी बात—ऑक्शन की तारीख का इंतजार न करें। ऑक्शन नोटिस मिलते ही सभी दस्तावेजों की जांच करवाएं।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
1. बैंक से ऑक्शन नोटिस मिलने के बाद क्या करें?
ऑक्शन नोटिस को नजरअंदाज न करें। बकाया रकम, ऑक्शन की तारीख, प्रॉपर्टी का विवरण और पहले के नोटिस जांचें। सभी दस्तावेज इकट्ठा करके जरूरत पड़ने पर वकील से कानूनी प्रक्रिया की जांच करवाएं।
2. क्या बैंक का ऑक्शन रोका जा सकता है?
मामले की स्थिति के अनुसार ऑक्शन रोकने या आगे की कार्रवाई से राहत पाने के विकल्प हो सकते हैं। आप बैंक से बकाया भुगतान, सेटलमेंट या OTS के लिए बात कर सकते हैं। कानूनी कमी होने पर DRT में भी उचित कानूनी उपाय उपलब्ध हो सकता है।
3. क्या बैंक के ऑक्शन नोटिस को DRT में चुनौती दे सकते हैं?
हां, उचित मामलों में SARFAESI एक्ट की धारा 17 के तहत DRT में बैंक की धारा 13(4) की कार्रवाई को चुनौती दी जा सकती है। आमतौर पर संबंधित कार्रवाई की तारीख से 45 दिन की समय सीमा होती है।
4. क्या ऑक्शन नोटिस के बाद OTS की बात कर सकते हैं?
हां, आप बैंक से OTS के लिए अनुरोध कर सकते हैं। लेकिन OTS बैंक की मंजूरी पर निर्भर करता है। सेटलमेंट की सभी शर्तें लिखित में लें और केवल मौखिक भरोसे पर निर्भर न रहें।
5. अगर ऑक्शन कुछ दिनों में होने वाला है तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई करें। सभी लोन और रिकवरी दस्तावेज इकट्ठा करें, बैंक की बकाया रकम और ऑक्शन नोटिस की जांच करें और SARFAESI/DRT मामलों के अनुभवी वकील से सलाह लें। साथ ही, सेटलमेंट और उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर भी तुरंत विचार करें।



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