चेक बाउंस केस में NBW जारी हो गया है? वारंट कैंसिल कैसे कराएं?

Has a Non-Bailable Warrant (NBW) been issued in a cheque bounce case? How can the warrant be cancelled?

कोर्ट मामले में नॉन बेलेबल वारंट (NBW) जारी होना एक गंभीर स्थिति हो सकती है, क्योंकि इसके आधार पर व्यक्ति को गिरफ्तार करके संबंधित कोर्ट के सामने पेश किया जा सकता है। लेकिन केवल NBW जारी होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति दोषी साबित हो गया है या कोर्ट ने उसके खिलाफ फैसला दे दिया है। आमतौर पर इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति कोर्ट के सामने उपस्थित हो।

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के चेक बाउंस मामले में, बार-बार कोर्ट में उपस्थित न होने पर NBW जारी हो सकता है। इसे नजरअंदाज न करें। कोर्ट रिकॉर्ड की जांच कर अनुपस्थिति का कारण बताएं और NBW रद्द कराने या बेल के लिए तुरंत कानूनी कदम उठाएं।

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NBW क्या होता है?

NBW का मतलब नॉन बेलेबल वारंट होता है। जब कोर्ट को लगता है कि आरोपी की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करना जरूरी है, तो कोर्ट वारंट जारी कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बताया है कि आमतौर पर नॉन-बेलेबल वारंट तब जारी किया जाना चाहिए, जब आरोपी को कोर्ट में बुलाने के लिए सम्मन या बेलेबल वारंट पर्याप्त न हो। ऐसा तब हो सकता है जब कोर्ट को लगता है कि व्यक्ति अपनी इच्छा से कोर्ट में उपस्थित नहीं होगा या उसे सम्मन देना संभव नहीं हो रहा है।

इसलिए, NBW एक गंभीर कानूनी कार्रवाई है। लेकिन इसका यह मतलब अपने आप नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो गया है। चेक बाउंस मामले में मुकदमे की सुनवाई अभी भी चल रही हो सकती है।

चेक बाउंस मामला क्या होता है?

चेक बाउंस के मामले आमतौर पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दर्ज किए जाते हैं। धारा 138 में उन परिस्थितियों में चेक का भुगतान न होने की बात कही गई है, जैसे खाते में पर्याप्त पैसे न होना या बैंक के साथ तय सीमा से अधिक रकम का चेक जारी होना, लेकिन इसके लिए कानून में दी गई जरूरी शर्तों का पूरा होना भी जरूरी है।

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट में चेक बाउंस मामलों में कानूनी अनुमान, प्रक्रिया, मामले की जगह और मुकदमे की सुनवाई से जुड़े प्रावधान भी हैं। एक सामान्य चेक बाउंस मामला लगभग इस तरह आगे बढ़ सकता है:

चेक जारी → चेक बैंक में जमा → चेक बाउंस → कानूनी नोटिस → पैसे का भुगतान न होना → कोर्ट में शिकायत → सम्मन → कोर्ट में उपस्थिति → सबूत/मुकदमे की सुनवाई

अगर आरोपी को जिस स्टेप पर कोर्ट में उपस्थित होना जरूरी था, उस समय वह उपस्थित नहीं होता है, तो कोर्ट उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठा सकती है। कुछ मामलों में आगे चलकर NBW भी जारी हो सकता है।

चेक बाउंस मामले में NBW क्यों जारी होता है?

इसके कई कारण हो सकते हैं।

1. आरोपी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ

सबसे आम कारण बार-बार कोर्ट में उपस्थित न होना होता है। उदाहरण के लिए, कोर्ट ने आरोपी को किसी निश्चित तारीख पर उपस्थित होने का आदेश दिया, लेकिन आरोपी उस दिन कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। अगर ऐसा बार-बार होता है, तो कोर्ट आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठा सकती है।

2. सम्मन को नजरअंदाज किया गया

अगर आरोपी को सही तरीके से सम्मन मिल चुका है और इसके बाद भी वह कोर्ट में उपस्थित नहीं होता है, तो मामले की परिस्थितियों के अनुसार कोर्ट वारंट जारी करने पर विचार कर सकती है।

3. बेलेबल वारंट का पालन नहीं किया गया

कुछ मामलों में कोर्ट पहले बेलेबल वारंट जारी कर सकती है। अगर इसके बाद भी आरोपी कोर्ट में उपस्थित नहीं होता है, तो कोर्ट आगे चलकर NBW जारी कर सकती है।

4. आरोपी को मामले की जानकारी नहीं थी

कुछ मामलों में आरोपी को सच में यह जानकारी नहीं होती कि उसके खिलाफ कोर्ट में मामला चल रहा है। उदाहरण के लिए:

  • सम्मन पुराने पते पर भेज दिया गया
  • आरोपी ने अपना घर बदल लिया
  • नोटिस किसी दूसरे व्यक्ति ने प्राप्त कर लिया
  • आरोपी यात्रा पर था
  • आरोपी को दस्तावेज की गंभीरता समझ नहीं आई
  • या जानकारी पहुंचाने में कोई समस्या हुई।

ऐसी परिस्थितियों को कोर्ट के सामने सही तरीके से समझाना चाहिए।

5. कोर्ट के आदेश के बाद भी बारबार अनुपस्थित रहना

अगर कोर्ट ने आरोपी को कई बार कोर्ट में उपस्थित होने का मौका दिया है, लेकिन आरोपी इसके बाद भी लगातार अनुपस्थित रहता है, तो NBW रद्द करवाना अधिक मुश्किल हो सकता है। इसलिए, वारंट की जानकारी मिलते ही आरोपी को तुरंत कानूनी कदम उठाना चाहिए।

क्या NBW जारी होने का मतलब है कि आपको दोषी ठहरा दिया गया है?

नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है। NBW का उद्देश्य आरोपी की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है। यह इन चीजों से अलग होता है:

  • दोषसिद्धि
  • सजा
  • अंतिम फैसला
  • या आरोपी को दोषी ठहराने वाला आदेश।
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चेक बाउंस का मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा हो सकता है। इसलिए, केवल NBW जारी होने के कारण यह न मानें कि पूरा मामला खत्म हो गया है। लेकिन NBW को हल्के में भी न लें। यह कोर्ट का गंभीर आदेश है और इस पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

क्या NBW रद्द या वापस लिया जा सकता है?

उचित परिस्थितियों में आरोपी NBW जारी करने वाली कोर्ट से NBW को वापस लेने या रद्द करने की मांग कर सकता है। इस पर फैसला मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रक्रिया को देखकर कोर्ट करती है। सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में भी नॉन-बेलेबल वारंट के आदेश को वापस लेने की अर्जी एक मान्य प्रकार की अर्जी के रूप में स्वीकार की जाती है।

ट्रायल कोर्ट के मामले में इसकी सही प्रक्रिया और इस्तेमाल होने वाले शब्द मामले और स्थानीय कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकते हैं।

आमतौर पर आरोपी को अपने वकील के माध्यम से संबंधित कोर्ट में जाकर यह बताना चाहिए:

  • आरोपी कोर्ट में क्यों उपस्थित नहीं हुआ;
  • क्या आरोपी जानबूझकर कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ था;
  • क्या आरोपी को सम्मन मिला था;
  • क्या इससे पहले कोई वारंट जारी हुआ था;
  • क्या आरोपी अब कोर्ट में उपस्थित होने के लिए तैयार है;
  • और कोर्ट को NBW वापस क्यों लेना चाहिए।

NBW जारी होने के बाद पहला कदम क्या होना चाहिए?

सबसे पहला कदम कोर्ट की आदेश पत्रिका प्राप्त करके उसकी जांच करना है। सिर्फ किसी व्यक्ति द्वारा बताई गई जानकारी पर भरोसा न करें। आपके वकील को इन बातों की जांच करनी चाहिए:

  • NBW किस तारीख को जारी हुआ
  • कोर्ट ने NBW जारी करने का क्या कारण बताया
  • क्या आरोपी को सम्मन सही तरीके से दिया गया था
  • क्या इससे पहले बेलेबल वारंट जारी किया गया था
  • क्या कोर्ट ने पहले आरोपी को उपस्थित होने के मौके दिए थे
  • क्या पहले कोई छूट की अर्जी दाखिल की गई थी
  • अगली सुनवाई की तारीख क्या है
  • और क्या कोर्ट ने कोई दूसरा आदेश भी जारी किया है।

इन सभी बातों की जानकारी से आगे की सही कानूनी कार्रवाई तय करने में मदद मिलेगी।

NBW जारी होने के बाद उठाए जाने वाले 6 महत्वपूर्ण कदम

स्टेप 1: तुरंत वकील से सलाह लें

NBW को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे वकील से बात करें जो नियमित रूप से आपराधिक मामलों और चेक बाउंस मामलों को संभालते हों। वकील को ये दस्तावेज दें:

  • शिकायत की कॉपी
  • सम्मन
  • कोर्ट के पिछले आदेश
  • चेक से जुड़ी जानकारी
  • बैंक का रिटर्न मेमो
  • लीगल नोटिस
  • आपके जवाब, यदि कोई दिए गए हों
  • और आपकी अनुपस्थिति का कारण बताने वाला कोई भी दस्तावेज।

इसके बाद वकील कोर्ट के रिकॉर्ड की जांच करके यह तय कर सकता है कि NBW वापस लेने, रद्द कराने, बेल लेने, व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट लेने या किसी अन्य उचित कानूनी उपाय की मांग करनी चाहिए या नहीं।

स्टेप 2: NBW वापस लेने या रद्द कराने की अर्जी तैयार करें

अर्जी में यह साफ-साफ बताया जाना चाहिए कि आरोपी कोर्ट में क्यों उपस्थित नहीं हुआ। बताया गया कारण सही और वास्तविक होना चाहिए। उदाहरण के लिए:

  1. मेडिकल इमरजेंसी अगर आरोपी अस्पताल में भर्ती था या गंभीर रूप से बीमार था, तो चिकित्सा संबंधी रिकॉर्ड अर्जी के साथ लगाए जाने चाहिए।
  2. यात्रा या ऐसी परिस्थिति जिसे टालना संभव नहीं था अगर अनुपस्थिति का कोई वास्तविक और ऐसा कारण था जिसे टाला नहीं जा सकता था, तो उसके समर्थन में दस्तावेज देने चाहिए।
  3. मामले की जानकारी न होना अगर आरोपी को वास्तव में कोर्ट की कार्यवाही के बारे में जानकारी नहीं थी, तो उस परिस्थिति को सावधानी से समझाया जाना चाहिए।
  4. गलत पता या सम्मन की सही तरीके से तामील न होना अगर सम्मन सही तरीके से नहीं दिया गया था, तो सम्मन की तामील से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।
  5. जानकारी पहुंचाने में समस्या अगर आरोपी किसी ऐसे व्यक्ति पर निर्भर था जिसने उसे सुनवाई की तारीख की जानकारी नहीं दी, तो पूरी परिस्थिति ईमानदारी से समझाई जानी चाहिए।

जितने मजबूत सहायक दस्तावेज होंगे, कोर्ट के लिए दिए गए कारण को समझना और उसका मूल्यांकन करना उतना ही आसान हो सकता है।

स्टेप 3: कोर्ट के सामने उपस्थित होने की पेशकश करें

रणनीति का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा यह दिखाना है कि आप कोर्ट के सामने उपस्थित होने के लिए तैयार और इच्छुक हैं। वारंट का उद्देश्य आपकी कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है। इसलिए, NBW की जानकारी मिलने के बाद आपका व्यवहार महत्वपूर्ण होता है। कोर्ट से बचने के बजाय, आरोपी को उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से कोर्ट के सामने जाना चाहिए। परिस्थितियों के अनुसार, वकील कोर्ट से यह अनुरोध कर सकता है:

  • NBW वापस लिया जाए
  • कोर्ट में उपस्थित होने या आत्मसमर्पण करने की अनुमति दी जाए
  • बेल पर विचार किया जाए
  • भविष्य में कोर्ट में उपस्थित रहने का आश्वासन स्वीकार किया जाए
  • या जहां कानून इसकी अनुमति देता है, वहां व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जाए।
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कौन-सी राहत मिल सकती है, यह मामले के तथ्यों और संबंधित कोर्ट पर निर्भर करेगा।

स्टेप 4: बेल की कार्यवाही के लिए तैयार रहें

क्योंकि NBW गिरफ्तारी का वारंट होता है, इसलिए आरोपी को कोर्ट के सामने जाने से पहले बेल के बारे में उचित कानूनी सलाह लेनी चाहिए। यह न मानें कि केवल NBW वापस लेने या रद्द कराने की अर्जी दाखिल करने से गिरफ्तारी से अपने आप सुरक्षा मिल जाती है।

वकील को यह देखना चाहिए कि क्या बेल की अर्जी या कोई अन्य उचित कानूनी राहत भी मांगी जानी चाहिए। कानूनी प्रक्रिया इन बातों पर निर्भर कर सकती है:

  • संबंधित अपराध क्या है;
  • मामला किस स्टेप में है;
  • कोर्ट ने क्या आदेश दिया है;
  • आरोपी अपनी इच्छा से कोर्ट में उपस्थित होता है या नहीं;
  • और स्थानीय कोर्ट में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।

स्टेप 5: दिखाएं कि आप आगे की सुनवाई में उपस्थित रहेंगे

कोर्ट को यह चिंता हो सकती है कि आरोपी आगे भी कोर्ट में उपस्थित नहीं होगा। इसलिए, आरोपी को आगे की सुनवाई में उपस्थित रहने की अपनी प्रतिबद्धता दिखाने की जरूरत पड़ सकती है। मामले के अनुसार, वकील कोर्ट से उचित राहत की मांग कर सकता है, जैसे:

  • जहां कानून इसकी अनुमति देता है, वहां वकील के माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति;
  • कुछ विशेष तारीखों पर व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट;
  • पहले की अनुपस्थिति को नियमित करना;
  • या आगे की कोर्ट में उपस्थिति के लिए उचित निर्देश।
  • कोर्ट उचित शर्तें लगा सकती है।

क्या शिकायतकर्ता NBW रद्द कराने में मदद कर सकता है?

  • कुछ मामलों में शिकायतकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर जब दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया हो।
  • परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत चेक बाउंस के अपराध में समझौता किया जा सकता है।
  • इसलिए, अगर दोनों पक्षों के बीच चेक से जुड़े विवाद का वास्तव में समझौता हो जाता है, तो आरोपी अपराध का समझौते के आधार पर निपटारा कराने का विकल्प देख सकता है।
  • हालांकि, समझौता हो जाने का यह मतलब अपने आप नहीं है कि पहले से जारी NBW अपने आप खत्म हो जाएगा। उचित अर्जी कोर्ट के सामने दाखिल करनी होगी और कोर्ट को आवश्यक आदेश पारित करना होगा।

अगर चेक की रकम का भुगतान कर दिया गया है तो क्या होगा?

मान लीजिए चेक की रकम ₹5 लाख थी। मामला कोर्ट में दाखिल होने के बाद आरोपी ने शिकायतकर्ता को पूरी रकम दे दी। क्या इससे आपराधिक मामला अपने आप खत्म हो जाएगा?

जरूरी नहीं। भुगतान बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर क्योंकि धारा 138 के तहत अपराध में समझौता किया जा सकता है।

लेकिन आरोपी को समझौते या भुगतान से जुड़े उचित दस्तावेज प्राप्त करके उन्हें कोर्ट के सामने दाखिल करना चाहिए। आदर्श रूप से, ये दस्तावेज होने चाहिए:

  • सेटलमेंट एग्रीमेंट
  • पेमेंट प्रूफ
  • शिकायतकर्ता की भुगतान प्राप्त करने की पुष्टि
  • जहां उचित हो, जॉइंट एप्लीकेशन
  • और अपराध का समझौते के आधार पर निपटारा करने या मामले के निपटारे के लिए स्पष्ट अनुरोध।

सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार धारा 138 की कार्यवाही में समझौते की संभावना को स्वीकार किया है और उचित मामलों में समझौते के माध्यम से मामले का निपटारा करने को प्रोत्साहित किया है।

अगर NBW पहले ही लागू हो चुका है तो क्या होगा?

यह स्थिति अधिक गंभीर और तुरंत कार्रवाई वाली होती है। अगर NBW के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, तो कानून के अनुसार आरोपी को बिना अनावश्यक देरी के संबंधित कोर्ट के सामने पेश किया जाना चाहिए। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 में वारंट के तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करने और उससे जुड़ी प्रक्रिया के बारे में प्रावधान दिए गए हैं।

इस स्टेप पर वकील को उचित जमानत की अर्जी दाखिल करने और संबंधित परिस्थितियों को कोर्ट के सामने रखने की जरूरत पड़ सकती है। गिरफ्तारी होने तक मामले पर कार्रवाई शुरू करने के लिए इंतजार न करें। अगर आपको पहले से पता है कि NBW जारी हो चुका है, तो तुरंत कानूनी सलाह लें।

क्या आप हाई कोर्ट से राहत मांग सकते हैं?

कुछ परिस्थितियों में आरोपी उचित कानूनी राहत के लिए हाई कोर्ट का रुख करने पर विचार कर सकता है। हालांकि, हर मामले में सीधे हाई कोर्ट जाना जरूरी नहीं होता।

अगर ट्रायल कोर्ट के पास ही NBW वापस लेने या रद्द करने की अर्जी पर विचार करने का अधिकार है, तो ट्रायल कोर्ट का रुख करना व्यावहारिक रूप से पहला कदम हो सकता है। सही कानूनी रणनीति इन बातों पर निर्भर करती है:

  • NBW क्यों जारी किया गया
  • क्या NBW लागू हो चुका है
  • क्या आरोपी पहले कोर्ट में उपस्थित हुआ है
  • क्या एक से अधिक वारंट जारी हुए हैं
  • क्या ट्रायल कोर्ट ने राहत देने से मना कर दिया है
  • और मामले से जुड़े अन्य तथ्य।
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हाई कोर्ट से हस्तक्षेप मांगना उचित है या नहीं, यह तय करने से पहले वकील को कोर्ट के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।

किन गलतियों से बचना चाहिए?

  1. NBW को नजरअंदाज न करें इसे अनदेखा करने से परेशानी बढ़ सकती है।
  2. समन से बचने के लिए अपना पता न बदलें कोर्ट से बचने की कोशिश करने से आपका मामला और खराब हो सकता है।
  3. पुलिस से न छिपें अगर वारंट पर कार्रवाई हो सकती है, तो छिपने से नई कानूनी परेशानी हो सकती है।
  4. झूठा मेडिकल प्रमाण पत्र न दें कभी भी झूठे कागज या सबूत न बनाएं।
  5. बिना कागज के भुगतान न करें अगर समझौता हो रहा है, तो भुगतान और समझौते का सही रिकॉर्ड रखें।
  6. यह न सोचें कि पैसे देने से मामला अपने आप खत्म हो जाएगा मामला खत्म करने के लिए कोर्ट का आदेश जरूरी हो सकता है।
  7. पुलिस के आने का इंतजार न करें अगर आपको NBW जारी होने की जानकारी है, तो तुरंत अपने वकील से बात करें।

महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति

NBW को गंभीरता से लेना चाहिए, लेकिन इसकी वजह से बिना जरूरत घबराना नहीं चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नॉन-बेलेबल वारंट बिना सोच-विचार के या सामान्य प्रक्रिया के रूप में जारी नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति में व्यक्ति की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करना है, जब परिस्थितियों में कम सख्त कानूनी प्रक्रिया पर्याप्त नहीं हो सकती है।

लेकिन एक बार कोर्ट द्वारा NBW जारी हो जाने के बाद आरोपी को यह नहीं मानना चाहिए कि उसे आसानी से नजरअंदाज किया जा सकता है।

सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि तुरंत कोर्ट की आदेश पत्रिका प्राप्त करें और संबंधित कोर्ट के सामने उचित कानूनी कदम उठाएं।

निष्कर्ष

चेक बाउंस मामले में NBW जारी होना गंभीर स्थिति है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आपको दोषी ठहरा दिया गया है। कोर्ट के आदेश की जांच करके, अपनी अनुपस्थिति का कारण बताकर और उचित जमानत या कोर्ट में उपस्थित होने से जुड़ी राहत के साथ NBW वापस लेने या रद्द कराने की मांग करके तुरंत कानूनी कदम उठाएं। अगर संभव हो, तो समझौते और अपराध के समझौते के आधार पर निपटारे पर भी विचार किया जा सकता है।

NBW को नजरअंदाज न करें। अपने मामले के तथ्यों के आधार पर सलाह लेने के लिए तुरंत योग्य वकील से संपर्क करें।

किसी भी कानूनी सहायता के लिए लीड इंडिया से संपर्क करें। हमारे पास लीगल एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो आपकी हर संभव सहायता करेगी।

FAQs

1. क्या NBW जारी होने का मतलब है कि आरोपी दोषी है?

नहीं। NBW जारी होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आरोपी की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है। हालांकि, NBW को गंभीरता से लेकर तुरंत उचित कानूनी कदम उठाना चाहिए।

2. क्या चेक बाउंस मामले में NBW रद्द हो सकता है?

हां, उचित परिस्थितियों में आरोपी NBW जारी करने वाली कोर्ट के सामने उसे वापस लेने या रद्द करने की अर्जी दे सकता है। कोर्ट अनुपस्थिति का कारण, पिछली कार्यवाही और मामले के अन्य तथ्यों को देखकर उचित आदेश दे सकती है।

3. NBW जारी होने के बाद सबसे पहले क्या करना चाहिए?

सबसे पहले कोर्ट की आदेश पत्रिका प्राप्त करके उसकी जांच करनी चाहिए। इसके बाद वकील से तुरंत सलाह लेकर NBW वापस लेने या रद्द कराने, जमानत और कोर्ट में उपस्थिति से जुड़ी उचित कानूनी राहत के लिए कदम उठाने चाहिए।

4. क्या चेक की पूरी रकम देने से चेक बाउंस मामला खत्म हो जाता है?

जरूरी नहीं। चेक की पूरी रकम का भुगतान समझौते के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन मामला अपने आप खत्म नहीं होता। समझौते और भुगतान के उचित दस्तावेज कोर्ट के सामने पेश करके अपराध के समझौते के आधार पर निपटारे की मांग करनी पड़ सकती है।

5. अगर NBW के आधार पर गिरफ्तारी हो जाए तो क्या करें?

अगर NBW के आधार पर गिरफ्तारी हो जाती है, तो आरोपी को बिना अनावश्यक देरी के संबंधित कोर्ट के सामने पेश किया जाना चाहिए। वकील को मामले की परिस्थितियों के अनुसार उचित जमानत की अर्जी और अन्य आवश्यक कानूनी राहत के लिए तुरंत कदम उठाना चाहिए।

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