मान लीजिए किसी व्यक्ति ने प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसके कागजात की जांच की, कीमत तय की, पैसे दिए और अपने नाम सेल डीड भी करा लिया। खरीदार को लगता है कि अब प्रॉपर्टी कानूनी रूप से उसकी हो गई है। लेकिन बाद में अगर उसे पता चलता है कि उसी प्रॉपर्टी को उसी बेचने वाले ने किसी दूसरे व्यक्ति को भी बेच दिया है, तो मामला गंभीर हो सकता है।
ऐसी स्थिति में दूसरा खरीदार भी यह दावा कर सकता है कि उसने प्रॉपर्टी सही तरीके से खरीदी है। इससे दोनों खरीदारों के बीच मालिकाना हक को लेकर डिस्प्यूट हो सकता है।
अगर खरीदार को पता चलता है कि एक ही प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति को भी बेच दी गई है, तो तुरंत समझौता करने, कब्जा छोड़ने या अपना दावा छोड़ने की जल्दबाजी न करें। पहले सभी कागजात की जांच करवाएं, दोनों बिक्री की तारीख और पूरी घटनाक्रम को समझें और फिर किसी योग्य प्रॉपर्टी वकील से सलाह लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई तय करें।
एक ही प्रॉपर्टी दो बार कैसे बेची जा सकती है?
एक ही प्रॉपर्टी को दो लोगों को बेचने से जुड़ा विवाद कई तरह से हो सकता है। जैसे:
1. पहले एक व्यक्ति को बेचकर बाद में दूसरे को बेचना
कभी-कभी बेचने वाला पहले Buyer A के नाम सेल डीड कर देता है और बाद में उसी प्रॉपर्टी को Buyer B को भी बेच देता है। ऐसा धोखाधड़ी या गलत नीयत से किया जा सकता है।
2. पहले एक व्यक्ति से बेचने का समझौता, फिर दूसरे को बिक्री
कई बार बेचने वाला पहले Buyer A के साथ प्रॉपर्टी बेचने का समझौता करता है, लेकिन बिक्री पूरी नहीं करता। बाद में वही प्रॉपर्टी Buyer B को सेल डीड के जरिए बेच देता है। ऐसी स्थिति में मामला इस बात पर निर्भर करेगा कि पहली डील कितनी आगे बढ़ी थी और उसके कागजात क्या हैं।
3. नकली या जाली कागजात के जरिए बिक्री
कभी कोई व्यक्ति नकली कागजात बनाकर या असली मालिक बनकर प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति को बेच सकता है। ऐसी स्थिति में सिविल और आपराधिक दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
4. जानबूझकर दो लोगों से पैसे लेना
कुछ मामलों में बेचने वाला जानबूझकर एक ही प्रॉपर्टी के लिए दो अलग-अलग लोगों से पैसे ले लेता है और दोनों को प्रॉपर्टी देने का वादा करता है। ऐसी स्थिति में खरीदार को देरी नहीं करनी चाहिए। सभी कागजात सुरक्षित रखें और प्रॉपर्टी की स्थिति की जांच करवाकर समय रहते उचित कानूनी कदम उठाएं।
सबसे पहला सवाल प्रॉपर्टी पहले किसने खरीदी?
अगर एक ही प्रॉपर्टी दो लोगों को बेच दी गई है, तो दोनों खरीद की तारीख बहुत महत्वपूर्ण होती है। मान लीजिए:
- Buyer A ने प्रॉपर्टी 1 जनवरी को खरीदी।
- Buyer B ने वही प्रॉपर्टी 1 मार्च को खरीदी।
अगर Buyer A की खरीद कानूनी रूप से सही और पूरी हो चुकी थी, तो संभव है कि 1 मार्च को बेचने वाले के पास वही प्रॉपर्टी Buyer B को बेचने का वैध अधिकार न रहा हो।
लेकिन सिर्फ तारीख देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन है। कोर्ट इन बातों को भी देख सकती है:
- पहली खरीद किस तरह हुई थी।
- पहली बिक्री पूरी हुई थी या नहीं।
- सेल डीड का रजिस्ट्रेशन हुआ था या नहीं।
- प्रॉपर्टी का कब्जा किसके पास था।
- प्रॉपर्टी की कीमत का भुगतान हुआ था या नहीं।
- बेचने वाले के पास वैध मालिकाना हक था या नहीं।
- दूसरे खरीदार को पहली बिक्री की जानकारी थी या नहीं।
- राज्य के लागू कानून क्या कहते हैं।
- अन्य कागजात और पूरे मामले की परिस्थितियां क्या हैं।
इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि “मैंने पहले खरीदा है, इसलिए प्रॉपर्टी पर मेरा हक अपने आप तय हो गया।” ऐसे मामले में दोनों लेन-देन के सभी कागजात और पूरी घटनाओं की जांच करना जरूरी है।
अगर आपकी सेल डीड पहले रजिस्टर्ड हुई थी तो क्या होगा?
अगर आपकी सेल डीड पहले रजिस्टर्ड हुई है और उसके बाद उसी प्रॉपर्टी को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया है, तो आपके पास अपने अधिकार का दावा करने के लिए मजबूत आधार हो सकता है। हालांकि, केवल रजिस्ट्रेशन ही हर मामले में अंतिम फैसला तय नहीं करता। पूरे मामले और कागजात को देखना जरूरी होता है।
अगर आपके पक्ष में हुई सेल डीड सही और कानूनी रूप से पूरी हुई थी, तो बाद में की गई दूसरी बिक्री को आप सिविल कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। मामले के अनुसार आप कोर्ट से मांग कर सकते हैं:
- प्रॉपर्टी पर अपने मालिकाना हक की घोषणा।
- बाद में हुई सेल डीड को अमान्य घोषित करने की मांग।
- जरूरत पड़ने पर बाद की सेल डीड रद्द करने की मांग।
- दूसरे खरीदार को आपकी प्रॉपर्टी में दखल देने से रोकने का आदेश।
- प्रॉपर्टी को आगे किसी और को बेचने या ट्रांसफर करने से रोकने का आदेश।
- अगर आपका कब्जा छीन लिया गया है, तो प्रॉपर्टी का कब्जा वापस दिलाने की मांग।
कौन-सी राहत मिलेगी, यह सेल डीड, भुगतान के सबूत, कब्जे और मामले की पूरी स्थिति देखकर तय होगी। इसलिए ऐसे विवाद में सभी कागजात की जांच करवाकर समय पर कानूनी कदम उठाना जरूरी है।
अगर दूसरे खरीदार की सेल डीड पहले रजिस्टर्ड हुई है तो क्या होगा?
यह स्थिति थोड़ी ज्यादा जटिल हो सकती है। मान लीजिए आपने किसी प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए बेचने वाले के साथ एग्रीमेंट टू सेल किया था, लेकिन आपकी सेल डीड रजिस्टर्ड होने से पहले ही बेचने वाले ने वही प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति को बेचकर उसके नाम रजिस्टर्ड कर दी।
ऐसे मामले में आपका अधिकार कई बातों पर निर्भर कर सकता है, जैसे:
- आपके और बेचने वाले के बीच हुआ एग्रीमेंट कानूनी रूप से सही था या नहीं।
- आपने अपनी तरफ से पैसे देने या बाकी शर्तें पूरी करने की पूरी कोशिश की थी या नहीं।
- दूसरे खरीदार को आपके पहले वाले एग्रीमेंट की जानकारी थी या नहीं।
- आपके पास एग्रीमेंट और भुगतान के पर्याप्त सबूत हैं या नहीं।
स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट, 1963 में कुछ परिस्थितियों में पहले खरीदार को प्रॉपर्टी की बिक्री पूरी कराने के लिए कानूनी राहत लेने का अधिकार दिया गया है। इसकी धारा 19 कुछ मामलों में बाद में प्रॉपर्टी खरीदने वाले व्यक्ति के खिलाफ राहत से जुड़ी है।
इसलिए केवल यह वजह कि दूसरे खरीदार की सेल डीड पहले रजिस्टर्ड हो गई, इसका मतलब यह नहीं है कि आपका पहले का एग्रीमेंट अपने आप बेकार हो गया। ऐसे मामले में एग्रीमेंट, भुगतान के सबूत, दोनों सेल डीड और दूसरे खरीदार की जानकारी सहित पूरे मामले की जांच करना बहुत जरूरी है।
अगर दूसरे खरीदार को आपकी पहले की खरीद के बारे में पता था तो क्या होगा?
अगर दूसरे खरीदार को पहले से पता था कि आपने उसी प्रॉपर्टी को खरीदने का एग्रीमेंट किया है या उसके लिए पैसे दिए हैं, तो यह बात कानूनी विवाद में बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। मान लीजिए:
- आपने बेचने वाले के साथ प्रॉपर्टी खरीदने का एग्रीमेंट किया।
- आपने बेचने वाले को काफी रकम दे दी।
- बेचने वाले को आपके एग्रीमेंट की पूरी जानकारी थी।
- बाद में दूसरे खरीदार ने भी प्रॉपर्टी खरीदी, जबकि उसे आपकी पहले की डील के बारे में पता था।
ऐसी स्थिति में दूसरे खरीदार की जानकारी और उसकी नीयत को कोर्ट में देखा जा सकता है। अगर वह खुद को सही और ईमानदार खरीदार बताता है, तो मामले के अनुसार यह भी देखा जा सकता है कि उसने प्रॉपर्टी बिना किसी जानकारी के और सही नीयत से खरीदी थी या नहीं। आपके दावे को मजबूत करने के लिए ये सबूत महत्वपूर्ण हो सकते हैं:
- बेचने वाले के साथ हुई बातचीत।
- व्हाट्सऐप या अन्य संदेश।
- एग्रीमेंट टू सेल।
- भुगतान की रसीद या बैंक रिकॉर्ड।
- प्रॉपर्टी के कब्जे से जुड़े कागजात।
- प्रॉपर्टी से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड।
- प्रॉपर्टी देखने या जांच करने से जुड़े सबूत।
- बेचने वाले के बयान या लिखित आश्वासन।
- दोनों खरीदारों के बीच हुई बातचीत।
- मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज और परिस्थितियां।
इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने से जुड़े हर कागज, भुगतान का सबूत और संदेश सुरक्षित रखें। बाद में विवाद होने पर यही दस्तावेज आपके अधिकार साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
एग्रीमेंट टू सेल और सेल डीड के बीच अंतर
| आधार | एग्रीमेंट टू सेल | सेल डीड |
| मतलब | भविष्य में प्रॉपर्टी बेचने का समझौता | प्रॉपर्टी की बिक्री पूरी करने वाला दस्तावेज |
| मालिकाना हक | आमतौर पर अपने आप ट्रांसफर नहीं होता | कानून के अनुसार मालिकाना हक ट्रांसफर कर सकता है |
| रजिस्ट्रेशन | परिस्थितियों पर निर्भर | आमतौर पर रजिस्ट्रेशन जरूरी |
| कानूनी उपाय | शर्तें पूरी होने पर स्पेसिफिक परफॉरमेंस मांगी जा सकती है | जरूरत पड़ने पर बिक्री को चुनौती दी जा सकती है |
| दूसरे खरीदार की जानकारी | उसकी जानकारी और नीयत महत्वपूर्ण हो सकती है | विवाद में इसकी भी जांच हो सकती है |
क्या खरीदार स्पेसिफिक परफॉरमेंस का केस कर सकता है?
हां, कुछ मामलों में खरीदार स्पेसिफिक परफॉरमेंस का केस कर सकता है। इसका मतलब है कि खरीदार कोर्ट से यह मांग कर सकता है कि बेचने वाले को किए गए समझौते के अनुसार प्रॉपर्टी की बिक्री पूरी करने का आदेश दिया जाए, केवल पैसे का मुआवजा न दिया जाए।
उदाहरण के लिए, अगर आपने प्रॉपर्टी खरीदने का वैध एग्रीमेंट किया, पैसे दिए और अपनी बाकी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए तैयार थे, लेकिन बेचने वाले ने बाद में वही प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दी, तो आप उचित मामले में स्पेसिफिक परफॉरमेंस के लिए कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट इन बातों को देखेगी:
- एग्रीमेंट सही और वैध था या नहीं।
- आपने कितना भुगतान किया।
- आप बिक्री पूरी करने के लिए तैयार थे या नहीं।
- दूसरे खरीदार को पहले एग्रीमेंट की जानकारी थी या नहीं।
- दोनों पक्षों का व्यवहार और अन्य जरूरी दस्तावेज।
इसलिए अगर आपके पास केवल एग्रीमेंट टू सेल है, तो यह न मानें कि आपके पास कोई कानूनी उपाय नहीं है। मामले के अनुसार आप स्पेसिफिक परफॉरमेंस की मांग कर सकते हैं।
क्या खरीदार दूसरी सेल डीड रद्द करने की मांग कर सकता है?
हां, मामले की स्थिति के अनुसार खरीदार दूसरी सेल डीड के खिलाफ कोर्ट से उचित राहत मांग सकता है। अगर दूसरी सेल डीड से आपके प्रॉपर्टी के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, तो आप मामले के अनुसार कोर्ट से मांग कर सकते हैं:
- अपने मालिकाना हक की घोषणा।
- दूसरी सेल डीड रद्द करने की मांग।
- यह घोषणा कि दूसरी सेल डीड आपके ऊपर लागू नहीं होती।
- दूसरे व्यक्ति को प्रॉपर्टी में दखल देने से रोकने का आदेश।
- प्रॉपर्टी का कब्जा वापस लेने की मांग।
- स्पेसिफिक परफॉरमेंस की मांग।
कौन-सी राहत मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप दूसरी सेल डीड में पक्षकार हैं या नहीं, दस्तावेज कानूनी रूप से गलत या रद्द करने योग्य है या नहीं, प्रॉपर्टी का कब्जा किसके पास है और मामले के अन्य तथ्य क्या हैं।
इसलिए ऐसे विवाद में केवल आपसी बातचीत या मौखिक शिकायत पर निर्भर न रहें। सभी दस्तावेजों की जांच करवाकर सही कानूनी उपाय अपनाएं।
क्या दूसरे खरीदार के खिलाफ इन्जंक्शन ले सकते हैं?
हां, उचित मामले में आप सिविल कोर्ट से इन्जंक्शन की मांग कर सकते हैं। इन्जंक्शन का मतलब है कोर्ट का ऐसा आदेश, जिसमें किसी व्यक्ति को कोई खास काम करने से रोका जाता है। उदाहरण के लिए, आप कोर्ट से मांग कर सकते हैं कि दूसरे खरीदार को:
- प्रॉपर्टी किसी और को बेचने से रोका जाए।
- किसी तीसरे व्यक्ति का अधिकार बनाने से रोका जाए।
- आपके कब्जे में दखल देने से रोका जाए।
- प्रॉपर्टी का स्वरूप बदलने से रोका जाए।
- बिना अनुमति निर्माण या तोड़फोड़ करने से रोका जाए।
लेकिन केवल यह कहने से कि “मैंने प्रॉपर्टी पहले खरीदी थी”, इन्जंक्शन अपने आप नहीं मिल जाता। कोर्ट मामले के सभी तथ्यों और उपलब्ध सबूतों को देखकर फैसला करती है।
इसलिए अगर आपको पता चला है कि प्रॉपर्टी दूसरे व्यक्ति को भी बेच दी गई है, तो देरी न करें। अगर दूसरा खरीदार प्रॉपर्टी किसी तीसरे व्यक्ति को बेच देता है, तो मामला और जटिल हो सकता है।
अगर बेचने वाले ने दोनों खरीदारों से पैसे ले लिए हैं तो क्या करें?
अगर बेचने वाले ने जानबूझकर एक ही प्रॉपर्टी के लिए दो अलग-अलग खरीदारों से पैसे लिए हैं, तो मामले में धोखाधड़ी या ठगी का मामला बन सकता है। यह पूरे मामले के तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करेगा। ऐसी स्थिति में प्रभावित खरीदार:
- प्रॉपर्टी पर अपने अधिकार के लिए सिविल केस कर सकता है।
- दिए गए पैसे वापस लेने की मांग कर सकता है।
- अगर अपराध बनता है, तो पुलिस में शिकायत कर सकता है।
- प्रॉपर्टी को आगे बेचने से रोकने के लिए इन्जंक्शन मांग सकता है।
- मामले के अनुसार अन्य कानूनी उपाय अपना सकता है।
लेकिन केवल क्रिमिनल शिकायत करना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। अगर मुख्य विवाद यह है कि प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन है, तो सिविल कोर्ट में मामला करना भी जरूरी हो सकता है। कुछ मामलों में सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई साथ-साथ चल सकती है।
अगर दोनों सेल डीड रजिस्टर्ड हैं तो क्या होगा?
यह स्थिति थोड़ी जटिल हो सकती है। मान लीजिए एक ही बेचने वाले ने:
- Buyer A के नाम एक सेल डीड की।
- Buyer B के नाम दूसरी सेल डीड की।
- और दोनों सेल डीड रजिस्टर्ड हैं।
सिर्फ दोनों सेल डीड रजिस्टर्ड होने से यह नहीं माना जाता कि दोनों खरीदार एक ही प्रॉपर्टी के बराबर मालिक बन गए। कोर्ट यह जांच सकती है कि किस खरीदार का अधिकार कानूनी रूप से ज्यादा मजबूत है। इसके लिए इन बातों को देखा जा सकता है:
- कौन-सी सेल डीड पहले बनाई गई।
- कौन-सी पहले रजिस्टर्ड हुई।
- पहली बिक्री के बाद बेचने वाले के पास मालिकाना हक बचा था या नहीं।
- पहली बिक्री वास्तव में पूरी हुई थी या नहीं।
- प्रॉपर्टी का कब्जा किसे दिया गया।
- दूसरे खरीदार को पहली बिक्री की जानकारी थी या नहीं।
- कोई धोखाधड़ी हुई थी या नहीं।
- दोनों दस्तावेज असली और सही हैं या नहीं।
- लागू कानून इस स्थिति में क्या कहता है।
इन सभी तथ्यों को देखकर कोर्ट यह तय कर सकती है कि किस बिक्री को कानूनी प्राथमिकता मिलेगी और किस खरीदार को क्या राहत दी जा सकती है।
अगर दूसरा खरीदार पहले से प्रॉपर्टी पर कब्जे में है तो क्या करें?
अगर दूसरा खरीदार प्रॉपर्टी पर कब्जे में है, तो उसे खुद से या जबरदस्ती बाहर निकालने की कोशिश न करें। भले ही आपको पूरा विश्वास हो कि प्रॉपर्टी पर आपका अधिकार है, फिर भी कानून अपने हाथ में लेना आपके लिए नई परेशानी खड़ी कर सकता है। इसके बजाय उचित कोर्ट में जाकर मामले के अनुसार मांग कर सकते हैं:
- प्रॉपर्टी पर अपने मालिकाना हक की घोषणा।
- प्रॉपर्टी का कब्जा वापस दिलाने की मांग।
- दूसरे खरीदार को दखल देने से रोकने के लिए इन्जंक्शन।
- दूसरी सेल डीड के संबंध में रद्द करने या उचित घोषणा की मांग।
- कानून के अनुसार अन्य जरूरी राहत।
सबसे जरूरी बात: खुद से कब्जा लेने की कोशिश न करें। सभी दस्तावेजों की जांच करवाकर उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाएं।
खरीदारों को किन गलतियों से बचना चाहिए?
- दूसरे खरीदार से झगड़ा या मारपीट न करें: प्रॉपर्टी का विवाद कोर्ट के जरिए सुलझाएं। खुद कानून हाथ में न लें।
- जरूरी कागजात को नुकसान न पहुंचाएं: सभी ओरिजिनल दस्तावेज सुरक्षित रखें। उनकी फोटो और कॉपी भी बना लें।
- केवल मौखिक बातों पर भरोसा न करें: बैंक, बेचने वाले या दूसरे खरीदार से हुई जरूरी बातचीत को लिखित में रखें।
- कई साल तक इंतजार न करें: प्रॉपर्टी के मामलों में देरी और कानूनी समय सीमा आपके अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
- सिर्फ रजिस्ट्रेशन देखकर निश्चिंत न हों: रजिस्टर्ड दस्तावेज होने के बावजूद उस पर कानूनी विवाद हो सकता है।
- यह न मानें कि दूसरा खरीदार अपने आप जीत जाएगा: किसका अधिकार मजबूत है, यह मामले के तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करता है।
- विवाद के दौरान प्रॉपर्टी खुद न बेचें: जब प्रॉपर्टी के मालिकाना हक पर विवाद चल रहा हो, तो बिना कानूनी सलाह के उसे बेचने या ट्रांसफर करने की कोशिश न करें।
निष्कर्ष
अगर आपको पता चलता है कि एक ही प्रॉपर्टी दो लोगों को बेच दी गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपने अपने अधिकार या पैसे अपने आप खो दिए हैं।
आपका कानूनी अधिकार कई बातों पर निर्भर करेगा, जैसे दोनों बिक्री की तारीख, रजिस्ट्रेशन, कब्जा, भुगतान, प्रॉपर्टी के कागजात, धोखाधड़ी और दूसरे खरीदार को पहली बिक्री की जानकारी थी या नहीं।
ऐसी स्थिति में सभी कागजात सुरक्षित रखें, दोनों सेल डीड की कॉपी लें और जरूरी सबूत इकट्ठा करें। दूसरे खरीदार से झगड़ा या जबरदस्ती न करें और बिना कानूनी सलाह के कोई समझौता साइन न करें। अगर प्रॉपर्टी को आगे बेचने का खतरा है, तो अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए तुरंत कानूनी सलाह लेकर उचित कार्रवाई करें।
किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।
FAQs
1. एक ही प्रॉपर्टी दो लोगों को बेच दी जाए तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में दोनों खरीदारों के अधिकार कई बातों पर निर्भर करते हैं, जैसे बिक्री की तारीख, रजिस्ट्रेशन, कब्जा, कागजात और दूसरे खरीदार को पहली बिक्री की जानकारी थी या नहीं। तुरंत प्रॉपर्टी वकील से सलाह लें।
2. क्या पहले खरीदार का अधिकार हमेशा मजबूत होता है?
जरूरी नहीं। कोर्ट दोनों बिक्री की वैधता, रजिस्ट्रेशन, कब्जा, भुगतान, बेचने वाले का मालिकाना हक और दूसरे खरीदार की जानकारी जैसी बातों को देख सकती है।
3. क्या दूसरी सेल डीड रद्द कराई जा सकती है?
मामले के अनुसार सिविल कोर्ट में सेल डीड रद्द करने, मालिकाना हक की घोषणा या इन्जंक्शन जैसी राहत मांगी जा सकती है। सही उपाय मामले के दस्तावेजों पर निर्भर करता है।
4. अगर बेचने वाले ने दोनों खरीदारों से धोखाधड़ी की है तो क्या करें?
तथ्यों के अनुसार पैसे वापस लेने, स्पेसिफिक परफॉरमेंस, मालिकाना हक या इन्जंक्शन के लिए सिविल केस किया जा सकता है। अगर धोखाधड़ी या जालसाजी जैसा अपराध बनता है, तो क्रिमिनल शिकायत भी की जा सकती है।
5. प्रॉपर्टी दो बार बिकने का पता चले तो तुरंत क्या करें?
अपनी सेल डीड, एग्रीमेंट, भुगतान के सबूत और प्रॉपर्टी के कागजात सुरक्षित रखें। दूसरी सेल डीड की कॉपी लेकर दोनों लेन-देन की तारीख जांचें और तुरंत प्रॉपर्टी वकील से सलाह लें। अगर प्रॉपर्टी आगे बेचने का खतरा है, तो तुरंत कानूनी कार्रवाई पर विचार करें।



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